मेरठ:
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उत्तर प्रदेश के मेरठ शहर में अतिक्रमण और जाम की समस्या एक ऐसा नासूर बन चुकी है, जिसका इलाज फिलहाल प्रशासन के पास नजर नहीं आ रहा है। प्रशासन जब भी सख्ती का दिखावा करता है, तो बेखौफ अतिक्रमणकारी कुछ ही घंटों में उस सख्ती की हवा निकाल देते हैं। ऐसा ही एक ताजा और हैरान करने वाला मामला मंगलवार को मेरठ के सबसे व्यस्त इलाकों में से एक, छतरी वाली पीर से घंटाघर मार्ग पर देखने को मिला।READ ALSO:-बिजनौर में सनसनीखेज वारदात: लापता युवक गुल्लू की कब्रिस्तान के पास झाड़ियों में मिली लाश, परिजनों ने दोस्त पर ही मढ़ दिया कत्ल का इल्ज़ाम
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सोमवार को जिस सड़क को ट्रैफिक पुलिस और नगर निगम की संयुक्त टीम ने भारी मशक्कत के बाद अतिक्रमण मुक्त कराया था, मात्र 24 घंटे से भी कम समय में वह सड़क दोबारा अवैध कब्जे का शिकार हो गई। व्यापारियों ने पुलिस की चेतावनियों को दरकिनार करते हुए मंगलवार सुबह फिर से सड़क किनारे अपना सामान लगा लिया, जिससे पूरे इलाके में भीषण जाम लग गया और राहगीरों का पैदल चलना तक दुश्वार हो गया।
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आइए, इस पूरे मामले को विस्तार से समझते हैं कि आखिर प्रशासन की सख्ती इतनी जल्दी बेअसर क्यों हो गई और इसका खामियाजा आम जनता कैसे भुगत रही है।
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 अतिक्रमण अभियान के बाद मंगलवार को दुकानदारों ने फिर से सड़क किनारे सामान रखकर अतिक्रमण कर लिया

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1. सोमवार का 'महा-अभियान': पुलिस और निगम का शक्ति प्रदर्शन

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मेरठ शहर को जाम मुक्त बनाने के लिए सोमवार को एक बड़ा अभियान छेड़ा गया था। इस अभियान की कमान खुद एसपी ट्रैफिक राजेश कुमार श्रीवास्तव ने संभाली थी। उनके नेतृत्व में ट्रैफिक पुलिस और नगर निगम के प्रवर्तन दल (Enforcement Squad) ने संयुक्त रूप से शहर के अति व्यस्त मार्ग— छतरी वाली पीर से लेकर घंटाघर तक मार्च किया।
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इस टीम में नगर निगम की ओर से प्रभारी संपत्ति भोला नाथ गौतम, ट्रैफिक प्रभारी संतोष कुमार सिंह और देहलीगेट थाना प्रभारी अतुल कुमार भी पूरे दलबल के साथ मौजूद थे।
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    सड़क कराई गई थी खाली: टीम ने सड़क के दोनों ओर फुटपाथ और मुख्य मार्ग पर दुकानदारों द्वारा रखे गए तख्त, बोर्ड, काउंटर और अन्य सामानों को हटवाया था।
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    36 दुकानदारों पर गिरी थी गाज: पुलिस ने वीडियोग्राफी कराते हुए उन दुकानदारों को चिन्हित किया था जिन्होंने सड़क को अपनी जागीर समझ लिया था। ऐसे 36 अतिक्रमणकारियों को मौके पर ही नोटिस थमाए गए थे।
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2. BNS की नई धाराओं के तहत नोटिस और सख्त चेतावनी

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अतिक्रमणकारियों में कानून का खौफ पैदा करने के लिए पुलिस ने इस बार नए आपराधिक कानूनों का सहारा लिया था। एसपी ट्रैफिक राजेश कुमार श्रीवास्तव ने अभियान के दौरान सड़क घेरने वाले 36 लोगों को भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 289 (सार्वजनिक उपद्रव/Public Nuisance) और धारा 292 के तहत नोटिस जारी किए थे।
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 सोमवार को छतरी वाली पीर से घंटाघर तक अतिक्रमण अभियान चलाया गया था

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क्या दी गई थी चेतावनी?

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एसपी ट्रैफिक ने लाउडस्पीकर के माध्यम से मौके पर साफ ऐलान किया था कि यह प्रशासन की तरफ से "आखिरी मौका" और अंतिम चेतावनी है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा था, "नोटिस के साथ-साथ मुक़दमे भी दर्ज किए जा रहे हैं। अब अगर किसी ने दोबारा सड़क पर अतिक्रमण किया, तो बार-बार समझाया नहीं जाएगा। सीधा सामान जब्त (Confiscate) किया जाएगा और बुलडोजर से ध्वस्तीकरण (Demolition) की सख्त कार्रवाई होगी।"
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3. मंगलवार की सुबह: 24 घंटे में ही उड़ी कानून की धज्जियां

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पुलिस की इतनी सख्त चेतावनियों, मुकदमों के डर और भारी-भरकम जुर्माने के नोटिसों का असर अगले दिन (मंगलवार) सुबह ही धड़ाम हो गया। जैसे ही ट्रैफिक पुलिस और निगम की टीमें वहां से हटीं और अगली सुबह बाजार खुला, दुकानदारों ने पुरानी ढर्रे पर काम शुरू कर दिया।
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    फिर सज गया बाजार: जिन दुकानदारों को सोमवार को चेतावनी दी गई थी, उन्होंने मंगलवार को निर्भीक होकर फिर से सड़क के किनारे अपना सामान, रेहड़ियां और बोर्ड लगा दिए।
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    राहगीरों की फजीहत: सड़क की चौड़ाई फिर से आधी हो गई। ई-रिक्शा, टू-व्हीलर और कारों की लंबी कतारें लग गईं। पैदल चलने वालों के लिए फुटपाथ पर जगह नहीं बची, जिससे उन्हें सड़क के बीचों-बीच वाहनों के बीच से होकर गुजरना पड़ा। यह नजारा स्पष्ट कर रहा था कि इन व्यापारियों के अंदर पुलिस या प्रशासन का रत्ती भर भी खौफ नहीं बचा है।
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4. सबसे बड़ा खतरा: मरीजों की जान से हो रहा है खिलवाड़

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छतरी वाली पीर से घंटाघर तक के इस मार्ग पर अतिक्रमण केवल एक यातायात की समस्या नहीं है, बल्कि यह सीधे तौर पर लोगों के 'जीवन और मृत्यु' से जुड़ा मामला है।
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जिस सड़क पर यह अतिक्रमण होता है, उसी रास्ते पर मेरठ का जिला अस्पताल (District Hospital) और जिला महिला अस्पताल (District Women's Hospital) स्थित है। पूरे जिले और आसपास के देहात क्षेत्रों से गंभीर रूप से बीमार मरीज, गर्भवती महिलाएं और दुर्घटना के शिकार लोग इन्ही अस्पतालों में इलाज के लिए आते हैं।
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    एंबुलेंस का सायरन तोड़ता है दम: अतिक्रमण के कारण लगने वाले जाम में अक्सर एंबुलेंस फंस जाती हैं। 'गोल्डन ऑवर' (Golden Hour - इलाज का सबसे महत्वपूर्ण शुरुआती समय) जाम में ही बर्बाद हो जाता है। कई बार मरीजों की हालत जाम में फंसे होने के कारण गंभीर हो जाती है। प्रशासन ने इसी को ध्यान में रखकर सोमवार को रास्ता साफ कराया था, लेकिन व्यापारियों की मनमानी ने फिर से मरीजों की जान को जोखिम में डाल दिया है।
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5. आखिर क्यों फेल हो जाते हैं ऐसे अभियान?

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मेरठ की जनता अब प्रशासन की इस 'चूहे-बिल्ली' की दौड़ से वाकिफ हो चुकी है। शहर के बुद्धिजीवियों और स्थानीय नागरिकों का मानना है कि अतिक्रमण अभियान के फेल होने के पीछे कुछ प्रमुख कारण हैं:
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    निरंतरता का अभाव (Lack of Consistency): पुलिस और निगम एक दिन भारी दलबल के साथ आते हैं, लेकिन अगले दिन कोई मॉनिटरिंग (Monitoring) नहीं होती।
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    दुकानदारों में खौफ की कमी: दुकानदारों को पता है कि नोटिस सिर्फ एक कागजी कार्रवाई है। सामान जब्त होने या ध्वस्तीकरण जैसी बड़ी कार्रवाई असल में बहुत कम होती है।
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    स्थानीय साठगांठ: कई बार निचले स्तर के कर्मचारियों और स्थानीय नेताओं की साठगांठ के कारण भी अतिक्रमणकारी बेखौफ रहते हैं।
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6. अब क्या करेगा प्रशासन? क्या चलेगी जब्ती और ध्वस्तीकरण की कार्रवाई?

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अब सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जिस पुलिस ने सोमवार को माइक पर खुलेआम ध्वस्तीकरण और सामान जब्ती की चेतावनी दी थी, वह अपनी बात पर कितनी खरी उतरती है? जब 24 घंटे के अंदर ही उनकी चेतावनी को कचरे के डिब्बे में डाल दिया गया है, तो क्या अब एसपी ट्रैफिक राजेश कुमार श्रीवास्तव और नगर निगम की टीम दोबारा उस इलाके में जाकर एक्शन मोड में दिखाई देगी?
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अगर अब प्रशासन ने उन 36 नोटिस प्राप्त दुकानदारों का सामान जब्त नहीं किया या उन पर भारी जुर्माना नहीं लगाया, तो भविष्य में चलाए जाने वाले किसी भी 'अतिक्रमण हटाओ अभियान' को जनता और व्यापारी गंभीरता से नहीं लेंगे।
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एक नजर में पूरा घटनाक्रम (Key Highlights)

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विवरण (Details)
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जानकारी (Information)
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स्थान
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छतरी वाली पीर से घंटाघर मार्ग, मेरठ
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अभियान का दिन
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सोमवार (अगले ही दिन मंगलवार को फेल)
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मुख्य अधिकारी
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एसपी ट्रैफिक राजेश कुमार श्रीवास्तव, नगर निगम प्रभारी भोला नाथ गौतम
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कार्रवाई
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36 दुकानदारों को नोटिस जारी किए गए
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लगाई गई धाराएं
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BNS (भारतीय न्याय संहिता) की धारा 289 और 292
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मुख्य समस्या
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जिला अस्पताल और महिला अस्पताल मार्ग पर जाम, एंबुलेंस का फंसना
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प्रशासन की चेतावनी
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दोबारा अतिक्रमण पर सामान जब्ती और ध्वस्तीकरण
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मेरठ में अतिक्रमण केवल चालान काटने या नोटिस देने से खत्म होने वाला नहीं है। इसके लिए 'जीरो टॉलरेंस' (Zero Tolerance) की नीति अपनानी होगी। घंटाघर और जिला अस्पताल जैसे संवेदनशील मार्गों को 'नो-एन्क्रोचमेंट जोन' घोषित कर वहां स्थाई रूप से पुलिस पिकेट की तैनाती करनी होगी। अब देखना यह है कि कानून की धज्जियां उड़ने के बाद मेरठ प्रशासन अपनी खोई हुई साख वापस पाने के लिए क्या सख्त कदम उठाता है।
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