उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) को अपराध मुक्त बनाने और अपराधियों की कमर तोड़ने के लिए यूपी पुलिस का 'जीरो टॉलरेंस' (Zero Tolerance) अभियान लगातार जारी है। इसी कड़ी में पश्चिमी यूपी के मेरठ (Meerut) जिले में पुलिस को एक बेहद बड़ी और महत्वपूर्ण सफलता हाथ लगी है। मेरठ के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) के सख्त निर्देशों पर जिले भर में चलाए जा रहे धरपकड़ अभियान के तहत, पुलिस ने एक ऐसे अंतरजनपदीय गिरोह का पर्दाफाश किया है जो गुपचुप तरीके से अवैध हथियारों (Illegal Arms) की पूरी की पूरी फैक्ट्री चला रहा था।READ ALSO:-सोने-चांदी के दामों में अचानक आई गिरावट! क्या यही है खरीदारी का सही मौका? शोरूम जाने से पहले तुरंत चेक करें ताजा रेट लिस्ट
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
मेरठ की तेजतर्रार SWAT टीम प्रथम (नगर) और थाना लिसाड़ी गेट पुलिस के एक शानदार और सटीक संयुक्त अभियान (Joint Operation) में इस अवैध शस्त्र बनाने वाले कारखाने पर छापा मारा गया। इस ताबड़तोड़ कार्रवाई में पुलिस ने गिरोह के दो बेहद शातिर गुर्गों को गिरफ्तार किया है। पकड़े गए आरोपियों के पास से न केवल तैयार और अर्ध-निर्मित हथियारों का बड़ा जखीरा बरामद हुआ है, बल्कि हथियार बनाने की भारी मशीनरी और उपकरण भी जब्त किए गए हैं। आइए इस पूरे पुलिस ऑपरेशन और आरोपियों के काले कारनामों को विस्तार से समझते हैं।
\r\n\r\n

 

विज्ञापन
विज्ञापन
\r\n\r\n

कैसे हुआ इस अवैध 'हथियार फैक्ट्री' का पर्दाफाश? (The Joint Police Operation)

\r\n\r\n
मेरठ शहर में लंबे समय से अवैध हथियारों की सप्लाई की गुप्त सूचनाएं मिल रही थीं। इसे गंभीरता से लेते हुए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ने एक विशेष टीम का गठन किया था।
\r\n\r\n\r\n\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
मेरठ के एसपी सिटी (SP City) विनायक गोपाल भोंसले ने इस पूरे ऑपरेशन की जानकारी देते हुए मीडिया को बताया कि, "जिले में अपराधियों और अवैध हथियारों के तस्करों के खिलाफ एक विशेष अभियान चलाया जा रहा है। इसी अभियान के दौरान हमारी स्वाट (SWAT) टीम और थाना लिसाड़ी गेट की पुलिस को मुखबिरों के जरिए एक बेहद सटीक और पुख्ता सूचना मिली थी कि शहर के एक रिहायशी इलाके में हथियारों की खरीद-फरोख्त और निर्माण का काम चल रहा है।"
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
इस गुप्त सूचना के आधार पर पुलिस ने एक फुल-प्रूफ जाल बिछाया। सबसे पहले पुलिस ने घेराबंदी करते हुए एक संदिग्ध को दबोचा। जब उससे सख्ती से पूछताछ की गई, तो उसने हथियारों के इस पूरे काले साम्राज्य का कच्चा-चिट्ठा खोलकर रख दिया। इसके बाद पुलिस टीम ने बिना समय गंवाए थाना लोहियानगर क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली आशियाना कॉलोनी में एक गोदाम पर अचानक छापा (Raid) मारा, जहां हथियारों की यह मिनी-फैक्ट्री धड़ल्ले से चल रही थी।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

कौन हैं गिरफ्तार किए गए शातिर आरोपी? (Profile of the Accused)

\r\n\r\n
पुलिस की गिरफ्त में आए दोनों आरोपी कोई मामूली अपराधी नहीं हैं, बल्कि ये एक सुनियोजित अंतरजनपदीय गिरोह (Inter-district Gang) के सक्रिय सदस्य हैं, जिनका काम हथियारों का निर्माण करना और उन्हें अलग-अलग जिलों के अपराधियों तक पहुंचाना था। पकड़े गए आरोपियों की पहचान इस प्रकार है:
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
    \r\n
  1. \r\n
    शुआइब उर्फ शोएब उर्फ सैफ (उम्र- 25 वर्ष): यह आरोपी अब्दुल रशीद का पुत्र है और तारापुरी की आरा मशीन वाली गली, थाना लिसाड़ी गेट, मेरठ का निवासी है। इस गिरोह में हथियारों की सप्लाई और सौदेबाजी का मुख्य काम यही देखता था।
    \r\n
  2. \r\n
  3. \r\n
    शान इलाही उर्फ सोनू (उम्र- 35 वर्ष): यह आरोपी नूर इलाही का पुत्र है और तेली वाली गली, चौकी जैदी फार्म के पास, थाना नौचंदी, मेरठ का रहने वाला है। शान इलाही इस पूरी फैक्ट्री के तकनीकी पहलुओं और निर्माण कार्य को संभालता था। (इसे आशियाना कॉलोनी के गोदाम से गिरफ्तार किया गया)।
    \r\n
  4. \r\n
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
इस मामले में एक तीसरे आरोपी 'सलमान' का नाम भी सामने आया है, जो फिलहाल फरार बताया जा रहा है और पुलिस उसकी सरगर्मी से तलाश कर रही है।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

गोदाम की आड़ में चलता था हथियारों का कारोबार: क्या-क्या हुआ बरामद?

\r\n\r\n
जब पुलिस टीम ने आशियाना कॉलोनी के उस गोदाम का दरवाजा खोला, तो अंदर का नजारा देखकर वे भी दंग रह गए। बाहर से एक साधारण सा दिखने वाला यह गोदाम अंदर से एक पूरी तरह से सुसज्जित हथियार फैक्ट्री (Arms Manufacturing Unit) में तब्दील हो चुका था। वहां हथियार बनाने की हर छोटी-बड़ी मशीन मौजूद थी। पुलिस ने मौके से निम्नलिखित सामानों का भारी जखीरा बरामद किया है:
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
    \r\n
  • \r\n
    तैयार और अर्ध-निर्मित हथियार: 3 अदद पूरी तरह से तैयार .32 बोर की शानदार पिस्टल और 2 अर्ध-निर्मित (Semi-finished) पिस्टल।
    \r\n
  • \r\n
  • \r\n
    मैगजीन का जखीरा: 1 पूरी तरह तैयार मैगजीन और 20 अर्ध-निर्मित मैगजीन।
    \r\n
  • \r\n
  • \r\n
    हथियार बनाने के भारी उपकरण: 2 ग्राइंडर मशीनें (लोहे को काटने और आकार देने के लिए), 2 ड्रिल मशीनें (मय 15 अलग-अलग ड्रिल बिट्स), कटर ब्लेड और वेल्डिंग रॉड।
    \r\n
  • \r\n
  • \r\n
    ढांचे और फिनिशिंग का सामान: 2 मैगजीन बनाने के फर्मा (Molds), बड़ी संख्या में रेती (चपटी, गोल, सुआनुमा जिससे हथियारों को घिसा जाता है), और रेगमाल।
    \r\n
  • \r\n
  • \r\n
    अन्य सामग्री: एक 5 किलो का गैस सिलिंडर, गैस चूल्हा, गैस रेगुलेटर, भारी मात्रा में स्प्रिंग और लोहे की पत्तियां (जिनसे ट्रिगर और अन्य पुर्जे बनाए जाते हैं)।
    \r\n
  • \r\n
  • \r\n
    वाहन: हथियारों की डिलीवरी के लिए इस्तेमाल की जाने वाली एक काले रंग की स्कूटी एक्टिवा (रजिस्ट्रेशन नंबर: UP 15 EC 4268) भी पुलिस ने जब्त की है।
    \r\n
  • \r\n
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

35 से 40 हजार रुपये में बिकती थी मौत: क्या था 'मोडस ऑपरेंडी'? (Modus Operandi)

\r\n\r\n
पुलिस की कड़ी पूछताछ में आरोपी शुआइब ने कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। उसने बताया कि यह गिरोह बहुत ही शातिराना तरीके से काम करता था। वे लोग गोदाम में दिन-रात काम करके लोहे की पत्तियों और स्प्रिंग को काटकर आधुनिक दिखने वाली .32 बोर की पिस्तौलें तैयार करते थे।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
मुनाफे का गणित: शुआइब ने कबूल किया कि वह इन तैयार किए गए अवैध हथियारों को सलमान और शान इलाही से प्राप्त करता था। इसके बाद वह इन .32 बोर की पिस्तौलों को मेरठ और आसपास के जिलों (जैसे मुजफ्फरनगर, शामली, बागपत और गाजियाबाद) के स्थानीय बदमाशों, गैंगस्टर्स और आपराधिक तत्वों को 35,000 रुपये से लेकर 40,000 रुपये प्रति पीस के हिसाब से बेचता था।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
त्योहारी सीजन और चुनावों के समय इन हथियारों की मांग और कीमत दोनों बढ़ जाया करती थी। इस काले कारोबार से यह गिरोह हर महीने लाखों रुपये की अवैध कमाई कर रहा था। पुलिस का मानना है कि इन हथियारों का इस्तेमाल कई बड़ी आपराधिक वारदातों, लूट, हत्या और रंगदारी मांगने जैसे गंभीर अपराधों में किया जाना था।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

आरोपियों का आपराधिक इतिहास और आगे की कानूनी कार्रवाई

\r\n\r\n
मेरठ पुलिस के अनुसार, पकड़े गए दोनों आरोपियों (शुआइब और शान इलाही) का पुराना और लंबा आपराधिक इतिहास (Criminal History) रहा है। ये पहले भी पुलिस की राडार पर रहे हैं। पुलिस अब इनके कॉल डिटेल्स और मोबाइल फोन्स की गहन जांच कर रही है ताकि उन 'सफेदपोश' लोगों और अपराधियों की लिस्ट तैयार की जा सके जिन्होंने हाल के दिनों में इनसे हथियार खरीदे हैं।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
जेल की सलाखों के पीछे: फिलहाल, पुलिस ने दोनों आरोपियों के खिलाफ 'आर्म्स एक्ट' (Arms Act) की गंभीर धाराओं और अवैध हथियार फैक्ट्री संचालित करने के जुर्म में सुसंगत धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया है। सभी कानूनी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद दोनों अभियुक्तों को माननीय न्यायालय के समक्ष पेश किया गया, जहां से अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए उन्हें सीधे न्यायिक हिरासत (जेल) में भेज दिया है।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
मेरठ पुलिस और स्वाट टीम की यह कार्रवाई निश्चित रूप से काबिले तारीफ है। एक चलती-फिरती हथियार फैक्ट्री का पकड़ा जाना इस बात का प्रमाण है कि पुलिस तंत्र पूरी तरह से अलर्ट मोड पर है। इस बड़ी खेप के पकड़े जाने से पश्चिमी उत्तर प्रदेश में होने वाली कई संभावित आपराधिक घटनाओं पर समय रहते रोक लग गई है। पुलिस अब इस सिंडिकेट के फरार सदस्यों और उनके 'कस्टमर्स' की तलाश में लगातार दबिश दे रही है।
विज्ञापन
विज्ञापन