खबरीलाल डेस्क
मेरठ (उत्तर प्रदेश): मेरठ छावनी क्षेत्र में रक्षा भूमि पर अवैध कब्जे और अनाधिकृत निर्माणों के खिलाफ प्रशासन का डंडा अब पूरी ताकत से चल रहा है। रक्षा संपदा कार्यालय (Defence Estates Office) ने दशकों पुरानी कानूनी लड़ाइयों और न्यायालयों के स्पष्ट आदेशों के बाद, अवैध कब्जेदारों के खिलाफ अपनी कार्रवाई तेज कर दी है। रक्षा संपदा अधिकारी विनीत कुमार ने सेंट्रल मार्केट सीलिंग मामले में सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का हवाला देते हुए एक कड़ा अल्टीमेटम जारी किया है, जिसने छावनी क्षेत्र में अवैध निर्माणकर्ताओं की नींद हराम कर दी है।READ ALSO:-मेरठ की IIMT यूनिवर्सिटी में सनसनीखेज घटना: गर्ल्स हॉस्टल की छत से गिरकर MBA छात्रा की दर्दनाक मौत, खून से लथपथ मिला शव
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
गुरु तेग बहादुर स्कूल पर सीलिंग का खतरा, 2000 छात्रों का भविष्य दांव पर इसी कड़े रुख के क्रम में, मेरठ छावनी के वेस्ट एंड रोड स्थित प्रतिष्ठित गुरु तेग बहादुर पब्लिक स्कूल को एक सप्ताह के भीतर पूरा परिसर खाली करने और सामान हटाने का सख्त वैधानिक नोटिस दिया गया है। इस औचक और सख्त कार्रवाई ने न केवल स्कूल प्रबंधन, बल्कि क्षेत्र के अन्य स्कूल संचालकों में भी हड़कंप मचा दिया है।
\r\n\r\n

 

विज्ञापन
विज्ञापन
\r\n\r\n
यह मामला बंगला संख्या 227, जीएलआर सर्वे नंबर 375 (Bungalow No. 227, GLR Survey No. 375) स्थित रक्षा भूमि से संबंधित है, जिस पर अनाधिकृत निर्माण कर दशकों से स्कूल संचालित किया जा रहा है। रक्षा संपदा अधिकारी ने स्कूल प्रबंधन के साथ-साथ अभिभावकों, विद्यार्थियों, शिक्षकों और कर्मचारियों को भी पूरी स्थिति और कानूनी पहलुओं से अवगत कराया है, ताकि कोई भ्रम न रहे।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
दशकों पुरानी कानूनी लड़ाई: 1994 से लेकर 2010 तक का कानूनी इतिहास अधिकारियों के मुताबिक, इस मामले में कानूनी प्रक्रिया कोई नई नहीं है, बल्कि दशकों से चल रही है। सबसे पहले 17 दिसंबर 1994 को रक्षा भूमि पर अवैध निर्माण को लेकर स्कूल को वैधानिक नोटिस जारी किया गया था। इसके बाद जिला न्यायालय ने 18 जुलाई 1995 को मिसलेनियस अपील संख्या 284/1994 को निरस्त कर दिया था, जो स्कूल द्वारा दायर की गई थी।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
कानूनी लड़ाई का दौर आगे बढ़ा और इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने भी 26 मई 2010 को गुरु तेग बहादुर पब्लिक स्कूल बनाम स्टेट ऑफिसर्स एवं अन्य याचिका को पूरी तरह खारिज कर दिया था। अब, न्यायालयों के स्पष्ट आदेशों और दशकों पुरानी कानूनी प्रक्रिया को तार्किक परिणति तक पहुंचाने के लिए, 23 अप्रैल से इस मामले में पुनः वैधानिक कार्रवाई शुरू की गई है।
\r\n\r\n
एक सप्ताह का अल्टीमेटम: स्वैच्छिक परिसर खाली करने का आदेश रक्षा संपदा अधिकारी विनीत कुमार ने स्कूल प्रबंधन को एक सप्ताह के भीतर स्वेच्छा से परिसर खाली करने का आदेश दिया है। नोटिस में स्पष्ट चेतावनी दी गई है कि यदि तय अवधि में सहयोग नहीं किया गया और परिसर खाली नहीं किया गया, तो प्रशासन सख्त कानूनी और प्रशासनिक कार्रवाई करने के लिए विवश होगा।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
इस कार्रवाई के सीधे परिणाम के रूप में, लगभग दो हजार से अधिक छात्र-छात्राओं के अभिभावकों में अपने बच्चों के भविष्य और शिक्षा को लेकर भारी चिंता और अनिश्चितता बढ़ गई है। अभिभावकों का कहना है कि सत्र के बीच में इस तरह की कार्रवाई से बच्चों की पढ़ाई का भारी नुकसान होगा। वहीं, स्कूल के शिक्षक और कर्मचारी भी अपनी नौकरी जाने के डर से सहमे हुए हैं।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
अन्य अवैध कब्जेदारों के लिए चेतावनी सेंट्रल मार्केट सीलिंग मामले में सुप्रीम कोर्ट के सख्त रुख के बाद, मेरठ छावनी क्षेत्र में रक्षा भूमि पर अवैध कब्जों को हटाने की कार्रवाई को अब एक नया आयाम मिल गया है। रक्षा संपदा कार्यालय की यह सख्त कार्रवाई अन्य अवैध कब्जेदारों और अनाधिकृत निर्माणकर्ताओं के लिए भी एक स्पष्ट चेतावनी है कि अब कानून का शासन बहाल किया जाएगा और रक्षा भूमि पर किसी भी तरह का अवैध कब्जा बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। फिलहाल, सभी की निगाहें गुरु तेग बहादुर स्कूल प्रबंधन के अगले कदम पर टिकी हैं और एक सप्ताह की अवधि समाप्त होने के बाद प्रशासन की अगली कार्रवाई का बेसब्री से इंतजार किया जा रहा है।