मेरठ: उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले में अवैध निर्माणों और स्वीकृत मानचित्रों के विपरीत चल रही गतिविधियों पर लगाम कसने के लिए मेरठ विकास प्राधिकरण (MDA) ने एक बहुत बड़ा और व्यापक अभियान छेड़ दिया है। देश की सर्वोच्च अदालत यानी सुप्रीम कोर्ट के सख्त आदेशों के अनुपालन में मेडा ने अपने पूरे क्षेत्राधिकार के अंतर्गत आने वाले सभी भवनों का भौतिक सर्वे (Building Survey) शुरू कर दिया है। इस अभियान के तहत प्राधिकरण की टीमें शहर के अलग-अलग कोनों में जाकर इमारतों की जमीनी हकीकत खंगाल रही हैं, जिससे यह स्पष्ट हो सके कि कौन सा निर्माण नियमों के दायरे में है और कहां कानूनों की धज्जियां उड़ाई गई हैं।READ ALSO:-नीट छात्रों के लिए बड़ी राहत! सुप्रीम कोर्ट ने रद्द की प्रदर्शनकारियों पर दर्ज सभी एफआईआर, सरकार के आश्वासन के बाद CJP ने वापस लिया 5 सितंबर का दिल्ली मार्च
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शास्त्रीनगर ध्वस्तीकरण के बाद सख्त हुआ प्रशासन इस पूरे सर्वे की पृष्ठभूमि में आवास विकास परिषद की शास्त्रीनगर कॉलोनी में हुई वह बहुचर्चित कार्रवाई है, जिसमें सुप्रीम कोर्ट के सीधे आदेश पर बड़े पैमाने पर अवैध निर्माणों को बुलडोजर से ढहा दिया गया था। शास्त्रीनगर में वह ध्वस्तीकरण अभियान आज भी चर्चा का विषय बना हुआ है। सुप्रीम कोर्ट के उसी ऐतिहासिक आदेश और निर्देशों को आधार बनाते हुए अब मेरठ विकास प्राधिकरण ने भी अपने पूरे कार्यक्षेत्र में सभी प्रकार के कमर्शियल और रेजिडेंशियल भवनों की जांच का यह अभियान शुरू किया है। प्राधिकरण यह सुनिश्चित करना चाहता है कि शहर में कहीं भी भू-उपयोग (Land Use) का अवैध दुरुपयोग या बिना नक्शे के निर्माण न पनपने पाए।
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अब तक 10 हजार भवनों की हो चुकी है जांच मेडा अधिकारियों से मिली जानकारी के अनुसार, इस वृहद सर्वे अभियान के तहत अब तक अलग-अलग जोन में काम करते हुए लगभग 10,000 भवनों का सर्वे सफलतापूर्वक पूरा किया जा चुका है। हालांकि, यह कार्य अभी शुरुआती चरण में ही है, क्योंकि पूरे प्राधिकरण क्षेत्र में अनुमानित भवनों की कुल संख्या आठ लाख (8,00,000) से भी अधिक है। इन सभी आठ लाख से ज्यादा इमारतों का बारीकी से सर्वे किया जाना है। इस पूरी प्रक्रिया और मैपिंग में कम से कम तीन से चार महीने का लंबा समय लगने का अनुमान जताया गया है।
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इन प्रमुख इलाकों में पूरी हुई जांच मेरठ विकास प्राधिकरण के कर्मचारियों और सर्वे टीमों ने जोनवार अपनी गतिविधियां तेज कर दी हैं। अभी तक शहर के कई प्रमुख और व्यस्त इलाकों में सर्वे का काम पूरा किया जा चुका है, जिनमें मुख्य रूप से शामिल हैं:
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    दिल्ली रोड
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    बागपत रोड
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    गंगानगर क्षेत्र
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    मोदीपुरम का इलाका
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    पॉश इलाका सिविल लाइंस
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इन क्षेत्रों में टीमों ने मौके पर जाकर दस्तावेजों और धरातल पर मौजूद स्थिति का मिलान किया है।
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सर्वे के दौरान किन बिंदुओं की हो रही है जांच? प्राधिकरण द्वारा चलाए जा रहे इस सर्वे में मुख्य रूप से निम्नलिखित बिंदुओं पर फोकस किया जा रहा है:
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    मानचित्र (नक्शा) की वैधता: भवन का निर्माण पास किए गए नक्शे के अनुरूप है या नहीं।
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    वास्तविक उपयोग: आवासीय भूखंड पर कमर्शियल गतिविधियां या अन्य दुरुपयोग तो नहीं किया जा रहा है।
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    अतिरिक्त निर्माण: स्वीकृत सीमा से बाहर जाकर अवैध रूप से बनाए गए फ्लोर या अतिक्रमण की स्थिति।
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मेडा सचिव ने दी जानकारी, होगी सख्त कार्रवाई मेरठ विकास प्राधिकरण के सचिव अर्पित गुप्ता ने इस संबंध में जानकारी देते हुए बताया कि शहर में अवैध निर्माणों पर रोक लगाने और उनके खिलाफ ध्वस्तीकरण की कार्रवाई के साथ-साथ यह सर्वे अभियान भी लगातार जारी है। सर्वे पूरा होने के बाद जैसे ही तमाम अवैध और अनियोजित निर्माणों की सूची तैयार होगी, उन्हें चिन्हित कर नियमानुसार कड़ी कानूनी और प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी।
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सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद मेडा के इस कड़े रुख से शहर के भू-माफियाओं और अवैध निर्माणकर्ताओं में भारी हड़कंप मच गया है। आने वाले दिनों में यह सर्वे उन लोगों के लिए बड़ी मुसीबत बन सकता है जिन्होंने नियमों को ताक पर रखकर अवैध इमारतें खड़ी कर ली हैं।
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