दिल्ली के लाल किले के पास सोमवार रात हुए बम ब्लास्ट (Delhi Blast) की घटना में मेरठ के एक ई-रिक्शा चालक मोहसिन (32) की दुखद मौत हो गई। मोहसिन करीब दो साल पहले बेहतर भविष्य और रोजी-रोटी की तलाश में अपने परिवार के साथ मेरठ से दिल्ली गया था, जहाँ वह ई-रिक्शा चलाकर अपना परिवार चलाता था। उनके असामयिक निधन की खबर से उनका पैतृक परिवार सदमे में है।READ ALSO:-दिल्ली धमाके के बाद मेरठ में चप्पे-चप्पे पर पुलिस: रेलवे स्टेशन से बस अड्डे तक सघन चेकिंग, हाईवे पर वाहनों की तलाशी
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परिवार और दिल्ली कनेक्शन 

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मोहसिन मूल रूप से मेरठ के लोहियानगर थाना क्षेत्र के न्यू इस्लामनगर गली नंबर 28 के रहने वाले थे।
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    दिल्ली निवास: वह फिलहाल दिल्ली में जामा मस्जिद स्थित पत्ता मोहल्ले में किराए के मकान में रहता था, जो उसकी ससुराल भी थी।
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    परिवार: उनके परिवार में पत्नी सुल्ताना, 10 साल की बेटी हिफजा और 8 साल का बेटा आहद है।
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    सपना: मोहसिन का मुख्य उद्देश्य अपने बच्चों को बेहतर शिक्षा दिलाना और उनके अच्छे भविष्य की नींव रखना था, जिसके लिए वह मेरठ से दिल्ली गए थे।
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लाल किले के पास हादसे का शिकार

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सोमवार शाम को मोहसिन ई-रिक्शा से सवारियां लेकर लाल किला की तरफ जा रहे थे।
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    घटना: ई-रिक्शा चलाने के दौरान ही वह लाल किले के पास हुए बम ब्लास्ट की चपेट में आ गए और मौके पर ही उनकी मौत हो गई।
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    पहचान: मोहसिन की पत्नी सुल्ताना ने सोमवार शाम को अपने देवर नदीम को फोन करके बम ब्लास्ट की जानकारी दी और बताया कि मोहसिन का कुछ पता नहीं चल रहा है। देर रात तक घर नहीं लौटने पर नदीम दिल्ली पहुंचे, जहां उन्हें मोहसिन की मौत की खबर मिली।
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माँ का मार्मिक विलाप

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मंगलवार की सुबह मोहसिन का शव मेरठ स्थित उनके पैतृक घर पहुंचा, जिसके बाद पूरे परिवार में चीख-पुकार मच गई।
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    माँ का दर्द: बेटे का शव देखकर माँ संजीदा बिलख-बिलखकर रोने लगीं। उन्होंने कहा, "मेरे लाल की क्या गलती थी। किसी तरह रोज 500-600 रुपए कमाकर परिवार चलाता था। इंसानियत के दुश्मनों ने सब कुछ तबाह कर दिया।"
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    पत्नी का रुख: मोहसिन की पत्नी सुल्ताना और बच्चे अभी दिल्ली में ही हैं। उनकी इच्छा है कि मोहसिन का कफन-दफन दिल्ली में ही किया जाए, जबकि परिवार वाले मेरठ में अंतिम संस्कार करना चाहते थे।
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    पिता का बयान: पिता रफीक ने बताया कि मोहसिन नौ भाई-बहनों में दूसरे नंबर पर था। उन्होंने कहा, "मेरा बेटा रोजी कमाने के लिए दिल्ली गया था। लेकिन बम ब्लास्ट में उसकी जान चली गई। बेटे की मौत के बाद परिवार पर संकट आ गया है।"
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सैकड़ों लोगों की भीड़

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बम ब्लास्ट में मारे गए मोहसिन के घर पर सैकड़ों लोगों की भीड़ संवेदना व्यक्त करने उमड़ पड़ी। इलाके के लोगों का कहना था कि ई-रिक्शा चलाने वाले उस गरीब की क्या गलती थी, जिसके पूरे परिवार को इंसानियत के दुश्मनों ने तबाह कर दिया। उनकी मौत के बाद मोहसिन के बच्चों की देखभाल कौन करेगा, यह बड़ा सवाल खड़ा हो गया है।
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परिवार को सहायता की उम्मीद

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मोहसिन की मौत से उनके बच्चों और पत्नी पर संकट आ गया है। उनका सपना था कि बच्चे अच्छी शिक्षा पाएं। अब परिवार और प्रशासन से पीड़ित परिवार को जल्द से जल्द आर्थिक सहायता दिए जाने की उम्मीद है।
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