एक छोटी सी लापरवाही कैसे किसी की जिंदगी भर का सबसे बड़ा नासूर बन सकती है, इसका एक बेहद दर्दनाक और दिल दहला देने वाला उदाहरण उत्तर प्रदेश के मेरठ (Meerut) जिले से सामने आया है। कंकरखेड़ा थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले खिर्वा रोड पर गुरुवार रात एक झोपड़ी में आग लगने से ढाई साल के एक मासूम बच्चे की जिंदा जलकर मौत हो गई। यह हादसा इतना खौफनाक था कि आग की लपटों ने बच्चे को संभलने या रोने तक का मौका नहीं दिया।READ ALSO:-UP में HSRP का 'महा-अलर्ट': 6 लाख से ज्यादा वाहनों पर लटकी ₹15,000 के चालान की तलवार; बिना हाई-सिक्योरिटी नंबर प्लेट के नहीं बनेगा प्रदूषण सर्टिफिकेट!
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पेट पालने के लिए दूसरे राज्य से आकर झुग्गी-झोपड़ी में रहने वाले एक गरीब मजदूर परिवार पर दुखों का ऐसा पहाड़ टूटा है, जिसकी भरपाई अब जिंदगी में कभी नहीं हो सकती। मां की चीख-पुकार और पिता के आंसुओं से पूरा इलाका दहल उठा है। आइए इस हृदयविदारक घटना के हर पहलू को विस्तार से जानते हैं।
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पश्चिम बंगाल से आकर मेरठ में रह रहा था परिवार
\r\n\r\nपुलिस से मिली प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, यह पीड़ित परिवार मूल रूप से पश्चिम बंगाल (West Bengal) का रहने वाला है। परिवार के मुखिया का नाम युसूफ अली है, जो अपनी पत्नी जरीना और ढाई साल के इकलौते बेटे इब्राहिम के साथ मेरठ में रहता था।
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मजदूरी करके अपने परिवार का पेट पालने वाला युसूफ अली कंकरखेड़ा थाना क्षेत्र के खिर्वा रोड स्थित जेवरी नाले के पास एक कच्ची झोपड़ी (झुग्गी) बनाकर रह रहा था। इसी बस्ती में आसपास अन्य मजदूरों की भी कई झोपड़ियां बनी हुई हैं, जिनमें जरीना के मायके वाले (पिता) भी रहते हैं। दिन भर की हाड़-तोड़ मेहनत के बाद यह परिवार इसी छोटी सी झोपड़ी में अपना गुजर-बसर कर रहा था, लेकिन उन्हें नहीं पता था कि गुरुवार की रात उनके लिए एक मनहूस रात साबित होगी।
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हादसे की रात: एक मोमबत्ती और मौत का तांडव
\r\n\r\nघटना गुरुवार देर रात की है। रात का समय था और झोपड़ी में अंधेरा होने के कारण उजाले के लिए एक मोमबत्ती जलाई गई थी।
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- \r\n मां की चूक: बच्चे की मां जरीना ने अपने ढाई साल के मासूम बेटे इब्राहिम को सुलाया और झोपड़ी में रखे एक कूलर के ऊपर जलती हुई मोमबत्ती रख दी। बच्चा गहरी नींद में सो रहा था और इसी दौरान जरीना उसे झोपड़ी में अकेला छोड़कर पास ही स्थित अपने पिता की झोपड़ी में किसी काम से चली गई।\r\n \r\n
- \r\n असंतुलित हुई मोमबत्ती: जरीना के जाने के कुछ ही देर बाद, कूलर के ऊपर रखी वह जलती हुई मोमबत्ती किसी तरह असंतुलित होकर नीचे गिर गई।\r\n \r\n
- \r\n आग ने लिया विकराल रूप: झोपड़ी में पॉलीथिन, तिरपाल, सूखे बांस और कपड़े जैसी अत्यधिक ज्वलनशील (Flammable) चीजें मौजूद थीं। मोमबत्ती गिरते ही इन चीजों ने तुरंत आग पकड़ ली। आग इतनी तेजी से फैली कि पूरी झोपड़ी चंद मिनटों में धू-धू कर जलने लगी।\r\n \r\n
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मासूम को नहीं मिला बचने का मौका
\r\n\r\nआग की लपटें इतनी तेज और भयानक थीं कि अंदर सो रहे ढाई साल के मासूम इब्राहिम को संभलने या बाहर भागने का कोई मौका ही नहीं मिला। आग के धुएं और तेज लपटों के बीच बच्चा झोपड़ी के अंदर ही बुरी तरह से फंस गया।
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जब तक आसपास के लोगों और जरीना को आग लगने का एहसास हुआ, तब तक बहुत देर हो चुकी थी। आग ने विकराल रूप धारण कर लिया था। आसपास के लोगों ने बाल्टियों से पानी और रेत डालकर आग बुझाने का भरसक प्रयास किया। लोगों ने अपनी जान पर खेलकर बच्चे को बाहर निकालने की कोशिश भी की, लेकिन आग की भीषण गर्मी और लपटों के कारण कोई भी झोपड़ी के अंदर प्रवेश नहीं कर सका। मासूम इब्राहिम ने उसी आग में तड़प-तड़प कर दम तोड़ दिया।
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पड़ोस की झोपड़ी भी जलकर हुई राख
\r\n\r\nइस अग्निकांड का कहर सिर्फ युसूफ की झोपड़ी तक सीमित नहीं रहा। हवा और ज्वलनशील पदार्थों के कारण आग की लपटों ने युसूफ की झोपड़ी से सटी हुई पास की एक और झोपड़ी को भी अपनी चपेट में ले लिया। देखते ही देखते वह दूसरी झोपड़ी भी जलकर पूरी तरह से खाक हो गई। गनीमत यह रही कि दूसरी झोपड़ी के लोग समय रहते बाहर निकल आए, जिससे वहां कोई जनहानि नहीं हुई, लेकिन गरीब मजदूरों का झोपड़ी में रखा खाने-पीने का सारा सामान, कपड़े और थोड़ी-बहुत जमा पूंजी जलकर राख हो गई।
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दमकल और पुलिस की टीम पहुंची मौके पर
\r\n\r\nहादसे की सूचना मिलते ही इलाके में हड़कंप मच गया। स्थानीय लोगों ने तुरंत फायर ब्रिगेड (Fire Brigade) और पुलिस कंट्रोल रूम को घटना की जानकारी दी।
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सूचना मिलते ही दमकल विभाग की गाड़ियां सायरन बजाते हुए घटनास्थल पर पहुंचीं। दमकलकर्मियों ने तुरंत मोर्चा संभाला और आग पर पानी की बौछारें शुरू कीं। हालांकि, जब तक दमकल की टीम मौके पर पहुंची थी, तब तक दोनों झोपड़ियां पूरी तरह से जल चुकी थीं। दमकल की टीम ने कड़ी मशक्कत के बाद आग को पूरी तरह से बुझाया (Cooling process) ताकि यह आसपास की अन्य झुग्गियों तक न फैले।
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कंकरखेड़ा थाना पुलिस और आला अधिकारी भी मौके पर पहुंच गए और उन्होंने घटनास्थल का जायजा लिया। राख के ढेर में तब्दील हो चुकी झोपड़ी से बच्चे के जले हुए अवशेष निकाले गए, जिसे देखकर वहां मौजूद हर शख्स की आंखें नम हो गईं।
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सीओ दौराला का आधिकारिक बयान
\r\n\r\nइस दर्दनाक घटना पर संज्ञान लेते हुए सीओ दौराला (CO Daurala) चंद्र प्रकाश अग्रवाल ने मीडिया को आधिकारिक जानकारी दी है। उन्होंने बताया:
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\r\n\r\n\r\n"कंकरखेड़ा थाना क्षेत्र के अंतर्गत जेवरी नाले के पास बनी एक झुग्गी में आग लगने की सूचना मिली थी। पुलिस और फायर ब्रिगेड की टीम ने तुरंत मौके पर पहुंचकर आग पर पूरी तरह से काबू पा लिया है। प्रारंभिक जांच में यह बात सामने आई है कि बच्चे की मां जरीना उसे सुलाकर अपने पिता की झुग्गी में गई हुई थी। उसने कूलर पर एक मोमबत्ती जलाई थी, जो नीचे गिर गई और उसी से आग भड़की। इस हादसे में ढाई साल के बच्चे की जिंदा जलने से दुखद मौत हो गई है। मृतक बच्चे के शव को कब्जे में लेकर कानूनी प्रक्रिया के तहत पोस्टमार्टम (Post-mortem) के लिए अस्पताल भेज दिया गया है। पुलिस द्वारा इस पूरी घटना की गहनता से जांच की जा रही है।"\r\n
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मेरठ का यह अग्निकांड एक ऐसा घाव है जो आसानी से नहीं भरेगा। अपने कलेजे के टुकड़े को इस तरह आंखों के सामने जलता हुआ देखकर माता-पिता का रो-रोकर बुरा हाल है। यह घटना समाज के लिए एक बहुत बड़ा सबक भी है। खासकर उन परिवारों के लिए जो कच्चे मकानों या झोपड़ियों में रहते हैं, वहां आग के छोटे से स्रोत (जैसे दीपक, मोमबत्ती या चूल्हा) को लेकर की गई जरा सी लापरवाही कितनी बड़ी और जानलेवा कीमत वसूल सकती है। पुलिस अब आगे की विधिक कार्रवाई में जुटी है, लेकिन एक हंसता-खेलता मासूम परिवार हमेशा के लिए उजड़ गया है।
Sabse pehle comment karne wale banein.