मेरठ (क्राइम डेस्क/विशेष रिपोर्ट):
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पश्चिम उत्तर प्रदेश का प्रमुख व्यापारिक केंद्र माना जाने वाला मेरठ शहर एक बार फिर नकली और मिलावटी सामानों के काले कारोबार को लेकर सुर्खियों में है। कुछ मुनाफे के लालच में आम लोगों की सेहत के साथ कितना बड़ा खिलवाड़ किया जा रहा है, इसका एक जीता-जागता और खौफनाक उदाहरण सोमवार रात सदर बाजार थाना क्षेत्र की दाल मंडी में देखने को मिला।
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​यहां ब्रांडेड और भरोसेमंद कंपनियों के नाम का सहारा लेकर धड़ल्ले से नकली उत्पाद बेचे जा रहे थे। पुलिस ने एक सटीक और गुप्त सूचना के आधार पर कार्रवाई करते हुए नामी ब्रांड्स की नकली 'टाटा टी' (Tata Tea) और 'ऑल आउट' (All Out) रिफिल का एक बड़ा जखीरा बरामद किया है।
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​कैसे हुआ इस बड़े काले कारोबार का पर्दाफाश?

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​पिछले कई महीनों से 'टाटा टी' और 'ऑल आउट' बनाने वाली मूल कंपनियों के कस्टमर केयर सेंटर पर मेरठ और आसपास के क्षेत्रों से लगातार शिकायतें पहुंच रही थीं। ग्राहकों का कहना था कि चायपत्ती के स्वाद और रंग में भारी गिरावट आई है, वहीं ऑल आउट रिफिल से मच्छर भागने के बजाय लोगों को सांस लेने में तकलीफ और आंखों में जलन की शिकायत हो रही थी।
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​इन गंभीर शिकायतों को संज्ञान में लेते हुए, कंपनियों द्वारा अधिकृत एक विशेष जांच एजेंसी 'स्पीड सर्च एंड सिक्योरिटी नेटवर्क' (Speed Search & Security Network) के अधिकारियों ने गुपचुप तरीके से मेरठ के बाजारों की रेकी शुरू की। एजेंसी के फील्ड मैनेजर ललित कुमार ने कई दिनों तक दाल मंडी में डमी ग्राहक (Decoy Customer) बनकर खरीदारी की और संदिग्ध उत्पादों के सैंपल लैब में जांच के लिए भेजे। जब लैब रिपोर्ट में उत्पादों के 100% नकली होने की पुष्टि हो गई, तब ललित कुमार ने मेरठ की स्थानीय सदर बाजार थाना पुलिस से संपर्क साधा और एक फुल-प्रूफ रेड (Raid) की योजना बनाई गई।
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​दाल मंडी में एक साथ दो दुकानों पर धावा: मची अफरा-तफरी

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​सोमवार रात जब बाजार में भीड़भाड़ थी, तभी पुलिस बल और कंपनी की विशेष जांच टीम ने सदर दाल मंडी स्थित दो प्रमुख दुकानों— 'जैन किराना स्टोर' और 'जैन जनरल स्टोर' पर एक साथ धावा बोल दिया। पुलिस की अचानक हुई इस कार्रवाई से पूरे थोक बाजार में हड़कंप मच गया और कई अन्य दुकानदार अपनी-अपनी दुकानों के शटर गिराकर भागने लगे।
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​छापेमारी के दौरान जब दुकानों और उनके गोदामों की तलाशी ली गई, तो पुलिस और जांच टीम के अधिकारी भी दंग रह गए। वहां असली ब्रांडेड पैकिंग में पैक किया गया हजारों रुपये का नकली माल बोरियों में भरकर रखा हुआ था।
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​बरामद किए गए नकली माल की सूची (Seizure Details):

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​1. आशीष जैन (जैन किराना स्टोर) के यहां से बरामदगी:

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    ​टाटा टी (100 ग्राम पैकिंग) के 279 नकली पैकेट।
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    ​टाटा टी (200 ग्राम पैकिंग) के 21 नकली पैकेट।
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2. राकेश कुमार जैन (जैन जनरल स्टोर) के यहां से बरामदगी:

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    ​टाटा टी (1 किलोग्राम पैकिंग) के 44 बड़े नकली पैकेट।
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    ​टाटा टी (100 ग्राम पैकिंग) के 19 नकली पैकेट।
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    ​मच्छर भगाने वाली 'ऑल आउट' रिफिल के 632 नकली पैकेट/रिफिल।
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दोनों दुकानदारों (आशीष जैन और राकेश कुमार जैन) को मौके से ही रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया गया और पुलिस उन्हें पूछताछ के लिए थाने ले आई।
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धीमा जहर: आपकी सेहत के लिए कितने खतरनाक हैं ये नकली उत्पाद?

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​बाजार और स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक, इस तरह के नकली उत्पाद सिर्फ आर्थिक धोखाधड़ी नहीं हैं, बल्कि यह सीधे तौर पर आम जनता की जान से खेलने जैसा है।
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    ​नकली चायपत्ती में मिलाए जाते हैं घातक रसायन: आमतौर पर इस तरह की नकली चायपत्ती बनाने वाले गिरोह असली चाय की पत्तियों के बजाय इस्तेमाल की जा चुकी पुरानी चायपत्ती को सुखाकर इस्तेमाल करते हैं। वजन और रंग बढ़ाने के लिए इसमें चमड़े का बारीक बुरादा, लकड़ी का बुरादा और खतरनाक रासायनिक रंगों (Industrial Dyes) की मिलावट की जाती है। इसका लंबे समय तक सेवन करने से लीवर (Liver), किडनी और पेट की आंतों में गंभीर संक्रमण हो सकता है। यह कैंसर जैसी जानलेवा बीमारियों का भी कारण बन सकता है।
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    ​नकली ऑल आउट रिफिल से सांस की बीमारियां: असली मच्छर रोधी रिफिल में इंसानी सेहत के मानकों को ध्यान में रखकर केमिकल का इस्तेमाल होता है। लेकिन इन नकली रिफिल में बेहद सस्ते, प्रतिबंधित और जहरीले रसायनों (Banned Toxic Chemicals) का इस्तेमाल किया जाता है। बंद कमरे में जब यह रिफिल जलती है, तो इसका धुआं सीधे फेफड़ों में जाता है, जिससे अस्थमा, सांस फूलने, त्वचा पर रैशेज और आंखों में गंभीर जलन जैसी बीमारियां हो सकती हैं। खासकर बच्चों और बुजुर्गों के लिए यह जानलेवा साबित हो सकता है।
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पुलिस का बयान: "सप्लाई चेन और मैन्युफैक्चरिंग यूनिट तक पहुंचेगी पुलिस"

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​इस पूरी कार्रवाई पर जानकारी देते हुए मेरठ के एसपी सिटी विनायक गोपाल भोसले (SP City Vinayak Gopal Bhosle) ने बताया:
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​"दाल मंडी के दो दुकानदारों, आशीष जैन और राकेश कुमार जैन के पास से भारी मात्रा में नकली टाटा चाय और ऑल आउट रिफिल बरामद हुए हैं। आरोपियों के खिलाफ कॉपीराइट एक्ट, धोखाधड़ी और मिलावटखोरी की संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया है। बरामद किए गए सभी नकली उत्पाद हूबहू असली पैकिंग में पैक किए गए थे, जिससे आम ग्राहकों के लिए असली-नकली में अंतर कर पाना नामुमकिन था। अब हमारी विशेष टीमें इस पूरे सप्लाई नेटवर्क की गहराई से जांच कर रही हैं। यह पता लगाया जा रहा है कि यह नकली माल किस छिपी हुई फैक्ट्री में तैयार हो रहा था, इसकी प्रिंटिंग और पैकेजिंग का काम कहां होता था, और इसे मेरठ के अलावा किन-किन जिलों या बाजारों में सप्लाई किया जा रहा था।"
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जागरूकता: ग्राहक कैसे करें असली और नकली की पहचान?

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​इस घटना के बाद आम उपभोक्ताओं के लिए यह जानना बेहद जरूरी हो गया है कि वे ठगी का शिकार होने से कैसे बचें। बाजार से कोई भी ब्रांडेड एफएमसीजी (FMCG) प्रोडक्ट खरीदते समय इन बातों का विशेष ध्यान रखें:
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    ​पैकेजिंग की क्वालिटी: नकली उत्पादों की पैकेजिंग का रंग अक्सर असली के मुकाबले थोड़ा हल्का या ज्यादा चमकदार होता है।
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    ​स्पेलिंग और फॉन्ट (Spelling Errors): ठग अक्सर कानूनी कार्रवाई से बचने के लिए ब्रांड के नाम में कोई एक अक्षर बदल देते हैं (जैसे TATA की जगह TAATA) या फॉन्ट का स्टाइल थोड़ा अलग होता है।
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    ​बारकोड और बैच नंबर: असली उत्पादों पर बारकोड और मैन्युफैक्चरिंग बैच नंबर बहुत स्पष्ट छपा होता है। आप अपने स्मार्टफोन से बारकोड स्कैन करके भी उत्पाद की प्रामाणिकता जांच सकते हैं।
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    ​कीमत में भारी अंतर: अगर कोई दुकानदार आपको ब्रांडेड उत्पाद पर बाजार भाव से बहुत ज्यादा और असामान्य डिस्काउंट दे रहा है, तो समझ जाइए कि दाल में कुछ काला है।
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​फिलहाल, मेरठ पुलिस इस नकली सामान को बनाने वाली असली मैन्युफैक्चरिंग यूनिट, अवैध प्रिंटिंग प्रेस और मुख्य सप्लायर की तलाश में मेरठ शहर और उसके आसपास के कई जिलों में लगातार दबिश दे रही है। पुलिस को उम्मीद है कि जल्द ही एक बड़े अंतरराज्यीय सिंडिकेट का खुलासा हो सकता है।
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