मेरठ (Meerut): उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गरीब और जरूरतमंद परिवारों की बेटियों के हाथ पीले करने के लिए चलाई जा रही महत्वाकांक्षी 'मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना' (Mukhyamantri Samuhik Vivah Yojana) में भ्रष्टाचार का दीमक लग गया है। मेरठ के जानी ब्लॉक (Jani Block) से एक बेहद शर्मनाक और संवेदनशील मामला सामने आया है, जहां एक गरीब पिता ने आरोप लगाया है कि ब्लॉक के अधिकारियों ने उससे बेटी की शादी कराने के एवज में 15,000 रुपये की रिश्वत मांगी। जब पिता ने असमर्थता जताई, तो ऐन मौके पर बेटी का नाम लाभार्थियों की सूची से काट दिया गया, जिससे परिवार को भारी मानसिक आघात और सामाजिक अपमान का सामना करना पड़ा है।READ ALSO:-नूरपुर: बैंक के 'लॉकर' तक पहुंचने की फिराक में था शातिर, दीवार काटते वक्त हुई चूक और अब सलाखों के पीछे पहुंचा
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पीड़ित पिता ने सोमवार को कलेक्ट्रेट पहुंचकर जिलाधिकारी (DM) डॉ. वी.के. सिंह के समक्ष अपना दुखड़ा रोया और न्याय की गुहार लगाई। मामले की गंभीरता को देखते हुए डीएम ने तत्काल जिला समाज कल्याण अधिकारी को जांच कर सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
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क्या है पूरा मामला? (The Incident Details)
\r\n\r\nप्राप्त जानकारी और जिलाधिकारी को सौंपे गए शिकायती पत्र के अनुसार, मामला मेरठ जिले के थाना परतापुर अंतर्गत ग्राम इटारा (Itara Village) का है। यहां के निवासी उमेश, पुत्र स्वर्गीय ओमप्रकाश, एक गरीब मजदूर हैं। उमेश ने अपनी पुत्री कु. अनमोल (उम्र 22 वर्ष) के विवाह के लिए मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के तहत आवेदन किया था।
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उमेश के अनुसार, उन्होंने शादी की सभी औपचारिकताएं पूरी कर दी थीं। जानी ब्लॉक द्वारा आयोजित सामूहिक विवाह कार्यक्रम में उनकी बेटी की शादी 8 फरवरी 2026 को होनी तय थी (हालांकि पत्र में शादी की तारीख 12.03.2026 और प्रक्रिया पूर्ण होने की तारीख 08.02.2026 का संदर्भ भी है, लेकिन मुख्य विवाद आयोजन के समय लाभ न मिलने का है)।
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आरोप है कि जानी ब्लॉक में तैनात एडीओ पंचायत (ADO Panchayat) अनिल और बीएलओ (BLO) हल्का (ग्राम गगोल निवासी) ने उमेश से संपर्क किया और सीधे शब्दों में कहा कि अगर उन्हें योजना के तहत आर्थिक मदद और गृहस्थी का सामान चाहिए, तो उन्हें 15,000 रुपये की रिश्वत (Bribe) देनी होगी।
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"पैसे नहीं दोगे तो लिस्ट से नाम कट जाएगा"
\r\n\r\nपीड़ित उमेश ने अपने शिकायती पत्र में लिखा है कि अधिकारियों ने उन्हें धमकी दी, "अगर तुम्हें आर्थिक मदद लेनी है (सामान इत्यादि लेना है) तो हमें 15,000/- रुपये रिश्वत देनी होगी, अन्यथा तुम्हें यहाँ से कोई आर्थिक मदद या सामान नहीं मिलेगा और तुम्हारा नाम भी लिस्ट से कटवा दिया जाएगा।"
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उमेश एक गरीब मजदूर हैं और उनकी पत्नी दिव्यांग (Viklang) हैं। उन्होंने अधिकारियों के सामने हाथ-पैर जोड़े और अपनी गरीबी का हवाला दिया, लेकिन अधिकारियों का दिल नहीं पसीजा। उमेश का आरोप है कि जब वह पैसे देने में असमर्थ रहे, तो अधिकारियों ने जानबूझकर उनकी बेटी का नाम लिस्ट से हटा दिया।
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वर पक्ष को मिल गया था सेहरा और कार्ड, वधू पक्ष रह गया खाली हाथ
\r\n\r\nइस मामले में सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि प्रशासन की लापरवाही या मिलीभगत के चलते वर पक्ष (लड़के वाले) को शादी के लिए 'सेहरा', 'पटका' और शादी का आधिकारिक कार्ड जारी कर दिया गया था। लेकिन वधू (लड़की) का नाम पोर्टल या लिस्ट से यह कहकर हटा दिया गया कि उनका फॉर्म रिजेक्ट हो गया है।
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उमेश ने बताया कि वह अपने गवाह मूलचन्द और श्रीमती प्रियंका के साथ अधिकारियों के चक्कर काटते रहे। अधिकारियों ने उन्हें "थोड़ा इंतजार करो" कहकर शाम तक बैठाए रखा, लेकिन अंत में यह कह दिया कि "तुमने रिश्वत नहीं दी है, अब तुम्हारा यहाँ सामूहिक विवाह नहीं होगा।"
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इस घटना के कारण जहां एक ओर वर पक्ष पूरी तैयारी के साथ बैठा था, वहीं वधू पक्ष को एन वक्त पर मना कर दिए जाने से दोनों परिवारों के बीच रिश्ते में खटास आने और सामाजिक बदनामी का खतरा पैदा हो गया है। पीड़ित की बेटी इस घटना से गहरे सदमे और मानसिक तनाव में है।
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डीएम डॉ. वी.के. सिंह का सख्त रुख
\r\n\r\nसोमवार, 9 फरवरी 2026 को पीड़ित उमेश ने जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचकर अपनी आपबीती सुनाई। मेरठ के जिलाधिकारी डॉ. वी.के. सिंह (DM Dr. V.K. Singh), जो अपनी सख्त कार्यशैली के लिए जाने जाते हैं, ने मामले को बेहद गंभीरता से लिया।
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डीएम ने जिला समाज कल्याण अधिकारी सुनील कुमार सिंह (District Social Welfare Officer) को मामले की तत्काल जांच करने के आदेश दिए हैं। सूत्रों के मुताबिक, डीएम ने स्पष्ट कहा है कि यदि आरोप सही पाए गए, तो दोषी अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर उन्हें जेल भेजा जाएगा और उनकी सेवा समाप्ति की कार्यवाही भी की जा सकती है। डीएम पहले भी लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों का वेतन रोकने जैसे कड़े कदम उठा चुके हैं।
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योजना के तहत क्या मिलता है लाभ? (Scheme Benefits)
\r\n\r\nमुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना (Mukhyamantri Samuhik Vivah Yojana) उत्तर प्रदेश सरकार की एक फ्लैगशिप योजना है, जिसका उद्देश्य गरीब परिवारों पर पड़ने वाले शादी के बोझ को कम करना है। इस योजना के तहत सरकार प्रति जोड़ा 51,000 रुपये खर्च करती है:
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- \r\n 35,000 रुपये: कन्या के बैंक खाते में सीधे ट्रांसफर किए जाते हैं।\r\n \r\n
- \r\n 10,000 रुपये: शादी के लिए जरूरी सामान (कपड़े, बिछिया, पायल, बर्तन आदि) देने के लिए।\r\n \r\n
- \r\n 6,000 रुपये: बिजली, पानी, टेंट और भोजन आदि की व्यवस्था के लिए आयोजनकर्ता को दिए जाते हैं।\r\n \r\n
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इतनी पारदर्शी योजना होने के बावजूद, निचले स्तर के अधिकारी और कर्मचारी इसमें सेंधमारी करने से बाज नहीं आ रहे हैं। जानी ब्लॉक का यह मामला बताता है कि कैसे 'दलाल' और भ्रष्ट कर्मचारी गरीबों के हक पर डाका डाल रहे हैं।
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भ्रष्टाचार का यह पहला मामला नहीं
\r\n\r\nउत्तर प्रदेश में सामूहिक विवाह योजना में गड़बड़ी का यह कोई पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी बलिया (Ballia) और कानपुर (Kanpur) जैसे जिलों से फर्जीवाड़े की खबरें सामने आ चुकी हैं, जहां बिना शादी कराए ही पैसे निकालने या अपात्र लोगों को लाभ देने के आरोप लगे थे।
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हालांकि, मेरठ के जानी ब्लॉक का यह मामला इसलिए अलग और संवेदनशील है क्योंकि यहां एक पात्र लाभार्थी को सिर्फ इसलिए बाहर कर दिया गया क्योंकि उसने रिश्वत देने से मना कर दिया। यह सीधे तौर पर "हक मारने" का मामला है।
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पीड़ित परिवार की मांग
\r\n\r\nपीड़ित उमेश ने अपने प्रार्थना पत्र में मांग की है कि:
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- \r\n एडीओ पंचायत अनिल कुमार और बीएलओ अलका तोमर के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई हो।\r\n \r\n
- \r\n उनके खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर जेल भेजा जाए।\r\n \r\n
- \r\n उनकी बेटी को योजना का लाभ दिलाया जाए और हुए मानसिक उत्पीड़न का मुआवजा मिले।\r\n \r\n
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मेरठ की यह घटना प्रशासनिक मशीनरी पर एक बदनुमा दाग है। सरकार ऊपर से कितनी भी अच्छी योजनाएं बना ले, लेकिन जब तक धरातल पर बैठे क्रियान्वयन अधिकारी (Implementing Officers) अपनी मानसिकता नहीं बदलेंगे, तब तक गरीबों तक उनका पूरा लाभ नहीं पहुंच पाएगा। अब सबकी निगाहें डीएम की जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं। क्या उमेश और उनकी बेटी अनमोल को न्याय मिलेगा? क्या भ्रष्ट अधिकारियों पर गाज गिरेगी? यह आने वाले कुछ दिनों में स्पष्ट हो जाएगा।
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मेरठ के जानी ब्लॉक में मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना में भ्रष्टाचार का गंभीर आरोप लगा है। एक गरीब पिता ने डीएम से शिकायत की है कि एडीओ पंचायत और बीएलओ ने बेटी की शादी के लिए 15,000 रुपये की रिश्वत मांगी। पैसे न देने पर बेटी का नाम लिस्ट से काट दिया गया, जबकि वर पक्ष को कार्ड भी मिल चुका था। डीएम ने जांच के आदेश दिए हैं।
Sabse pehle comment karne wale banein.