मेरठ: उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले में सड़क किनारे धार्मिक अतिक्रमण के खिलाफ पुलिस प्रशासन लगातार सक्रिय है। ताजा मामला परतापुर थाना क्षेत्र का है, जहां पुलिस ने सड़क किनारे बनाई गई एक मेरठ में अवैध मजार (Meerut Mein Avaidh Mazar) को तुड़वा दिया है। यह मामला इसलिए भी चर्चा का विषय बना हुआ है क्योंकि इस मजार का निर्माण किसी मुस्लिम व्यक्ति ने नहीं, बल्कि एक हिंदू बेकरी मालिक ने अपने मुस्लिम कर्मचारी की सलाह पर कराया था।READ ALSO:-मेरठ में दर्दनाक हादसा: कमरे में जिंदा जला हेड कॉन्स्टेबल, साकेत में बेड पर मिली जली हुई बॉडी, धूम्रपान से आग लगने की आशंका
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स्थानीय लोगों के हंगामे और शिकायत के बाद पुलिस मौके पर पहुंची और जांच-पड़ताल के बाद मजार को हटा दिया गया। बेकरी मालिक ने भी पुलिस का सहयोग किया और अपनी गलती स्वीकार की।
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क्या है पूरा मामला?
\r\n\r\nघटना मेरठ के परतापुर थाना क्षेत्र के दिल्ली रोड की है। यहां अचानक सड़क किनारे एक पीर की मजार उभर आई, जिस पर दीपक भी जलाए जाने लगे। सड़क जैसी सार्वजनिक जगह पर अचानक मेरठ में अवैध मजार को बना देख स्थानीय निवासियों और राहगीरों ने आपत्ति जताई। लोगों का कहना था कि यह सरकारी जमीन पर कब्जा करने और यातायात को बाधित करने का प्रयास है।
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मामला बढ़ता देख स्थानीय लोगों ने तुरंत इसकी सूचना परतापुर थाना पुलिस को दी। शिकायत मिलते ही पुलिस बल मौके पर पहुंचा। पुलिस ने जब मजार के बारे में पूछताछ की, तो एक चौंकाने वाली कहानी सामने आई।
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कारोबार बढ़ाने के लिए अंधविश्वास का सहारा
\r\n\r\nपुलिस की पूछताछ में वहां मौजूद बेकरी मालिक हंसराज सैनी ने बताया कि यह मजार उसने ही बनवाई थी। हंसराज ने खुलासा किया कि उसने कुछ समय पहले यहां बेकरी खोली थी, लेकिन कारोबार उम्मीद के मुताबिक नहीं चल रहा था। घाटे से परेशान हंसराज अपने एक मुस्लिम कर्मचारी, अब्दुल सत्तार के प्रभाव में आ गया।
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हंसराज के मुताबिक, अब्दुल सत्तार ने उससे कहा कि "मेरे सपने में पीर बाबा आए हैं और उन्होंने कहा है कि अगर यहां उनकी मजार बनवा दी जाए, तो कारोबार में बरकत होगी और सफलता मिलेगी।" कर्मचारी की बातों में आकर और मुनाफे की आस में हंसराज ने मेरठ में अवैध मजार का निर्माण करवा दिया।
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विरोध के बाद बदली थी जगह
\r\n\r\nहंसराज ने बताया कि पहले यह मजार थोड़ी हटकर बनाई गई थी, लेकिन वहां भी लोगों ने इसका विरोध किया था। विरोध के चलते उसने मजार को वहां से हटाकर मुख्य सड़क के किनारे स्थापित कर दिया। लेकिन यहां भी मेरठ में अवैध मजार को लेकर स्थानीय लोगों का गुस्सा फूट पड़ा। लोगों का तर्क था कि धर्म की आड़ में सड़क किनारे अतिक्रमण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
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पुलिस की कार्रवाई और मालिक का बयान
\r\n\r\nमौके पर पहुंची पुलिस ने जब दस्तावेजों और स्थिति की जांच की, तो पाया कि निर्माण पूरी तरह से अवैध था। पुलिस की सख्ती और लोगों के आक्रोश को देखते हुए बेकरी मालिक हंसराज ने तुरंत अपनी गलती मान ली।
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हंसराज ने कहा, "मैं कोई भी ऐसा काम नहीं करना चाहता जिससे आम लोगों को परेशानी हो या किसी की जनभावनाएं आहत हों। यह निर्माण सिर्फ कारोबार की भलाई के लिए किया गया था, लेकिन अगर इससे समस्या हो रही है, तो इसे हटाना ही सही है।"
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इसके बाद पुलिस की देखरेख में मेरठ में अवैध मजार को तोड़ दिया गया। पुलिस ने सख्त हिदायत दी है कि भविष्य में सरकारी जमीन या सड़क किनारे इस तरह का कोई भी निर्माण न किया जाए।
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प्रशासन का कड़ा रुख
\r\n\r\nमेरठ और पूरे उत्तर प्रदेश में योगी सरकार अवैध अतिक्रमण और सड़क किनारे बने अवैध धार्मिक स्थलों को लेकर जीरो टॉलरेंस की नीति अपना रही है। परतापुर की यह घटना यह दर्शाती है कि पुलिस प्रशासन मुस्तैद है। मेरठ में अवैध मजार जैसे मामलों में त्वरित कार्रवाई से यह संदेश गया है कि कानून से ऊपर कोई आस्था या अंधविश्वास नहीं है।
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स्थानीय लोगों ने पुलिस की इस त्वरित कार्रवाई की सराहना की है। उनका कहना है कि अगर समय रहते ऐसे निर्माणों को नहीं रोका गया, तो ये भविष्य में बड़े विवाद और जाम का कारण बन जाते हैं।
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कारोबार में मंदी और अंधविश्वास के चलते एक हिंदू व्यापारी द्वारा बनाई गई मेरठ में अवैध मजार आखिरकार जमींदोज हो गई। यह घटना समाज में फैले अंधविश्वास और सरकारी जमीन पर कब्जे की मानसिकता को उजागर करती है। पुलिस की सूझबूझ और त्वरित एक्शन ने एक संभावित विवाद को शांत कर दिया।
Sabse pehle comment karne wale banein.