मेरठ: पश्चिमी उत्तर प्रदेश (Western UP), जो अपनी रफ्तार और एक्सप्रेस-वे के जाल के लिए जाना जाता है, अक्सर सड़क हादसों की भयानक खबरों के लिए भी चर्चा में रहता है। दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेस-वे हो या आगामी गंगा एक्सप्रेस-वे, रफ्तार के इस कहर के बीच एक बुरी खबर हमेशा आती थी—"घायल की हालत गंभीर है, दिल्ली रेफर कर दिया गया है।" और कई बार रेफरल के इसी रास्ते में सांसें टूट जाती थीं।READ ALSO:-मेरठ में बढ़ी स्कूल की छुट्टियां: कड़ाके की ठंड के कारण 24 और 26 दिसंबर को भी अवकाश, अब सीधे 29 दिसंबर को खुलेंगे स्कूल
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
लेकिन अब मेरठ और आसपास के 10-12 जिलों के लिए एक बहुत बड़ी खुशखबरी है। लाला लाजपत राय (LLR) मेडिकल कॉलेज में 'लेवल-1 ट्रॉमा सेंटर' (Level-1 Trauma Center) का निर्माण कार्य आधिकारिक तौर पर शुरू हो गया है। यह कोई साधारण अस्पताल नहीं, बल्कि लखनऊ के एसजीपीजीआई (SGPGI) की तर्ज पर बनने वाला एक अत्याधुनिक केंद्र होगा, जहां एक ही छत के नीचे जांच से लेकर जटिल सर्जरी तक की सुविधाएं मिलेंगी।
\r\n\r\n

 

विज्ञापन
विज्ञापन
\r\n\r\n
मार्च 2027 की डेडलाइन के साथ शुरू हुआ यह प्रोजेक्ट पश्चिमी यूपी के हेल्थकेयर सेक्टर में गेम-चेंजर साबित होने वाला है। खबरीलाल आपके लिए लेकर आया है इस प्रोजेक्ट की ग्राउंड जीरो से विस्तृत रिपोर्ट।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

क्यों खास है 'लेवल-1' का दर्जा? (SGPGI जैसी सुविधाएं)

\r\n\r\n
चिकित्सा जगत में ट्रॉमा सेंटर्स को अलग-अलग लेवल में बांटा जाता है। उत्तर प्रदेश में अब तक सरकारी क्षेत्र में 'लेवल-1' ट्रॉमा सेंटर की सुविधा मुख्य रूप से लखनऊ स्थित एसजीपीजीआई (SGPGI) और केजीएमयू (KGMU) में ही उपलब्ध थी।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
    \r\n
  • \r\n
    लेवल-1 का मतलब: इसका अर्थ है एक ऐसा संस्थान जो हर तरह की चोट (सिर से लेकर पैर तक) का इलाज 24x7 करने में सक्षम हो।
    \r\n
  • \r\n
  • \r\n
    सुविधाएं: यहाँ न्यूरोसर्जरी, ऑर्थोपेडिक सर्जरी, प्लास्टिक सर्जरी, और जनरल सर्जरी के विशेषज्ञ हमेशा मौजूद रहते हैं।
    \r\n
  • \r\n
  • \r\n
    मेरठ का महत्व: मेरठ में बनने वाला यह सेंटर पश्चिमी यूपी का पहला ऐसा सरकारी सेंटर होगा जो दिल्ली के एम्स (AIIMS) और लखनऊ के एसजीपीजीआई के भार को कम करेगा।
    \r\n
  • \r\n
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

बढ़ते हादसों ने खड़ी की जरूरत: आंकड़े डराने वाले हैं

\r\n\r\n
इस ट्रॉमा सेंटर की जरूरत क्यों पड़ी, इसे समझने के लिए हमें मेरठ और आसपास के सड़क हादसों के आंकड़ों पर नजर डालनी होगी। मेरठ अब एक्सप्रेस-वे का हब बन चुका है। दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेस-वे चालू है और गंगा एक्सप्रेस-वे भी जल्द शुरू होने वाला है। रफ्तार बढ़ने के साथ ही हादसों का ग्राफ तेजी से ऊपर गया है।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
    \r\n
  • \r\n
    मौत का ग्राफ: वर्ष 2022 से पहले मेरठ जनपद में प्रतिवर्ष सड़क दुर्घटनाओं में औसतन 300 मौतें होती थीं। साल 2025 आते-आते यह आंकड़ा बढ़कर 350 के पार पहुंच गया है।
    \r\n
  • \r\n
  • \r\n
    टॉप 20 में मेरठ: सड़क दुर्घटनाओं के मामले में मेरठ प्रदेश के शीर्ष 20 जिलों में शामिल है।
    \r\n
  • \r\n
  • \r\n
    रेफरल का दर्द: अभी तक मेडिकल कॉलेज में गंभीर हेड इंजरी या मल्टीपल ऑर्गन फेलियर के मरीजों को संभालने के लिए संसाधनों की कमी थी, जिससे उन्हें हायर सेंटर रेफर करना मजबूरी थी। लेकिन 2027 के बाद यह मजबूरी खत्म हो जाएगी।
    \r\n
  • \r\n
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

प्रोजेक्ट रिपोर्ट: 49 करोड़, 4 मंजिल और आधुनिक तकनीक

\r\n\r\n
इस महत्वाकांक्षी परियोजना की जिम्मेदारी जल निगम सी एंड डीएस (C&DS) की मेरठ शाखा को सौंपी गई है। इमरजेंसी और पोस्टमार्टम हाउस के बीच की खाली जमीन पर नींव (Foundation) की खुदाई का काम युद्धस्तर पर चल रहा है।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

प्रोजेक्ट हाईलाइट्स:

\r\n\r\n
    \r\n
  1. \r\n
    लागत: बेसमेंट सहित चार मंजिला भवन बनाने में करीब 49 करोड़ रुपये खर्च होंगे।
    \r\n
  2. \r\n
  3. \r\n
    फंडिंग: उत्तर प्रदेश शासन ने पहली किश्त के रूप में 16.85 करोड़ रुपये जारी कर दिए हैं, जिससे काम में तेजी आई है।
    \r\n
  4. \r\n
  5. \r\n
    कनेक्टिविटी: सबसे खास बात यह है कि इस 100 बेड के ट्रॉमा सेंटर को पास में ही बन रहे 100 बेड के क्रिटिकल केयर यूनिट (CCU) और इमरजेंसी ब्लॉक से एक 'पैदल पुल' (Foot Over Bridge/Corridor) के जरिए जोड़ा जाएगा। यानी मरीज को स्ट्रेचर पर सड़क पार कराने की जरूरत नहीं होगी, वह सीधे एक बिल्डिंग से दूसरी बिल्डिंग में शिफ्ट हो सकेगा।
    \r\n
  6. \r\n
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

'गोल्डन आवर' में जीवनदान: रेड, येलो और ग्रीन जोन का विज्ञान

\r\n\r\n
किसी भी सड़क दुर्घटना में घायल व्यक्ति के लिए 'गोल्डन आवर' (Golden Hour) यानी हादसे के बाद का पहला घंटा सबसे महत्वपूर्ण होता है। अगर इस एक घंटे में सही इलाज मिल जाए, तो जान बचने की संभावना 80% तक बढ़ जाती है।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
नए ट्रॉमा सेंटर को इसी सिद्धांत पर डिजाइन किया गया है। यहां मरीजों को गंभीरता के आधार पर तीन जोन में बांटा जाएगा:
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
    \r\n
  1. \r\n
    रेड जोन (Red Zone): यह अत्यधिक गंभीर मरीजों के लिए होगा। जैसे—हेड इंजरी, अत्यधिक रक्तस्राव (Bleeding), नस फटना या सांस न आना। ग्राउंड फ्लोर पर इसके लिए 8 हाईटेक बेड रिजर्व होंगे जहां वेंटिलेटर और मॉनिटरिंग की सुविधा होगी।
    \r\n
  2. \r\n
  3. \r\n
    येलो जोन (Yellow Zone): यह उन मरीजों के लिए होगा जो गंभीर हैं लेकिन जिनकी जान को तत्काल खतरा नहीं है। यहां भी 8 बेड होंगे।
    \r\n
  4. \r\n
  5. \r\n
    ग्रीन जोन (Green Zone): कम चोट वाले मरीजों के लिए 20 बेड की सुविधा होगी।
    \r\n
  6. \r\n
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
अभी तक मेडिकल कॉलेज में यह 'ट्राएज सिस्टम' (Triage System) संसाधनों की कमी के चलते पूरी तरह लागू नहीं हो पाता था, लेकिन नई बिल्डिंग में यह मानक के अनुसार होगा।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

मैनपावर: 256 नए पदों पर भर्ती, 24 घंटे तैनात रहेंगे विशेषज्ञ

\r\n\r\n
इंफ्रास्ट्रक्चर चाहे कितना भी अच्छा हो, इलाज डॉक्टर ही करते हैं। इस बात को समझते हुए सरकार ने मैनपावर की भी पूरी व्यवस्था की है। मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. आरसी गुप्ता ने बताया कि इलाज की उपलब्धता 24 घंटे सुनिश्चित करने के लिए बंपर भर्तियां होंगी।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
    \r\n
  • \r\n
    डॉक्टर्स की फौज: ट्रॉमा सेंटर के लिए कुल 50 नए डॉक्टर मिलेंगे।
    \r\n\r\n
      \r\n
    • \r\n
      20 सीनियर डॉक्टर्स (फैकल्टी लेवल)।
      \r\n
    • \r\n
    • \r\n
      15 सीनियर रेजिडेंट (SR)।
      \r\n
    • \r\n
    • \r\n
      15 जूनियर रेजिडेंट (JR)।
      \r\n
    • \r\n
    \r\n
  • \r\n
  • \r\n
    विशेषज्ञता: इसमें हड्डी रोग (Ortho), न्यूरोसर्जरी (Neuro), प्लास्टिक सर्जरी और जनरल सर्जरी के स्पेशलिस्ट शामिल होंगे। अब सिर की चोट या चेहरा बिगड़ने पर मरीज को दिल्ली नहीं भागना होगा।
    \r\n
  • \r\n
  • \r\n
    सपोर्ट स्टाफ: नर्स, टेक्नीशियन, वार्ड बॉय और पैरामेडिकल स्टाफ सहित कुल 256 नए पदों पर नियुक्तियां की जाएंगी।
    \r\n
  • \r\n
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

एक छत के नीचे जांच: भटकना होगा बंद

\r\n\r\n
अक्सर सरकारी अस्पतालों में देखा जाता है कि डॉक्टर पर्चा लिखते हैं और मरीज एक्स-रे के लिए एक बिल्डिंग में और सीटी स्कैन के लिए दूसरी बिल्डिंग में भटकता रहता है। ट्रॉमा मरीजों के लिए यह भटकना जानलेवा होता है।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

इस नए सेंटर में 'वन स्टॉप सॉल्यूशन' की तर्ज पर काम होगा:

\r\n\r\n
    \r\n
  • \r\n
    मॉड्यूलर ऑपरेशन थिएटर (Modular OT)
    \r\n
  • \r\n
  • \r\n
    सीटी स्कैन (CT Scan)
    \r\n
  • \r\n
  • \r\n
    डिजिटल एक्स-रे (Digital X-Ray)
    \r\n
  • \r\n
  • \r\n
    एमआरआई (MRI)
    \r\n
  • \r\n
  • \r\n
    पैथोलॉजी लैब
    \r\n
  • \r\n
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
ये सारी सुविधाएं इसी बिल्डिंग के अंदर मौजूद होंगी। लिफ्ट से मरीज को ऊपर-नीचे ले जाया जाएगा और बेड साइड पर ही जांच की सुविधा होगी।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

कैसा होगा ट्रॉमा सेंटर का नक्शा? (Floor Plan)

\r\n\r\n
इंजीनियरिंग टीम ने इसे मरीजों की सहूलियत के हिसाब से डिजाइन किया है:
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
    \r\n
  • \r\n
    बेसमेंट (Basement): यहां डॉक्टरों और स्टाफ के लिए कार पार्किंग होगी (क्षमता: 26 कारें)। साथ ही स्टोर रूम और इलेक्ट्रिकल पैनल रूम होंगे।
    \r\n
  • \r\n
  • \r\n
    ग्राउंड फ्लोर (Ground Floor): सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा। यहां रेड, येलो और ग्रीन जोन होंगे। एंबुलेंस सीधे यहीं मरीज को उतारेगी।
    \r\n
  • \r\n
  • \r\n
    प्रथम तल (First Floor): यहां 4 मॉड्यूलर ऑपरेशन थिएटर होंगे। सर्जरी से पहले और बाद के लिए 5-5 बेड के प्री और पोस्ट ऑपरेटिव वार्ड होंगे। ग्राउंड फ्लोर से लिफ्ट के जरिए गंभीर मरीज को सीधे ओटी में लाया जा सकेगा।
    \r\n
  • \r\n
  • \r\n
    द्वितीय तल (Second Floor): यहां 30 बेड का जनरल वार्ड और डॉक्टरों के लिए ड्यूटी रूम/विश्राम कक्ष होगा।
    \r\n
  • \r\n
  • \r\n
    तृतीय तल (Third Floor): यहां 40 बेड का जनरल वार्ड बनाया जाएगा।
    \r\n
  • \r\n
  • \r\n
    लिफ्ट: पूरी बिल्डिंग में 20 लोगों की क्षमता वाली तीन हाई-स्पीड लिफ्ट लगाई जाएंगी ताकि स्ट्रेचर और तीमारदारों को आने-जाने में दिक्कत न हो।
    \r\n
  • \r\n
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

2027 का इंतजार

\r\n\r\n
मार्च 2027 अभी दूर लग सकता है, लेकिन जिस गति से निर्माण कार्य शुरू हुआ है, उससे उम्मीद है कि यह समय पर पूरा होगा। मेरठ का यह ट्रॉमा सेंटर न केवल मेरठ, बल्कि मुजफ्फरनगर, बिजनौर, बागपत, हापुड़ और बुलंदशहर जैसे जिलों के करोड़ों लोगों के लिए जीवन रक्षक बनेगा।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
सड़क हादसों को रोकना मुश्किल है, लेकिन हादसे के बाद होने वाली मौतों को रोकना संभव है। लाला लाजपत राय मेडिकल कॉलेज का यह प्रयास उसी दिशा में एक ठोस कदम है।
विज्ञापन
विज्ञापन