उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले से एक बेहद चौंकाने वाला और सरकारी महकमे की गरिमा को तार-तार करने वाला मामला सामने आया है। जिस सरकारी बस डिपो परिसर का इस्तेमाल यात्रियों की सुविधा और परिवहन व्यवस्था के सुचारू संचालन के लिए होना चाहिए, उसे रात के समय कथित तौर पर एक 'डांस बार' में तब्दील कर दिया गया। मेरठ के सोहराबगेट बस डिपो में एक रोडवेज कर्मचारी की रिटायरमेंट पार्टी के दौरान मंच पर महिला डांसर द्वारा अश्लील डांस किए जाने का मामला सामने आया है। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर आग की तरह फैल गया है, जिसके बाद उत्तर प्रदेश परिवहन विभाग (UP Roadways) के आला अधिकारियों की नींद उड़ गई है।READ ALSO-धामपुर में गूंजा हिंदी का जयघोष: राजर्षि पुरुषोत्तम दास टंडन की जयंती पर भव्य काव्य गोष्ठी का आयोजन, कवियों ने बांधा समां
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  • वीडियो के संज्ञान में आते ही विभाग ने तुरंत एक्शन लेते हुए जिम्मेदार अधिकारियों को नोटिस जारी कर दिया है। सरकारी परिसर में इस तरह के फूहड़ और नियम विरुद्ध आयोजन ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
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क्या है पूरा मामला? कैसे शुरू हुआ यह विवाद

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यह पूरी घटना 31 जुलाई की बताई जा रही है। मेरठ के सोहराबगेट बस डिपो में तैनात चालक पदम सिंह अपनी लंबी सेवा के बाद सेवानिवृत्त (रिटायर) हो रहे थे। पदम सिंह सिर्फ एक चालक नहीं थे, बल्कि वह यूपी रोडवेज एम्पलॉयज यूनियन के क्षेत्रीय उपाध्यक्ष भी थे। यूनियन में उनके मजबूत रसूख और प्रभाव के कारण ही उनकी विदाई के अवसर पर डिपो परिसर के भीतर ही एक भव्य रिटायरमेंट पार्टी का आयोजन किया गया था।
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शुरुआत में यह कार्यक्रम एक सामान्य विदाई समारोह की तरह लग रहा था, जिसमें सहकर्मियों को भोजन और सम्मान समारोह के लिए आमंत्रित किया गया था। लेकिन, रात होते-होते कार्यक्रम का रंग पूरी तरह बदल गया। मनोरंजन के नाम पर बाहर से एक महिला डांसर (बार-बाला) को बुलाया गया। देखते ही देखते सरकारी डिपो के परिसर में तेज संगीत पर अश्लील डांस शुरू हो गया और वहां मौजूद कर्मचारी ठुमके लगाने लगे।
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सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल, उड़ी सरकारी नियमों की धज्जियां

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कार्यक्रम के दौरान वहां मौजूद कुछ लोगों ने इस डांस का वीडियो अपने मोबाइल फोन में रिकॉर्ड कर लिया। कुछ ही घंटों में यह वीडियो व्हाट्सएप ग्रुप्स और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर वायरल हो गया। वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि कैसे सरकारी संपत्ति और कार्यालय परिसर के भीतर बिना किसी खौफ के नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं।
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सरकारी कार्यालयों और परिसरों के लिए स्पष्ट नियम हैं कि वहां किसी भी प्रकार का व्यक्तिगत, धार्मिक या ऐसा कोई भी सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित नहीं किया जा सकता जिससे कार्यालय की गरिमा को ठेस पहुंचे या कामकाज बाधित हो। इसके बावजूद, यूनियन के दबाव या अधिकारियों की मिलीभगत के चलते इतना बड़ा आयोजन बेरोकटोक चलता रहा। वीडियो सामने आने के बाद आम जनता भी सोशल मीडिया पर परिवहन विभाग की कार्यप्रणाली और अनुशासन पर तीखे सवाल उठा रही है।
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परिवहन विभाग सख्त: 72 घंटे के भीतर मांगा गया स्पष्टीकरण

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वीडियो वायरल होने और उच्चाधिकारियों तक मामला पहुंचने के बाद मेरठ परिवहन विभाग में हड़कंप मच गया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए डिपो के एआरएम (सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक) राजीव ने तुरंत कड़ा रुख अपनाया है।
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उन्होंने इस मामले में डिपो की सुरक्षा और व्यवस्था के लिए सीधे तौर पर जिम्मेदार दो अधिकारियों पर गाज गिराई है। एआरएम ने स्टेशन इंचार्ज जयकेश देवी और संगीता को कारण बताओ नोटिस जारी किया है।
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नोटिस में स्पष्ट रूप से पूछा गया है कि: 

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    सरकारी परिसर के भीतर इस तरह के कार्यक्रम के आयोजन की अनुमति किसने दी?
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    जब डिपो परिसर में यह सब चल रहा था, तब स्टेशन इंचार्ज और सुरक्षा व्यवस्था में लगे कर्मचारी क्या कर रहे थे?
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    बाहरी लोगों (डांसर और अन्य) को डिपो के संवेदनशील क्षेत्र में प्रवेश कैसे मिला?
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दोनों अधिकारियों को अपना लिखित स्पष्टीकरण देने के लिए 72 घंटे का अल्टीमेटम दिया गया है। विभाग ने साफ कर दिया है कि यदि तय समय सीमा के भीतर संतोषजनक जवाब नहीं मिलता है, तो दोनों के खिलाफ कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी, जिसमें निलंबन भी शामिल हो सकता है।
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आरएम दीपक चौधरी का बयान: "छवि धूमिल करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा"

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इस शर्मनाक घटना पर मेरठ मंडल के आरएम (क्षेत्रीय प्रबंधक) दीपक चौधरी ने भी कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने पूरे मामले की विस्तृत जांच के आदेश दे दिए हैं।
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"यह बेहद गंभीर और अनुशासनहीनता का मामला है। सरकारी डिपो परिसर का इस्तेमाल इस तरह के आयोजनों के लिए कतई नहीं किया जा सकता। मैंने एआरएम से इस पूरी घटना की विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। मामले की निष्पक्ष जांच कराई जा रही है। उत्तर प्रदेश परिवहन विभाग की छवि धूमिल करने वाले किसी भी अधिकारी या कर्मचारी को बख्शा नहीं जाएगा। जांच के बाद जिन लोगों की भी जिम्मेदारी तय होगी, उनके खिलाफ विभागीय नियमों के तहत सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी।" - दीपक चौधरी (आरएम, मेरठ मंडल)
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यूनियन के रसूख पर उठे सवाल

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इस घटना ने एक बार फिर सरकारी विभागों में कर्मचारी यूनियनों के प्रभाव और मनमानी पर बहस छेड़ दी है। चूंकि सेवानिवृत्त होने वाले कर्मचारी पदम सिंह यूपी रोडवेज एम्पलॉयज यूनियन के क्षेत्रीय उपाध्यक्ष थे, इसलिए यह माना जा रहा है कि स्थानीय अधिकारियों ने यूनियन के दबाव या रसूख के चलते इस कार्यक्रम को रोकने की हिम्मत नहीं दिखाई। अक्सर देखा जाता है कि यूनियन के पदाधिकारी नियमों को ताक पर रखकर अपने प्रभाव का इस्तेमाल करते हैं। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि जांच में क्या सिर्फ छोटे कर्मचारियों पर गाज गिरती है, या आयोजन कराने वाले रसूखदार लोगों पर भी विभागीय चाबुक चलता है।
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आगे क्या होगा?

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फिलहाल सभी की निगाहें स्टेशन इंचार्ज जयकेश देवी और संगीता के जवाब पर टिकी हैं। उनके जवाब के आधार पर ही जांच की दिशा तय होगी। इस घटना ने पूरे प्रदेश के परिवहन विभाग के लिए एक नजीर पेश कर दी है कि सरकारी परिसरों में अनुशासन को हल्के में लेना कितना भारी पड़ सकता है। आने वाले कुछ दिनों में इस मामले में निलंबन या ट्रांसफर जैसी बड़ी विभागीय कार्रवाई होने की पूरी संभावना है।
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