मेरठ (स्पेशल डेस्क): डिजिटल इंडिया के दौर में ऑनलाइन गेमिंग का बाजार जितनी तेजी से बढ़ा है, उतनी ही तेजी से इसके पीछे टैक्स चोरी और फर्जीवाड़े के नए तरीके भी ईजाद किए गए हैं। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मेरठ में विशेष मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (Special CJM) की अदालत में एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने GST विभाग (DGGI) और जांच एजेंसियों के भी होश उड़ा दिए हैं।READ ALSO:-मेरठ में व्यापारिक क्रांति का शंखनाद: नमो भारत और मेट्रो की 'डबल इंजन' रफ्तार से भरेगी अर्थव्यवस्था की उड़ान; दिल्ली-मेरठ के बाजार अब 'एक कदम' दूर
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महज कुछ डमी कंपनियों और फर्जी डायरेक्टरों के सहारे 400 करोड़ रुपये से ज्यादा का लेन-देन और सरकारी खजाने को 115 करोड़ रुपये का चूना लगाने वाले मास्टरमाइंड आशीष त्यागी को अंततः कानून के शिकंजे में ले लिया गया है। 18 फरवरी 2026 को हुई अहम सुनवाई के बाद, अदालत ने जांच अधिकारी के तर्कों को सही मानते हुए आरोपी को न्यायिक हिरासत (Remand) में भेज दिया है।
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यह मामला सिर्फ एक व्यक्ति की गिरफ्तारी का नहीं, बल्कि इस बात का प्रमाण है कि कैसे तकनीक का दुरुपयोग कर सरकार की आंखों में धूल झोंकी जा रही थी। आइए जानते हैं इस हाई-प्रोफाइल केस की एक-एक परत, जिसे DGGI गाजियाबाद की टीम ने अपनी सूझबूझ और फॉरेंसिक जांच से बेनकाब किया।
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गिरफ्तारी की इनसाइड स्टोरी: क्या है पूरा मामला?
\r\n\r\nमामला यूनियन ऑफ इंडिया बनाम आशीष त्यागी (वाद संख्या 2122/2025) का है। गाजियाबाद स्थित डायरेक्टरेट जनरल ऑफ जीएसटी इंटेलिजेंस (DGGI) को खूफिया जानकारी मिली थी कि ऑनलाइन मनी गेमिंग के जरिए बड़े पैमाने पर टैक्स चोरी की जा रही है। जांच की सुई मैसर्स डोटन इन्फोटेक प्राइवेट लिमिटेड (M/s Doton Infotech Pvt. Ltd.) और मैसर्स ऋषि एंटरप्राइजेज (M/s Rishi Enterprises) की तरफ घूमी।
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छापेमारी और गिरफ्तारी
\r\n\r\nDGGI की टीम ने जब जांच शुरू की, तो पता चला कि कागजों पर दिखने वाले डायरेक्टर सिर्फ 'चेहरे' हैं, जबकि असली रिमोट कंट्रोल गाजियाबाद के पटेल नगर निवासी आशीष त्यागी (पुत्र सुरेंद्र त्यागी) के हाथ में है। 17 फरवरी 2026 को सुबह 11:50 बजे आशीष त्यागी को गिरफ्तार किया गया। 18 फरवरी को उन्हें मेरठ स्थित विशेष मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (आर्थिक अपराध) की अदालत में पेश किया गया, जहां जांच अधिकारी कुमार सौरव जयंत ने 14 दिन की न्यायिक रिमांड की मांग की।
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414 करोड़ का टर्नओवर और 115 करोड़ की चोरी: आंकड़ों का खेल
\r\n\r\nइस केस में जो आंकड़े सामने आए हैं, वे चौंकाने वाले हैं। आरोपी ने न केवल सरकार को धोखा दिया, बल्कि कानून की पेचीदगियों का फायदा उठाने की कोशिश की।
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फंड्स का भारी-भरकम प्रवाह
\r\n\r\nजांच में पता चला कि आशीष त्यागी द्वारा नियंत्रित डमी कंपनियों के खातों में भारी मात्रा में पैसा आया:
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- \r\n कुल लेन-देन: लगभग 414 करोड़ रुपये से अधिक।\r\n \r\n
- \r\n मैसर्स डोटन इन्फोटेक के खाते में: ₹369,08,83,275/- (लगभग 369 करोड़)।\r\n \r\n
- \r\n मैसर्स ऋषि एंटरप्राइजेज के खाते में: ₹45,03,46,673/- (लगभग 45 करोड़)।\r\n \r\n
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टैक्स चोरी का गणित (18% बनाम 28%)
\r\n\r\nऑनलाइन गेमिंग में सरकार ने स्पष्ट नियम बनाए हैं कि दांव पर लगाई गई पूरी राशि (Face Value) पर 28% GST देना अनिवार्य है। लेकिन आशीष त्यागी का 'मास्टरप्लान' अलग था:
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- \r\n नियम: कुल फेस वैल्यू पर 28% GST।\r\n \r\n
- \r\n आरोपी ने क्या किया: उन्होंने कुल वैल्यू के बजाय सिर्फ 'कमीशन' की राशि पर 18% GST जमा किया।\r\n \r\n
- \r\n नतीजा: जहां सरकार को 115 करोड़ रुपये से अधिक का टैक्स मिलना चाहिए था, वहां आरोपी ने मात्र 12 लाख रुपये (लगभग) का भुगतान किया।\r\n \r\n
- \r\n सीधा नुकसान: सरकारी खजाने को सीधे तौर पर 115 करोड़ रुपये का नुकसान पहुंचाया गया।\r\n \r\n
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'डमी' कंपनियों का मायाजाल: कौन था असली बॉस?
\r\n\r\nइस घोटाले का सबसे दिलचस्प पहलू यह है कि आशीष त्यागी ने खुद को बचाने के लिए "लेयरिंग" (Layering) तकनीक का इस्तेमाल किया।
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फर्जी चेहरे, असली कंट्रोल जांच अधिकारी ने कोर्ट को बताया कि कागजों पर कंपनियां किसी और के नाम पर थीं, लेकिन ये सभी व्यक्ति "डमी" (Dummy) थे। वे या तो कम पढ़े-लिखे थे या उन्हें पैसों का लालच देकर डायरेक्टर बनाया गया था। जब इन कथित डायरेक्टरों के बयान दर्ज किए गए, तो उन्होंने साफ तौर पर कहा:
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\r\n\r\n\r\n"ये कंपनियां आशीष त्यागी के कहने पर बनाई गई थीं और वही इन्हें चला रहे थे। हमारा काम सिर्फ दस्तावेजों पर साइन करना था।"\r\n
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यह बयान इस केस में 'आखिरी कील' साबित हुआ, जिसने आशीष त्यागी के उस दावे को खारिज कर दिया कि उनका इन कंपनियों से कोई लेना-देना नहीं है।
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डिजिटल फॉरेंसिक: मोबाइल ने उगले सारे राज
\r\n\r\nआज के दौर में अपराधी चाहे कितना भी शातिर हो, उसका डिजिटल फुटप्रिंट (Digital Footprint) उसे पकड़वा ही देता है। इस केस में भी आरोपी का मोबाइल फोन उसका सबसे बड़ा दुश्मन बन गया। फॉरेंसिक जांच में जो मिला, उसने कोर्ट को भी हैरान कर दिया।
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(i) डैशबोर्ड और पासवर्ड का एक्सेस
\r\n\r\nआशीष त्यागी ने कोर्ट में कहा था कि वह डायरेक्टर नहीं हैं। लेकिन उनके मोबाइल की फॉरेंसिक जांच में इन दोनों कंपनियों (डोटन और ऋषि एंटरप्राइजेज) के यूजरनेम, पासवर्ड और एडमिन डैशबोर्ड का एक्सेस मिला। सवाल यह उठता है कि अगर कोई व्यक्ति कंपनी से जुड़ा नहीं है, तो उसके पास कंपनी के बैंक खातों और पोर्टल का 'मास्टर एक्सेस' क्यों होगा?
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(ii) व्हाट्सएप चैट और विजय यादव का एंगल
\r\n\r\nजांच में एक और किरदार सामने आया—विजय यादव, जो मैसर्स फिनजेन पेमेंट टेक्नोलॉजी (Finzen Payment Technology) से जुड़े हैं। यह कंपनी डोटन इन्फोटेक को सर्विस देती थी। आशीष त्यागी के मोबाइल से विजय यादव के साथ हुई व्हाट्सएप चैट मिली। इसमें आशीष त्यागी विजय यादव को निर्देश दे रहे थे कि वह जांच में शामिल न हों। यह सीधे तौर पर गवाहों को प्रभावित करने (Witness Tampering) का प्रयास था, जिसे कोर्ट ने गंभीरता से लिया।
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(iii) बैंक खाते और OTP
\r\n\r\nआरोपी के पास डमी कंपनियों के बैंक खातों से जुड़े मोबाइल नंबर और OTP (One Time Password) आते थे। इसका मतलब है कि पैसे का हर ट्रांसफर उनकी उंगलियों के इशारे पर हो रहा था।
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कोर्ट रूम ड्रामा: बचाव पक्ष और अभियोजन की दलीलें
\r\n\r\nमेरठ की विशेष अदालत में 18 फरवरी को हुई सुनवाई के दौरान माहौल तनावपूर्ण था। दोनों पक्षों ने अपनी-अपनी दलीलें रखीं।
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बचाव पक्ष (Defense) का तर्क:
\r\n\r\nआरोपी आशीष त्यागी के वकील ने रिमांड का कड़ा विरोध किया। उनका कहना था:
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- \r\n झूठे आरोप: मेरे मुवक्किल को झूठा फंसाया जा रहा है।\r\n \r\n
- \r\n कोई संबंध नहीं: आशीष त्यागी न तो डोटन इन्फोटेक के डायरेक्टर हैं और न ही ऋषि एंटरप्राइजेज के।\r\n \r\n
- \r\n दस्तावेजी सबूत नहीं: कागजों पर उनका नाम कहीं नहीं है, इसलिए उन्हें गिरफ्तार करना गैर-कानूनी है।\r\n \r\n
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अभियोजन पक्ष (Prosecution) का पलटवार:
\r\n\r\nजांच अधिकारी (IO) कुमार सौरव जयंत और जीएसटी विभाग की ओर से लक्ष्य कुमार सिंह विशेष अभियोजन अधिकारी एवं उनकी सहयोगी श्रीमती वंदना सिंह एडवोकेट ने तर्कों के साथ ठोस सबूत पेश किए।
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- \r\n 36 करोड़ का निजी लाभ: जांच अधिकारी ने एक नोट-शीट पेश की, जिसमें दिखाया गया कि गेमिंग कंपनियों से कमाया गया 36,90,88,327 रुपये (लगभग 37 करोड़) डमी फर्मों से निकलकर सीधे आशीष त्यागी के निजी बैंक खाते में गया। अगर उनका कंपनी से कोई वास्ता नहीं, तो 37 करोड़ रुपये उनके खाते में क्यों आए?\r\n \r\n
- \r\n कानूनी नजीर: अभियोजन ने सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले राधिका अग्रवाल बनाम यूनियन ऑफ इंडिया (2025) का हवाला देते हुए कहा कि गिरफ्तारी के लिए "Reason to Believe" (विश्वास करने का कारण) पर्याप्त है।\r\n \r\n
- \r\n HSN कोड की हेराफेरी: आरोपी ने जानबूझकर गलत HSN/SAC कोड का इस्तेमाल किया ताकि बिजनेस की असली प्रकृति (नेचर) को छुपाया जा सके।\r\n \r\n
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कोर्ट का फैसला और सख्त टिप्पणी
\r\n\r\nविशेष मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (Special CJM), श्री दुर्गेश ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद एक विस्तृत आदेश पारित किया। कोर्ट ने माना कि यह मामला साधारण नहीं है, बल्कि एक गंभीर आर्थिक अपराध (Serious Economic Offense) है।
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कोर्ट की प्रमुख टिप्पणियां (Key Observations):
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- \r\n परिचालन नियंत्रण (Operational Control): कोर्ट ने पाया कि आरोपी के मोबाइल में कंपनियों के फ्रीज होने के नोटिस और समन की कॉपियां मौजूद थीं। एक बाहरी व्यक्ति के पास विभागीय नोटिस की कॉपी होना यह सिद्ध करता है कि वही कंपनी चला रहा था।\r\n \r\n
- \r\n आर्थिक अपराध की गंभीरता: कोर्ट ने कहा कि 115 करोड़ की टैक्स चोरी राष्ट्र के राजस्व को भारी क्षति है। ऐसे मामलों में नरमी नहीं बरती जा सकती।\r\n \r\n
- \r\n गवाहों को धमकाना: व्हाट्सएप चैट से यह स्पष्ट है कि आरोपी जांच को पटरी से उतारने की कोशिश कर रहा था, जो रिमांड देने का एक मजबूत आधार है।\r\n \r\n
- \r\n प्रक्रिया का पालन: कोर्ट ने पुष्टि की कि गिरफ्तारी के समय BNSS (भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता) की धारा 105 के तहत ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग की गई थी और सभी नियमों का पालन किया गया।\r\n \r\n
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आदेश: कोर्ट ने आरोपी आशीष त्यागी की 14 दिन की न्यायिक रिमांड मंजूर कर ली। अब उन्हें 27 फरवरी 2026 तक जेल में रहना होगा और अगली पेशी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (V.C.) के जरिए होगी।
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क्या कहता है कानून? (CGST Act की धारा 132 का विश्लेषण)
\r\n\r\nआम पाठकों के लिए यह समझना जरूरी है कि आशीष त्यागी पर किन धाराओं में मुकदमा चल रहा है और यह कितना गंभीर है।
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- \r\n धारा 132(1)(a): बिना इनवॉइस या बिल के माल या सेवाओं की आपूर्ति करना (टैक्स बचाने के उद्देश्य से)।\r\n \r\n
- \r\n धारा 132(1)(f): गलत तरीके से इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) लेना या उसका उपयोग करना।\r\n \r\n
- \r\n धारा 132(1)(i): किसी भी तरह से सरकारी राजस्व की चोरी करना या उसमें मदद करना।\r\n \r\n
- \r\n धारा 69: यह धारा GST कमिश्नर को शक्ति देती है कि अगर उनके पास यह मानने का ठोस कारण है कि किसी व्यक्ति ने धारा 132 के तहत अपराध किया है, तो वे उसकी गिरफ्तारी का आदेश दे सकते हैं।\r\n \r\n
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सजा का प्रावधान: चूंकि कर चोरी की राशि 5 करोड़ रुपये से अधिक है (यहां 115 करोड़ है), इसलिए यह अपराध गैर-जमानती (Non-bailable) और संज्ञेय (Cognizable) है। इसमें 5 साल तक की कैद और भारी जुर्माने का प्रावधान है।
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ऑनलाइन गेमिंग इंडस्ट्री के लिए खतरे की घंटी
\r\n\r\nआशीष त्यागी का केस भारत में ऑनलाइन गेमिंग कंपनियों के लिए एक सबक है। पिछले कुछ वर्षों में सरकार ने गेमिंग पर टैक्स नियमों को सख्त किया है। कई कंपनियां "स्किल गेमिंग" के नाम पर 18% टैक्स दे रही थीं, जबकि उन्हें "सट्टेबाजी/जुआ" की श्रेणी में 28% टैक्स देना था।
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यह केस दिखाता है कि DGGI अब सिर्फ कागजी दस्तावेजों पर निर्भर नहीं है। मोबाइल फॉरेंसिक, आईपी एड्रेस ट्रैकिंग, और बैंक ट्रेल एनालिसिस के जरिए असली मालिकों (Beneficial Owners) तक पहुंचा जा रहा है। डमी डायरेक्टर खड़ा करके अब बचना नामुमकिन है।
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जांच का अगला चरण: क्या और भी नाम सामने आएंगे?
\r\n\r\nरिमांड के दौरान DGGI आशीष त्यागी से कई अहम सवालों के जवाब उगलवाएगी:
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- \r\n क्या इस सिंडिकेट में और भी लोग शामिल हैं?\r\n \r\n
- \r\n 414 करोड़ रुपये का फंड कहां-कहां डाइवर्ट किया गया?\r\n \r\n
- \r\n पेमेंट गेटवे की भूमिका क्या थी? (विजय यादव से पूछताछ संभव)।\r\n \r\n
- \r\n क्या अन्य शहरों में भी ऐसी डमी कंपनियां चल रही हैं?\r\n \r\n
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कोर्ट ने अपने आदेश में भी लिखा है कि "विवेचना अभी प्रचलित है" (Investigation is ongoing), जिसका अर्थ है कि आने वाले दिनों में और भी गिरफ्तारियां या बड़े खुलासे हो सकते हैं।
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कानून के हाथ लंबे और डिजिटल भी
\r\n\r\nआशीष त्यागी का मामला इस बात का सटीक उदाहरण है कि कैसे सफेदपोश अपराधी (White Collar Criminals) टेक्नोलॉजी की आड़ में अपराध करते हैं, लेकिन उसी टेक्नोलॉजी से पकड़े भी जाते हैं। 115 करोड़ की यह टैक्स चोरी न केवल एक आर्थिक अपराध है, बल्कि देश के विकास में बाधा भी है। मेरठ कोर्ट का यह सख्त फैसला संदेश देता है कि टैक्स चोरी चाहे कितने भी शातिर तरीके से की जाए, कानून की गिरफ्त से बचना अब आसान नहीं है।
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अगली सुनवाई: 27 फरवरी 2026 को आरोपी को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कोर्ट में पेश किया जाएगा, जहां यह तय होगा कि रिमांड और बढ़ेगी या जमानत याचिका पर बहस होगी। तब तक के लिए, आशीष त्यागी का नया पता 'जेल' ही रहेगा।
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प्रमुख बिंदु (Quick Highlights for Readers)
\r\n\r\n| \r\n विवरण \r\n | \r\n \r\n जानकारी \r\n | \r\n
| \r\n आरोपी का नाम \r\n | \r\n \r\n आशीष त्यागी (निवासी गाजियाबाद) \r\n | \r\n
| \r\n कुल घोटाला राशि \r\n | \r\n \r\n 414 करोड़ (लेन-देन), 115 करोड़ (टैक्स चोरी) \r\n | \r\n
| \r\n धाराएं \r\n | \r\n \r\n CGST Act 132(1)(a), (f), (i) \r\n | \r\n
| \r\n मुख्य सबूत \r\n | \r\n \r\n मोबाइल फॉरेंसिक, व्हाट्सएप चैट, बैंक स्टेटमेंट \r\n | \r\n
| \r\n कोर्ट का आदेश \r\n | \r\n \r\n 27.02.2026 तक न्यायिक रिमांड \r\n | \r\n
| \r\n जांच एजेंसी \r\n | \r\n \r\n DGGI, गाजियाबाद \r\n | \r\n
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Disclaimer: यह समाचार रिपोर्ट उपलब्ध प्रेस विज्ञप्ति और विशेष अभियोजन अधिकारी तथा अभियुक्त के अधिवक्ताओं के तर्कों तथा मान्य न्यायालय के आदेशों पर आधारित है।
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