मेरठ (Khabreelal Special Education Desk): उत्तर प्रदेश के उच्च शिक्षा संस्थानों में शुमार मेरठ के चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय (Chaudhary Charan Singh University - CCSU) का प्रशासन एक बार फिर से विवादों के घेरे में आ गया है। इस बार मामला विश्वविद्यालय के प्रतिष्ठित 'पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग' (Journalism and Mass Communication Department) से जुड़ा हुआ है, जहां एक अनुसूचित जाति (SC) के छात्र के साथ प्रवेश के दौरान कथित तौर पर हुए भेदभाव, मानसिक उत्पीड़न और शिक्षा से वंचित किए जाने के गंभीर आरोप लगे हैं।READ ALSO:-मेरठ: दलित महिलाओं पर अश्लील और जातिसूचक टिप्पणी मामले में NCSC सख्त, DM और SSP को 7 दिन का अल्टीमेटम
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मामले की गंभीरता और विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से बरती जा रही कथित हीलाहवाली को देखते हुए राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग (National Commission for Scheduled Castes - NCSC), भारत सरकार ने बेहद कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। गुरुवार, 27 अगस्त 2026 को आयोग ने CCSU के रजिस्ट्रार को सीधे तौर पर 'अनुस्मारक-II' (Reminder-II) जारी करते हुए 7 दिन के भीतर पूरे मामले की विस्तृत और तथ्यात्मक रिपोर्ट तलब की है।
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आयोग (NCSC) का सख्त एक्शन: 11 जून और 4 अगस्त के पत्रों को किया गया था नजरअंदाज
\r\n\r\nविश्वविद्यालय प्रशासन की लापरवाही का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि राष्ट्रीय स्तर के आयोग द्वारा मांगे गए जवाब को भी ठंडे बस्ते में डाल दिया गया था।
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27 अगस्त 2026 को आयोग द्वारा जारी किए गए इस 'अनुस्मारक-II' में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि इस गंभीर प्रकरण के संदर्भ में आयोग द्वारा पूर्व में 11 जून 2026 और उसके बाद 4 अगस्त 2026 को भी पत्र जारी कर रिपोर्ट मांगी गई थी। लेकिन, निर्धारित समय सीमा बीत जाने के बावजूद विश्वविद्यालय प्रशासन की तरफ से कोई भी अपेक्षित सूचना आयोग को उपलब्ध नहीं कराई गई।
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विश्वविद्यालय के इस लचर रवैये पर आयोग ने गहरी नाराजगी जताते हुए कड़ा संज्ञान लिया है। आयोग ने रजिस्ट्रार को दोबारा और सख्त लहजे में निर्देशित किया है कि मामले की आवश्यक सूचना बिना किसी भी प्रकार के विलंब के, पत्र प्राप्त होने के ठीक 7 दिनों के भीतर आयोग को हर हाल में भेजी जाए। यह अल्टीमेटम इसलिए भी महत्वपूर्ण है ताकि आयोग के माननीय अध्यक्ष को इस प्रकरण की वास्तविक और ग्राउंड जीरो की स्थिति से तुरंत अवगत कराया जा सके।
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क्या है 2021 का यह पूरा विवादित प्रकरण? (The 2021 Admission Row)
\r\n\r\nयह पूरा विवाद वर्ष 2021 की प्रवेश प्रक्रिया से जुड़ा हुआ है। मेरठ के ही रहने वाले और 'एंटी करप्शन फाउंडेशन ऑफ इंडिया' के वर्तमान जिला युवा अध्यक्ष मयंक कुमार वर्मा ने NCSC के समक्ष यह विस्तृत शिकायत दर्ज कराई है।
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अपनी शिकायत में मयंक वर्मा ने CCSU के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के कुछ अधिकारियों और कर्मचारियों पर बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका आरोप है कि वर्ष 2021 में जब वह विभाग में प्रवेश लेने गए, तो उनके साथ न केवल जातिगत आधार पर खुला भेदभाव किया गया, बल्कि उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित कर उच्च शिक्षा के मौलिक अधिकार से भी वंचित करने की साजिश रची गई।
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पोर्टल पर एडमिशन नहीं किया 'लॉक', कक्षाओं में बैठने के बावजूद हाजिरी गायब
\r\n\r\nशिकायतकर्ता मयंक के अनुसार, प्रवेश के दौरान जो उत्पीड़न हुआ, वह किसी भी शैक्षणिक संस्थान के लिए शर्मनाक है। उन्होंने आयोग को दिए अपने अभ्यावेदन में सिलसिलेवार तरीके से बताया है कि:
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- \r\n फीस और दस्तावेज: उन्होंने विश्वविद्यालय के नियमानुसार सभी आवश्यक दस्तावेज समय पर विभाग में जमा कर दिए थे और निर्धारित प्रवेश शुल्क (Admission Fee) का भी विधिवत भुगतान कर दिया था।\r\n \r\n
- \r\n पोर्टल का खेल: सब कुछ सही होने और फीस जमा होने के बावजूद, विभागीय अधिकारियों ने जानबूझकर उनका प्रवेश विश्वविद्यालय के आधिकारिक पोर्टल पर 'लॉक' (Lock) नहीं किया।\r\n \r\n
- \r\n हाजिरी में गोलमाल: छात्र का आरोप है कि प्रवेश प्रक्रिया के बीच उन्हें कुछ समय तक नियमित रूप से कक्षाओं में बैठने की अनुमति तो दी गई, लेकिन रजिस्टर में उनकी उपस्थिति (Attendance) कभी दर्ज ही नहीं की गई, ताकि बाद में यह साबित किया जा सके कि वह छात्र वहां पढ़ता ही नहीं था।\r\n \r\n
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जातिसूचक टिप्पणियां और जबरन एडमिशन वापसी का दबाव
\r\n\r\nमामला सिर्फ पोर्टल पर एडमिशन न लॉक करने तक सीमित नहीं था। मयंक वर्मा ने अपनी शिकायत में विभाग के कुछ चुनिंदा अधिकारियों और कर्मचारियों पर बेहद चौंकाने वाले आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि इन लोगों ने उनके साथ भेदभावपूर्ण रवैया अपनाया और उनके खिलाफ 'जातिसूचक टिप्पणियों' (Casteist Remarks) का भी इस्तेमाल किया।
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सबसे बड़ा आरोप यह है कि जब छात्र ने अपने हक के लिए आवाज उठानी चाही, तो उस पर भारी मानसिक दबाव बनाया गया। शिकायत के अनुसार, विभागीय अधिकारियों ने साजिश के तहत उस पर एक 'प्रवेश वापस लेने संबंधी आवेदन' (Application for Admission Withdrawal) लिखने का भारी दबाव बनाया। अंततः, उसे मजबूर किया गया और उसके द्वारा जमा की गई प्रवेश फीस उसके बैंक खाते में वापस (Refund) कर दी गई। इस पूरे घटनाक्रम ने छात्र को मानसिक रूप से बुरी तरह तोड़ कर रख दिया और उसके शैक्षणिक करियर का एक अहम साल बर्बाद हो गया।
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शिकायतकर्ता के पास मौजूद हैं डिजिटल और पुख्ता साक्ष्य (The Evidence)
\r\n\r\nमयंक कुमार वर्मा ने अपनी लड़ाई को सिर्फ जुबानी आरोपों तक सीमित नहीं रखा है। उन्होंने राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग को भरोसा दिलाया है कि इस पूरे 'सिंडिकेट' और भेदभाव को साबित करने के लिए उनके पास पुख्ता साक्ष्य मौजूद हैं।
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शिकायतकर्ता के अनुसार, उनके पास घटना के समय के सभी दस्तावेज, फीस वापसी के बैंक रिकॉर्ड, अधिकारियों के साथ हुए ई-मेल पत्राचार (E-mail Correspondence), और कुछ अहम ऑडियो रिकॉर्डिंग (Audio Recordings) सुरक्षित हैं, जो जांच के दौरान विभाग के जिम्मेदार लोगों को सीधे तौर पर कटघरे में खड़ा कर सकते हैं।
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आगे क्या? छात्र को न्याय की उम्मीद और प्रशासन की बढ़ी धड़कनें
\r\n\r\nNCSC द्वारा जारी इस दूसरे अनुस्मारक के बाद CCSU प्रशासन में हड़कंप मचना तय है। अब आयोग ने विश्वविद्यालय प्रशासन को किसी भी तरह की लीपापोती से बचने और समयबद्ध तरीके से जवाब देने के लिए बाउंड कर दिया है।
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शिकायतकर्ता मयंक कुमार वर्मा का स्पष्ट कहना है कि उन्हें NCSC की इस कठोर कार्यवाही और संवैधानिक प्रक्रिया से पूरी उम्मीद है कि वर्ष 2021 के इस पूरे काले अध्याय के तथ्यों की अब निष्पक्ष और पारदर्शी जांच हो सकेगी। उनका मानना है कि यदि किसी भी स्तर पर उनके अनुसूचित जाति के अधिकारों का हनन हुआ है, तो इसकी जिम्मेदारी तय होनी चाहिए और दोषियों के खिलाफ कड़ी दंडात्मक कार्रवाई होनी चाहिए, ताकि भविष्य में कोई भी उच्च शिक्षण संस्थान किसी अन्य दलित छात्र के भविष्य के साथ ऐसा खिलवाड़ न कर सके।
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अब सभी की निगाहें CCSU के रजिस्ट्रार कार्यालय पर टिकी हैं कि क्या अगले 7 दिनों के भीतर सच्चाई आयोग के सामने रखी जाती है, या फिर इस मामले में कोई नया मोड़ आता है।