मेरठ (एक्सक्लूसिव रिपोर्ट): उत्तर प्रदेश के बिजली विभाग में अपनी जान हथेली पर रखकर काम करने वाले संविदा कर्मचारियों और लाइनमैनों की दुर्दशा किसी से छिपी नहीं है। एक तरफ जहां सरकार 'श्रम कानूनों' और 'कर्मचारी हितों' के बड़े-बड़े दावे करती है, वहीं दूसरी तरफ जमीनी हकीकत इसके बिल्कुल उलट है। ठेकेदारों की मनमानी और विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत के चलते एक गरीब लाइनमैन की मौत के बाद भी उसके परिवार को उनके कानूनी हक से महरूम रखा जा रहा है।Read also:-मेरठ में ईद पर हाई अलर्ट और भव्य तैयारियां: DM की स्पष्ट चेतावनी- 'नई परंपरा की इजाजत नहीं', आसमान से ड्रोन और जमीन पर CCTV रखेंगे पैनी नजर
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
ताजा और बेहद गंभीर मामला मेरठ के पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड (PVVNL) के अंतर्गत आने वाले विद्युत नगरीय वितरण खण्ड (11kv नॉर्थ - गंगानगर द्वितीय) से सामने आया है। यहां एक संविदा लाइनमैन की ड्यूटी से लौटते वक्त मौत हो गई थी, लेकिन एक साल का लंबा वक्त बीत जाने के बाद भी मृतक के आश्रितों को न तो बीमा राशि मिली और न ही कोई अनुग्रह राशि। अब इस मामले में 'निविदा-संविदा कर्मचारी सेवा समिति' (NSEWA) ने कड़ा रुख अख्तियार करते हुए बिजली विभाग के आला अधिकारियों की नींद उड़ा दी है।
\r\n\r\n

 

विज्ञापन
विज्ञापन
\r\n\r\n

क्या था पूरा मामला? मौत और इंतज़ार की दर्दनाक कहानी

\r\n\r\n
पूरा घटनाक्रम विभाग के आउटसोर्सिंग ठेकेदार 'मैसर्स अधाना एंटरप्राइजेज' के अंतर्गत काम करने वाले संविदा लाइनमैन स्व. धर्मराज (पुत्र श्री बलजीत सिंह) से जुड़ा है।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
धर्मराज अपनी जिम्मेदारी और ड्यूटी को लेकर बेहद सजग थे। जानकारी के अनुसार, दिनांक 22 मई 2025 को धर्मराज हमेशा की तरह अपनी रात्रि पाली (Night Shift) की ड्यूटी पूरी करके गंगानगर क्षेत्र से अपने घर वापस लौट रहे थे। तभी रास्ते में एक तेज रफ्तार अज्ञात वाहन ने उन्हें जोरदार टक्कर मार दी। इस भीषण हादसे में धर्मराज गंभीर रूप से घायल हो गए। परिवार ने अपनी जमा-पूंजी लगाकर लगभग एक महीने तक उनका इलाज कराया, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। तमाम कोशिशों के बावजूद दिनांक 20 जून 2025 को धर्मराज जिंदगी की जंग हार गए और उनकी मृत्यु हो गई। धर्मराज के जाने से उनका पूरा परिवार बेसहारा हो गया।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

सिस्टम की संवेदनहीनता: न ठेकेदार पसीजा, न अधिकारी

\r\n\r\n
धर्मराज की मौत की सूचना तत्काल प्रभाव से संबंधित अधिशासी अभियंता (XEN) और आउटसोर्सिंग फर्म 'मैसर्स अधाना एंटरप्राइजेज' को दे दी गई थी। नियमों के मुताबिक, ऐसे हादसों में कर्मचारी के परिवार को तत्काल राहत मिलनी चाहिए।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
    \r\n
  • \r\n
    कर्मचारी क्षतिपूर्ति अधिनियम, 1923 और श्रम विभाग के स्पष्ट आदेश (शासनादेश संख्या 688/36-3-2006-180(सा)/05) के तहत यह अनिवार्य है कि दुर्घटना होने पर मृतक कर्मचारी के आश्रितों को 120 दिन के भीतर दुर्घटना बीमा राशि और अनुग्रह राशि का भुगतान हर हाल में कर दिया जाए।
    \r\n
  • \r\n
  • \r\n
    लेकिन विडंबना देखिए कि धर्मराज की मौत को पूरा एक साल बीत चुका है, और उनके परिवार को आज तक एक फूटी कौड़ी भी मुआवजे के तौर पर नहीं दी गई है।
    \r\n
  • \r\n
  • \r\n
    सबसे बड़ी लापरवाही ठेकेदार मैसर्स अधाना एंटरप्राइजेज की रही, जिसने मृतक के परिवार से संपर्क करके जरूरी कागजी कार्यवाही तक पूरी नहीं कराई और जानबूझकर बीमा कंपनी में क्लेम दाखिल ही नहीं किया।
    \r\n
  • \r\n
  • \r\n
    दूसरी ओर, गंगानगर द्वितीय के संबंधित अधिशासी अभियंता (Executive Engineer) की भूमिका भी पूरी तरह से संदिग्ध नजर आ रही है। प्रकरण की पूरी जानकारी होने के बावजूद उन्होंने ठेकेदार फर्म पर न तो कोई पेनल्टी लगाई और न ही मृतक के परिवार को उनका हक दिलाने का कोई प्रशासनिक प्रयास किया।
    \r\n
  • \r\n
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

'निविदा-संविदा कर्मचारी सेवा समिति' ने खोला मोर्चा

\r\n\r\n
सिस्टम की इस बेशर्मी और पीड़ित परिवार की बेबसी को देखते हुए अंततः 'निविदा-संविदा कर्मचारी सेवा समिति' (NSEWA) ने इस मामले में दखल दिया है। नीति आयोग से मान्यता प्राप्त इस राष्ट्रव्यापी संगठन ने अब ठेकेदार और विभागीय अधिकारियों के खिलाफ सीधा मोर्चा खोल दिया है।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
समिति के अध्यक्ष भूपेन्द्र सिंह, महामंत्री अमित खारी और राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष (उ.प्र. प्रभारी) विनोद कुमार के नेतृत्व में संगठन ने दिनांक 26 मई 2026 को अधीक्षण अभियंता (Superintending Engineer), PVVNL, मेरठ को एक कड़ा पत्र (पत्रांक: NSEWA/116/PVVNL/26) भेजा है। इस पत्र में महामंत्री अमित खारी ने अधिकारियों की शिथिलता की कड़ी निंदा करते हुए मृतक के परिवार के लिए त्वरित न्याय की मांग की है।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

संगठन की 4 प्रमुख और सख्त मांगें

\r\n\r\n
कर्मचारी संगठन ने अधीक्षण अभियंता के सामने अपनी 4 सूत्रीय मांगें रखी हैं, जो सीधे तौर पर ठेकेदार और लापरवाह अधिकारियों पर नकेल कसने वाली हैं:
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
    \r\n
  1. \r\n
    भुगतान पर तत्काल रोक: मैसर्स अधाना एंटरप्राइजेज की सभी प्रकार की सिक्योरिटी मनी (धरोहर राशि) और विभाग में लंबित सभी बिलों का भुगतान तत्काल प्रभाव से रोक दिया जाए।
    \r\n
  2. \r\n
  3. \r\n
    15 दिन में ब्याज सहित भुगतान: मृतक स्व. धर्मराज के वैध आश्रितों को कर्मचारी क्षतिपूर्ति अधिनियम 1923 के तहत देय बीमा राशि, अनुग्रह राशि और EPF/EDLI का पूरा पैसा, विलंब अवधि के ब्याज सहित मात्र 15 दिन के अंदर दिलाया जाए।
    \r\n
  4. \r\n
  5. \r\n
    ठेकेदार हो ब्लैकलिस्ट: क्योंकि ठेकेदार ने बीमा क्लेम में 120 दिन से अधिक का जानबूझकर विलंब किया है, इसलिए अनुबंध की शर्तों के अनुसार मैसर्स अधाना एंटरप्राइजेज पर भारी पेनल्टी लगाई जाए और फर्म को तुरंत 'ब्लैकलिस्ट' (Blacklist) करने की संस्तुति की जाए।
    \r\n
  6. \r\n
  7. \r\n
    अधिकारी पर विभागीय कार्रवाई: इस पूरे मामले में घोर लापरवाही और शिथिलता बरतने वाले गंगानगर द्वितीय के अधिशासी अभियंता (XEN) के खिलाफ भी कर्मचारी हितों की अनदेखी करने के आरोप में सख्त अनुशासनात्मक और विभागीय कार्रवाई अमल में लाई जाए।
    \r\n
  8. \r\n
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

15 दिन का अल्टीमेटम: कोर्ट और श्रम आयुक्त जाने की चेतावनी

\r\n\r\n
समिति के महामंत्री अमित खारी ने अपने पत्र के अंत में प्रशासन को खुली चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि अगले 15 कार्यदिवसों के भीतर मृतक धर्मराज के गरीब परिवार को उनका पूरा पैसा और हक नहीं मिलता है, तो संगठन चुप नहीं बैठेगा।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
मजबूर होकर संगठन इस पूरे मामले को लेकर श्रम आयुक्त (Labour Commissioner), उत्तर प्रदेश के कानपुर स्थित कार्यालय और माननीय उच्च न्यायालय (High Court) का दरवाजा खटखटाएगा। संगठन ने स्पष्ट किया है कि इसके बाद होने वाली किसी भी कानूनी या विभागीय फजीहत की संपूर्ण जिम्मेदारी केवल और केवल निगम प्रशासन (PVVNL) की होगी।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

क्या जागेगा प्रशासन?

\r\n\r\n
एक संविदा लाइनमैन, जो सिस्टम का सबसे अहम और जमीनी हिस्सा होता है, उसकी मौत के बाद उसके परिवार को इस तरह दर-दर की ठोकरें खाने पर मजबूर करना किसी भी सभ्य समाज और सरकारी तंत्र के माथे पर कलंक है। इस मामले की प्रतिलिपि PVVNL के प्रबंध निदेशक (MD), जिलाधिकारी (DM) मेरठ और श्रम आयुक्त को भी सूचनार्थ भेजी गई है।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
अब देखना यह दिलचस्प होगा कि 'निविदा-संविदा कर्मचारी सेवा समिति' के इस कड़े अल्टीमेटम के बाद क्या PVVNL के आला अधिकारी नींद से जागते हैं? क्या ठेकेदार मैसर्स अधाना एंटरप्राइजेज पर गाज गिरेगी? या फिर धर्मराज का परिवार यूं ही सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटता रहेगा? मेरठ का पूरा बिजली महकमा और अन्य संविदा कर्मचारी अब अधीक्षण अभियंता के अगले कदम पर अपनी पैनी नजर गड़ाए बैठे हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन