पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लोगों का दशकों पुराना सपना अब हकीकत बनने की दहलीज पर है। मेरठ को सीधे संगम नगरी प्रयागराज से जोड़ने वाला महत्वाकांक्षी गंगा एक्सप्रेसवे लगभग बनकर तैयार हो चुका है। उम्मीद है कि सब कुछ योजना के अनुसार रहा तो नवंबर 2025 से इस पर वाहन फर्राटा भरने लगेंगे, जिससे 12-14 घंटे का लंबा सफर घटकर सिर्फ 8 घंटे से भी कम का रह जाएगा।READ ALSO:-मेरठ में 'जॉब सेंटर' की आड़ में जिस्मफरोशी का अड्डा, ऑन डिमांड सप्लाई से लेकर ब्लैकमेलिंग तक, 13 गिरफ्तार
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क्या है एक्सप्रेसवे की मौजूदा स्थिति?
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594 किलोमीटर लंबे इस एक्सप्रेसवे का मुख्य ढांचा पूरी तरह से तैयार कर लिया गया है। अब केवल कुछ जगहों पर फिनिशिंग का काम ही बचा है, जो हाल ही में हुई बारिश के कारण अस्थायी रूप से रुका हुआ है।
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    अमरोहा में काम पूरा: अमरोहा की हसनपुर तहसील में पड़ने वाले लगभग 23 किलोमीटर के हिस्से का निर्माण कार्य 12 अक्टूबर 2025 की डेडलाइन से पहले ही पूरा हो चुका है।
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    पुल और ओवरब्रिज तैयार: हसनपुर-रहरा मार्ग पर ओवरब्रिज और गंगा नदी पर पाइंदापुर में मुख्य पुल का निर्माण भी पूरा कर लिया गया है।
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    अन्य सुविधाएं: एक्सप्रेसवे पर टोल बूथ बनाने का काम तेजी से चल रहा है और बारिश के पानी की निकासी के लिए पाइपलाइन बिछाने का काम भी पूरा हो चुका है।
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नवंबर में शुरू होने की पूरी उम्मीद
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अमरोहा के अधिकारियों ने पुष्टि की है कि जिले में एक्सप्रेसवे से संबंधित लगभग सभी काम पूरे हो चुके हैं और जो थोड़ा-बहुत काम बचा है, उसे अक्टूबर तक हर हाल में पूरा कर लिया जाएगा। इसी तेज गति को देखते हुए यह प्रबल संभावना जताई जा रही है कि नवंबर महीने में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा इसका उद्घाटन किया जा सकता है, जिसके बाद इसे यातायात के लिए खोल दिया जाएगा।
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औद्योगिक गलियारे की राह में एक रोड़ा
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एक्सप्रेसवे के साथ-साथ एक औद्योगिक ग्रीन गलियारा भी प्रस्तावित है, जिससे क्षेत्र में विकास और रोजगार के अवसर पैदा होंगे। हालांकि, इस गलियारे के लिए भूमि अधिग्रहण का काम अभी तक पूरा नहीं हो पाया है। कई गांवों के किसान अधिक मुआवजे की मांग कर रहे हैं, जिसके कारण अभी तक लगभग 60% जमीन ही खरीदी जा सकी है। यह एक चुनौती है जिस पर प्रशासन काम कर रहा है।
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यह एक्सप्रेसवे न केवल मेरठ, अमरोहा, और प्रयागराज, बल्कि रास्ते में पड़ने वाले दर्जनों जिलों के लिए विकास की एक नई लाइफलाइन साबित होगा। इससे व्यापार, पर्यटन और कृषि तीनों क्षेत्रों को जबरदस्त बढ़ावा मिलेगा।
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