उत्तर प्रदेश के मेरठ शहर में मुख्यमंत्री ग्रीन रोड इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट स्कीम (CM Grid Yojana) के तहत चल रहे विकास कार्यों में बड़ी लापरवाही सामने आई है। वेस्टर्न कचहरी रोड पर नाला निर्माण के दौरान ठेकेदार द्वारा घोर अनियमितता बरती जा रही है, जहां नाले का लिंटर (छत) सीधे भरे हुए पानी के बीच ही डाला जा रहा है। इस construction corruption को लेकर स्थानीय समाजसेवी और वरिष्ठ अधिवक्ता संदीप पहल ने सीधे प्रशासन पर निशाना साधा है।
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करोड़ों की CM Grid Yojana
\r\n\r\nमेरठ शहर में CM Grid Yojana के तहत दो प्रमुख मार्गों—गढ़ रोड और वेस्टर्न कचहरी रोड—पर नाला निर्माण, डिवाइडर और सड़कों के चौड़ीकरण का कार्य किया जा रहा है। इस योजना का लक्ष्य शहर को बेंगलुरु और नोएडा जैसी आधुनिक, व्यवस्थित सड़कों की सौगात देना है। वेस्टर्न कचहरी रोड पर नाला निर्माण और सड़क चौड़ीकरण का कार्य नवरात्र के समय शुरू हुआ था। इस प्रोजेक्ट में भूमिगत केबल और जल निकासी की व्यवस्था का वादा किया गया था, लेकिन निर्माण शुरू होते ही गुणवत्ता पर सवाल उठने लगे हैं।
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पानी के अंदर सरिया और लिंटर का जाल
\r\n\r\nवेस्टर्न कचहरी रोड पर, सांसद आवास के पास चल रहे नाला निर्माण में नियमों का घोर उल्लंघन किया गया।
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- \r\n लापरवाही का स्तर: नाले का बेस और उस पर लिंटर डालने का काम भरे हुए पानी के बीच ही किया जा रहा है। निर्माण के लिए तैयार किया गया सरिया (Reinforcement steel) का जाल भी पानी के अंदर ही था।\r\n \r\n
- \r\n भ्रष्टाचार का आरोप: समाजसेवी संदीप पहल ने आरोप लगाया कि नाले में पानी भरा होने के बावजूद, उसे निकाले बिना ही लिंटर डाल दिया गया। यह स्पष्ट रूप से गुणवत्ता को ताक पर रखकर किया गया कार्य है।\r\n \r\n
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भ्रष्टाचार चरम सीमा पर
\r\n\r\nवरिष्ठ अधिवक्ता संदीप पहल ने इसे 'भ्रष्टाचार की चरम सीमा' बताया है।
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- \r\n पहल का बयान: उन्होंने कहा, "नाले में पहले से पानी भरा था, उसी पानी में सरिया का जाल बनाया गया और फिर उसी भरे हुए पानी में लिंटर (कंक्रीट) डाल दिया गया। नाले का बेस भी भरे हुए पानी के बीच ही तैयार किया गया था।"\r\n \r\n
- \r\n गुणवत्ता पर सवाल: निर्माण की यह प्रक्रिया सीधे construction corruption की ओर इशारा करती है। सीमेंट और कंक्रीट विशेषज्ञों के अनुसार, पानी के बीच लिंटर डालने से कंक्रीट अपनी अपेक्षित मजबूती (Compressive Strength) हासिल नहीं कर पाता है, जिससे नाले की संरचना जल्द ही कमजोर होकर ढह सकती है।\r\n \r\n
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नागरिक हुए नाराज
\r\n\r\nमेरठ के नागरिक इस प्रकार की लापरवाही से बेहद नाराज हैं, खासकर जब यह परियोजना मुख्यमंत्री की प्राथमिकता वाली CM Grid Yojana का हिस्सा है। सोशल मीडिया पर लोग लगातार सवाल उठा रहे हैं कि करोड़ों रुपये के प्रोजेक्ट में जब खुलेआम गुणवत्ता से समझौता किया जा रहा है, तो इसकी निगरानी कौन कर रहा है। नागरिकों का कहना है कि खुलेआम चल रहा यह निर्माण कार्य दिखाता है कि स्थानीय प्रशासन की कार्यशैली में कोई सुधार नहीं हुआ है।
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पुराने घोटालों की पुनरावृत्ति
\r\n\r\nयह पहली बार नहीं है जब मेरठ में विकास कार्यों की गुणवत्ता पर सवाल खड़े हुए हैं।
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- \r\n पुराना मामला: कुछ दिन पहले, नगर आयुक्त ने ही एक सीसी रोड का निरीक्षण किया था, जहां कागजों में 7 इंच मोटी सड़क 4 इंच की ही मिली थी। इस मामले में एक्सईएन, एई और जेई जैसे तीन इंजीनियरों को नोटिस भी जारी किया गया था।\r\n \r\n
- \r\n आगे की कार्रवाई: संदीप पहल ने चेतावनी दी है कि वे इस मामले को उच्चाधिकारियों के संज्ञान में लाएंगे। आवश्यक है कि नगर निगम और लोक निर्माण विभाग इस निर्माण कार्य की तुरंत जाँच करें और पानी के बीच डाले गए लिंटर को हटवाकर मानकों के अनुरूप काम करवाएँ।\r\n \r\n
Sabse pehle comment karne wale banein.