मेरठ (खबरीलाल विशेष रिपोर्ट): पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीति और किसान आंदोलनों का मुख्य केंद्र रहे मेरठ में मंगलवार को एक बार फिर अन्नदाताओं का भारी हुजूम सड़कों पर उतर आया। भारतीय किसान यूनियन (भाकियू-टिकैत) के बैनर तले हजारों किसानों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर कमिश्नर कार्यालय और कलेक्ट्रेट का घेराव किया। हाथों में गन्ने और ज्वार की फसलें लिए इन किसानों का गुस्सा प्रशासन की वादाखिलाफी और सुस्त कार्यप्रणाली को लेकर साफ झलक रहा था। हालत यह हो गई कि किसानों के उग्र रूप और भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन को कमिश्नरी के मुख्य द्वार पर अंदर से ताला जड़ना पड़ा और भारी पुलिस बल तैनात करना पड़ा। सड़क पर बजते डीजे, गुड़गुड़ाते हुक्के और करोड़ों की लागत वाले मॉडिफाइड ट्रैक्टरों ने इस प्रदर्शन को मेरठ की सड़कों पर चर्चा का मुख्य विषय बना दिया।READ ALSO:-बिजनौर गुलदार का खूनी खेल: चारा लेने गई महिला को बनाया निवाला, अजूपुर जट में मातम और वन विभाग पर फूटा गुस्सा
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

कमिश्नरी पर किसानों का धावा और गेट पर जड़ा ताला

\r\n\r\n
मंगलवार सुबह से ही मेरठ और आस-पास के ग्रामीण इलाकों से किसानों का जत्था शहर की ओर कूच करने लगा था। करीब सवा 11 बजे तक लगभग 2000 से अधिक किसान कमिश्नर कार्यालय के बाहर पहुंच गए। किसानों के इस अचानक हुए भारी जमावड़े को देखकर प्रशासनिक अमले के हाथ-पांव फूल गए। सुरक्षा के मद्देनजर आनन-फानन में कमिश्नरी के मेन गेट को बंद कर दिया गया और अंदर से ताला लगा दिया गया। मौके पर पीएसी (PAC) और भारी पुलिस फोर्स को तैनात कर दिया गया ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटा जा सके। गेट बंद होने से आक्रोशित किसान वहीं सड़क पर बैठ गए और शासन-प्रशासन के खिलाफ जोरदार नारेबाजी शुरू कर दी।
\r\n\r\n

 मेरठ में कमिश्नर को चेतावनी के बाद एडिशनल कमिश्नर अमित कुमार सिंह को किसानों ने ज्ञापन सौंपा।

विज्ञापन
विज्ञापन
\r\n\r\n

अनुराग चौधरी की खुली चेतावनी: "10 मिनट में ज्ञापन लें, वरना टूटेंगे गेट"

\r\n\r\n
दोपहर करीब साढ़े 12 बजे धरने का नेतृत्व कर रहे भाकियू (टिकैत) के जिलाध्यक्ष अनुराग चौधरी का धैर्य जवाब दे गया। उन्होंने धरने के दौरान ही माइक संभालते हुए पुलिस और प्रशासन को एक बेहद सख्त और खुली चेतावनी दे डाली। उन्होंने हुंकार भरते हुए कहा, "यह तानाशाह अधिकारियों के लिए हमारी खुली चेतावनी है। हम यहां पिछले 2 घंटे से शांतिपूर्ण तरीके से धरने पर बैठे हैं, लेकिन कोई भी अधिकारी हमारी सुध लेने या हमारी बात सुनने नहीं आ रहा है। अगर अगले 10 मिनट में मेरठ कमिश्नर अपने कार्यालय से बाहर आकर हमारा ज्ञापन स्वीकार नहीं करते हैं, तो उसके बाद हम खुद गेट तोड़कर अंदर जाएंगे।"
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
अनुराग चौधरी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अगर 10 मिनट के बाद गेट टूटते हैं और कोई अव्यवस्था या कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ती है, तो इसके लिए भारतीय किसान यूनियन या उनके किसी भी कार्यकर्ता की कोई जिम्मेदारी नहीं होगी। इस तीखे अल्टीमेटम के बाद प्रशासन में हड़कंप मच गया।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

बैकफुट पर आया प्रशासन, कलेक्ट्रेट की ओर किया कूच

\r\n\r\n
किसानों की इस खुली चेतावनी और माहौल की गंभीरता को भांपते हुए प्रशासन को आखिरकार झुकना पड़ा। अल्टीमेटम के चंद मिनटों के भीतर ही कमिश्नर के प्रतिनिधि के रूप में अधिकारी आनन-फानन में बाहर आए और किसानों से बातचीत कर उनका ज्ञापन स्वीकार किया। ज्ञापन सौंपने के बाद किसानों का यह विशाल जत्था वहां से लगभग 500 मीटर दूर स्थित कलेक्ट्रेट की ओर मार्च करने लगा। हाथों में अपने खेतों की उपज (ज्वार और गन्ने की फसल) लहराते हुए किसानों ने कलेक्ट्रेट पहुंचकर भी अपना शक्ति प्रदर्शन जारी रखा।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

प्रदर्शन का मुख्य आकर्षण: 5 लाख के मॉडिफाइड ट्रैक्टर, डीजे और हुक्का

\r\n\r\n
पश्चिमी यूपी के किसान आंदोलनों की अपनी एक अलग ही सांस्कृतिक पहचान होती है, जो इस प्रदर्शन में भी भरपूर देखने को मिली। मंगलवार को कमिश्नरी पर हुए इस प्रदर्शन में किसानों की ट्रैक्टर-ट्रॉलियों ने वहां से गुजरने वाले हर आम और खास व्यक्ति का ध्यान अपनी ओर खींचा। किसान अपने-अपने हाई-टेक और शानदार तरीके से मॉडिफाई किए गए ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के साथ पहुंचे थे।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
किसानों ने बताया कि इनमें से कई ट्रॉलियां विशेष रूप से तैयार कराई गई हैं, जिन पर करीब 5 लाख रुपये तक की लागत आई है। इन ट्रॉलियों में केवल बैठने की ही नहीं, बल्कि आराम करने, सोने और घर जैसी तमाम आधुनिक सुविधाएं मौजूद हैं। यूनियन के सदस्यों ने गर्व के साथ बताया कि इन खास वाहनों को केवल बड़े विरोध प्रदर्शनों, ऐतिहासिक गंगा मेलो या किसानों के विशेष शिविरों में ही बाहर निकाला जाता है।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
इसके साथ ही, जैसे-जैसे किसानों की संख्या बढ़ती गई, युवाओं ने ट्रैक्टरों पर लगे डीजे सिस्टम को चालू कर दिया और सड़क पर ही डांस करना शुरू कर दिया। वहीं, बुजुर्ग किसान और भाकियू के जिलाध्यक्ष अनुराग चौधरी अपने अन्य कार्यकर्ताओं के साथ कमिश्नरी के बाहर सड़क पर ही दरी बिछाकर बैठ गए और हुक्का गुड़गुड़ाते नजर आए। उनका साफ कहना था कि जब तक समस्याओं का ठोस समाधान नहीं होता, वे यहीं डटे रहेंगे।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

क्या हैं किसानों की प्रमुख मांगें?

\r\n\r\n
इस उग्र प्रदर्शन के पीछे किसानों की कई गहरी और पुरानी पीड़ाएं हैं, जिन्हें प्रशासन लंबे समय से नजरअंदाज कर रहा था:
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
    \r\n
  1. \r\n
    गन्ना भुगतान (Sugarcane Dues): पश्चिमी यूपी की पूरी अर्थव्यवस्था गन्ने पर टिकी है। किसानों की सबसे बड़ी मांग चीनी मिलों पर बकाया गन्ना भुगतान को तुरंत ब्याज सहित दिलाना है।
    \r\n
  2. \r\n
  3. \r\n
    खाद की किल्लत: रबी की बुवाई का समय नजदीक है, लेकिन सहकारी समितियों पर पर्याप्त खाद (यूरिया और डीएपी) उपलब्ध नहीं है। किसानों का आरोप है कि खाद वितरण में भारी अनियमितताएं और कालाबाजारी हो रही है, जिससे उन्हें समय पर खाद नहीं मिल पा रही है।
    \r\n
  4. \r\n
  5. \r\n
    बिजली के बढ़े हुए भार से राहत: ट्यूबवेल और घरेलू बिजली के मनमाने बिलों और अघोषित रूप से बढ़ाए गए बिजली के भार (Load) ने किसानों की कमर तोड़ दी है। वे इसमें तत्काल राहत चाहते हैं।
    \r\n
  6. \r\n
  7. \r\n
    तहसीलों में चरम पर भ्रष्टाचार: किसानों का सीधा आरोप है कि तहसीलों में बिना रिश्वत के कोई भी काम (जैसे खतौनी, दाखिल-खारिज) नहीं होता है। भ्रष्ट अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की गई है।
    \r\n
  8. \r\n
  9. \r\n
    लोक निर्माण विभाग (PWD) के मुद्दे: ग्रामीण अंचलों की टूटी सड़कों और PWD से जुड़े अन्य विकास कार्यों की अनदेखी का समाधान निकालने की मांग भी ज्ञापन में प्रमुखता से शामिल है।
    \r\n
  10. \r\n
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
किसानों ने अपने ज्ञापन में यह भी कड़ा एतराज जताया है कि जिले के सर्वोच्च अधिकारी (जिलाधिकारी) से जब किसान अपनी समस्याएं लेकर मिलने का समय मांगते हैं, तो उन्हें समय नहीं दिया जाता है। यह किसानों का सीधा अपमान है।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
मेरठ में हुआ यह प्रदर्शन सिर्फ एक झांकी है। भारतीय किसान यूनियन ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि उनकी इन जायज मांगों पर जल्द ही कोई ठोस प्रशासनिक कार्रवाई नहीं हुई, तो आने वाले दिनों में यह आंदोलन गांव-गांव तक फैलेगा और प्रशासन के लिए इसे संभालना मुश्किल हो जाएगा। 'खबरीलाल' की टीम इस पूरे घटनाक्रम और किसानों की हर आवाज को आप तक पहुंचाती रहेगी।
\r\n\r\n
 
विज्ञापन
विज्ञापन