खबरीलाल डेस्क
पश्चिम एशिया में चल रहे अमेरिका-इस्राइल और ईरान युद्ध का सीधा असर अब उत्तर प्रदेश के स्थानीय बाजारों और आम आदमी की रसोई पर दिखने लगा है। मेरठ में गैस की किल्लत (LPG Shortage in Meerut) एक गंभीर रूप धारण करती जा रही है। पिछले कई दिनों से गैस कंपनियों का सर्वर डाउन होने के कारण ऑनलाइन बुकिंग पूरी तरह से ठप हो गई है। लोग गैस एजेंसियों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन उन्हें निराशा ही हाथ लग रही है। इस संकट के बीच जमाखोरी और कालाबाजारी की आशंकाओं को देखते हुए जिला आपूर्ति विभाग (District Supply Department) पूरी तरह से अलर्ट मोड पर आ गया है।READ ALSO:-सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: 13 साल से कोमा में रह रहे हरीश राणा को मिली इच्छामृत्यु की मंजूरी, देश का ऐसा पहला मामला
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बुधवार को जिला प्रशासन ने शहर से लेकर देहात तक कई टीमों का गठन कर गैस एजेंसियों और गोदामों पर ताबड़तोड़ जांच अभियान चलाया। अधिकारियों का दावा है कि जिले में गैस पर्याप्त मात्रा में है, लेकिन तकनीकी खामियों और आम जनता में 'पैनिक बुकिंग' (Panic Booking) के कारण यह अव्यवस्था फैली है। इस विस्तृत रिपोर्ट में हम मेरठ में गैस की किल्लत, सर्वर की समस्या, ई-केवाईसी (e-KYC) के पेंच, कमर्शियल गैस के संकट और प्रशासन द्वारा उठाए गए कड़े कदमों का गहराई से विश्लेषण करेंगे।
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मेरठ में गैस की किल्लत और ठप पड़ा सर्वर (The Core Issue)

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डिजिटल इंडिया के इस दौर में लोग घर बैठे अपने स्मार्टफोन से गैस बुक करने के आदी हो चुके हैं। लेकिन पिछले कुछ दिनों से इंडियन ऑयल (IOCL), भारत पेट्रोलियम (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL) जैसी प्रमुख तेल विपणन कंपनियों (OMCs) का सर्वर लगातार डाउन चल रहा है।
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ऑनलाइन बुकिंग पोर्टल और मोबाइल ऐप्स काम नहीं कर रहे हैं। आईवीआरएस (IVRS) नंबरों पर भी तकनीकी खराबी आ रही है। इसके चलते मेरठ में गैस की किल्लत और ज्यादा महसूस होने लगी है। बुधवार को भी गैस कंपनियों द्वारा सर्वर डाउन होने की समस्या का कोई स्थायी समाधान नहीं निकाला जा सका।
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एजेंसियों पर उमड़ी लोगों की भीड़

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सर्वर काम न करने के कारण परेशान उपभोक्ता सुबह से ही अपनी खाली सिलिंडर लेकर गैस एजेंसियों पर पहुंच रहे हैं। स्थिति यह है कि कई लोग नए गैस कनेक्शन (New LPG Connection) लेने के लिए भी एजेंसियों पर पहुंच रहे हैं ताकि उनके घर का चूल्हा जल सके, लेकिन सर्वर डाउन होने के कारण नए कनेक्शन की प्रक्रिया भी पूरी तरह से रुक गई है। गैस एजेंसी संचालक और कर्मचारी भी उपभोक्ताओं की इस समस्या का कोई समाधान नहीं कर पा रहे हैं, जिसके कारण कई जगहों पर तीखी नोकझोंक की घटनाएं भी सामने आई हैं।
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कॉलोनियों में प्वाइंट बनाकर बांटे जा रहे सिलिंडर

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आम दिनों में गैस एजेंसियों की गाड़ियां उपभोक्ताओं के घर तक गैस सिलिंडर की 'होम डिलीवरी' (Home Delivery) करती हैं। लेकिन वर्तमान संकट के समय में यह व्यवस्था भी चरमरा गई है। सर्वर डाउन होने के कारण डिलीवरी ब्वॉयज के पास डिलीवरी ऑथेंटिकेशन कोड (DAC) और पर्चियां जनरेट नहीं हो पा रही हैं। इस वजह से पुरानी बुकिंग की गैस भी सुचारू रूप से सप्लाई नहीं हो पा रही है।
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नई रणनीति: प्वाइंट-बेस्ड डिस्ट्रीब्यूशन (Point-Based Distribution)

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जब एजेंसियों पर लोगों की भीड़ बेकाबू होने लगी, तो गैस एजेंसी संचालकों ने एक नई रणनीति अपनाई। उन्होंने बड़े ट्रकों के बजाय छोटे वाहनों (जैसे छोटा हाथी, पिकअप वैन) में गैस सिलिंडर भरकर शहर की विभिन्न कॉलोनियों में भिजवाने शुरू कर दिए हैं।
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इन कॉलोनियों में एक নির্দিষ্ট 'प्वाइंट' (Point) बना दिया गया है, जहां रजिस्टर में पुरानी पर्ची या बुकिंग का मिलान करके लोगों को कतार में खड़ा कर सिलिंडर दिए जा रहे हैं। मेरठ शहर के कई प्रमुख इलाकों में यह नजारा आम हो गया है, जिनमें शामिल हैं:
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    शारदा रोड (Sharda Road)
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    जिमखाना मैदान के पास (Near Gymkhana Maidan)
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    गढ़ रोड (Garh Road)
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    शास्त्रीनगर (Shastri Nagar)
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    जागृति विहार (Jagriti Vihar)
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घंटों लाइन में लगने के बाद लोगों को गैस मिल पा रही है, जिससे कामकाजी लोगों और महिलाओं को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
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कमर्शियल गैस की सप्लाई बंद: होटल और रेस्टोरेंट पर संकट

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सरकार और प्रशासन का इस समय पूरा जोर किसी भी तरह घरेलू गैस (Domestic LPG - 14.2 kg) की आपूर्ति बरकरार रखने पर है। इस प्राथमिकता के चक्कर में कमर्शियल गैस (Commercial Cylinder - 19 kg) की सप्लाई लगभग बंद सी हो गई है।
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कमर्शियल गैस न मिलने से मेरठ शहर और बाहरी इलाकों (हाईवे आदि) पर स्थित होटल, ढाबे, और रेस्टोरेंट (Restaurants & Eateries) का कारोबार बुरी तरह प्रभावित हो रहा है।
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    व्यापारिक नुकसान: कई छोटे-बड़े होटलों और ढाबों में गैस न होने के कारण खाना नहीं बन पा रहा है। शादी-विवाह और पार्टियों के सीजन में कैटरर्स (Caterers) को सबसे ज्यादा नुकसान उठाना पड़ रहा है।
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    कालाबाजारी का डर: जब कमर्शियल गैस नहीं मिलती, तो कुछ बेईमान ढाबा संचालक घरेलू सिलेंडरों का अवैध रूप से कमर्शियल इस्तेमाल करने लगते हैं। इसी बात को ध्यान में रखते हुए प्रशासन अतिरिक्त सतर्कता बरत रहा है।
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ई-केवाईसी (e-KYC) नहीं होने के कारण निष्क्रिय हुए गैस कनेक्शन

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मेरठ में गैस की किल्लत को बढ़ाने में एक और बड़ा कारण 'ई-केवाईसी' (e-KYC) का अधूरा होना है। पेट्रोलियम मंत्रालय और गैस कंपनियों ने सभी पुराने और नए कनेक्शनों (विशेषकर प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों) के लिए बायोमेट्रिक ई-केवाईसी अनिवार्य कर दिया था। इसका उद्देश्य फर्जी कनेक्शनों और गैस की सब्सिडी लीकेज को रोकना था।
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गैस कंपनियों द्वारा बार-बार चेतावनी और डेडलाइन दिए जाने के बावजूद बड़ी संख्या में उपभोक्ताओं ने अपनी एजेंसी पर जाकर फिंगरप्रिंट या आइरिस स्कैन के जरिए अपना ई-केवाईसी अपडेट नहीं कराया।
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ऐन मौके पर बंद हुए कनेक्शन

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नियमों का पालन न करने के कारण गैस कंपनियों ने सिस्टम से ऐसे हजारों गैस कनेक्शनों को 'अस्थायी तौर पर निष्क्रिय' (Temporarily Inactive) कर दिया है। अब जब वैश्विक युद्ध के कारण गैस संकट का आभास हुआ और लोगों में पैनिक बुकिंग शुरू हुई, तो एकाएक ऐसे लोग अपने कनेक्शन फिर से चालू (Reactivate) कराने के लिए गैस एजेंसियों की ओर दौड़ पड़े।
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लेकिन विडंबना देखिए कि जिस समय वे एजेंसी पहुंच रहे हैं, उस समय सर्वर डाउन है। बिना सर्वर के आधार कार्ड (Aadhaar Card) का प्रमाणीकरण (Authentication) नहीं हो सकता, और बिना प्रमाणीकरण के उनका ई-केवाईसी पूरा नहीं हो रहा है। ऐसे उपभोक्ताओं की भारी भीड़ एजेंसियों पर लगी हुई है, जो इस संकट को और भी गहरा कर रही है।
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प्रशासन का एक्शन: शहर से देहात तक सघन जांच अभियान

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गैस संकट की आड़ में कुछ असामाजिक तत्व और गैस माफिया कालाबाजारी (Black Marketing) शुरू कर देते हैं। ₹900 का सिलिंडर ₹1200 से ₹1500 तक में ब्लैक किया जाने लगता है। इस स्थिति से निपटने और जनता को राहत देने के लिए मेरठ का जिला आपूर्ति विभाग (District Supply Department) सख्त एक्शन में आ गया है।
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बुधवार को जिला प्रशासन ने पूरे जिले की प्रत्येक तहसील (सदर, मवाना, सरधना आदि) में विशेष टीमों का गठन किया।
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    शहर में 5 टीमों की तैनाती: अकेले मेरठ शहर के लिए 5 विशेष टीमों का गठन किया गया है, जिनमें आपूर्ति निरीक्षक (Supply Inspectors) और पुलिस बल शामिल हैं।
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    गोदामों और एजेंसियों पर छापा: इन टीमों ने गैस एजेंसियों और उनके बाहरी इलाकों में स्थित गोदामों पर अचानक जाकर औचक निरीक्षण (Surprise Checks) किया।
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    स्टॉक का मिलान: टीमों ने गोदामों में रखे गैस सिलेंडरों की भौतिक गिनती की और उसका मिलान ऑनलाइन स्टॉक रजिस्टर से किया।
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    उपभोक्ताओं से सीधा संवाद: सबसे अहम बात यह रही कि टीम में शामिल अधिकारियों ने केवल कागजी कार्रवाई नहीं की, बल्कि मौके पर मौजूद और लाइन में लगे उपभोक्ताओं से सीधे बात करके गैस की आपूर्ति, डिलीवरी के समय और अतिरिक्त पैसे मांगे जाने की शिकायतों के बारे में जानकारी ली।
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ऑफलाइन बुकिंग के निर्देश: आम जनता के लिए बड़ी राहत

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लगातार सर्वर डाउन रहने और 'पैनिक बुकिंग' से निपटने के लिए जिला प्रशासन और तेल कंपनियों के अधिकारियों ने एक बीच का रास्ता निकाला है।
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अधिकारियों के मुताबिक, गैस कंपनियों का सर्वर अत्यधिक लोड के कारण काम नहीं कर रहा है। इसके अलावा, एक नया नियम लागू किया गया है जिसके तहत एक सिलिंडर लेने के 25 दिन बाद ही दूसरी गैस बुक की जा सकती है।
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चूंकि ऑनलाइन सिस्टम ठप है, इसलिए जिला आपूर्ति अधिकारी ने सभी गैस एजेंसियों को सख्त निर्देश दिए हैं कि वे उपभोक्ताओं को वापस न लौटाएं। ऑफलाइन रजिस्टर बुकिंग (Offline Register Booking) की व्यवस्था तुरंत प्रभाव से शुरू की जाए। जिन उपभोक्ताओं के पास पासबुक या पुरानी रसीद है, उनकी बुकिंग मैनुअल रजिस्टर में दर्ज करके उन्हें सीरियल नंबर (Serial Number) दिया जाए और गैस उपलब्ध होने पर उन्हें पर्ची के हिसाब से सिलिंडर मुहैया कराया जाए।
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डीएसओ का बयान: "कालाबाजारी करने वालों पर होगी एफआईआर"

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इस पूरे संकट और जांच अभियान के बीच मेरठ के जिला पूर्ति अधिकारी (DSO) ने एक कड़ा संदेश जारी किया है, जिससे जनता में कुछ हद तक विश्वास बहाली की उम्मीद है।
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ये बोले अधिकारी: "मेरठ में गैस एजेंसियों पर पर्याप्त गैस उपलब्ध है। गैस की कोई कमी नहीं है, बस सर्वर की तकनीकी समस्या के कारण वितरण में थोड़ी देरी हो रही है। हमारी प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि पूरी पारदर्शिता से गैस का वितरण किया जाए। तहसील वार टीमें बनाकर शहर और देहात में गैस एजेंसियों पर लगातार जांच कराई जा रही है। अगर किसी भी एजेंसी या डिलीवरी मैन के खिलाफ गैस की कालाबाजारी, जमाखोरी या तय कीमत से अधिक पैसे वसूलने की कोई भी शिकायत मिलती है, तो संबंधित के खिलाफ तत्काल प्रभाव से एफआईआर (FIR) दर्ज कराई जाएगी और कड़ी कानूनी कार्रवाई होगी।" - विनय कुमार सिंह, जिला पूर्ति अधिकारी, मेरठ (DSO Meerut)
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वैश्विक युद्ध का स्थानीय रसोई पर असर (Geopolitical Analysis)

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यह समझना बहुत जरूरी है कि मेरठ जैसे शहर में अचानक यह संकट क्यों पैदा हुआ? इसका सीधा संबंध अमेरिका, इस्राइल और ईरान के बीच चल रहे भारी तनाव से है। भारत अपनी जरूरत का लगभग 60% एलपीजी आयात (Import) करता है। यह आयात मुख्य रूप से खाड़ी देशों (Middle East) से 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' (Strait of Hormuz) के रास्ते भारत आता है। युद्ध के कारण इस समुद्री रास्ते पर जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई है, बीमा का खर्च बढ़ गया है और सप्लाई चेन बाधित हुई है।
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हालांकि केंद्र सरकार ने आश्वस्त किया है कि भारत के पास पर्याप्त रिज़र्व है और उत्पादन 25% बढ़ाया गया है, लेकिन इस वैश्विक तनाव की खबरें जैसे ही टीवी और सोशल मीडिया के जरिए आम जनता तक पहुंची, लोगों में एक 'पैनिक' (घबराहट) फैल गई। हर कोई जल्द से जल्द अपना खाली सिलिंडर भरवाना चाहता है। इसी अचानक बढ़ी भारी मांग (Surge in Demand) के कारण गैस कंपनियों के ऑनलाइन सर्वर क्रैश (Server Crash) हो गए हैं।
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आगे का रास्ता और उपभोक्ताओं के लिए सलाह

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प्रशासन अपनी तरफ से पूरी कोशिश कर रहा है, लेकिन मेरठ में गैस की किल्लत से पूरी तरह निपटने के लिए उपभोक्ताओं को भी संयम बरतना होगा:
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    पैनिक बुकिंग न करें: अगर आपके घर में गैस भरा हुआ है, तो केवल डर के मारे बेवजह बुकिंग करने का प्रयास न करें। इससे जरूरतमंदों का हक मारा जाता है और सर्वर पर बेवजह लोड पड़ता है।
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    ई-केवाईसी पूरा करें: जैसे ही सर्वर ठीक हो, सबसे पहला काम अपनी एजेंसी पर जाकर अपना बायोमेट्रिक ई-केवाईसी (e-KYC) पूरा कराएं, ताकि भविष्य में आपका कनेक्शन ब्लॉक न हो।
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    ऑफलाइन बुकिंग का सहारा लें: अगर अत्यंत आवश्यकता है और ऑनलाइन बुकिंग नहीं हो रही है, तो एजेंसी पर जाकर रजिस्टर में अपनी ऑफलाइन बुकिंग जरूर दर्ज कराएं।
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    शिकायत दर्ज करें: अगर कोई एजेंसी वाला आपसे ब्लैक में पैसे मांगता है, तो तुरंत 1906 (LPG Helpline) या जिला आपूर्ति अधिकारी के कार्यालय में शिकायत दर्ज कराएं।
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अंततः, पश्चिम एशिया के भू-राजनीतिक संकट ने यह साबित कर दिया है कि दुनिया आज कितनी गहराई से जुड़ी हुई है, जहां समुद्र पार हो रहे युद्ध की तपिश सीधे मेरठ के आम आदमी की रसोई तक पहुंच जाती है। मेरठ में गैस की किल्लत मुख्य रूप से तकनीकी विफलता (सर्वर डाउन), पैनिक बुकिंग और अधूरी ई-केवाईसी का मिला-जुला परिणाम है। हालांकि, जिला आपूर्ति अधिकारी विनय कुमार सिंह के नेतृत्व में प्रशासन द्वारा शहर से लेकर देहात तक चलाया गया सघन चेकिंग अभियान एक सराहनीय कदम है। ऑफलाइन बुकिंग के निर्देश और कॉलोनियों में प्वाइंट बनाकर गैस बांटने की रणनीति से आम जनता को थोड़ी राहत जरूर मिली है। अब उम्मीद की जानी चाहिए कि तेल कंपनियां जल्द ही अपने सर्वर की तकनीकी खामियों को दूर करेंगी ताकि डिजिटल बुकिंग फिर से शुरू हो सके और मेरठ वासियों को इस गैस संकट से स्थायी निजात मिल सके।