मेरठ (Meerut News): उत्तर प्रदेश के मेरठ शहर में बढ़ते प्रदूषण और कड़ाके की ठंड ने अब आम जनजीवन के साथ-साथ खेल जगत को भी प्रभावित करना शुरू कर दिया है। मेरठ में प्रदूषण (Meerut Pollution) का स्तर इतना खतरनाक हो गया है कि यहां पहली बार आयोजित होने वाली प्रतिष्ठित फुटबॉल प्रतियोगिता 'संतोष ट्रॉफी' (Santosh Trophy) की मेजबानी शहर से छिन गई है। घने कोहरे और जहरीली हवा के चलते एसोसिएशन ने चैंपियनशिप को आगरा शिफ्ट करने का फैसला लिया है।READ ALSO:-शर्मनाक: मेरठ में चल रही थी 'मासूमों की अस्मत की मंडी', टेलीग्राम पर वीडियो बेचता था अमित जैन; तीन राज्यों तक फैला गंदा धंधा
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मेरठ वासियों के लिए यह खबर किसी झटके से कम नहीं है, क्योंकि खेल प्रेमी इस आयोजन का बेसब्री से इंतजार कर रहे थे। वहीं, अस्पतालों में बढ़ती मरीजों की भीड़ इस बात की गवाही दे रही है कि शहर की आबोहवा कितनी जहरीली हो चुकी है।
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16 से 20 दिसंबर तक होना था आयोजन
\r\n\r\nसंतोष ट्रॉफी भारतीय फुटबॉल के सबसे पुराने और प्रतिष्ठित टूर्नामेंटों में से एक है। अब तक देश भर में इसके 78 संस्करण (Championships) आयोजित हो चुके हैं। इस बार मेरठ के सुभारती विश्वविद्यालय (Subharti University) को मेजबानी का मौका मिला था। तय कार्यक्रम के अनुसार, 16 दिसंबर से 20 दिसंबर तक यहां मैच खेले जाने थे।
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आयोजन समिति और स्थानीय प्रशासन ने तैयारियां लगभग पूरी कर ली थीं। लेकिन, बीते कुछ दिनों से मेरठ में प्रदूषण और स्मॉग (Smog) की स्थिति बद से बदतर होती गई। विजिबिलिटी कम होने और खिलाड़ियों के स्वास्थ्य को देखते हुए फुटबॉल एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने आपात बैठक की और आयोजन को रद्द कर आगरा (Agra) स्थानांतरित कर दिया। अब यह रोमांचक मुकाबले ताजनगरी में देखने को मिलेंगे।
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देश का 7वां सबसे प्रदूषित शहर बना मेरठ
\r\n\r\nप्रदूषण के आंकड़ों पर नजर डालें तो स्थिति बेहद डरावनी है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के आंकड़ों के मुताबिक, मेरठ देश के सबसे प्रदूषित शहरों की सूची में सातवें स्थान पर पहुंच गया है। वहीं, उत्तर प्रदेश में यह पांचवां सबसे प्रदूषित शहर बन चुका है।
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शहर का एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 350 के आंकड़े को पार कर गया है, जो 'बेहद खराब' (Very Poor) श्रेणी में आता है। सुबह और शाम के वक्त आसमान में कोहरे और धुएं की एक मोटी चादर (Smog) छाई रहती है, जो दोपहर तक भी पूरी तरह नहीं छंटती। हवा में पीएम 2.5 (PM 2.5) और पीएम 10 कणों की अधिकता के कारण लोगों का दम घुट रहा है।
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अस्पतालों में सांस और आंखों के मरीजों की बाढ़
\r\n\r\nप्रदूषण का सीधा असर अब लोगों की सेहत पर दिखने लगा है। सरकारी और निजी अस्पतालों की ओपीडी में मरीजों की लंबी कतारें लगी हैं।
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- \r\n मेडिकल कॉलेज: यहां की ओपीडी में रोजाना 4000 से अधिक मरीज पहुंच रहे हैं, जिनमें से बड़ी संख्या सांस लेने में तकलीफ और आंखों में जलन की शिकायत करने वालों की है।\r\n \r\n
- \r\n जिला अस्पताल: यहां भी मरीजों का आंकड़ा 1500 के पार जा रहा है।\r\n \r\n
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सीएमओ (CMO) ने इस गंभीर स्थिति को देखते हुए विशेष गाइडलाइन जारी की है। बुजुर्गों, बच्चों और अस्थमा के मरीजों को सुबह-शाम टहलने से बचने और घर से बाहर निकलते समय मास्क (Mask) का प्रयोग करने की सलाह दी गई है।
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मौसम अपडेट: और गिरेगा रात का पारा
\r\n\r\nप्रदूषण के साथ-साथ मौसम की मार भी दोहरी मुसीबत बन रही है। मौसम वैज्ञानिक डॉ. यूपी शाही के अनुसार, आने वाले दिनों में मेरठ के मौसम में और बदलाव देखने को मिलेगा।
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- \r\n तापमान: रात के तापमान में और गिरावट आने की संभावना है, जिससे ठिठुरन बढ़ेगी।\r\n \r\n
- \r\n कोहरा: तापमान गिरने से कोहरे का घनत्व और बढ़ेगा। कम हवा चलने के कारण प्रदूषक तत्व (Pollutants) जमीन की सतह के पास ही जमे रहेंगे, जिससे एक्यूआई में सुधार की गुंजाइश कम है।\r\n \r\n
- \r\n दिन का मौसम: फिलहाल दिन का तापमान स्थिर है, जिससे दोपहर में थोड़ी राहत महसूस होती है, लेकिन शाम ढलते ही गलन बढ़ जाती है।\r\n \r\n
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खेल प्रेमियों में निराशा
\r\n\r\nसंतोष ट्रॉफी का आगरा शिफ्ट होना मेरठ के खेल प्रेमियों के लिए बड़ी निराशा है। यह टूर्नामेंट न केवल शहर को एक नई पहचान देता, बल्कि स्थानीय खिलाड़ियों को राष्ट्रीय स्तर का खेल देखने और सीखने का मौका भी मिलता। जानकारों का कहना है कि अगर समय रहते प्रदूषण नियंत्रण के कड़े उपाय किए जाते, तो शायद यह मेजबानी बचाई जा सकती थी।
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मेरठ में प्रदूषण अब केवल एक पर्यावरणीय मुद्दा नहीं रहा, बल्कि यह शहर के विकास और आयोजनों पर भी ग्रहण लगा रहा है। संतोष ट्रॉफी का शिफ्ट होना प्रशासन और आम जनता के लिए एक चेतावनी है। अगर प्रदूषण के स्तर को कम करने के लिए जल्द ही ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले समय में स्वास्थ्य आपातकाल जैसी स्थिति बन सकती है। फिलहाल, नागरिकों को अपनी सेहत का ख्याल रखने और एहतियात बरतने की जरूरत है।
Sabse pehle comment karne wale banein.