उत्तर प्रदेश के मेरठ शहर में बुधवार को एक बार फिर बेगमपुल (Begampul) चौराहे से जुड़े नामकरण का विवाद गरमा गया। हिन्दू राष्ट्र सेवा संघ (Hindu Rashtra Seva Sangh) ने कलेक्ट्रेट पर प्रदर्शन करते हुए मेरठ रैपिड (Rapid) और मेट्रो स्टेशन का नाम 'बेगमपुल' से बदलकर 'भारत माता चौक' करने की मांग की। संगठन ने जिलाधिकारी (DM) डॉ. वी.के. सिंह के माध्यम से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को संबोधित करते हुए एक ज्ञापन सौंपा है।READ ALSO:-UP में 8 नए एक्सप्रेस-वे का 'महा-प्लान', 30 जिलों की बदलेगी तस्वीर! चित्रकूट से हरिद्वार और जेवर तक, देखें पूरी लिस्ट
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नगर निगम ने पहले ही पारित किया है प्रस्ताव

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बेगमपुल शहर के सबसे पुराने और सबसे व्यस्त चौराहों में से एक है। संगठन के पदाधिकारियों ने बताया कि इस स्थान का नाम बदलने का मुद्दा पुराना है और स्थानीय स्तर पर इस पर सहमति बन चुकी है।
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    महापौर का निर्णय: उन्होंने बताया कि नगर निगम (Nagar Nigam) की बोर्ड बैठक में 'बेगमपुल' का नाम बदलने का प्रस्ताव पहले ही पारित किया जा चुका है।
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    नया नाम: महापौर हरिकांत अहलूवालिया ने इस स्थान का नया नाम 'भारत माता चौक' रखा है।
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    विवाद: इसके बावजूद, नेशनल कैपिटल रीजन ट्रांसपोर्ट कॉर्पोरेशन (NCRTC) ने रैपिड कॉरिडोर के तहत बन रहे मेट्रो और रैपिड स्टेशन का नाम आधिकारिक रूप से पुराने नाम 'बेगमपुल' पर ही रख दिया है, जिससे यह विवाद खड़ा हुआ है।
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संगठन ने दी विरोध प्रदर्शन की चेतावनी

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हिन्दू राष्ट्र सेवा संघ का कहना है कि मेरठ देश के पहले रैपिड कॉरिडोर स्टेशन का गौरव प्राप्त करने जा रहा है, और यदि इसका नाम 'भारत माता चौक' रखा जाता है, तो यह पूरे शहरवासियों के लिए गर्व की बात होगी।
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    ज्ञापन में आग्रह: संगठन ने प्रधानमंत्री से आग्रह किया है कि Meerut मेट्रो स्टेशन का नाम नगर निगम द्वारा पारित प्रस्ताव के अनुरूप औपचारिक रूप से 'भारत माता चौक' में संशोधित किया जाए।
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    चेतावनी: संगठन ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांग को अनसुना किया गया और नाम नहीं बदला गया, तो वे मेट्रो स्टेशन के उद्घाटन के समय बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन करेंगे।
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प्रशासन ने लिया ज्ञापन

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जिलाधिकारी डॉ. वी.के. सिंह ने संगठन के पदाधिकारियों से ज्ञापन लिया है और आश्वस्त किया है कि इस मांग को उचित माध्यम से सरकार तक पहुंचाया जाएगा। इस मुद्दे पर रैपिड निर्माण एजेंसी (NCRTC) की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।
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राजनीतिक और सांस्कृतिक दबाव

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Meerut का यह नाम बदलने का विवाद अब स्थानीय राजनीति और सांस्कृतिक भावनाओं के बीच टकराव का कारण बन रहा है। एक तरफ जहां स्थानीय निकाय ने नाम बदलने का प्रस्ताव पारित किया है, वहीं केंद्रीय परियोजना में पुराने नाम का उपयोग किया गया है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा राजनीतिक दबाव का कारण बन सकता है, खासकर रैपिड कॉरिडोर के उद्घाटन की तैयारियों के बीच।
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