पश्चिम उत्तर प्रदेश में आर्थिक अपराधों के खिलाफ मेरठ पुलिस को एक बड़ी सफलता हाथ लगी है। मेरठ क्राइम ब्रांच और स्वाट (SWAT) टीम ने एक ऐसे हाई-प्रोफाइल सिंडिकेट का भंडाफोड़ किया है, जो केवल कागजों पर कंपनियां चलाकर भारत सरकार के राजस्व में करोड़ों की सेंध लगा रहा था।READ ALSO:-UP Weather Alert: यूपी में कुदरत का 'कोल्ड अटैक', 18 जिलों में ओले और आंधी की चेतावनी; जानें बारिश से गलन और फसलों का पूरा गणित
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
ब्रह्मपुरी थाने में दर्ज एक मुकदमे की जांच करते हुए पुलिस ने GST (वस्तु एवं सेवा कर) चोरी के आरोप में दो बेहद शातिर दिमाग अपराधियों को गिरफ्तार किया है। शुरुआती जांच में 1.23 करोड़ रुपये की GST चोरी की पुष्टि हुई है, लेकिन पुलिस का मानना है कि यह तो बस हिमशैल का ऊपरी सिरा (Tip of the iceberg) है। इस घोटाले की जड़ें काफी गहरी हो सकती हैं और जांच का दायरा बढ़ने पर घोटाले की रकम कई गुना बढ़ सकती है।
\r\n\r\n

 

विज्ञापन
विज्ञापन
\r\n\r\n

बड़ी कार्रवाई: कैसे पुलिस के हत्थे चढ़े 'टैक्स चोर'?

\r\n\r\n
मेरठ पुलिस की क्राइम ब्रांच और स्वाट टीम पिछले काफी समय से उन संदिग्ध लेन-देन पर नजर रख रही थी, जो बिना किसी वास्तविक व्यापार के किए जा रहे थे। खूफिया इनपुट और इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस की मदद से पुलिस इस निष्कर्ष पर पहुंची कि एनसीआर (NCR) में बैठे कुछ लोग फर्जी फर्मों का जाल बुनकर सरकार को चूना लगा रहे हैं।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

ब्रह्मपुरी थाने से शुरू हुई जांच

\r\n\r\n
यह पूरा मामला मेरठ के ब्रह्मपुरी थाने में दर्ज एक एफआईआर (FIR) से जुड़ा है। पुलिस को सूचना मिली थी कि कुछ लोग बोगस (फर्जी) दस्तावेजों के आधार पर जीएसटी नंबर लेकर फर्जी बिलिंग का खेल कर रहे हैं। इस सूचना को गंभीरता से लेते हुए एसपी क्राइम (SP Crime) अवनीश कुमार के नेतृत्व में एक विशेष टीम का गठन किया गया।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
टीम ने जाल बिछाया और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर दो मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। यह गिरफ्तारी न केवल मेरठ पुलिस की सतर्कता को दर्शाती है, बल्कि यह भी बताती है कि कैसे आर्थिक अपराधी अब डिजिटल प्रणालियों का दुरुपयोग कर रहे हैं।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

मास्टरमाइंड्स की प्रोफाइल: दिल्ली और गाजियाबाद का कनेक्शन

\r\n\r\n
पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए गए दोनों आरोपी बेहद शातिर हैं और इन्हें आर्थिक नियमों की बारीक जानकारी थी। इनका प्रोफाइल इस प्रकार है:
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
    \r\n
  1. \r\n
    अमित जोशी:
    \r\n\r\n
      \r\n
    • \r\n
      निवासी: वैशाली सेक्टर-4, थाना कौशांबी, गाजियाबाद।
      \r\n
    • \r\n
    • \r\n
      भूमिका: अमित जोशी को एनसीआर में बैठकर फर्जी दस्तावेजों का प्रबंधन करने और गाजियाबाद से इस नेटवर्क को ऑपरेट करने का आरोपी माना जा रहा है।
      \r\n
    • \r\n
    \r\n
  2. \r\n
  3. \r\n
    गौतम राजकुमार बरमेचा:
    \r\n\r\n
      \r\n
    • \r\n
      निवासी: रामविहार कॉलोनी, थाना विवेक विहार, पूर्वी दिल्ली।
      \r\n
    • \r\n
    • \r\n
      भूमिका: दिल्ली में बैठकर वित्तीय प्रबंधन और फर्जी फर्मों के नाम पर बैंक खाते खुलवाने में इसकी संदिग्ध भूमिका रही है।
      \r\n
    • \r\n
    \r\n
  4. \r\n
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
ये दोनों आरोपी आपस में मिलकर फर्जी फर्मों का एक नेटवर्क चला रहे थे। इनका उद्देश्य बिना कोई सामान खरीदे या बेचे, केवल बिलों के आदान-प्रदान से इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) का दावा करना और सरकार को राजस्व हानि पहुंचाना था।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

बरामदगी: 7 मुहरें खोलेंगी राज

\r\n\r\n
गिरफ्तारी के वक्त पुलिस को इनके पास से जो सामान मिला है, वह इस बात की तस्दीक करता है कि यह कोई छोटा-मोटा अपराध नहीं, बल्कि एक संगठित गिरोह है।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

बरामद सामान की सूची:

\r\n\r\n
    \r\n
  • \r\n
    4 मोबाइल फोन: जिनमें संदिग्ध व्हाट्सएप चैट, बैंक ट्रांजेक्शन के मैसेज और नेटवर्क के अन्य लोगों के नंबर हो सकते हैं।
    \r\n
  • \r\n
  • \r\n
    7 रबर स्टैम्प (मुहरें): अलग-अलग बोगस फर्मों की मुहरें, जिनका इस्तेमाल फर्जी बिलों और दस्तावेजों को प्रमाणित करने के लिए किया जाता था।
    \r\n
  • \r\n
  • \r\n
    दस्तावेज: कई फर्जी फर्मों से संबंधित रजिस्ट्रेशन पेपर, लेटरहेड और अन्य अभिलेख।
    \r\n
  • \r\n
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
एसपी क्राइम ने बताया कि बरामद दस्तावेजों की जांच की जा रही है। इन मुहरों से पता चलेगा कि अब तक कितनी फर्जी कंपनियां बनाई गई हैं और किन-किन शहरों में इनका जाल फैला हुआ है।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

घोटाले का गणित: 6 करोड़ के बिल, 1.23 करोड़ की चोरी

\r\n\r\n
इस पूरे फर्जीवाड़े का आर्थिक गणित हैरान करने वाला है। एसपी क्राइम के मुताबिक, आरोपियों ने बहुत ही सुनियोजित तरीके से इस अपराध को अंजाम दिया।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
    \r\n
  • \r\n
    कुल फर्जी बिलिंग: आरोपियों ने फर्जी फर्मों के सहारे कुल 6,86,60,010 रुपये (लगभग 6.86 करोड़) के फर्जी बिल तैयार किए। यानी, 6 करोड़ से ज्यादा का माल कागजों पर बेचा और खरीदा गया, जबकि असलियत में एक सुई भी इधर से उधर नहीं हुई।
    \r\n
  • \r\n
  • \r\n
    GST चोरी: इन फर्जी बिलों के माध्यम से आरोपियों ने 1,23,58,801.80 रुपये (लगभग 1.23 करोड़) की जीएसटी चोरी की। यह वह पैसा है जो सरकार के खजाने में जाना चाहिए था, लेकिन फर्जीवाड़े के जरिए दबा लिया गया।
    \r\n
  • \r\n
  • \r\n
    सरकार को नुकसान: इस तरह की चोरी से सीधे तौर पर भारत सरकार और राज्य सरकार के राजस्व को भारी नुकसान पहुंचता है, जिसका असर विकास कार्यों पर पड़ता है।
    \r\n
  • \r\n
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

पुलिस का मास्टरस्ट्रोक: 4 करोड़ से ज्यादा की रकम फ्रीज

\r\n\r\n
अपराधियों को केवल पकड़ना ही काफी नहीं था, बल्कि उनके द्वारा कमाई गई काली कमाई को जब्त करना भी जरूरी था। मेरठ पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए वित्तीय प्रहार भी किया है।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
जांच के दौरान पुलिस को 3 संदिग्ध बैंक खातों (Bank Accounts) की जानकारी मिली। जब इन खातों को खंगाला गया, तो उनमें करोड़ों रुपये जमा मिले। पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए बैंक प्रबंधन से संपर्क कर इन खातों को फ्रीज (Freeze) करवा दिया है।
\r\n\r\n
फ्रीज की गई रकम का ब्यौरा:
\r\n\r\n\r\n \r\n \r\n \r\n \r\n \r\n \r\n \r\n \r\n \r\n \r\n \r\n \r\n \r\n \r\n \r\n \r\n \r\n \r\n \r\n \r\n \r\n \r\n \r\n \r\n
\r\n
खाता संख्या (सांकेतिक)
\r\n
\r\n
फ्रीज की गई धनराशि
\r\n
\r\n
अकाउंट 1
\r\n
\r\n
₹ 64,27,831
\r\n
\r\n
अकाउंट 2
\r\n
\r\n
₹ 1,38,00,000
\r\n
\r\n
अकाउंट 3
\r\n
\r\n
₹ 3,20,00,000
\r\n
\r\n
कुल योग
\r\n
\r\n
₹ 5.22 करोड़ (लगभग)
\r\n
\r\n\r\n
 
\r\n\r\n
(नोट: रिपोर्ट में फ्रीज की गई कुल रकम अलग-अलग खातों के आधार पर 4 करोड़ से अधिक बताई गई है, जो जांच का विषय है कि यह पैसा कहां से आया।)
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

कार्यप्रणाली (Modus Operandi): कैसे बनाते थे 'हवा-हवाई' कंपनियां?

\r\n\r\n
इस गिरोह का काम करने का तरीका (Modus Operandi) बेहद शातिर था। यह लोग जीएसटी सिस्टम की कमियों का फायदा उठाते थे।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
    \r\n
  1. \r\n
    फर्जी दस्तावेज: सबसे पहले गरीब या जरूरतमंद लोगों के आधार कार्ड और पैन कार्ड (कई बार किराए पर या चोरी किए गए) का उपयोग करके फर्जी पहचान बनाई जाती थी।
    \r\n
  2. \r\n
  3. \r\n
    बोगस फर्म रजिस्ट्रेशन: इन दस्तावेजों के आधार पर जीएसटी पोर्टल पर नई फर्म का रजिस्ट्रेशन कराया जाता था। इसके लिए रेंट एग्रीमेंट और बिजली के बिल भी फर्जी लगाए जाते थे।
    \r\n
  4. \r\n
  5. \r\n
    सर्कुलर ट्रेडिंग (Circular Trading): फर्म बनने के बाद, ये लोग आपस में ही (एक फर्जी फर्म से दूसरी फर्जी फर्म को) माल बेचने का बिल काटते थे। असल में कोई माल नहीं होता था, सिर्फ बिल जनरेट होते थे।
    \r\n
  6. \r\n
  7. \r\n
    ITC का खेल: बिल काटने के बाद ये लोग सरकार से 'इनपुट टैक्स क्रेडिट' (Input Tax Credit) क्लेम कर लेते थे या अपनी देनदारी कम दिखा देते थे।
    \r\n
  8. \r\n
  9. \r\n
    पैसा ठिकाने लगाना: अवैध रूप से कमाए गए पैसे को अलग-अलग बैंक खातों में घुमाया जाता था ताकि पुलिस या आयकर विभाग को शक न हो।
    \r\n
  10. \r\n
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

पुलिस अधिकारी का बयान

\r\n\r\n
इस मामले पर जानकारी देते हुए एसपी क्राइम अवनीश कुमार ने बताया:
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
\r\n
"यह एक संगठित गिरोह है जो बोगस फर्म बनाकर सरकार को राजस्व की हानि पहुंचा रहा था। हमने दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है, लेकिन जांच अभी शुरुआती दौर में है। पकड़े गए आरोपियों के पास से कई महत्वपूर्ण दस्तावेज मिले हैं। हमें आशंका है कि इस फ्रॉड की कुल धनराशि अभी और बढ़ सकती है। इसके अलावा, इस सिंडिकेट में कई अन्य लोग भी शामिल हो सकते हैं, जिनकी तलाश जारी है। बैंक खातों को फ्रीज करा दिया गया है और फॉरेंसिक ऑडिट के जरिए पैसों के ट्रेल (Money Trail) का पता लगाया जा रहा है।"
\r\n
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

आगे की राह: जांच का दायरा बढ़ेगा

\r\n\r\n
पुलिस ने दोनों आरोपियों को कोर्ट में पेश कर रिमांड पर लिया है और बाद में जेल भेज दिया है। लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं होती।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
    \r\n
  • \r\n
    नेटवर्क की तलाश: पुलिस अब यह पता लगा रही है कि अमित और गौतम के ऊपर कौन है? क्या कोई बड़ा चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) या टैक्स वकील भी इनकी मदद कर रहा था?
    \r\n
  • \r\n
  • \r\n
    अन्य राज्यों से तार: क्या इन फर्जी फर्मों के तार उत्तर प्रदेश के अलावा हरियाणा, दिल्ली या राजस्थान से भी जुड़े हैं?
    \r\n
  • \r\n
  • \r\n
    बेनामी संपत्ति: आरोपियों ने इस काली कमाई से कहां-कहां संपत्तियां खरीदी हैं, इसकी भी जांच की जाएगी।
    \r\n
  • \r\n
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
यह मामला इस बात का प्रमाण है कि यूपी पुलिस अब पारंपरिक अपराधों के साथ-साथ 'व्हाइट कॉलर क्राइम' (White Collar Crime) पर भी कड़ा प्रहार कर रही है। मेरठ में हुए इस खुलासे ने जीएसटी चोरी करने वालों के बीच हड़कंप मचा दिया है।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
मेरठ पुलिस की यह कार्रवाई सराहनीय है। 1.23 करोड़ की चोरी पकड़े जाने और 4 करोड़ से ज्यादा की रकम फ्रीज होने से यह साफ है कि कानून के हाथ अब डिजिटल चोरों तक भी पहुंच रहे हैं। आने वाले दिनों में इस मामले में और भी बड़े खुलासे होने की उम्मीद है।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

जनता से अपील:

\r\n\r\n
अगर आपको अपने आसपास किसी ऐसी फर्म या व्यक्ति की जानकारी मिले जो संदिग्ध रूप से रातों-रात अमीर बन रहा हो या फर्जी बिलिंग का काम करता हो, तो तुरंत पुलिस या जीएसटी विभाग को सूचित करें। आपकी जागरूकता देश के राजस्व को बचाने में मदद कर सकती है।
विज्ञापन
विज्ञापन