खबरीलाल डेस्क
मेरठ। उत्तर प्रदेश के प्रमुख शहरों में शुमार मेरठ के निवासियों और यहाँ से सफर करने वाले हजारों यात्रियों के लिए एक बेहद अहम खबर है। शहर की यातायात व्यवस्था में एक बड़ा बदलाव होने जा रहा है। मेरठ शहर के सबसे व्यस्त मार्गों में से एक, गढ़ रोड पर स्थित सोहराब गेट बस अड्डा अब जल्द ही अपना पुराना पता बदलने वाला है।
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​इस बस अड्डे को हापुड़ रोड स्थित लोहियानगर में शिफ्ट करने की तैयारियां जोरों पर हैं। हालांकि, अभी तक शिफ्टिंग की कोई अंतिम तिथि आधिकारिक तौर पर घोषित नहीं की गई है, लेकिन जिस तेजी से काम चल रहा है, उसे देखते हुए यह तय माना जा रहा है कि रक्षाबंधन के पर्व के ठीक बाद (लगभग दस दिन के भीतर) बसों का संचालन नए अस्थायी अड्डे से शुरू हो जाएगा। एक तरफ जहाँ इस कदम से शहरवासियों को भीषण जाम से मुक्ति मिलेगी, वहीं दूसरी ओर सुविधाओं के अभाव में यात्रियों को कुछ नई चुनौतियों का सामना भी करना पड़ सकता है।
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​आइए, इस पूरे बदलाव, इसके कारणों और आम जनता पर पड़ने वाले इसके प्रभाव को विस्तार से समझते हैं।
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​गढ़ रोड के लिए वरदान: ट्रैफिक जाम से मिलेगी स्थायी मुक्ति
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​वर्तमान में सोहराब गेट बस अड्डा मेरठ के सबसे व्यस्त और घनी आबादी वाले गढ़ रोड पर स्थित है। इस अड्डे से प्रतिदिन उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम (UPSRTC) की 205 बसें और लगभग 51 अनुबंधित (कॉन्ट्रैक्ट) बसें संचालित होती हैं।
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जाम का मुख्य कारण:

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    सड़क पर बसों की पार्किंग: जगह की कमी के कारण अक्सर रोडवेज बसें मुख्य सड़क पर ही खड़ी होकर सवारियां भरती हैं।
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    गलत टर्न और कट: अड्डे के ठीक सामने बने कट से ही बसों को मोड़ा जाता है, जिससे गढ़ रोड का पूरा ट्रैफिक दिनभर रेंगता रहता है।
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    ई-रिक्शा और ऑटो का जमावड़ा: बसों के साथ-साथ यहाँ यात्रियों को ले जाने वाले ई-रिक्शा और ऑटो बेतरतीब ढंग से खड़े रहते हैं।
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​अड्डे के लोहियानगर शिफ्ट हो जाने से गढ़ रोड का चौड़ीकरण और सौंदर्यीकरण अधिक प्रभावी ढंग से हो सकेगा। स्थानीय व्यापारियों, राहगीरों और रोजमर्रा के यात्रियों के लिए यह किसी वरदान से कम नहीं होगा। लंबे समय से शहरवासी इस जाम से निजात दिलाने की मांग कर रहे थे, जो अब पूरी होती दिख रही है।
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​क्यों हो रही है शिफ्टिंग? पीपीपी मॉडल पर होगा कायाकल्प
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​सोहराब गेट बस अड्डे का यह विस्थापन अस्थायी है, जो अगले दो से ढाई वर्षों तक लागू रहेगा। दरअसल, परिवहन निगम पुराने सोहराब गेट बस अड्डे को पीपीपी (Public-Private Partnership) मॉडल के तहत एक अत्याधुनिक और हाई-टेक बस टर्मिनल में बदलने जा रहा है।
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    निर्माण की जिम्मेदारी: इस नए और भव्य बस अड्डे के निर्माण का जिम्मा 'कुंतारी बिल्ड प्राइवेट लिमिटेड' को सौंपा गया है।
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    सुविधाएं: भविष्य में बनने वाला यह बस अड्डा एयरपोर्ट जैसी सुविधाओं से लैस होगा, जिसमें शॉपिंग कॉम्प्लेक्स, साफ-सुथरे वेटिंग लाउंज और आधुनिक पार्किंग व्यवस्था शामिल होगी।
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    ​जब तक इस नए अड्डे का निर्माण कार्य चलेगा, तब तक बसों का संचालन सुचारू रखने के लिए लोहियानगर में एक अस्थायी बस अड्डा बनाया गया है।
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लोहियानगर में नया ठिकाना: कितनी है तैयारी?

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​परिवहन निगम ने अस्थायी बस अड्डा संचालित करने के लिए मेरठ विकास प्राधिकरण (MDA) से लोहियानगर में लगभग 9700 वर्ग मीटर भूमि लीज पर ली है। इस भूमि का सालाना किराया निगम द्वारा प्राधिकरण को चुकाया जाएगा। नया अड्डा हापुड़ रोड पर बिजली बंबा पुलिस चौकी के ठीक सामने स्थित है।
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हालिया प्रगति:

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पिछले सप्ताह ही उत्तर प्रदेश परिवहन निगम के प्रबंध निदेशक श्री प्रभु एन सिंह ने एक अहम वर्चुअल मीटिंग की थी। इसमें उन्होंने स्थानीय अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए कि गढ़ रोड स्थित अड्डे को जल्द से जल्द खाली करवाया जाए। इसी के चलते लोहियानगर में:
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    ​बसों के खड़े होने के लिए खड़ंजा बिछाने का काम तेजी से चल रहा है।
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    ​एक शेड का निर्माण किया गया है।
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    ​बसों के निर्बाध प्रवेश (Entry) और निकास (Exit) के लिए मार्ग तैयार किए जा रहे हैं।
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आधी-अधूरी तैयारियां बन सकती हैं यात्रियों के लिए मुसीबत
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​एक तरफ जहाँ प्रशासनिक अमला जल्द से जल्द अड्डे को शिफ्ट करने की जल्दबाजी में है, वहीं जमीनी हकीकत यात्रियों के लिए चिंताजनक है। दो वर्ष से अधिक समय तक चलने वाले इस अस्थायी अड्डे पर बुनियादी सुविधाओं का भारी अभाव है।
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यात्रियों को झेलनी पड़ सकती हैं ये परेशानियां:

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    पेयजल और शौचालय की कमी: अब तक अस्थायी अड्डे पर पीने के साफ पानी और शौचालयों का उचित प्रबंध नहीं हो पाया है। भीषण गर्मी और उमस के बीच इन बुनियादी सुविधाओं के बिना यात्रियों का बुरा हाल हो सकता है।
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    बैठने की उचित व्यवस्था नहीं: वर्तमान में लगाए गए शेड अपर्याप्त हैं। महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों के लिए पर्याप्त बेंच और विश्रामालय का निर्माण होना बाकी है।
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    बारिश में कीचड़ का डर: केवल खड़ंजा लगने से बारिश के मौसम में जलभराव और कीचड़ की समस्या उत्पन्न हो सकती है।
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​जेब और समय पर पड़ेगी मार: शहर से बाहरी छोर पर है नया अड्डा

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​लोहियानगर स्थित नया अस्थायी बस अड्डा मेरठ शहर के बाहरी छोर पर स्थित है। इस दूरी का सीधा असर शहर के विभिन्न कोनों में रहने वाले यात्रियों की जेब और समय दोनों पर पड़ेगा।
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किन इलाकों के लोगों को होगी सबसे ज्यादा परेशानी?

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    ​गंगानगर
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    ​मवाना रोड
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    ​कंकरखेड़ा
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    ​रुड़की रोड
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    ​दिल्ली रोड और कैंट क्षेत्र
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​इन कॉलोनियों के निवासियों को यदि मुरादाबाद, लखनऊ या आगरा की बस पकड़नी है, तो उन्हें अब अपने घर से 10 से 15 किलोमीटर की अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ेगी। इसका सीधा मतलब है कि यात्रियों को ई-रिक्शा, ऑटो या कैब का भारी किराया चुकाना होगा और उनके सफर में 45 मिनट से 1 घंटे का अतिरिक्त समय लगेगा। रात के समय बाहरी छोर तक सुरक्षित पहुंचना भी एक चुनौती होगी।
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इन महत्वपूर्ण शहरों के सफर पर पड़ेगा असर

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​सोहराब गेट डिपो से पश्चिमी उत्तर प्रदेश के साथ-साथ पूर्वांचल और अन्य बड़े शहरों के लिए प्रमुख बसें संचालित होती हैं। नए अड्डे से निम्नलिखित रूट की बसों का संचालन होगा:
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    प्रमुख रूट: हापुड़, गुलावठी, बुलंदशहर, गजरौला, गढ़मुक्तेश्वर, संभल, धामपुर।
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    लंबी दूरी के रूट: लखनऊ, गोरखपुर, आजमगढ़, बहराइच, लखीमपुर खीरी, प्रयागराज, कानपुर, कन्नौज और झांसी।
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    उत्तराखंड और ब्रज क्षेत्र: मुरादाबाद, बरेली, बदायूं, हल्द्वानी, रामनगर, टनकपुर, अलीगढ़, मथुरा और आगरा।
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वर्कशॉप की भी होगी शिफ्टिंग

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​सोहराब गेट डिपो के सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक (ARM) राजीव कुमार ने जानकारी दी है कि व्यवस्थाओं को सुचारू रखने के लिए केवल बसों का संचालन लोहियानगर से होगा। जबकि, बसों के रखरखाव और मरम्मत के लिए वर्कशॉप को मेरठ डिपो (भैंसाली बस अड्डा) परिसर में शिफ्ट किया जाएगा।
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​अधिकारियों का आश्वासन: पूरी व्यवस्था होने पर ही होगा शिफ्ट

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​यात्रियों की चिंताओं को देखते हुए उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम के अधिकारियों ने आश्वासन दिया है। क्षेत्रीय प्रबंधक (RM) दीपक चौधरी का कहना है, "सोहराब बस अड्डा जल्दी ही शिफ्ट किया जाना है, इसकी युद्ध स्तर पर तैयारी चल रही है। लोहियानगर में अस्थायी अड्डे पर यात्रियों के बैठने के लिए बेंच के साथ-साथ शुद्ध पेयजल एवं साफ शौचालय की सुविधा भी सुनिश्चित कराई जाएगी। जब सभी व्यवस्थाएं पूरी तरह से मुकम्मल हो जाएंगी, उसके बाद ही अड्डे को पूरी तरह शिफ्ट किया जाएगा। इसके बाद पुराने सोहराब गेट बस अड्डे के नवनिर्माण का काम शुरू होगा।"
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मेरठ में सोहराब गेट बस अड्डे की शिफ्टिंग विकास की दिशा में एक जरूरी और कड़वा घूंट है। गढ़ रोड को जाम से मुक्ति मिलना एक बहुत बड़ी जीत है, लेकिन प्रशासन को यह सुनिश्चित करना होगा कि आम यात्रियों, खासकर ग्रामीण क्षेत्रों और लंबी दूरी की यात्रा करने वाले लोगों को बुनियादी सुविधाओं (पानी, शौचालय, सुरक्षा) के लिए दर-दर न भटकना पड़े। अगर परिवहन निगम शिफ्टिंग से पहले इन खामियों को दूर कर लेता है, तो यह योजना मेरठ के लिए मील का पत्थर साबित होगी।