उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले में आवारा कुत्तों का आतंक चरम पर है, जिसके कारण रोज़ाना बड़ी संख्या में लोग घायल हो रहे हैं। इन बढ़ते हमलों के बीच, जिले के स्वास्थ्य व्यवस्था से जुड़ी एक चौंकाने वाली खबर सामने आई है। जिला अस्पताल में एंटी रेबीज वैक्सीन (ARV) तो पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है, लेकिन कुत्ते के काटने के गंभीर जख्मों के लिए ज़रूरी एंटी रेबीज सीरम (ARS) का स्टॉक समाप्त हो चुका है। इसके चलते गंभीर रूप से घायल मरीजों को निजी मेडिकल स्टोर से यह महंगा इंजेक्शन खरीदने को मजबूर होना पड़ रहा है।READ ALSO:-मेरठ में दवा व्यापारी से नाक रगड़वाने का मामला: BJP नेता समेत 4 गिरफ्तार, व्यापारी संघ ने DM-SSP से मिलकर मांगा 'सख्त एक्शन
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सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद भी आतंक जारी

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आवारा कुत्तों के आतंक के बीच, ज़िला अस्पताल, सीएचसी (सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र) और पीएचसी (प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र) के आंकड़े बताते हैं कि समस्या कितनी गंभीर है।
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    प्रशासनिक उदासीनता: सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट आदेश के बावजूद, जिला प्रशासन और नगर निगम आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या को नियंत्रित करने के प्रति गंभीर नहीं दिख रहा है।
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    गंभीर घावों का इलाज नहीं: जिला अस्पताल में पेट से ऊपर काटने या गंभीर घाव वाले मरीजों को वापस किया जा रहा है, क्योंकि उनके लिए जीवनरक्षक एंटी रेबीज सीरम (ARS) स्टॉक में नहीं है।
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    केवल ARV उपलब्ध: चिकित्सा अधीक्षक ने पुष्टि की कि केवल एंटी रेबीज वैक्सीन (ARV) ही लगाई जा रही है, जो मामूली रूप से घायल मरीजों के लिए होती है।
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Latest Update: प्रतिदिन 300 से अधिक मरीज

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मेरठ में कुत्तों के काटने के मरीजों की संख्या चौंकाने वाली है:
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    जिला अस्पताल: कमरा नंबर-16 में रोज़ाना लगभग 190 मरीजों को वैक्सीन लगाई जा रही है। गुरुवार को भी सुबह 8 बजे से 11:30 बजे तक 84 लोगों को इंजेक्शन लगाए जा चुके थे।
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    सीएचसी-पीएचसी: जनपद में मौजूद कुल 59 (32 सीएचसी और 27 पीएचसी) केंद्रों पर औसतन रोज़ाना 5 मरीज पहुँच रहे हैं, जिससे रोज़ाना लगभग 300 मरीजों को वैक्सीन दी जा रही है।
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    कुल अनुमान: यह केवल सरकारी आंकड़ा है। अनुमान है कि इतनी ही संख्या में मरीज निजी क्लीनिकों या अस्पतालों में भी इलाज करा रहे होंगे।
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ARS स्टॉक खत्म होने की पुष्टि

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जिला अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक (Medical Superintendent), डॉ. बीपी कौशिक ने एआरएस की कमी की पुष्टि की।
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    स्टॉक की कमी: डॉ. कौशिक ने बताया कि एंटी रेबीज सीरम (ARS) इंजेक्शन जिला अस्पताल में 26 सितंबर को ही खत्म हो गया था।
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    डिमांड भेजी गई: उन्होंने बताया कि 27 सितंबर को ही खरखौदा स्थित ड्रग वेयर हाउस में इंजेक्शन की मांग (Demand) भेज दी गई थी।
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    वेयर हाउस में भी कमी: वेयर हाउस में भी स्टॉक उपलब्ध न होने के कारण अस्पताल को इंजेक्शन नहीं मिल पा रहा है। डॉ. कौशिक ने कहा कि जल्द ही दोबारा रिमाइंडर भेजा जाएगा।
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कुत्ते के शिकार लोगों की आपबीती

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कुत्तों के शिकार हुए लोगों ने अपनी दर्दनाक कहानियाँ सुनाई:
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    सतीश कुमार (हवलदार): "बुधवार रात ड्यूटी खत्म कर घर लौट रहा था। कैंट के हनुमान मंदिर के पास मेरी बाइक पर कुत्तों ने हमला कर दिया और मेरे पैर को बुरी तरह से नोंच दिया।"
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    मनोज कुमार (ब्रह्मपुरी निवासी): "बुधवार रात करीब 11 बजे वापस लौटा तो मुझे कुत्ते ने जांघ पर काट लिया। गली में कुत्तों की संख्या बहुत ज्यादा है।"
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रेबीज के खतरे का डर

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ARS की अनुपलब्धता एक गंभीर स्वास्थ्य खतरा है। ARS को रेबीज वायरस के खिलाफ तत्काल प्रतिरक्षा प्रदान करने के लिए गंभीर मामलों में घाव के चारों ओर लगाया जाता है। स्टॉक की कमी के कारण, गंभीर रूप से घायल मरीज निजी मेडिकल स्टोर से यह महंगा इंजेक्शन खरीदने को मजबूर हैं, जो गरीब और मध्यम वर्ग के लिए एक बड़ी वित्तीय चुनौती है। जिला प्रशासन को तत्काल इस जीवनरक्षक इंजेक्शन की आपूर्ति सुनिश्चित करनी चाहिए।
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