मेरठ (Meerut Crime News): पुलिस की खाकी वर्दी आम नागरिक के मन में सुरक्षा और विश्वास का प्रतीक मानी जाती है। लोग उम्मीद करते हैं कि संकट के समय पुलिस उनके रक्षक के रूप में खड़ी होगी। लेकिन क्या हो जब सुरक्षा की जिम्मेदारी उठाने वाले ही नशे में धुत होकर आम जनता पर जुल्म ढाने लगें? उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले से एक ऐसी ही हैरान करने वाली और पुलिस विभाग (UP Police) की छवि को धूमिल करने वाली घटना सामने आई है।READ ALSO:-दिल्ली-NCR में 'बैरियर-फ्री टोल' का महा-आगाज: अब टोल प्लाजा पर न ब्रेक दबाना है, न लाइन में लगना है! 100 की स्पीड में फास्टैग से कटेगा पैसा
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जिले में वर्दी के नशे और शराब के सुरूर में चूर दो सिपाहियों ने सरेआम एक ढाबे पर ऐसा खौफनाक उत्पात मचाया, जिसने खुद पुलिस महकमे को शर्मसार कर दिया है। इन सिपाहियों ने न केवल ढाबे पर काम करने वाले गरीब कर्मचारियों को बेरहमी से पीटा, बल्कि अपनी इस करतूत को छिपाने के लिए सबूत मिटाने का भी प्रयास किया। आइए, इस पूरी घटना के घटनाक्रम और पुलिस महकमे द्वारा लिए गए कड़े एक्शन पर विस्तार से नजर डालते हैं।
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भोला झाल के यशपाल ढाबे पर खौफ की वह रात
\r\n\r\nप्राप्त जानकारी के अनुसार, पुलिस की यह शर्मनाक गुंडागर्दी मेरठ जिले के थाना जानी अंतर्गत आने वाले भोला झाल क्षेत्र में हुई। यहां मुख्य मार्ग पर स्थित 'यशपाल ढाबा' (Yashpal Dhaba) अपनी सेवा के लिए जाना जाता है। घटना 13 तारीख की देर रात की है।
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बताया जा रहा है कि मेरठ के रोहटा थाना (Rohta Police Station) क्षेत्र में तैनात दो सिपाही— भरत और अमित कुमार— अपने कुछ अन्य साथियों के साथ यशपाल ढाबे पर रात का खाना खाने के लिए पहुंचे थे। प्रत्यक्षदर्शियों और ढाबा कर्मचारियों का आरोप है कि ये दोनों सिपाही और उनके साथी अत्यधिक शराब के नशे में धुत थे। खाना परोसने के दौरान किसी मामूली बात या बहस को लेकर इन पुलिसकर्मियों का आपा खो गया और उन्होंने अपनी वर्दी की हनक दिखानी शुरू कर दी।
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गाली-गलौज और कर्मचारियों की बेरहमी से पिटाई
\r\n\r\nशराब के नशे में चूर इन सिपाहियों ने ढाबा संचालक और वहां खाना बना रहे कर्मचारियों— यशपाल और सोनू— के साथ भद्दी-भद्दी गालियां देनी शुरू कर दीं। जब कर्मचारियों ने इस अभद्रता का विरोध किया और उन्हें शांत कराने का प्रयास किया, तो दोनों पुलिसकर्मियों (भरत और अमित कुमार) ने अपना रौब दिखाते हुए उनके साथ हाथापाई शुरू कर दी।
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आरोप है कि सिपाहियों ने कानून को ताक पर रखते हुए यशपाल और सोनू को बेरहमी से पीटा। ढाबे पर मौजूद अन्य ग्राहक भी इस अचानक हुए हमले से सहम गए। पुलिस की इस दबंगई से पूरे ढाबा परिसर में अफरा-तफरी और दहशत का माहौल पैदा हो गया। जो पुलिसकर्मी अपराधियों पर लगाम कसने के लिए भर्ती किए गए थे, वे खुद गुंडों की तरह आम नागरिकों पर कहर बरपा रहे थे।
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दहशत के बीच सबूत मिटाने की कोशिश: तोड़ दिया मोबाइल फोन
\r\n\r\nआज के डिजिटल युग में हर कोई जानता है कि एक छोटा सा वीडियो किसी की भी करतूतों को दुनिया के सामने ला सकता है। जब ढाबे पर यह मारपीट और हंगामा चल रहा था, तब वहां मौजूद किसी व्यक्ति या कर्मचारी ने पुलिस की इस गुंडागर्दी का अपने मोबाइल फोन से वीडियो बनाना शुरू कर दिया।
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नशे में होने के बावजूद इन आरोपी सिपाहियों को इस बात का पूरा भान था कि अगर उनकी यह करतूत कैमरे में कैद हो गई, तो उनकी नौकरी खतरे में पड़ सकती है। जैसे ही सिपाहियों की नजर वीडियो बना रहे शख्स पर पड़ी, वे उस पर टूट पड़े। उन्होंने न केवल उस व्यक्ति के साथ हाथापाई की, बल्कि सबूत नष्ट करने के इरादे से उसका मोबाइल फोन छीनकर जमीन पर पटक कर बुरी तरह तोड़ दिया। सिपाहियों को लगा था कि मोबाइल तोड़ने से उनकी यह करतूत हमेशा के लिए दफन हो जाएगी और वे वर्दी की आड़ में बच निकलेंगे।
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SSP का हंटर: अनुशासनहीनता पर 'जीरो टॉलरेंस'
\r\n\r\nहालांकि, इन सिपाहियों का यह सोचना पूरी तरह से गलत साबित हुआ। घटना की सूचना किसी तरह पुलिस के आला अधिकारियों और मीडिया तक पहुंच गई। मामला तूल पकड़ते देख और पुलिस महकमे की छवि खराब होते देख मेरठ के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP Meerut) ने इस घटना का तुरंत और कड़ा संज्ञान लिया।
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उत्तर प्रदेश सरकार और यूपी पुलिस की 'जीरो टॉलरेंस' नीति को अमल में लाते हुए एसएसपी ने बिना किसी देरी के मामले की जांच के आदेश दिए। प्रारंभिक जांच में जब ढाबा कर्मचारियों के आरोप और पुलिसकर्मियों के नशे में होने व मारपीट करने की बात प्रथम दृष्टया (Prima Facie) सही पाई गई, तो आला अधिकारियों ने कड़ा एक्शन लिया।
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इस पूरे घटनाक्रम पर आधिकारिक बयान देते हुए सीओ सरधना (CO Sardhana) आशुतोष कुमार ने बताया, "13 तारीख की रात्रि में थाना रोहटा पर तैनात दो सिपाही अमित कुमार और भरत द्वारा थाना जानी अंतर्गत भोला झाल के पास एक ढाबे में खाने के दौरान भारी अभद्रता की गई। पुलिसकर्मियों के द्वारा की गई इस घोर अनुशासनहीनता को गंभीरता से लेते हुए एसएसपी मेरठ द्वारा दोनों को तत्काल प्रभाव से निलंबित (Suspend) कर दिया गया है। इसके साथ ही, इस पूरे प्रकरण की विस्तृत विभागीय जांच (Departmental Inquiry) भी शुरू कर दी गई है।"
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पुलिस की छवि पर सवाल और आगे की कार्रवाई
\r\n\r\nइस घटना ने एक बार फिर से पुलिस विभाग के भीतर पनप रहे अहंकार और अनुशासनहीनता की कलई खोल कर रख दी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (CM Yogi Adityanath) लगातार इस बात पर जोर देते रहे हैं कि पुलिस का व्यवहार आम जनता के प्रति मित्रवत होना चाहिए और अपराधियों के प्रति सख्त। लेकिन मेरठ के इन दोनों सिपाहियों ने शासन की इन सभी हिदायतों को एक रात में ही तार-तार कर दिया।
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अब सस्पेंड हुए दोनों सिपाहियों (भरत और अमित कुमार) को पुलिस लाइन हाजिर कर दिया गया है। विभागीय जांच में यह तय किया जाएगा कि इस घोर दुर्व्यवहार और संपत्ति (मोबाइल) के नुकसान के लिए उन पर और क्या दंडात्मक कार्रवाई की जा सकती है। स्थानीय लोगों और व्यापारियों ने एसएसपी के इस त्वरित एक्शन की सराहना की है, क्योंकि इससे यह संदेश गया है कि यदि कोई वर्दी वाला भी कानून अपने हाथ में लेगा, तो उसे भी बख्शा नहीं जाएगा। फिलहाल, ढाबा कर्मचारियों में अभी भी दहशत है, लेकिन विभागीय कार्रवाई से उन्हें न्याय की उम्मीद जरूर जगी है।
Sabse pehle comment karne wale banein.