खबरीलाल डेस्क
उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष बबीता चौहान ने मिर्जापुर की हालिया घटना को लेकर एक बेहद गंभीर और बड़ा बयान दिया है। रविवार को मिर्जापुर के सर्किट हाउस में पत्रकारों से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा कि अब लव जिहाद का स्वरूप बदल गया है। मिर्जापुर में जो हुआ, वह केवल लव जिहाद नहीं है, बल्कि अगर इसे 'जिम जिहाद' (Gym Jihad) कहा जाए, तो यह कतई गलत नहीं होगा।READ ALSO:-आगरा का 'संजय प्लेस हॉरर': ऑफिस के सन्नाटे में प्यार का खूनी अंत, प्रेमी ने प्रेमिका के सिर-पैर काटे, यमुना पुल पर खुले बोरे ने उगला मौत का सच
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बबीता चौहान का यह बयान सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है। उन्होंने न केवल जिम संचालकों और ट्रेनरों की मंशा पर सवाल उठाए, बल्कि बुर्के की आड़ में होने वाली गतिविधियों और अभिभावकों की जिम्मेदारी पर भी खुलकर बात की।
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इस विशेष रिपोर्ट में हम विस्तार से जानेंगे कि आखिर बबीता चौहान ने जिम जिहाद को लेकर क्या तर्क दिए, मिर्जापुर का वह कौन सा मामला है जिसने इस बहस को जन्म दिया, और महिला सुरक्षा को लेकर आयोग अब क्या कदम उठाने जा रहा है।
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क्या है 'जिम जिहाद' (Gym Jihad)? बबीता चौहान का तर्क

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बबीता चौहान ने अपने बयान में स्पष्ट किया कि धर्म विशेष के युवकों द्वारा नाम बदलकर या अपनी पहचान छिपाकर हिंदू युवतियों को प्रेम जाल में फंसाना अब पुराने तरीके (लव जिहाद) से आगे बढ़कर 'संस्थानिक जिहाद' का रूप ले रहा है। उन्होंने विशेष रूप से जिम (Gym) का उल्लेख करते हुए इसे जिम जिहाद की संज्ञा दी।
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उन्होंने कहा, "मिर्जापुर की घटना अब केवल लव जिहाद नहीं रही है। अगर इसे जिम जिहाद कहा जाए तो कतई गलत नहीं होगा। जिम में अब जितना जिहाद चल रहा है, उतना कहीं और नहीं चल रहा।"
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उनके अनुसार, जिम एक ऐसी जगह है जहाँ युवा लड़कियां अपनी फिटनेस और स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के लिए जाती हैं। वहां वे अपने ट्रेनर पर भरोसा करती हैं। इसी भरोसे का फायदा उठाकर कुछ ट्रेनर, जिनकी मानसिकता दूषित है, उन्हें अपने जाल में फंसाते हैं। बबीता चौहान ने कहा कि यह एक सुनियोजित षड्यंत्र जैसा प्रतीत होता है, जहाँ शारीरिक प्रशिक्षण की आड़ में मानसिक ब्रेनवॉश किया जा रहा है।
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मिर्जापुर कांड और रमीज का कनेक्शन

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बबीता चौहान का यह बयान मिर्जापुर में हुई एक विशिष्ट घटना के संदर्भ में आया है। दरअसल, मिर्जापुर में एक जिम ट्रेनर रमीज (Rameez) पर आरोप है कि उसने एक युवती को अपने प्रेम जाल में फंसाया। आरोप है कि जिम ट्रेनिंग के दौरान नजदीकी बढ़ाई गई और बाद में युवती का शोषण किया गया।
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बबीता चौहान ने इस घटना का जिक्र करते हुए कहा कि "लव जिहाद को बढ़ावा देने वाला वह शख्स कोबरा सांप था। यह जो जिम जिहाद में शामिल रमीज जैसे लोग हैं, यह उसी के पैदा किए गए सपोले हैं।"
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उन्होंने प्रशासन और पुलिस की कार्रवाई की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे लोगों के खिलाफ सरकार सख्त है। जिम जिहाद के मामले सामने आने के बाद कई लोगों की गिरफ्तारियां हुई हैं और जो बचे हैं, उन्हें भी जल्द ही सलाखों के पीछे भेजा जाएगा।
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महिला ट्रेनर की अनिवार्यता पर जोर

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एक साल पहले उत्तर प्रदेश महिला आयोग ने एक प्रस्ताव रखा था कि महिलाओं के जिम और योग केंद्रों में महिला ट्रेनर का होना अनिवार्य किया जाए। अपने इस पुराने बयान को याद करते हुए बबीता चौहान ने कहा, "मुझे अपनी एक साल पुरानी वह बात याद आ रही है जिसमें मैंने जिम में महिला ट्रेनरों को शामिल किए जाने और बड़े ब्यूटी पार्लर व बुटीक में महिलाओं को अवश्य स्थान दिए जाने पर जोर दिया था।"
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उनका मानना है कि:

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    सुरक्षा: अगर महिला जिम में महिला ट्रेनर होंगी, तो 'बैड टच' या गलत नीयत से छूने की घटनाओं पर लगाम लगेगी।
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    रोजगार: इससे महिला सशक्तिकरण को बल मिलेगा। बड़ी संख्या में महिलाओं को रोजगार के अवसर मिलेंगे।
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    विश्वास: परिवार वाले अपनी बेटियों को जिम भेजने में सुरक्षित महसूस करेंगे।
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आयोग का मानना है कि जिम, बुटीक और टेलरिंग की दुकानों पर जहां माप लेने का काम होता है, वहां पुरुषों के बजाय महिलाओं की नियुक्ति से 'जिम जिहाद' जैसे अपराधों को काफी हद तक रोका जा सकता है।
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"झांगुर बाबा" और जिहादी जाल

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पत्रकारों से वार्ता के दौरान बबीता चौहान ने एक स्थानीय संदर्भ या प्रतीकात्मक रूप में "झांगुर बाबा" का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि यह सब उसी झांगुर का फैलाया हुआ जाल है। यह शब्दावली इस बात की ओर इशारा करती है कि वे इसे किसी एक व्यक्ति का अपराध नहीं, बल्कि एक संगठित गिरोह या मानसिकता (इकोसिस्टम) का हिस्सा मानती हैं।
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उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा, "इनसे बचने के लिए हमें सजग रहना होगा। क्योंकि जिम, बुटीक व ब्यूटी पार्लर जैसे स्थान उनके निशाने पर हैं।"
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बुर्के पर विवादास्पद और सीधा बयान

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बबीता चौहान ने बुर्के को लेकर भी अपनी बेबाक राय रखी। जब उनसे बुर्के को लेकर उनके पुराने बयानों के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने कहा, "आज बुर्के के पीछे क्या नहीं हो रहा, यह सब जानते हैं।"
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उनके प्रमुख बिंदु इस प्रकार थे:

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    पहचान छिपाना: उनका कहना है कि बुर्के की आड़ में कई बार अपराधी अपनी पहचान छिपा लेते हैं।
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    सुरक्षा का प्रश्न: उन्होंने उदाहरण दिया कि कई ज्वेलर्स ने सुरक्षा कारणों से अपनी दुकानों में बुर्का पहनकर आने वाली महिलाओं को प्रतिबंधित कर दिया है, ताकि चोरी या डकैती की वारदातों को रोका जा सके।
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    सुनवाई के दौरान: उन्होंने बताया कि जब वे आयोग में सुनवाई करती हैं, तब भी कई महिलाएं बुर्का पहनकर आती हैं। उन्होंने सवाल उठाया, "सवाल यह है उनके सामने बुर्का पहन के आने की क्या जरूरत है?"
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    6 साल की बच्ची का उदाहरण: अपनी बात को पुख्ता करने के लिए उन्होंने एक दर्दनाक घटना का जिक्र किया। उन्होंने कहा, "6 साल की बच्ची के साथ बुर्के में मौजूद हैवान ने गलत हरकत की, यह घटना किसी से छिपी नहीं है।"
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यह बयान स्पष्ट करता है कि महिला आयोग अध्यक्ष के अनुसार, परिधान की आड़ में सुरक्षा के साथ खिलवाड़ नहीं होना चाहिए और पहचान सुनिश्चित करना अनिवार्य है।
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अभिभावकों के लिए सलाह: "बच्चियों से संवाद बढ़ाएं"
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बबीता चौहान ने इस समस्या का एक बड़ा कारण परिवारों में बढ़ती दूरियों को बताया। उन्होंने कहा कि जिम जिहाद या लव जिहाद जैसे मामलों में फंसने का एक कारण यह भी है कि युवतियां अपने माता-पिता से कटी हुई हैं।
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उन्होंने अभिभावकों और महिलाओं को निम्नलिखित सलाह दी:

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    बैकग्राउंड चेक: महिलाएं अपना दिमाग खोलकर किसी भी काम में शामिल हों। जिससे मिल रही हैं या जिससे दोस्ती कर रही हैं, उसकी पृष्ठभूमि (Background) जरूर देख लें।
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  3. \r\n
    संवादहीनता खत्म करें: घरों के भीतर अपने-अपने मोबाइल में व्यस्त रहने की जो प्रथा शुरू हो गई है, उसे खत्म करना होगा। माता-पिता को अपने बच्चों से बात करनी चाहिए ताकि वे बाहर की समस्याओं को घर पर साझा कर सकें।
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    सुरक्षा ऑडिट: माता-पिता यह ध्यान रखें कि उनके बच्चे जिस जिम या सेंटर में जा रहे हैं, वह उनके लिए सुरक्षित है या नहीं।
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आयोग का एक्शन प्लान: जागरूकता अभियान

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उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग केवल बयानों तक सीमित नहीं है। अध्यक्ष बबीता चौहान ने बताया कि आयोग ने ऐसे प्रकरणों को लेकर सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने एक विशेष अभियान की रूपरेखा तैयार की है।
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    जागरूकता: आयोग स्कूल, कॉलेजों और सार्वजनिक स्थानों पर जाकर महिला वर्ग को जागरूक करेगा।
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    निगरानी: जिम और योगा सेंटर्स की निगरानी के लिए प्रशासन के साथ मिलकर काम किया जाएगा।
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    पुलिस की भूमिका: उन्होंने कहा कि "जिहादियों के पीछे पुलिस पड़ चुकी है।" यूपी पुलिस मिशन शक्ति और अन्य अभियानों के तहत महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित कर रही है।
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जिम जिहाद: एक सामाजिक चुनौती

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बबीता चौहान का "जिम जिहाद" शब्द का प्रयोग करना दर्शाता है कि प्रशासन अब अपराध के बदलते तरीकों को डिकोड कर रहा है। विशेषज्ञ मानते हैं कि जिम एक ऐसा स्थान है जहाँ शारीरिक आकर्षण और स्वास्थ्य चर्चा के बीच भावनात्मक संबंध बनाना आसान होता है। इसी मनोवैज्ञानिक पहलू का फायदा उठाकर कुछ अपराधी प्रवृति के लोग युवतियों का शोषण करते हैं।
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आयोग का मानना है कि जब तक जिम संचालक पुलिस वेरिफिकेशन नहीं कराते और महिला ट्रेनर्स की नियुक्ति नहीं करते, तब तक यह खतरा बना रहेगा।
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उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष बबीता चौहान का बयान यह स्पष्ट करता है कि राज्य सरकार और आयोग महिलाओं की सुरक्षा को लेकर किसी भी स्तर पर समझौता करने के मूड में नहीं है। मिर्जापुर की घटना को जिम जिहाद (Gym Jihad) का नाम देकर उन्होंने समाज को एक नए खतरे के प्रति आगाह किया है।
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चाहे वह बुर्के के पीछे की संदिग्ध गतिविधियों का मुद्दा हो या जिम और ब्यूटी पार्लर में पुरुष कर्मचारियों द्वारा शोषण का, आयोग ने साफ कर दिया है कि अब "आंख मूंदकर भरोसा करने का जमाना नहीं है।" बबीता चौहान के अनुसार, पुलिस की सख्ती के साथ-साथ पारिवारिक जागरूकता ही इस 'जाल' को काट सकती है। आने वाले दिनों में यूपी में जिम और योग सेंटर्स के लिए नए और सख्त दिशा-निर्देश देखने को मिल सकते हैं।
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यूपी महिला आयोग की अध्यक्ष बबीता चौहान ने मिर्जापुर दौरे के दौरान कहा कि अब लव जिहाद का तरीका बदलकर 'जिम जिहाद' हो गया है। उन्होंने जिम ट्रेनर रमीज के मामले का हवाला देते हुए जिम और ब्यूटी पार्लर्स में महिला कर्मचारियों की अनिवार्यता पर जोर दिया। साथ ही, उन्होंने बुर्के की आड़ में हो रहे अपराधों और अभिभावकों की सतर्कता पर भी बेबाक राय रखी।