तकनीक के दौर में जहां आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) ने जिंदगी आसान बनाई है, वहीं साइबर अपराधियों ने इसे ठगी का नया और खतरनाक हथियार बना लिया है। अगर आपको वीडियो कॉल पर आपका कोई करीबी रिश्तेदार, दोस्त या बॉस पैसे मांगता हुआ दिखाई दे, तो सावधान हो जाइए। हो सकता है कि वह असली इंसान नहीं, बल्कि डीपफेक (Deepfake) तकनीक से तैयार किया गया एक डिजिटल बहरूपिया हो।READ ALSO:-मेरठ में 'खूनी मांझे' पर पुलिस का प्रहार: SSP के निर्देश पर शहर भर में सघन चेकिंग अभियान; दुकानदारों को दी गई सख्त चेतावनी
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हाल ही में साइबर ठगी के मामलों में आई बाढ़ को देखते हुए पुलिस और साइबर सेल ने एक गंभीर एडवाइजरी जारी की है। इसमें आम जनता को #DEEP_FAKE और #AI स्कैम के प्रति सचेत किया गया है और ठगी का शिकार होने पर तुरंत 1930 हेल्पलाइन नंबर पर कॉल करने की सलाह दी गई है।
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क्या है डीपफेक स्कैम? (What is Deepfake Scam)
\r\n\r\nडीपफेक एक ऐसी तकनीक है जिसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल करके किसी व्यक्ति की नकली फोटो, वीडियो या आवाज तैयार की जाती है। यह नकली कंटेंट इतना असली लगता है कि नग्न आंखों से इसमें और असलियत में फर्क करना नामुमकिन सा हो जाता है। साइबर अपराधी सोशल मीडिया (Facebook, Instagram) से आपकी या आपके किसी परिचित की फोटो और आवाज का सैंपल चुराते हैं। फिर AI टूल्स की मदद से एक ऐसा वीडियो बनाते हैं जिसमें वह व्यक्ति हुबहू वही बोलता हुआ नजर आता है जो अपराधी चाहते हैं।
\r\n\r\n\r\n\r\n\r\n\r\n‼️Beware of DEEP FAKE Scam‼️
\r\n— LUCKNOW POLICE (@lkopolice) December 14, 2025
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\r\nसाइबर अपराधी, #DEEP_FAKE स्कैम द्वारा #AI का इस्तेमाल करके नकली फोटो/वीडियो बनाकर उसका उपयोग पैसे की मांग करने, झूठी जानकारी फैलाने आदि के लिए करते हैं।
\r\nऐसी स्थिति में तुरन्त 1930 पर कॉल करें।#सतर्करहें_सुरक्षितरहें#StopThinkTakeAction@Uppolice pic.twitter.com/7lF7N4K9ZA
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ठगी के तरीके: कैसे फंसाते हैं जाल में?
\r\n\r\nपुलिस ने बताया कि डीपफेक के जरिए अपराधी मुख्य रूप से तीन तरीकों से लोगों को शिकार बना रहे हैं:
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- \r\n इमरजेंसी वीडियो कॉल (The Emergency Trap): अपराधी आपके किसी दोस्त या रिश्तेदार का चेहरा और आवाज क्लोन करके आपको वीडियो कॉल करते हैं। वीडियो में वह व्यक्ति मुसीबत में फंसा हुआ दिखता है (जैसे- एक्सीडेंट हो गया है, अस्पताल में है या पुलिस ने पकड़ लिया है) और तुरंत पैसों की मांग करता है। घबराहट में लोग बिना जांचे पैसे ट्रांसफर कर देते हैं।\r\n \r\n
- \r\n अश्लील ब्लैकमेलिंग (Sextortion): कई मामलों में अपराधी लड़कियों या महिलाओं की सामान्य तस्वीरों को डीपफेक के जरिए आपत्तिजनक (Nude/Obscene) तस्वीरों या वीडियो में बदल देते हैं। इसके बाद वे पीड़ित को बदनाम करने की धमकी देकर लाखों रुपये वसूलते हैं।\r\n \r\n
- \r\n डिजिटल अरेस्ट (Digital Arrest): इसमें अपराधी पुलिस या सीबीआई अधिकारी बनकर वीडियो कॉल करते हैं। उनके बैकग्राउंड में पुलिस स्टेशन का नकली सेटअप होता है। वे पीड़ित को डराते हैं कि उनका नाम किसी बड़े अपराध में आया है और गिरफ्तारी से बचने के लिए पैसे देने होंगे।\r\n \r\n
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1930: आपकी सुरक्षा का नंबर
\r\n\r\nयदि आप या आपका कोई परिचित ऐसे किसी स्कैम का शिकार हो जाता है, तो घबराने के बजाय सबसे पहले 1930 डायल करें।
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- \r\n क्या है 1930? यह केंद्रीय गृह मंत्रालय और भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) द्वारा संचालित नेशनल साइबर क्राइम हेल्पलाइन नंबर है।\r\n \r\n
- \r\n कैसे करता है काम? जैसे ही आप इस नंबर पर कॉल करके वित्तीय ठगी की सूचना देते हैं, पुलिस और बैंक तुरंत हरकत में आते हैं। इस सिस्टम के जरिए अपराधी के खाते में गए पैसों को 'फ्रीज' (Freeze) कर दिया जाता है, जिससे अपराधी उस रकम को निकाल नहीं पाता और आपका पैसा वापस मिलने की उम्मीद बढ़ जाती है।\r\n \r\n
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बचाव के तरीके: 'रुको, सोचो और जांचो'
\r\n\r\nसाइबर एक्सपर्ट्स का कहना है कि डीपफेक से बचने का सबसे बड़ा हथियार जागरूकता है। पुलिस ने बचाव के लिए कुछ महत्वपूर्ण टिप्स साझा किए हैं:
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- \r\n कोड वर्ड बनाएं: अपने परिवार और करीबी दोस्तों के साथ एक 'सीक्रेट कोड वर्ड' तय करें। अगर कोई मुसीबत में होने का दावा करके कॉल करे, तो उससे वह कोड वर्ड पूछें। AI को वह कोड पता नहीं होगा।\r\n \r\n
- \r\n कॉल काटकर दोबारा मिलाएं: अगर कोई वीडियो कॉल पर पैसे मांगे, तो बहाना बनाकर फोन काट दें और उस व्यक्ति को उसके रेगुलर नंबर पर नॉर्मल कॉल करके पुष्टि करें।\r\n \r\n
- \r\n चेहरे और होठों पर ध्यान दें: डीपफेक वीडियो में अक्सर पलकें कम झपकती हैं या होठों की हरकत (Lip Sync) आवाज के साथ पूरी तरह मेल नहीं खाती। वीडियो कॉल के दौरान व्यक्ति से हाथ हिलाने या चेहरे के पास उंगली ले जाने को कहें, इससे AI का फिल्टर हट सकता है।\r\n \r\n
- \r\n सोशल मीडिया लॉक करें: अपनी प्रोफाइल को प्राइवेट रखें और अनजान लोगों की फ्रेंड रिक्वेस्ट स्वीकार न करें।\r\n \r\n
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सोशल मीडिया पर अफवाहों से बचें
\r\n\r\nसिर्फ पैसों की ठगी ही नहीं, डीपफेक का इस्तेमाल चुनावों या दंगों के दौरान झूठी खबरें और भ्रामक वीडियो फैलाने के लिए भी किया जा रहा है। किसी भी संवेदनशील वीडियो को फॉरवर्ड करने से पहले उसकी सत्यता जरूर जांच लें।
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साइबर अपराधी हर दिन नए तरीके खोज रहे हैं, लेकिन हमारी सतर्कता उन्हें हरा सकती है। याद रखें, डिजिटल दुनिया में "जो दिखता है, वह हमेशा सच नहीं होता।" अगर आपके साथ कोई भी ऑनलाइन धोखाधड़ी होती है, तो तुरंत 1930 पर कॉल करें या cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज कराएं। आपकी एक कॉल आपकी मेहनत की कमाई को बचा सकती है।