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मेरठ: उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले में पुलिस की संवेदनहीनता और लापरवाही का एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने 'मित्र पुलिस' के दावे की पोल खोलकर रख दी है। नौचंदी थाना क्षेत्र में एक अज्ञात शव को कानूनी कार्यवाही से बचने के लिए चोरी-छिपे दूसरे थाना क्षेत्र में फेंकने (Dead body shifting in Meerut) का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। हालांकि, एसएसपी डॉ. विपिन ताडा ने त्वरित कार्रवाई करते हुए चौकी प्रभारी और सिपाही को निलंबित कर दिया है, लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि आखिर नौचंदी थाना प्रभारी (SHO) इलम सिंह पर अब तक कोई आंच क्यों नहीं आई?
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क्या है पूरा मामला?

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घटना गुरुवार-शुक्रवार की दरमियानी रात की है। नौचंदी थाना क्षेत्र की एल ब्लॉक चौकी पुलिस को सड़क किनारे एक 35 वर्षीय अज्ञात युवक का शव मिला था। नियम के मुताबिक, पुलिस को शव का पंचनामा भरकर पोस्टमार्टम के लिए भेजना चाहिए था। लेकिन कागजी कार्रवाई और जांच से बचने के लिए पुलिसकर्मियों ने शर्मनाक रास्ता चुना।
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एल ब्लॉक चौकी पर तैनात सिपाही राजेश और होमगार्ड रोहतास ने एक ई-रिक्शा (E-rickshaw) में शव को लादा और उसे चुपके से लोहियानगर थाना क्षेत्र में एक दुकान के बाहर फेंक आए। यह पूरी घटना वहां लगे सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई। 
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सीसीटीवी ने खोली पोल, छोटे कर्मचारियों पर गिरी गाज

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शनिवार को जब सीसीटीवी फुटेज वायरल हुआ, तो पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया। वीडियो में साफ दिख रहा था कि वर्दीधारी पुलिसकर्मी ही शव को ठिकाने लगा रहे थे। मामले की गंभीरता को देखते हुए एसएसपी डॉ. विपिन ताडा ने तत्काल प्रभाव से एल ब्लॉक चौकी प्रभारी जितेंद्र और सिपाही राजेश को निलंबित कर दिया। वहीं, होमगार्ड रोहतास की सेवा समाप्त (बर्खास्त) कर दी गई।
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SHO इलम सिंह पर कार्रवाई क्यों नहीं?

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इस पूरे प्रकरण में छोटे कर्मचारियों पर तो गाज गिर गई, लेकिन नौचंदी थाना प्रभारी इलम सिंह अब तक कार्रवाई के दायरे से बाहर हैं। स्थानीय लोगों और बुद्धिजीवियों का सवाल है कि क्या इतनी बड़ी घटना थाना प्रभारी की जानकारी के बिना हो सकती है?
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पुलिस नियमावली के अनुसार, थाने के किसी भी क्षेत्र में होने वाली बड़ी घटनाओं की जिम्मेदारी अंततः थाना प्रभारी (SHO) की होती है। ऐसे में यह सवाल उठना लाजमी है कि जब चौकी प्रभारी पर लापरवाही का आरोप सिद्ध हो चुका है, तो उनके सुपरवाइजर यानी एसएचओ की जवाबदेही क्यों तय नहीं की गई? शहर में चर्चा है कि क्या यह काम सिर्फ चौकी स्तर पर हुआ या इसमें ऊपर से भी मूक सहमति थी? 
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'सीमा विवाद' का पुराना खेल
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मेरठ में शवों को लेकर थानों के बीच सीमा विवाद (Border dispute) का खेल पुराना है। अक्सर पुलिसकर्मी अपने क्षेत्र में शव मिलने पर उसे पड़ोसी थाने की सीमा में धकेलने की कोशिश करते हैं ताकि एफआईआर और विवेचना से बचा जा सके। लेकिन इस बार सीसीटीवी फुटेज ने पुलिस की इस अमानवीय चेहरा को बेनकाब कर दिया है।
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जांच जारी, पहचान अब भी पहेली
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उधर, लोहियानगर थाना पुलिस अब भी मृतक की शिनाख्त में जुटी है। पुलिस के अनुसार, मृतक की उम्र करीब 35 वर्ष है और उसने जींस-टीशर्ट पहन रखी थी। एसपी सिटी आयुष विक्रम सिंह (SP City Ayush Vikram Singh) ने बताया कि पूरे मामले की विभागीय जांच चल रही है और किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।
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मेरठ का शव शिफ्टिंग कांड सिर्फ एक लापरवाही नहीं, बल्कि खाकी पर लगा एक बदनुमा दाग है। छोटे कर्मचारियों को सजा देकर मामले को रफा-दफा करने की कोशिश तो की गई है, लेकिन जब तक जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय नहीं होगी, तब तक सिस्टम में सुधार की उम्मीद बेमानी है। जनता अब भी यह जानने का इंतजार कर रही है कि क्या थाना प्रभारी इलम सिंह पर भी कोई कार्रवाई होगी या नहीं।
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