मेरठ, रविवार। "सनातन धर्म में बेटियां देवी होती हैं, जबकि अन्य धर्मों में बेटियों को बेबी कहा जाता है।" यह बयान जगद्गुरु स्वामी रामभद्राचार्य ने मेरठ में अपनी सात दिवसीय रामकथा के समापन अवसर पर दिया। रविवार को कथा के अंतिम दिन उन्होंने हिंदुओं से अपने बच्चों को मदरसे या कॉन्वेंट स्कूल की बजाय संस्कृत विद्यालयों में पढ़ाने का आह्वान किया।READ ALSO:-'सपा सरकार का कार्यकाल बाबर-अकबर से भी खराब था': ब्राह्मण समाज के सम्मेलन में संगीत सोम का बड़ा बयान
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उन्होंने कहा कि आज बेटों को शिवाजी और महाराणा प्रताप तथा बेटियों को रानी लक्ष्मीबाई जैसे संस्कार देने की जरूरत है। कथा के समापन पर उन्होंने मेरठ की भूमि को क्रांतिकारी बताते हुए कहा कि यहां कथा करके उन्हें बहुत आनंद मिला। उन्होंने यह भी कहा कि पितृपक्ष के दौरान हुई इस कथा से 2006 के अग्निकांड में मृत लोगों की आत्मा को भी शांति मिली है।
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विवादों में रही 7 दिन की कथा: 5 सबसे बड़े बयान
\r\n\r\nउनकी सात दिवसीय कथा केवल धार्मिक प्रसंगों तक ही सीमित नहीं रही, बल्कि उनके कई बयानों ने राजनीतिक और सामाजिक हलकों में भी खूब सुर्खियां बटोरीं। पेश हैं 5 सबसे चर्चित बयान:
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1. यूपी 'मिनी पाकिस्तान' लगता है (12 सितंबर): कथा के दौरान उन्होंने कहा, "आज हिंदुओं पर संकट है। अपने ही देश में हम हिंदू धर्म को उतना न्याय नहीं दे पा रहे। उत्तर प्रदेश मिनी पाकिस्तान लगता है। अब हमें मुखर होने की जरूरत है... अब हम किसी को भूल से भी नहीं छेड़ेंगे, अगर कोई छेड़ेगा तो छोड़ेंगे भी नहीं।"
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2. हिंदुओं के तीन बच्चे होने चाहिए (13 सितंबर): उन्होंने हिंदू परिवारों में कम से कम तीन संतानें होने की वकालत की। उन्होंने कहा, "आज हिंदू समाज घट रहा है। यदि प्रत्येक परिवार केवल एक या दो बच्चों पर रुक जाएगा, तो आने वाले समय में समाज का अनुपात बिगड़ जाएगा। कम से कम तीन बच्चे अवश्य होने चाहिएं, जिससे माता-पिता की देखभाल हो सके और समाज मजबूत बन सके।"
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3. मनुस्मृति जलाने वालों को जवाब (9 सितंबर): मनुस्मृति पर बोलते हुए उन्होंने कहा, "संस्कृत न जानने के कारण लोगों ने मनुस्मृति का अपमान किया... कुछ लोगों ने मनुस्मृति को जलाया। इससे मनुस्मृति का कुछ नहीं बिगड़ा... चाहे जितनी मनुस्मृति जला दो, हम फिर लिखवा देंगे।"
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4. भारतीय संस्कृति के लिए संस्कृत जरूरी (8 सितंबर): कथा के दूसरे दिन उन्होंने कहा था, "भारतीय संस्कृति को समझने के लिए संस्कृत आनी चाहिए। जब तक संस्कृत नहीं पढ़ेंगे, तब तक अपनी संस्कृति को समझ नहीं पाएंगे।" इसी दिन उन्होंने मेरठ की धरती से देश में गोवध बंद कराने का संकल्प भी लिया था।
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5. 'जिसको मरना है मरो टेंशन से' (12 सितंबर): तनाव पर एक दार्शनिक टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा, "जिसको मरना है मरो। मैं टेंशन नहीं लेता। टेंशन तब दूर होगी, जब भगवान से हमारा अटेंशन होगा।"
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सपा पर हमला और मनुस्मृति पर सफाई
\r\n\r\nसपा के कार्यकाल को बाबर और अकबर के जमाने से भी बदतर बताते हुए रामभद्राचार्य ने कहा कि वे केवल अराजकता फैलाने और माहौल खराब करने वालों का विरोध करते हैं। उन्होंने मनुस्मृति का बचाव करते हुए कहा कि इसमें जातियां बनाई गई थीं, लेकिन इसका अपमान उन लोगों ने किया, जिन्होंने इसे नहीं समझा।
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स्वामी ने कहा कि भारतीय संस्कृति को समझने के लिए संस्कृत पढ़ना बहुत जरूरी है। उन्होंने मेरठ की क्रांतिकारी धरती पर कथा करने पर खुशी जाहिर की और कहा कि इस कथा से 2006 के अग्निकांड में मृत हुए लोगों की आत्मा को भी शांति मिली है।
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Sabse pehle comment karne wale banein.