उत्तर प्रदेश के मेरठ शहर में शनिवार (25 अक्टूबर 2025) की सुबह एक कठोर प्रशासनिक कार्रवाई की गवाह बनी। शहर के 35 साल पुराने एक कॉम्प्लेक्स में बनी 22 दुकानों को आवास विकास परिषद द्वारा ध्वस्त (Demolish) किया जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर हुई इस कार्रवाई से पहले, इन दुकानों के कारोबारी और उनके परिवार अपनी रोजी-रोटी का ठिकाना उजड़ते देख फूट-फूटकर रोने लगे। उनकी यह भावुक अपील दिल दहला देने वाली थी, "अब हमारा क्या होगा, कहाँ जाएंगे और किस तरह से अपना गुज़ारा करेंगे।"READ ALSO:-Meerut: विकुल चपराणा के समर्थन में 26 अक्टूबर को गुर्जर महापंचायत: बिरादरी लामबंद, पुलिस पर लगा 'एकतरफा' कार्रवाई का आरोप
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आवास के लिए आवंटित जमीन पर अवैध कॉम्प्लेक्स

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यह कार्रवाई दशकों पुराने एक संगठित अवैध निर्माण के मामले से जुड़ी हुई है, जिसका पटाक्षेप अब सुप्रीम कोर्ट के कड़े आदेश से हो रहा है।
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    जमीन का आवंटन: यह 288 वर्ग मीटर का भूखंड संख्या 661/6 स्कीम नंबर सात के तहत काजीपुर के वीर सिंह को आवासीय प्रयोग के लिए 30 अगस्त 1986 को आवंटित किया गया था।
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    अवैध निर्माण की शुरुआत: 1990 में, विनोद अरोड़ा नामक व्यक्ति ने 'पावर ऑफ अटॉर्नी' का दुरुपयोग करते हुए इस आवासीय जमीन पर 22 दुकानों का अवैध रूप से कॉम्प्लेक्स खड़ा कर दिया, जिसका नाम सेंट्रल मार्केट रख दिया गया, जबकि परिषद के दस्तावेजों में 'सेंट्रल मार्केट' नाम से कोई बाजार नहीं था।
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सुप्रीम कोर्ट की अंतिम मुहर और पुलिस का कड़ा पहरा

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इस अवैध निर्माण के खिलाफ आवास एवं विकास परिषद ने 19 सितंबर 1990 को कारण बताओ नोटिस भेजा था। अवैध उपयोग जारी रहने पर 23 मार्च 2005 को ध्वस्तीकरण के आदेश पारित हुए। लेकिन आदेश के बावजूद कार्रवाई न होने पर यह मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा।
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    कोर्ट का आदेश: सुप्रीम कोर्ट की खंडपीठ ने 17 दिसंबर 2024 को सख्त आदेश दिया था कि इस कॉम्प्लेक्स को तीन माह के भीतर खाली कराया जाए और ध्वस्त किया जाए। यह कार्रवाई उसी आदेश के अनुपालन में की जा रही है।
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    कार्रवाई का विवरण: शनिवार सुबह साढ़े 11 बजे प्रशासन की टीम मौके पर पहुँची और ध्वस्त करने की कार्रवाई शुरू की।
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    सुरक्षा व्यवस्था: घटनास्थल पर चार थानों की पुलिस फोर्स और एक कंपनी PAC (प्रादेशिक आर्म्ड कॉन्स्टेबुलरी) तैनात की गई है। इसके अलावा एटीएस के ड्रोन से हर गतिविधि पर कड़ी नजर रखी जा रही है, जिससे कोई अप्रिय घटना न हो।
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सेंट्रल मार्केट का अस्तित्व नहीं

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आवास विकास परिषद के अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि विभागीय दस्तावेजों में सेंट्रल मार्केट नाम से कोई बाजार कभी नहीं था, और यह कार्रवाई भूखंड के वाणिज्यिक दुरुपयोग और अवैध निर्माण के कारण हो रही है। इस निर्णय पर कोई रियायत नहीं दी जा सकती।
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अंतिम बार देखने की अपील

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कार्रवाई के दौरान वहाँ मौजूद दृश्य बेहद मार्मिक थे। सेंट्रल मार्केट में दशकों से व्यापार कर रहे कारोबारी और उनके परिवार अपनी दुकानें आखिरी बार देखना चाहते थे, लेकिन पुलिस ने सुरक्षा कारणों से उन्हें बैरिकेडिंग पार करने से रोक दिया।
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    भावुक अपील: दुकानदारों और उनके परिवारों ने रोते हुए अपील की कि "कम से कम आखिरी बार हमें अपनी दुकानें देखने की अनुमति तो दी जाए।"
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    सोशल मीडिया: इस घटना को #MeerutNews और #BulldozerAction के साथ साझा किया जा रहा है, जहाँ लोग कानून के सम्मान और कारोबारियों की दुर्दशा के बीच अपनी राय व्यक्त कर रहे हैं।
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उजड़े परिवारों का भविष्य

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मेरठ में 35 साल पुराने इस व्यावसायिक केंद्र के ढह जाने से 22 परिवारों की रोजी-रोटी सीधे प्रभावित हुई है। यह घटना सभी अवैध निर्माण करने वालों के लिए एक बड़ी चेतावनी है कि कानूनी प्रक्रिया लंबी हो सकती है, लेकिन अंततः सुप्रीम कोर्ट का आदेश सर्वोपरि है।
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