मेरठ (स्पेशल लोकल इन्वेस्टिगेशन डेस्क): एक तरफ पूरा मेरठ शहर शिवभक्त कांवड़ियों (Kanwariyas) की सेवा में पलकें बिछाए बैठा है, सड़कों पर 'बम-बम भोले' के जयकारे गूंज रहे हैं और प्रशासन चाक-चौबंद व्यवस्था के दावे कर रहा है। वहीं दूसरी तरफ, पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड (PVVNL) के कुछ लापरवाह अधिकारी सरकार के 'सुशासन' और 'निर्बाध बिजली आपूर्ति' के दावों को सरेआम पलीता लगा रहे हैं।READ ALSO:-सुहागरात की सेज बनी मौत का बिस्तर! बदायूं में नई नवेली दुल्हन के सामने दूल्हे को सांप ने डसा, मेंहदी का रंग उतरने से पहले उजड़ गया सुहाग
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मेरठ के हृदय स्थल और 'वीआईपी' (VIP) श्रेणी में गिने जाने वाले सिविल लाइन क्षेत्र (Civil Lines Area) में बिजली की आंख-मिचौली नहीं, बल्कि सरेआम 'ब्लैकआउट' (Blackout) का खौफनाक खेल चल रहा है। सावन की इस उमस भरी भयंकर गर्मी में लोग पसीने से तर-बतर हैं, व्यापार पूरी तरह चौपट हो रहा है, लेकिन वातानुकूलित (AC) कमरों में बैठे बिजली विभाग के अधिकारियों के कानों पर जूं तक नहीं रेंग रही है।
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इस घोर प्रशासनिक लापरवाही और अधिकारियों के अड़ियल रवैये के खिलाफ बेगमपुल व्यापार संघ, मेरठ के महामंत्री पुनीत शर्मा ने एक सख्त शिकायती पत्र जारी करते हुए बिजली विभाग के खोखले मेंटेनेंस दावों की पोल खोल कर रख दी है।
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'निर्बाध आपूर्ति' के नाम पर 'निर्बाध कटौती': 24 और 25 जुलाई की खौफनाक टाइमलाइन

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बिजली विभाग की कार्यप्रणाली कितनी चरमरा चुकी है, इसकी गवाही पिछले 24 घंटों का घटनाक्रम खुद दे रहा है। बेगमपुल व्यापार संघ के महामंत्री पुनीत शर्मा द्वारा दी गई सटीक जानकारी के अनुसार, बिजली की यह दुर्दशा कोई एक दिन का तकनीकी फाल्ट नहीं है, बल्कि यह विभाग की रोजमर्रा की आदत बन चुकी है।
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    24 जुलाई (शाम 4:00 बजे से रात 8:00 बजे तक): बुधवार की शाम 4 बजे से ही नेहरू रोड, पीएल शर्मा रोड और असोड़ा हाउस जैसे घनी आबादी और व्यापारिक क्षेत्रों में ट्रिपिंग का सिलसिला शुरू हो गया। हर 10 मिनट में बिजली आती और जाती रही, जिससे लोगों के घरों और दुकानों में रखे लाखों रुपये के कीमती इलेक्ट्रॉनिक उपकरण (AC, फ्रिज, कंप्यूटर) जलने के कगार पर आ गए।
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    24 जुलाई (रात 8:00 बजे से 12:30 बजे तक पूर्ण ब्लैकआउट): रात 8 बजते ही पूरे इलाके की बत्ती गुल हो गई। लोग उमस भरी गर्मी में तड़पते रहे। जब स्थानीय लोगों और व्यापारियों ने संबंधित जेई (Junior Engineer) और एसडीओ (Sub-Divisional Officer) को फोन मिलाया, तो किसी ने फोन उठाना मुनासिब नहीं समझा। अंततः, रात को एग्जीक्यूटिव इंजीनियर (EE) से फोन पर कड़ी वार्ता की गई, जिसके भारी दबाव के बाद रात 12:30 बजे इलाके में रोशनी लौट सकी।
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    25 जुलाई (सुबह 9:00 बजे से दोपहर 2:30 बजे तक): रात के खौफनाक मंजर के बाद लोगों ने सोचा कि शायद सुबह राहत मिलेगी, लेकिन सुबह 9 बजते ही फिर से बिजली काट दी गई। लगातार साढ़े पांच घंटे (दोपहर 2:30 बजे तक) बिजली आपूर्ति ठप रही।
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'पैनल में फाल्ट' का बहाना या मेंटेनेंस के नाम पर भ्रष्टाचार?

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जब लगातार हो रही इस कटौती का कारण जानने की कोशिश की गई, तो एग्जीक्यूटिव इंजीनियर (EE) की तरफ से एक रटा-रटाया जवाब मिला— "पैनल में फाल्ट आ गया है।"
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अब मेरठ की जनता और व्यापारी वर्ग बिजली विभाग से यह तीखा सवाल पूछ रहा है कि मॉनसून (Monsoon) और कांवड़ यात्रा से ठीक पहले विभाग ने 'प्री-मॉनसून मेंटेनेंस' (Pre-monsoon maintenance) के नाम पर करोड़ों रुपये फूंककर जो कई-कई घंटों के शटडाउन लिए थे, वो पैसा कहां गया? अगर मेंटेनेंस सही से हुआ था, तो वीआईपी इलाके के बिजली घर में आए दिन पैनल में फाल्ट कैसे आ रहा है? क्या यह घटिया सामग्री के इस्तेमाल या भ्रष्टाचार की ओर सीधा इशारा नहीं है?
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जेई और एसडीओ का 'साइलेंट मोड': जनता जाए तो कहां जाए?

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लोकतंत्र में सरकारी अधिकारी जनता के सेवक होते हैं, लेकिन मेरठ बिजली विभाग के स्थानीय जेई (JE) और एसडीओ (SDO) खुद को किसी रियासत का राजा समझने लगे हैं। बेगमपुल व्यापार संघ के महामंत्री पुनीत शर्मा ने अपने पत्र में जो सबसे गंभीर आरोप लगाया है, वह अधिकारियों की इसी तानाशाही से जुड़ा है।
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"महोदय, सबसे दुखद स्थिति यह है कि जेई और एसडीओ किसी का फोन उठाने को तैयार नहीं हैं। जब कोई अधिकारी फोन ही नहीं उठाएगा, तो आम जनता अपनी परेशानी किसे बताएगी?" - पुनीत शर्मा (महामंत्री, बेगमपुल व्यापार संघ)
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सरकार ने सीयूजी (CUG) नंबर इसलिए दिए हैं ताकि अधिकारी 24 घंटे जनता के लिए उपलब्ध रहें। लेकिन जब कटौती होती है, तो ये नंबर या तो स्विच ऑफ (Switch off) कर दिए जाते हैं या बजते-बजते कट जाते हैं। यह सीधे तौर पर मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) के उन निर्देशों की खुली अवहेलना है, जिसमें साफ कहा गया है कि हर अधिकारी को जनता का फोन उठाना अनिवार्य है।
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ठप हो रहा है मेरठ का व्यापार, लाखों का हो रहा नुकसान

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सिविल लाइन, बेगमपुल और पीएल शर्मा रोड मेरठ का सबसे बड़ा कमर्शियल हब (Commercial Hub) है। यहां सैकड़ों शोरूम, ब्रांडेड स्टोर, अस्पताल, क्लिनिक और कॉर्पोरेट कार्यालय स्थित हैं। दिन के समय 5 से 6 घंटे बिजली न रहने के कारण पूरा व्यापारिक ढांचा चरमरा गया है।
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    भीषण गर्मी में बिना एसी और पंखे के कोई भी ग्राहक दुकानों में प्रवेश नहीं करना चाहता।
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    व्यापारियों का इन्वर्टर और डीजल जनरेटर (DG Sets) का खर्च बजट से बाहर जा रहा है।
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    ऑनलाइन बिलिंग, जीएसटी रिटर्न (GST Return) और बैंकिंग सेवाएं पूरी तरह से ठप पड़ जाती हैं।
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व्यापारियों का कहना है कि एक तरफ वे सरकार को भारी-भरकम कमर्शियल टैक्स और फिक्स बिजली चार्ज (Fixed Charges) चुकाते हैं, और बदले में उन्हें अघोषित कटौती और अधिकारियों का अक्खड़पन झेलना पड़ता है।
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बेगमपुल व्यापार संघ के महामंत्री पुनीत शर्मा द्वारा उठाया गया यह मुद्दा सिर्फ एक क्षेत्र का नहीं, बल्कि पूरे मेरठ शहर की दुखती रग है। 'खबरीलाल' न्यूज़ पोर्टल इस खबर को प्रमुखता से उठाते हुए पीवीवीएनएल (PVVNL) की एमडी (MD) ईशा दुहन और ऊर्जा मंत्री एके शर्मा से यह सीधा सवाल करता है कि:
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    कांवड़ यात्रा के दौरान मुख्यमंत्री के 'कटौती मुक्त' आदेशों को ठेंगा दिखाने वाले इन लापरवाह अधिकारियों पर कब एक्शन होगा?
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    ड्यूटी के समय जनता का फोन न उठाने वाले जेई और एसडीओ के खिलाफ क्या विभागीय कार्रवाई की जाएगी?
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मेरठ की जनता अब सिर्फ खोखले वादे नहीं, बल्कि इस अघोषित और दमघोंटू बिजली कटौती से तुरंत और स्थायी राहत चाहती है। अगर उच्च अधिकारियों ने जल्द ही इस मामले का संज्ञान नहीं लिया, तो व्यापारियों का यह गुस्सा किसी बड़े जन-आंदोलन का रूप ले सकता है।
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