मेरठ (21 मई 2026): उत्तर प्रदेश के मेरठ जनपद में इस समय आसमान से आग बरस रही है। मई के महीने में ही गर्मी ने अपने सारे पुराने रिकॉर्ड तोड़ने शुरू कर दिए हैं। सुबह 8 बजे से ही सूरज की चुभती हुई किरणें और गर्म हवा के थपेड़े (लू) लोगों का घरों से निकलना मुहाल कर रहे हैं। इस भीषण और जानलेवा गर्मी का सबसे ज्यादा असर छोटे बच्चों और स्कूली छात्र-छात्राओं के स्वास्थ्य पर पड़ रहा था। बच्चों को चिलचिलाती धूप में स्कूल जाते देख अभिभावक भी खासे चिंतित थे। इसी गंभीर स्थिति को संज्ञान में लेते हुए मेरठ के जिलाधिकारी (DM) डॉ. वी.के. सिंह ने एक बेहद संवेदनशील और सख्त कदम उठाया है।
\r\n\r\nजिलाधिकारी ने बच्चों के स्वास्थ्य और सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए जनपद के सभी स्कूलों में अवकाश घोषित कर दिया है। यह आदेश आज, यानी 21 मई से 23 मई 2026 तक प्रभावी रहेगा। प्रशासन का यह कदम बच्चों को हीटस्ट्रोक (लू लगने) और डिहाइड्रेशन (पानी की कमी) जैसी गंभीर बीमारियों से बचाने के लिए उठाया गया है।
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\r\n\r\nआदेश की विस्तृत जानकारी और इसका दायरा
\r\n\r\nजिलाधिकारी कार्यालय से जारी किए गए आधिकारिक आदेश के अनुसार, यह छुट्टी केवल सरकारी स्कूलों तक सीमित नहीं है। इस आदेश के दायरे में निम्नलिखित विद्यालय आएंगे:
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- \r\n कक्षाओं का विवरण: प्री-प्राइमरी (Pre-Primary), नर्सरी, केजी से लेकर कक्षा 10 (Class 10) तक के सभी छात्र-छात्राओं के लिए अवकाश रहेगा।\r\n \r\n
- \r\n सभी बोर्ड्स पर लागू: यह आदेश उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद (UP Board), केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE), और भारतीय स्कूल प्रमाणपत्र परीक्षा परिषद (ICSE/ISC) से मान्यता प्राप्त सभी सरकारी, गैर-सरकारी, सहायता प्राप्त और निजी (Private) विद्यालयों पर समान रूप से लागू होगा।\r\n \r\n
- \r\n अवधि: अवकाश 21 मई 2026 (गुरुवार) से प्रारंभ होकर 23 मई 2026 (शनिवार) तक जारी रहेगा।\r\n \r\n
\r\n\r\nविद्यालय प्रबंधन को दी गई सख्त चेतावनी
\r\n\r\nजिलाधिकारी डॉ. वी.के. सिंह ने केवल अवकाश की घोषणा ही नहीं की है, बल्कि इसे लागू करवाने के लिए शिक्षा विभाग के अधिकारियों को सख्त निर्देश भी दिए हैं। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) और जिला विद्यालय निरीक्षक (DIOS) को जिम्मेदारी सौंपी गई है कि वे सुनिश्चित करें कि कोई भी स्कूल इस आदेश की अवहेलना न करे।
\r\n\r\nप्रशासन की ओर से स्पष्ट संदेश दिया गया है कि "छात्र-छात्राओं के स्वास्थ्य और उनकी सुरक्षा के साथ किसी भी प्रकार का समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।" यदि कोई निजी स्कूल प्रबंधन चोरी-छिपे या मनमाने ढंग से इन दिनों में स्कूल खोलता हुआ पाया गया, तो उसके खिलाफ कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी और स्कूल की मान्यता रद्द करने की सिफारिश भी की जा सकती है।
\r\n\r\nअभिभावकों ने ली राहत की सांस
\r\n\r\nइस आदेश के जारी होते ही मेरठ के हजारों अभिभावकों ने राहत की सांस ली है। पिछले कई दिनों से सुबह के समय भी तापमान में भारी वृद्धि देखी जा रही थी। दोपहर में जब बच्चों की छुट्टी होती थी, तब तक पारा अपने चरम पर होता था। गर्म बसों और वैन में बैठकर घर लौटने वाले बच्चे अक्सर सिरदर्द, उल्टी, और चक्कर आने की शिकायत कर रहे थे। कई बच्चे तो गर्मी के कारण बीमार भी पड़ने लगे थे।
\r\n\r\nएक अभिभावक ने अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा, "हम डीएम साहब के इस फैसले का स्वागत करते हैं। पढ़ाई महत्वपूर्ण है, लेकिन बच्चों की जान और सेहत से बढ़कर कुछ नहीं। इस झुलसा देने वाली गर्मी में बच्चों को स्कूल भेजना हमारे लिए भी एक डरावना अनुभव बन गया था।"
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\r\n\r\nबच्चों पर हीटवेव का प्रभाव और खतरे
\r\n\r\nचिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, वयस्कों की तुलना में बच्चों का शरीर तापमान को नियंत्रित करने में कम सक्षम होता है। अत्यधिक गर्मी में बच्चों के शरीर से पसीना तेजी से निकलता है, जिससे उन्हें बहुत जल्दी डिहाइड्रेशन (निर्जलीकरण) हो जाता है। हीटवेव के दौरान बच्चों में निम्नलिखित खतरे बढ़ जाते हैं:
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- \r\n हीट एक्सॉर्शन (Heat Exhaustion): अत्यधिक थकान, कमजोरी, और बहुत ज्यादा पसीना आना।\r\n \r\n
- \r\n हीटस्ट्रोक (Heatstroke): यह एक जानलेवा स्थिति है जिसमें शरीर का तापमान 104°F (40°C) या उससे अधिक हो जाता है। इसमें पसीना आना बंद हो जाता है और बच्चा बेहोश भी हो सकता है।\r\n \r\n
- \r\n सनबर्न और त्वचा रोग: तेज धूप की अल्ट्रावायलेट (UV) किरणें बच्चों की नाजुक त्वचा को झुलसा सकती हैं।\r\n \r\n
- \r\n पाचन संबंधी समस्याएं: गर्मी में अक्सर बच्चों का पाचन तंत्र कमजोर हो जाता है, जिससे उन्हें उल्टी या दस्त (Diarrhea) की शिकायत हो जाती है।\r\n \r\n
इन 3 दिनों की छुट्टियों में अभिभावकों के लिए महत्वपूर्ण सुझाव
\r\n\r\nचूंकि स्कूल बंद हैं, इसलिए अब यह अभिभावकों की जिम्मेदारी है कि वे घर पर बच्चों को सुरक्षित रखें। गर्मी से बचाव के लिए स्वास्थ्य विभाग और बाल रोग विशेषज्ञों ने कुछ महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश जारी किए हैं, जिनका पालन हर घर में होना चाहिए:
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- \r\n हाइड्रेशन (Hydration) है सबसे जरूरी: बच्चों को प्यास न लगने पर भी थोड़ी-थोड़ी देर में पानी पीने की आदत डालें। सादे पानी के अलावा उन्हें नींबू पानी, पुदीने का शर्बत, नारियल पानी, छाछ, लस्सी, और जलजीरा नियमित रूप से देते रहें। शरीर में इलेक्ट्रोलाइट्स का संतुलन बनाए रखने के लिए ओआरएस (ORS) का घोल भी एक बेहतरीन विकल्प है।\r\n \r\n
- \r\n धूप से पूर्ण बचाव: यह सुनिश्चित करें कि बच्चे सुबह 10 बजे से लेकर शाम 5 बजे तक घर से बाहर खेलने न जाएं। अगर किसी बहुत जरूरी काम से बाहर जाना ही पड़े, तो छाता, टोपी या गमछे का इस्तेमाल करें और सनस्क्रीन जरूर लगाएं।\r\n \r\n
- \r\n खान-पान (Diet) का रखें विशेष ध्यान: बच्चों को गरिष्ठ, तला-भुना और मसालेदार भोजन देने से बचें। उन्हें हल्का और सुपाच्य भोजन कराएं। डाइट में पानी से भरपूर फल जैसे- तरबूज, खरबूजा, खीरा, ककड़ी और संतरे को ज्यादा से ज्यादा शामिल करें।\r\n \r\n
- \r\n पहनावा (Clothing): बच्चों को हमेशा हल्के रंग के, ढीले-ढाले और 100% सूती (Cotton) कपड़े ही पहनाएं। सिंथेटिक कपड़ों से पसीना नहीं सूखता और घमौरियां (Heat Rash) होने का डर रहता है।\r\n \r\n
- \r\n तापमान में अचानक बदलाव से बचाएं: अक्सर बच्चे बाहर की तेज गर्मी से घर में आते ही तुरंत फ्रिज का ठंडा पानी पी लेते हैं या एसी (AC) के ठीक सामने बैठ जाते हैं। यह बहुत खतरनाक हो सकता है। शरीर के तापमान को पहले सामान्य होने दें, उसके बाद ही उन्हें ठंडा पानी या एसी का उपयोग करने दें।\r\n \r\n
\r\n\r\nप्रशासन की सतर्कता और आम जनमानस का सहयोग
\r\n\r\nमेरठ के जिलाधिकारी डॉ. वी.के. सिंह द्वारा उठाया गया यह कदम एक आदर्श प्रशासनिक संवेदनशीलता को दर्शाता है। जलवायु परिवर्तन (Climate Change) के कारण अब गर्मियां पहले से कहीं अधिक लंबी और खतरनाक होती जा रही हैं। ऐसे में प्रशासनिक स्तर पर त्वरित निर्णय लेना और उन्हें कड़ाई से लागू करना समय की मांग है।
\r\n\r\nहालांकि, प्रशासन अपना काम कर रहा है, लेकिन नागरिकों और अभिभावकों की भी यह जिम्मेदारी बनती है कि वे मौसम विभाग (IMD) की चेतावनियों को गंभीरता से लें। 23 मई तक घोषित किए गए इस अवकाश का मुख्य उद्देश्य बच्चों को सुरक्षित रखना है। इसलिए, इन छुट्टियों को सैर-सपाटे का अवसर न समझकर, बच्चों को घर के सुरक्षित और ठंडे वातावरण में ही रखें। जब तक बहुत आवश्यक न हो, घर से बाहर निकलने से बचें और खुद को तथा अपने परिवार को इस भीषण हीटवेव से बचाएं।