मेरठ: उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले से एक बेहद दर्दनाक और दिल दहला देने वाली खबर सामने आई है। यहां सिविल लाइन थाना क्षेत्र में तैनात एक हेड कॉन्स्टेबल की उनके किराए के कमरे में सोते समय जिंदा जलकर मौत हो गई। इस दुखद घटना ने पूरे पुलिस महकमे को शोक में डुबो दिया है। READ ALSO:-पुरानी बैटरियों के 'पानी और मेंटेनेंस' से पाएं आजादी: Sanvaru Urja ने लॉन्च किया लिथियम बैटरी और स्मार्ट इनवर्टर का दमदार कॉम्बो
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घटना मंगलवार देर रात की है, जब आसपास के लोगों ने कमरे से धुआं निकलते देखा। जब तक दमकल विभाग और पुलिस की टीम मौके पर पहुंची, तब तक बहुत देर हो चुकी थी।
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बंद कमरे में धुआं और बिस्तर पर लपटें
\r\n\r\nपुलिस सूत्रों के अनुसार, मृतक की पहचान विभोर तोमर के रूप में हुई है, जो मूल रूप से शामली जिले के कांधला के रहने वाले थे। वह मेरठ के सिविल लाइन थाना क्षेत्र के साकेत (शर्मा नगर) में संजय कुमार के मकान में किराए पर अकेले रहते थे। मंगलवार की रात वह अपनी ड्यूटी खत्म करके कमरे पर लौटे और सो गए।
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देर रात पड़ोसियों को उनके कमरे से अजीब गंध और धुआं निकलता दिखाई दिया। जब लोगों ने खिड़की से झांककर देखा तो उनके होश उड़ गए। हेड कॉन्स्टेबल विभोर तोमर बिस्तर पर बेहोशी की हालत में पड़े थे और उनका बिस्तर आग की लपटों से घिरा हुआ था। कमरा पूरी तरह से जहरीले धुएं से भर चुका था। यह दृश्य देखकर लोगों ने तुरंत पुलिस कंट्रोल रूम और फायर ब्रिगेड को सूचित किया।
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2011 बैच के सिपाही थे विभोर तोमर
\r\n\r\nविभोर तोमर 2011 में उत्तर प्रदेश पुलिस में भर्ती हुए थे। अपनी सेवा के दौरान उन्होंने कई अहम जिम्मेदारियां निभाई थीं और वर्तमान में हेड कॉन्स्टेबल के पद पर कार्यरत थे। बताया जा रहा है कि उनका परिवार कांधला में रहता है, जबकि वह नौकरी के कारण मेरठ में अकेले रह रहे थे।
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हादसे की सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड की एक गाड़ी मौके पर पहुंची और आग पर काबू पाया। पुलिस कर्मियों ने दरवाजा तोड़कर उन्हें बाहर निकालने की कोशिश की, लेकिन तब तक उनकी सांसें थम चुकी थीं। शरीर बुरी तरह झुलस चुका था। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया है। इस तरह मेरठ में हेड कॉन्स्टेबल की मौत ने एक हंसते-खेलते परिवार को कभी न भरने वाला जख्म दे दिया है।
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हादसे की वजह: सिगरेट या कुछ और?
\r\n\r\nपुलिस की प्रारंभिक जांच में हादसे के पीछे की वजह लापरवाही मानी जा रही है। आशंका जताई जा रही है कि विभोर तोमर ने शायद बिस्तर पर लेटकर बीड़ी या सिगरेट पी होगी। नींद आने पर जलती हुई सिगरेट बिस्तर पर गिर गई होगी, जिससे पहले गद्दे में आग सुलगती रही और कमरे में धुआं भर गया।
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विशेषज्ञों का मानना है कि आग की लपटें उठने से पहले कार्बन मोनोऑक्साइड (धुआं) के कारण व्यक्ति बेहोश हो जाता है, जिससे उसे भागने का मौका नहीं मिलता। मेरठ में हेड कॉन्स्टेबल की मौत के मामले में भी यही आशंका जताई जा रही है कि धुएं के कारण दम घुटने से वह बेहोश हो गए होंगे और फिर आग ने उन्हें अपनी चपेट में ले लिया। हालांकि, फॉरेंसिक टीम शॉर्ट सर्किट समेत अन्य पहलुओं की भी जांच कर रही है।
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एसएसपी ने दिए जांच के आदेश
\r\n\r\nघटनास्थल पर पहुंचे मेरठ के एसएसपी डॉ. विपिन ताड़ा ने स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने मीडिया से बात करते हुए कहा, "प्रारंभिक जांच में यह आग लगने की दुर्घटना प्रतीत हो रही है। मेरठ में हेड कॉन्स्टेबल की मौत दुखद है। हमने उनके परिजनों को सूचित कर दिया है। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट और फॉरेंसिक जांच के बाद ही मौत के सही कारणों और आग लगने की सटीक वजह का पता चल पाएगा।"
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पुलिस अधिकारियों ने बताया कि विभोर तोमर एक मिलनसार और कर्तव्यनिष्ठ पुलिसकर्मी थे। उनके साथियों को विश्वास नहीं हो रहा है कि अब वह उनके बीच नहीं हैं।
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अकेले रहने वाले पुलिसकर्मियों के लिए सबक
\r\n\r\nयह घटना उन सभी लोगों के लिए एक चेतावनी है जो अकेले रहते हैं और रात में धूम्रपान करते हैं या हीटर जलाकर सोते हैं। बंद कमरे में ऑक्सीजन की कमी और आग लगने का खतरा सर्दियों में बढ़ जाता है। मेरठ में हेड कॉन्स्टेबल की मौत एक रिमाइंडर है कि छोटी सी लापरवाही जानलेवा साबित हो सकती है।
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मंगलवार की रात मेरठ पुलिस के लिए काली रात साबित हुई। मेरठ में हेड कॉन्स्टेबल की मौत ने सुरक्षा और सावधानी के सवालों को फिर से खड़ा कर दिया है। विभोर तोमर की जान एक छोटी सी चिंगारी ने ले ली। पुलिस विभाग ने अपने एक जांबाज साथी को खो दिया है। जांच जारी है, लेकिन यह हादसा हमें सतर्क रहने की सीख दे गया है।
Sabse pehle comment karne wale banein.