मई की चिलचिलाती गर्मी के बीच मेरठ का मोहनपुरी इलाका पूरी रात अंधेरे में डूबा रहा। बार-बार होने वाले फाल्ट और विभागीय लापरवाही से उकताई जनता ने तड़के 4:30 बजे बिजली घर पर धावा बोल दिया। आक्रोश इतना था कि स्टाफ मौके से भाग खड़ा हुआ। पुलिस आई तो हंगामा और बढ़ गया। पढ़िए, मेरठ के इस 'हाई-वोल्टेज' ड्रामे की पूरी इनसाइड स्टोरी।
\r\n\r\nमेरठ (Meerut News): उत्तर प्रदेश में मई के महीने की भीषण गर्मी अपने चरम पर है। आसमान से आग बरस रही है और ऐसे में अगर 15 घंटे के लिए बिजली (Electricity) गायब हो जाए, तो आम जनजीवन का क्या हाल होगा, इसका अंदाजा लगाना मुश्किल नहीं है। मेरठ के मोहनपुरी और उसके आसपास के इलाकों में बुधवार रात से लेकर गुरुवार शाम तक बिल्कुल यही खौफनाक मंजर देखने को मिला।
\r\n\r\nलगातार 15 घंटे की बिजली कटौती (Power Cut) ने लोगों को खून के आंसू रुला दिए। गर्मी से बिलबिलाते बच्चे, बुजुर्ग और महिलाएं जब पूरी रात सो नहीं पाए, तो जनता के सब्र का बांध टूट गया। आक्रोशित भीड़ ने सुबह-सुबह ही मोहनपुरी सब-स्टेशन (Mohanpuri Substation) पर धावा बोल दिया, बिजली घर के गेट पर ताला जड़ दिया और जमकर नारेबाजी की। इस दौरान पुलिस और स्थानीय भाजपा पार्षद (BJP Councilor) के बीच जो तीखी नोकझोंक हुई, उसने इस पूरे मामले को एक बड़ा राजनीतिक और प्रशासनिक मुद्दा बना दिया है।
\r\n\r\nआधी रात को हुआ फाल्ट: झूठी तसल्ली और फिर लंबा इंतजार
\r\n\r\nइस पूरे घटनाक्रम की शुरुआत बुधवार रात करीब 12 बजे हुई। मोहनपुरी बिजली घर से जिन प्रमुख इलाकों को आपूर्ति की जाती है, उनमें पुरानी मोहनपुरी, न्यू हनुमानपुरी और सुभाष नगर शामिल हैं। पिछले कई दिनों से इस फीडर की आपूर्ति पटरी से उतरी हुई थी, लेकिन बुधवार रात हालात बेकाबू हो गए। रात 12 बजे अचानक एक बड़ा फाल्ट हुआ और पूरे इलाके की बत्ती गुल हो गई।
\r\n\r\nगर्मी से बेहाल लोग घरों से बाहर निकल आए। जब बिजली घर पर फोन घनघनाए गए, तो पता चला कि ट्रांसफार्मर की लीड (Lead) फुंकने के कारण आपूर्ति बाधित हुई है। विभागीय कर्मचारियों ने रात 1 बजे के करीब फाल्ट ठीक कर आपूर्ति बहाल कर दी। लोगों ने राहत की सांस ली और सोने चले गए, लेकिन यह राहत महज चंद मिनटों की थी।
Follow the Khabreelal News channel on WhatsApp Join › \r\n\r\nआरोप है कि फाल्ट ठीक होने के कुछ देर बाद ही दोबारा एक जोरदार फाल्ट हुआ। इस बार न सिर्फ लीड जली, बल्कि ट्रांसफार्मर (Transformer) को भी नुकसान पहुंचा। रात 1:30 बजे के बाद से पूरे इलाके की बिजली स्थायी रूप से गुल हो गई। लोग रात भर इंतजार करते रहे, हेल्पलाइन नंबरों पर शिकायतें दर्ज कराते रहे, लेकिन कोई भी कर्मचारी इस बड़े फाल्ट को ठीक करने नहीं पहुंचा। पानी की मोटरें बंद हो गईं, इनवर्टर जवाब दे गए और लोग पूरी रात हाथ के पंखे झलते हुए जागने को मजबूर हो गए।
\r\n\r\nसुबह 4:30 बजे का वो 'हाई-वोल्टेज' ड्रामा: भीड़ ने बिजली घर पर किया कब्जा
\r\n\r\nपूरी रात बिजली का इंतजार करने के बाद, जब सुबह तक कोई समाधान नहीं निकला, तो लोगों का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया। पुरानी मोहनपुरी, न्यू हनुमानपुरी और सुभाष नगर के सैकड़ों निवासी, जिनमें युवा, बुजुर्ग और महिलाएं भी शामिल थीं, सुबह 4:30 बजे ही न्यू मोहनपुरी स्थित बिजली घर (Substation) पहुंच गए।
\r\n\r\nभीड़ का गुस्सा देखकर बिजली घर पर मौजूद कर्मचारियों के हाथ-पांव फूल गए। इससे पहले कि जनता उन पर अपना गुस्सा उतारती, ड्यूटी पर मौजूद पूरा स्टाफ बिजली घर को भगवान भरोसे छोड़कर मौके से फरार हो गया। इसके बाद आक्रोशित भीड़ ने सब-स्टेशन के मुख्य द्वार पर अपना ताला जड़ दिया और धरने पर बैठ गए। उस समय काफी अंधेरा था, लेकिन जनता अफसरों के आने का इंतजार करते हुए डटी रही।
\r\n\r\nएसडीओ की एंट्री और पुलिस का 'दबंग' रवैया
\r\n\r\nबिजली घर पर ताला लगने और स्टाफ के भागने की सूचना मिलते ही विभाग में हड़कंप मच गया। करीब 45 मिनट बाद लेडीज पार्क क्षेत्र के एसडीओ (SDO) मौके पर पहुंचे। उन्होंने लोगों को समझाने की कोशिश की, लेकिन लोग बिना पुख्ता आश्वासन के ताला खोलने को तैयार नहीं थे। हालात बेकाबू होते देख एसडीओ ने सिविल लाइन थाना पुलिस (Civil Lines Police) को मौके पर बुला लिया।
\r\n\r\nपुलिस के आने के बाद मामला शांत होने के बजाय और ज्यादा भड़क गया। मौके पर पहुंचे एक दरोगा (Sub Inspector) ने लोगों की समस्या सुनने के बजाय उन पर रौब झाड़ना और फटकार लगाना शुरू कर दिया। भीड़ के साथ ही स्थानीय भाजपा पार्षद उत्तम सैनी भी मौजूद थे। दरोगा के इस अड़ियल रवैये को देखकर पार्षद उत्तम सैनी भड़क गए।
\r\n\r\n"मुकदमा दर्ज करूंगा" - दरोगा की धमकी और पार्षद का धरना
\r\n\r\nपुलिस और जनप्रतिनिधि के बीच सरेआम तीखी बहस शुरू हो गई। दरोगा ने सीधे तौर पर भीड़ और पार्षद को धमकाते हुए कहा कि सरकारी काम में बाधा डालने और बिजली घर पर ताला जड़ने के जुर्म में वह सब पर गंभीर धाराओं में मुकदमा (FIR) दर्ज कर देंगे।
\r\n\r\nयह सुनते ही पार्षद उत्तम सैनी और उग्र हो गए और उन्होंने पुलिस को चुनौती देते हुए कहा, "जनता गर्मी से मर रही है, विभाग भ्रष्ट है, और आप मुकदमा लिखने की धमकी दे रहे हैं? लिखो मुकदमा!" इसके बाद पार्षद अपने समर्थकों और मोहल्ले के लोगों के साथ वहीं बिजली घर के गेट पर धरने पर बैठ गए। मौके पर भारी गहमागहमी का माहौल बन गया। आला अधिकारियों के हस्तक्षेप और बमुश्किल समझाने-बुझाने के बाद आखिरकार पुलिस पीछे हटी और लोगों ने शांत होकर ताला खोला।
\r\n\r\nतकनीकी विफलता: आधा घंटे में फिर फुंकी लीड, शाम 4 बजे आई लाइट
\r\n\r\nताला खुलने के बाद विद्युत कर्मियों की टीम ने जैसे-तैसे काम शुरू किया। फुकी हुई लीड को बदला गया और सुबह के समय आपूर्ति बहाल कर दी गई। कर्मचारी अपना सामान समेट कर लौटे ही थे कि महज आधे घंटे बाद उसी लीड में फिर से धमाका हुआ और तीसरी बार पूरा इलाका अंधेरे में डूब गया।
\r\n\r\nइस बार लोगों का गुस्सा निराशा में बदल गया। पार्षद उत्तम सैनी ने तुरंत आला अधिकारियों (XEN और SDO) से फोन पर कड़ी आपत्ति दर्ज कराई। इसके बाद सुबह 10:00 बजे एक विशेष टीम दोबारा फाल्ट ठीक करने के लिए भेजी गई। भारी मशक्कत, केबल बदलने और ट्रांसफार्मर की मरम्मत के बाद आखिरकार शाम 4:00 बजे जाकर बिजली आपूर्ति पूरी तरह से सुचारू हो पाई। यानी कुल मिलाकर लोगों ने 15 से 16 घंटे तक गर्मी की भयंकर यातना झेली।
\r\n\r\nमूल समस्या क्या है? "घटिया सामग्री (Substandard Material) का इस्तेमाल"
\r\n\r\nइस पूरे संकट के पीछे की जो असली वजह सामने आई है, वह भ्रष्टाचार और लापरवाही की ओर इशारा करती है। भाजपा पार्षद उत्तम सैनी ने बिजली विभाग के ठेकेदारों और अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाते हुए एक बड़ा खुलासा किया है।
\r\n\r\nपार्षद ने स्पष्ट रूप से कहा कि, "बार-बार हो रहे इस फाल्ट की असली वजह घटिया माल (Cheap Material) का इस्तेमाल है। विभाग का ठेकेदार कमीशन के चक्कर में बेहद घटिया क्वालिटी की एल्युमिनियम लीड और केबल का इस्तेमाल कर रहा है। गर्मी के मौसम में जब ओवरलोडिंग होती है, तो यह घटिया लीड लोड नहीं झेल पाती और पिघल कर फुंक जाती है। इसी भ्रष्टाचार के कारण आए दिन फाल्ट होते हैं और आम उपभोक्ता को भीषण गर्मी में अमानवीय परेशानी झेलनी पड़ती है।"
\r\n\r\nपार्षद ने चेतावनी दी है कि यदि बिजली विभाग ने मानक के अनुसार (Standardized) सही मटेरियल का उपयोग सुनिश्चित नहीं किया, तो यह समस्या रोज का हिस्सा बन जाएगी और फाल्ट कभी खत्म नहीं होंगे।
\r\n\r\nप्रशासन के लिए एक चेतावनी
\r\n\r\nमेरठ के मोहनपुरी इलाके की यह घटना बिजली विभाग (UPPCL) के लिए एक गंभीर चेतावनी है। सर्दियां हों या गर्मियां, बिजली जैसी बुनियादी जरूरत के लिए अगर जनता को 15-15 घंटे इंतजार करना पड़े और ऊपर से पुलिस की धमकियां खानी पड़ें, तो यह सीधे तौर पर सिस्टम की विफलता है। जरूरत इस बात की है कि ठेकेदारों द्वारा इस्तेमाल की जा रही सामग्री की उच्च स्तरीय जांच हो और लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि मेरठ की जनता को आगे इस तरह के 'हाई-वोल्टेज' संकट का सामना न करना पड़े।
Sabse pehle comment karne wale banein.