मेरठ: इश्क, धोखा और फिरौती... अपराध की दुनिया के ये तीन ऐसे शब्द हैं जो जब एक साथ मिलते हैं, तो अंजाम बेहद खौफनाक होता है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले में एक ऐसा ही सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसने पुलिस महकमे से लेकर आम जनता तक को सन्न कर दिया है। यहाँ 'मोहब्बत' की आड़ में एक पशु व्यापारी को मौत के मुंह में धकेलने की साजिश रची गई। महज एक 'मिस्ड कॉल' से शुरू हुई बातचीत सात दिनों के भीतर अपहरण और फिरौती की खौफनाक दास्तां में बदल गई।READ ALSO:-हाई-स्पीड ट्रेन में 'शर्मनाक' स्पीड: नमो भारत के प्रीमियम कोच को बनाया 'बेडरूम', मेरठ के छात्र-छात्रा की 'गंदी करतूत' पर पुलिस का कड़ा एक्शन
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लोहियानगर थाना क्षेत्र में एक युवती ने अपने हुस्न के जाल (Honey Trap) में फंसाकर हापुड़ के एक व्यापारी को मिलने बुलाया और फिर उसे एक हिस्ट्रीशीटर के अड्डे पर बंधक बना लिया। रिहाई की कीमत लगाई गई—पूरे 10 लाख रुपये। लेकिन कहते हैं न कि अपराध के पांव नहीं होते, ऐन वक्त पर पुलिस की एंट्री ने इस पूरे 'खेल' को बिगाड़ दिया।
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फ्लैशबैक: वो एक 'मिस्ड कॉल' जिसने बदल दी जिंदगी

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इस पूरी वारदात की पटकथा आज से ठीक सात दिन पहले लिखी गई थी। पीड़ित, जिसे हम सुरक्षा कारणों से 'शान' (काल्पनिक नाम) कहेंगे, हापुड़ जिले के पिलखुवा का रहने वाला है और पेशे से पशु व्यापारी है।
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पुलिस जांच में सामने आया कि करीब एक हफ्ता पहले शान के मोबाइल पर एक अनजान नंबर से 'मिस्ड कॉल' आई थी। जिज्ञासावश जब शान ने उस नंबर पर कॉल बैक किया, तो दूसरी तरफ एक सुरीली आवाज थी। उस आवाज ने अपना नाम 'शशि' बताया और खुद को मेरठ के सरधना क्षेत्र के ग्वालीखेड़ा गांव की रहने वाली बताया।
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यहीं से शुरू हुआ 'हनी ट्रैप' का पहला चरण। शशि ने अपनी बातों में इतनी मिठास घोली कि व्यापारी शान उसकी तरफ खिंचा चला गया। पिछले सात दिनों में दोनों के बीच घंटों फोन पर बातें होने लगीं। शान को लगा कि उसे सच्चा प्यार मिल गया है, लेकिन उसे अंदाजा भी नहीं था कि वह प्यार नहीं, बल्कि एक पेशेवर अपराधी गिरोह के बिछाए जाल में फंसता जा रहा है।
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साजिश का 'दूसरा चरण': दीदार के बहाने मौत के कुएं में बुलाया

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फोन पर भरोसा जीतने के बाद, गिरोह ने अपनी योजना का दूसरा चरण शुरू किया। सोमवार को शशि ने शान से कहा कि वह उससे मिलना चाहती है। उसने मिलने की जगह तय की—मेरठ का लोहियानगर थाना क्षेत्र स्थित काजीपुर इलाका।
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शशि ने शान को एक विशेष पते पर आने को कहा। जांच में अब यह खुलासा हुआ है कि वह मकान किसी आम आदमी का नहीं, बल्कि इलाके के कुख्यात हिस्ट्रीशीटर सागर भारती का था। सागर भारती का नाम पुलिस रिकॉर्ड में पहले से दर्ज है और वह इस पूरे खेल का मास्टरमाइंड माना जा रहा है।
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व्यापारी शान, शशि के प्यार में इतना अंधा हो चुका था कि उसे खतरे का आभास नहीं हुआ। हालांकि, एहतियात के तौर पर वह अपने दो दोस्तों को साथ लेकर हापुड़ से मेरठ के लिए रवाना हो गया। उसे लगा था कि यह एक सामान्य मुलाकात होगी, लेकिन तकदीर ने उसके लिए कुछ और ही लिख रखा था।
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वारदात: 'स्वागत' के लिए तैयार खड़े थे गुंडे

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जैसे ही शान अपने दो दोस्तों के साथ काजीपुर स्थित उस मकान पर पहुंचा, दरवाजा खुला। सामने शशि खड़ी थी, लेकिन उसके चेहरे पर प्रेमी वाला भाव नहीं, बल्कि एक अजीब सी क्रूरता थी। शान और उसके दोस्तों के घर में कदम रखते ही नजारा बदल गया।
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वहां पहले से ही शशि का सगा भाई अंकित, मकान मालिक और हिस्ट्रीशीटर सागर भारती और उनके तीन-चार अन्य साथी हथियारों और डंडों के साथ मौजूद थे। इससे पहले कि शान कुछ समझ पाता, कमरे का दरवाजा अंदर से लॉक कर दिया गया।
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दहशत के वो 3 घंटे:

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    बंधक बनाया: युवती के इशारे पर बदमाशों ने तीनों युवकों को दबोच लिया। उनके साथ मारपीट की गई और रस्सियों से बांधकर एक कमरे में डाल दिया गया।
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    लूटपाट: सबसे पहले उनके मोबाइल फोन छीने गए, ताकि वे किसी से संपर्क न कर सकें। उनकी जेब में जो भी नकदी थी, वह निकाल ली गई।
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    फिरौती की मांग: इसके बाद शुरू हुआ असली खेल। हिस्ट्रीशीटर सागर भारती ने शान की कनपटी पर हथियार सटाकर कहा, "अगर यहां से जिंदा वापस जाना है, तो घर फोन कर और 10 लाख रुपये मंगवा।" आरोपियों ने धमकी दी कि अगर शाम तक पैसे नहीं आए, तो तीनों की लाशें भी घर वालों को नहीं मिलेंगी।
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क्लाइमेक्स: दीवार के उस पार सुनी गई चीखें

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अपराधी चाहे कितना भी शातिर क्यों न हो, कोई न कोई गलती जरूर करता है। जब मकान के अंदर व्यापारी और उसके दोस्तों के साथ मारपीट की जा रही थी और उन्हें धमकाया जा रहा था, तो शोर-शराबा बाहर गली तक पहुंच गया।
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काजीपुर एक रिहायशी इलाका है। सागर भारती के घर से आ रही चीख-पुकार और अजीबोगरीब आवाजों ने पड़ोसियों को सतर्क कर दिया। आसपास के लोगों को शक हो गया कि अंदर कुछ गलत हो रहा है। बिना समय गंवाए, एक जागरूक नागरिक ने लोहियानगर पुलिस स्टेशन को फोन कर दिया। यह एक कॉल व्यापारी और उसके दोस्तों के लिए जीवनदान साबित हुई।
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पुलिस का 'सिंघम अवतार': नंगे पैर भागे हिस्ट्रीशीटर

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सूचना मिलते ही लोहियानगर पुलिस की टीम, सायरन बजाते हुए मौके पर पहुंची। पुलिस की गाड़ियां देखते ही घर के अंदर मौजूद बदमाशों में हड़कंप मच गया। जो बदमाश अभी तक व्यापारी को जान से मारने की धमकी दे रहे थे, पुलिस को देखते ही भीगी बिल्ली बन गए।
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पुलिस ने मकान की घेराबंदी कर दरवाजा तोड़ने की कोशिश की। खुद को घिरता देख, हिस्ट्रीशीटर सागर भारती और उसके तीन अन्य साथी छत के रास्ते और पीछे की दीवारों को फांदकर भाग निकले। हालांकि, पुलिस ने मौके से मुख्य सूत्रधार युवती शशि और उसके भाई अंकित को धर दबोचा।
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रेस्क्यू ऑपरेशन: पुलिस जब अंदर पहुंची, तो एक कमरे में शान और उसके दो दोस्त बुरी तरह डरे-सहमे हालत में मिले। उन्हें तुरंत बंधन मुक्त कराया गया। पुलिस ने उनकी हालत देखकर उन्हें पानी पिलाया और भरोसा दिलाया कि अब वे सुरक्षित हैं।
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पुलिस की जांच: हनी ट्रैप का संगठित गिरोह

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घटना के बाद सहायक पुलिस अधीक्षक (ASP) अंतरिक्ष जैन ने मामले की कमान संभाली। उन्होंने मीडिया को बताया कि यह मामला सीधा-सीधा अपहरण या लूट का नहीं, बल्कि एक वेल-प्लांड (Well-planned) हनी ट्रैप का है।
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ASP अंतरिक्ष जैन का बयान:

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"प्राथमिक जांच में यह स्पष्ट हुआ है कि युवती ने योजनाबद्ध तरीके से व्यापारी को प्रेम जाल में फंसाया था। उसका काम सिर्फ शिकार को बुलाना था, बाकी काम उसके भाई और हिस्ट्रीशीटर सागर भारती का था। यह एक संगठित गिरोह की तरह काम कर रहे थे। हम यह भी पता लगा रहे हैं कि क्या इन्होंने पहले भी किसी और को इसी तरह अपना शिकार बनाया है। गिरफ्तार भाई-बहन से कड़ी पूछताछ की जा रही है।"
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आरोपियों की कुंडली: कौन हैं ये शातिर?

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    शशि (गिरफ्तार): यह इस नाटक की मुख्य किरदार है। भोली-भाली सूरत के पीछे एक शातिर अपराधी का दिमाग है। इसने अपनी आवाज और बातों से व्यापारी को फंसाया। पुलिस जांच कर रही है कि क्या इसके मोबाइल में अन्य व्यापारियों के नंबर भी हैं।
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    अंकित (गिरफ्तार): यह शशि का सगा भाई है। अपनी बहन के साथ मिलकर अपराध को अंजाम देने में इसे कोई संकोच नहीं था। यह फिरौती वसूलने और डराने-धमकाने का काम कर रहा था।
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  5. \r\n
    सागर भारती (फरार): यह इस गैंग का सरगना और स्थानीय हिस्ट्रीशीटर है। इसके ऊपर पहले से भी कई मुकदमे दर्ज बताए जा रहे हैं। पुलिस की कई टीमें उसकी तलाश में दबिश दे रही हैं।
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कानूनी कार्रवाई: सलाखों के पीछे भाई-बहन

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पुलिस ने पीड़ित व्यापारी की तहरीर पर आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की सुसंगत और गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है:
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    अपहरण (Kidnapping)
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    अवैध परिरोध (Wrongful Confinement)
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    फिरौती मांगना (Extortion)
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  • \r\n
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    आपराधिक षड्यंत्र (Criminal Conspiracy - 120B equivalent)
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    मारपीट और जान से मारने की धमकी
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पुलिस का कहना है कि फरार आरोपियों—सागर भारती और उसके तीन अज्ञात साथियों—को जल्द ही गिरफ्तार कर लिया जाएगा। सर्विलांस टीम उनकी लोकेशन ट्रेस कर रही है।
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सावधान: डिजिटल दौर में 'प्यार' जानलेवा हो सकता है

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मेरठ की यह घटना उन सभी लोगों के लिए एक सबक है जो सोशल मीडिया या अनजान नंबरों से हुई दोस्ती पर आंख मूंदकर भरोसा कर लेते हैं। हनी ट्रैप आज के दौर में अपराध का एक बड़ा जरिया बन चुका है।
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खबरीलाल की पाठकों को सलाह:

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    अनजान नंबर: किसी भी अनजान नंबर से आई मिस्ड कॉल या फ्रेंड रिक्वेस्ट पर ज्यादा भरोसा न करें।
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    निजी जानकारी: अजनबियों के साथ अपनी आर्थिक स्थिति या पारिवारिक जानकारी साझा न करें।
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    मुलाकात में सावधानी: अगर कोई सोशल मीडिया फ्रेंड या फोन पर बना दोस्त आपको किसी एकांत जगह या घर पर बुलाए, तो कभी भी अकेले न जाएं। हमेशा सार्वजनिक स्थान (Public Place) चुनें।
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    लोकेशन शेयरिंग: किसी भी अनजान व्यक्ति से मिलने जाते समय अपने परिजनों को अपनी लाइव लोकेशन जरूर भेजें।
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मेरठ पुलिस की तत्परता ने एक व्यापारी को बर्बाद होने और शायद जान गंवाने से बचा लिया। लेकिन सवाल यह है कि समाज में नैतिकता का स्तर कितना गिर गया है कि भाई-बहन मिलकर ऐसे अपराधों को अंजाम दे रहे हैं। फिलहाल, शशि और अंकित जेल की सलाखों के पीछे हैं और हिस्ट्रीशीटर सागर भारती कानून की पकड़ से दूर भाग रहा है, लेकिन कब तक? पुलिस के हाथ उस तक भी जल्द पहुंचेंगे।
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