खबरीलाल डेस्क
उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले से एक बेहद विचलित कर देने वाली और शिक्षा जगत को शर्मसार करने वाली खबर सामने आई है। जिस स्कूल को शिक्षा का मंदिर कहा जाता है, जहां माता-पिता अपने बच्चों को सुरक्षित भविष्य और अच्छे संस्कार सीखने के लिए भेजते हैं, वहीं एक शिक्षक ने क्रूरता की सारी हदें पार कर दीं। मेरठ के हस्तिनापुर स्थित जीआईसी (राजकीय इंटर कॉलेज) का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। यह वीडियो शुक्रवार, रक्षाबंधन के दिन का बताया जा रहा है, जब पूरे देश में सुरक्षा और स्नेह का पर्व मनाया जा रहा था, ठीक उसी दिन एक क्लासरूम के भीतर एक छात्र अपने ही शिक्षक के हाथों प्रताड़ना का शिकार हो रहा था।Read also:-रक्षाबंधन का उल्लास या ट्रैफिक का ब्रेक? दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे पर रेंगती गाड़ियां, मेट्रो-रेलवे स्टेशनों पर उमड़ा जनसैलाब!
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वायरल हो रहे इस सीसीटीवी फुटेज ने हर किसी के रोंगटे खड़े कर दिए हैं। वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि क्लासरूम में अन्य छात्रों की मौजूदगी के बीच एक शिक्षक अपना आपा खो बैठता है और एक निहत्थे छात्र पर टूट पड़ता है। महज 40 सेकंड के इस छोटे से वीडियो क्लिप में शिक्षक ने छात्र के गालों पर तड़ातड़ 15 से अधिक थप्पड़ जड़ दिए। शिक्षक का गुस्सा इतने पर ही नहीं रुका, वह लगातार छात्र को पीटता रहा। यह घटना न केवल शारीरिक प्रताड़ना है, बल्कि एक बच्चे के मानसिक स्वास्थ्य पर गहरा आघात भी है।
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हाई-क्वालिटी CCTV में कैद हुई छात्र की चीखें

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आजकल स्कूलों में सुरक्षा के लिहाज से सीसीटीवी कैमरे लगाए जाते हैं, और यही तकनीक इस मामले में सच्चाई को दुनिया के सामने लाने का सबसे बड़ा हथियार बनी। क्लासरूम में लगा सीसीटीवी कैमरा काफी हाई-क्वालिटी का है, जिसमें न केवल वीडियो बल्कि ऑडियो भी बिल्कुल स्पष्ट रिकॉर्ड हुआ है। जब शिक्षक छात्र पर थप्पड़ों की बारिश कर रहा था, तब कैमरे के ऑडियो सेंसर ने उस दर्द से तड़पते छात्र की चीखें भी रिकॉर्ड कर लीं। वीडियो में सुना जा सकता है कि छात्र दर्द के मारे बार-बार चिल्ला रहा है, खुद को बचाने की गुहार लगा रहा है, लेकिन शिक्षक के सिर पर जैसे खून सवार था। उसे छात्र की चीखों और आंसुओं से कोई फर्क नहीं पड़ा। यह फुटेज इतना खौफनाक है कि इसे देखने वाला हर व्यक्ति सिहर उठता है। किसी अज्ञात व्यक्ति ने स्कूल के सिस्टम से यह फुटेज निकालकर सोशल मीडिया पर लीक कर दी, जिसके बाद से ही यह इंटरनेट पर जंगल की आग की तरह फैल गया है।
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स्कूल प्रशासन का रवैया और लीपापोती की कोशिश

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इस खौफनाक घटना का वीडियो वायरल होने के बाद जब स्कूल प्रबंधन से जवाब मांगा गया, तो उनका रवैया बेहद ढुलमुल और रटा-रटाया नजर आया। स्कूल प्रबंधन का कहना है कि वे "मामले की जांच करा रहे हैं।" लेकिन सवाल यह उठता है कि जब सीसीटीवी फुटेज में शिक्षक का चेहरा, उसकी क्रूरता और छात्र की पीड़ा बिल्कुल साफ नजर आ रही है, तो इसमें किस तरह की जांच की आवश्यकता है? अक्सर ऐसे मामलों में स्कूल प्रशासन अपनी साख बचाने के लिए मामले को दबाने या शिक्षक को बचाने की कोशिश करता है। सोशल मीडिया पर लोग अब स्कूल प्रशासन के इस ठंडे रवैये पर भी सवाल उठा रहे हैं और तुरंत प्रभाव से आरोपी शिक्षक के निलंबन और उस पर पुलिस कार्रवाई (FIR) की मांग कर रहे हैं।
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सोशल मीडिया पर फूटा लोगों का गुस्सा
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डिजिटल युग में कोई भी घटना ज्यादा देर तक छिप नहीं सकती। जैसे ही यह वीडियो एक्स (पूर्व में ट्विटर), फेसबुक और इंस्टाग्राम जैसे प्लेटफॉर्म्स पर पहुंचा, लोगों का गुस्सा फूट पड़ा। यूजर्स लगातार मेरठ पुलिस, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और शिक्षा विभाग को टैग करते हुए सख्त से सख्त सजा की मांग कर रहे हैं। लोगों का तर्क है कि अगर सरकारी स्कूलों (GIC) में शिक्षकों का यह बर्ताव रहेगा, तो गरीब और मध्यम वर्ग के बच्चे शिक्षा कैसे प्राप्त कर पाएंगे। कई अभिभावकों ने अपनी चिंता जाहिर करते हुए लिखा है कि ऐसे वीडियो देखकर उन्हें अपने बच्चों को स्कूल भेजने में डर लगने लगा है।
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कानूनी प्रावधान: क्या कहता है राइट टू एजुकेशन (RTE) एक्ट?

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भारत में बच्चों के अधिकारों और उनकी सुरक्षा के लिए सख्त कानून बनाए गए हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर उनका पालन न होना ऐसी घटनाओं का मुख्य कारण है। 'राइट टू एजुकेशन (RTE) एक्ट, 2009' की धारा 17 स्पष्ट रूप से स्कूलों में किसी भी प्रकार के शारीरिक दंड (Corporal Punishment) और मानसिक उत्पीड़न पर पूरी तरह से रोक लगाती है। कानून के अनुसार:
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    किसी भी बच्चे को शारीरिक या मानसिक रूप से प्रताड़ित नहीं किया जा सकता।
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    यदि कोई शिक्षक ऐसा करता है, तो उसके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई (जिसमें नौकरी से बर्खास्तगी भी शामिल है) की जा सकती है।
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    इसके अलावा, भारतीय न्याय संहिता (BNS) और किशोर न्याय अधिनियम (Juvenile Justice Act) के तहत ऐसे मामलों में शिक्षक को जेल की सजा और भारी जुर्माना भी हो सकता है।
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बावजूद इसके, उत्तर प्रदेश के इस प्रतिष्ठित सरकारी स्कूल में खुलेआम कानून की धज्जियां उड़ाई गईं।
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बच्चों पर पड़ने वाला मनोवैज्ञानिक प्रभाव

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इस तरह की घटनाएं सिर्फ शरीर पर चोट नहीं देतीं, बल्कि बाल मन पर ऐसे गहरे घाव छोड़ जाती हैं जो जीवन भर नहीं भरते। बाल मनोवैज्ञानिकों के अनुसार, जब किसी बच्चे को पूरी क्लास के सामने इस तरह से अपमानित और पीटा जाता है, तो उसके अंदर गहरा खौफ (School Phobia) पैदा हो जाता है। ऐसे बच्चे अक्सर डिप्रेशन का शिकार हो जाते हैं, उनका पढ़ाई से मन उठ जाता है, और कई मामलों में वे स्कूल जाना ही छोड़ देते हैं। शिक्षक, जिसे समाज में माता-पिता के समान दर्जा दिया गया है, जब वह भक्षक बन जाए, तो बच्चे का बड़ों पर से विश्वास हमेशा के लिए उठ जाता है। यह पीड़ित छात्र आज जिस मानसिक आघात से गुजर रहा होगा, उसकी कल्पना करना भी सिहरन पैदा करता है।
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आगे की राह और प्रशासन से उम्मीदें

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मेरठ जीआईसी की यह घटना हमारी शिक्षा व्यवस्था के उस स्याह पहलू को उजागर करती है जिसे अक्सर अनुशासन के नाम पर सही ठहराने की कोशिश की जाती है। मार-पीट से अनुशासन नहीं आता, बल्कि इससे विद्रोह और भय जन्म लेता है। अब गेंद मेरठ जिला प्रशासन, पुलिस और शिक्षा विभाग के पाले में है। यह देखना अहम होगा कि क्या इस मामले में महज 'कारण बताओ नोटिस' जारी करके खानापूर्ति की जाती है, या फिर आरोपी शिक्षक के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज कर एक ऐसी नजीर पेश की जाती है जिससे भविष्य में कोई भी शिक्षक किसी मासूम पर हाथ उठाने से पहले हजार बार सोचे। एक सभ्य समाज में बच्चों के खिलाफ ऐसी बर्बरता के लिए कोई जगह नहीं होनी चाहिए।