खबरीलाल डेस्क
नई दिल्ली: भारत में जरा सी खांसी, जुकाम या बुखार होने पर लोग सीधे मेडिकल स्टोर (Pharmacy) पर जाकर अपनी मर्जी से कफ सिरप (Cough Syrup) या अन्य दवाइयां खरीद लेते हैं। इस आदत को 'सेल्फ-मेडिकेशन' (Self-Medication) कहा जाता है, जो कई बार जानलेवा साबित होती है। आम जनता की सुरक्षा और दवाओं की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय (Ministry of Health and Family Welfare) ने एक बहुत बड़ा और ऐतिहासिक फैसला लिया है।READ ALSO:-RBI New Rule Alert: बैंक ग्राहकों के लिए ऐतिहासिक फैसला! अब मर्जी के बिना नहीं बेच पाएंगे कोई फालतू प्रोडक्ट, RBI ने 'मिस-सेलिंग' पर लगाया पूर्ण बैन
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केंद्र सरकार ने एक आधिकारिक नोटिफिकेशन जारी करते हुए कफ सिरप समेत सभी प्रकार के मेडिकल सिरप की खुलेआम बिक्री पर पूरी तरह से रोक लगा दी है। नए और सख्त नियमों के अनुसार, अब देश के किसी भी मेडिकल स्टोर से सिरप खरीदने के लिए आपको एक रजिस्टर्ड डॉक्टर की पर्ची (Prescription) दिखानी ही होगी। आइए विस्तार से समझते हैं कि सरकार को इतना बड़ा कदम क्यों उठाना पड़ा और आम जनता की जेब व सेहत पर इसका क्या असर पड़ेगा।
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1. यह कड़ा फैसला क्यों लिया गया? (पृष्ठभूमि और कारण)

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भारत सहित दुनिया भर में पिछले कुछ समय से कफ सिरप की गुणवत्ता को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े हो रहे थे। इस सख्त कदम के पीछे की मुख्य वजह हाल ही में देश के दो राज्यों में हुई हृदयविदारक घटनाएं हैं।
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    मध्य प्रदेश और राजस्थान की घटनाएं: कुछ महीने पहले मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) और राजस्थान (Rajasthan) से ऐसी दुखद खबरें सामने आई थीं, जहां खराब क्वालिटी (Substandard) और जहरीले रसायन युक्त कफ सिरप पीने से कई मासूम बच्चों की जान चली गई थी।
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    गुणवत्ता पर उठते सवाल: इन घटनाओं के बाद देशभर में हड़कंप मच गया था। स्वास्थ्य विशेषज्ञों और बाल रोग विशेषज्ञों ने आम तौर पर इस्तेमाल होने वाली लिक्विड दवाओं (Liquid Medicines) और सिरप की सुरक्षा, रेगुलेशन और बिना पर्ची के उनकी आसान उपलब्धता को लेकर गहरी चिंताएं व्यक्त की थीं।
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    जांच की मांग: लगातार हो रहे इन हादसों के बाद दवा कंपनियों द्वारा सिरप बनाने की प्रक्रिया और बाजार में उनकी बिक्री पर बेहतर निगरानी और सख्त जांच (Strict Checking) की मांग तेज हो गई थी, जिसके परिणामस्वरूप सरकार ने यह कड़ा एक्शन लिया है।
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2. नोटिफिकेशन में क्या हैं कानूनी बदलाव? (Legal Amendments)

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सरकार ने दवाओं की बिक्री को रेगुलेट करने वाले सबसे पुराने और अहम कानून में बड़ा बदलाव किया है। 9 जून, 2026 की तारीख वाले इस लेटेस्ट नोटिफिकेशन में कानूनी मापदंडों को स्पष्ट किया गया है।
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    शेड्यूल K (Schedule K) से हटा 'सिरप' शब्द: केंद्र सरकार ने ‘ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट, 1940’ (Drugs and Cosmetics Act, 1940) की धारा 12 और 33 के तहत मिली विशेष शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए ‘ड्रग्स रूल्स, 1945’ (Drugs Rules, 1945) में संशोधन किया है। इस कानून की 'शेड्यूल K' के तहत सातवें आइटम में दवाओं की श्रेणी से "सिरप" (Syrup) शब्द को पूरी तरह से हटा दिया गया है।
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    ओवर-द-काउंटर (OTC) बिक्री खत्म: 'शेड्यूल K' में शामिल दवाओं को बिना डॉक्टर की पर्ची के ओवर-द-काउंटर (OTC) बेचा जा सकता था। अब चूंकि सिरप शब्द को ही इस लिस्ट से हटा दिया गया है, इसलिए इनकी ओटीसी उपलब्धता कानूनी रूप से समाप्त हो गई है।
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    संशोधन का नाम: नोटिफिकेशन में स्पष्ट रूप से लिखा गया है कि इन नए नियमों को ‘ड्रग्स (पांचवां संशोधन) नियम, 2026’ के नाम से जाना जाएगा। यह नियम भारत सरकार के आधिकारिक राजपत्र (Official Gazette) में पब्लिश होने की तारीख से ही पूरे देश में लागू माने जाएंगे।
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3. आम जनता (Consumers) पर इस फैसले का क्या असर होगा?

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इस रेगुलेटरी बदलाव का सीधा और सबसे बड़ा असर देश के करोड़ों आम कंज्यूमर्स पर पड़ेगा।
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    सेल्फ-मेडिकेशन पर लगाम: अब तक लोग रात-बिरात खांसी उठने पर खुद ही जाकर कोई भी सिरप खरीद लाते थे। अब इस प्रैक्टिस पर पूरी तरह ब्रेक लग जाएगा।
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    पर्ची दिखाना होगा अनिवार्य: कोई भी मेडिकल स्टोर संचालक आपको बिना मेडिकल मंजूरी के सीधे सिरप नहीं बेचेगा। सिरप खरीदने वाले ग्राहकों को अब हर हाल में एक रजिस्टर्ड मेडिकल प्रैक्टिशनर (RMP) यानी मान्यता प्राप्त एमबीबीएस/एमडी डॉक्टर का लिखा हुआ प्रिस्क्रिप्शन (पर्ची) केमिस्ट को दिखाना होगा।
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    सुरक्षा में वृद्धि: हालांकि इससे छोटी-मोटी बीमारियों के लिए बार-बार डॉक्टर के पास जाने की असुविधा जरूर बढ़ेगी, लेकिन इसके पीछे का मुख्य मकसद यह सुनिश्चित करना है कि मरीज (विशेषकर बच्चे) गलत डोज़ या गलत कंपोजीशन वाला सिरप न पी लें। इससे ओवरडोज और दवाओं के साइड-इफेक्ट्स से होने वाली मौतों में भारी कमी आएगी।
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4. देश भर की फार्मेसी (Medical Stores) के लिए सख्त निर्देश

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यह नया नियम केवल ग्राहकों के लिए नहीं, बल्कि दवा विक्रेताओं के लिए भी बेहद सख्त है। संशोधन लागू होने के बाद, देश भर के सभी थोक (Wholesale) और फुटकर (Retail) मेडिकल स्टोर्स को सिरप और उससे जुड़े फॉर्मूलेशन की बिक्री के बदले हुए नियमों का कड़ाई से पालन करना होगा। यदि कोई भी केमिस्ट बिना पर्ची के कफ सिरप बेचता हुआ पकड़ा गया, तो ड्रग इंस्पेक्टर (Drug Inspector) उसका लाइसेंस रद्द कर सकता है और उसके खिलाफ कड़ी कानूनी व दंडात्मक कार्रवाई की जा सकती है। केमिस्टों को अब डॉक्टर की पर्ची का रिकॉर्ड भी मेंटेन करना पड़ सकता है।
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5. एक नज़र में पूरा घटनाक्रम (Timeline of Decision)

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इस बड़े फैसले को रातों-रात लागू नहीं किया गया है, बल्कि इसके लिए एक लंबी प्रक्रिया का पालन किया गया है।
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चरण (Phase)
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जानकारी (Details)
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ड्राफ्ट प्रस्ताव जारी
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30 दिसंबर, 2025 को सरकार ने नियमों में संशोधन का ड्राफ्ट पब्लिश किया था।
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जनता की राय
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ड्राफ्ट जारी कर सरकार ने जनता, फार्मा कंपनियों और विशेषज्ञों से आपत्तियां व सुझाव मांगे थे।
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सुझावों पर विचार
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कंसल्टेशन पीरियड के दौरान मिली सभी टिप्पणियों का गहन विश्लेषण किया गया।
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अंतिम नोटिफिकेशन
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9 जून, 2026 को स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के जॉइंट सेक्रेटरी 'हर्ष मंगला' द्वारा अंतिम आदेश जारी किया गया।
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स्वास्थ्य सुरक्षा की दिशा में एक जरूरी कदम

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कफ सिरप पर पर्ची अनिवार्य करने का केंद्र सरकार का यह फैसला पहली नजर में आम आदमी को थोड़ा असुविधाजनक लग सकता है, लेकिन दीर्घकालिक (Long-term) जन स्वास्थ्य के नजरिए से यह एक बेहद जरूरी और स्वागत योग्य कदम है। दवाओं की आसान उपलब्धता ने समाज में बिना सोचे-समझे दवाएं खाने की जो खतरनाक संस्कृति पैदा कर दी थी, यह नया नियम उस पर एक कड़ा प्रहार करेगा।
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हमेशा याद रखें, कोई भी दवा शरीर के लिए तब तक सुरक्षित है जब तक वह एक योग्य डॉक्टर की निगरानी और सही मात्रा (Dosage) में ली जाए।
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महत्वपूर्ण नोट: यह नया नियम कफ सिरप के साथ-साथ बुखार, एलर्जी और अन्य बीमारियों के लिए इस्तेमाल होने वाले सभी प्रकार के मेडिकल 'सिरप' पर समान रूप से लागू होगा। इसलिए अगली बार जब भी आपको या आपके बच्चे को सिरप की जरूरत हो, तो सीधे मेडिकल स्टोर जाने के बजाय पहले अपने डॉक्टर से परामर्श अवश्य लें।