गाजियाबाद: दिल्ली-एनसीआर में मौसम के बदलने के साथ ही वायु प्रदूषण (Air Pollution) ने एक बार फिर विकराल रूप धारण कर लिया है। गाजियाबाद शहर में वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) लगातार 'गंभीर' (Severe) श्रेणी में बना हुआ है, जिससे आम जनता को सांस लेने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। जिले के कई इलाकों, विशेषकर वसुंधरा और लोनी, में तो AQI 400 के भी पार चला गया है, जो 'खतरनाक' (Hazardous) स्तर का संकेत है।READ ALSO:-नमो भारत डिपो में 'सोलर ऑन ट्रैक' प्रणाली, पटरियों के बीच बिछे सोलर पैनल से बनेगी बिजली, देश में ऐसा दूसरा सिस्टम
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\r\nबिगड़ते हालात को देखते हुए, गाजियाबाद के मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) डॉ. अखिलेश मोहन ने तत्काल प्रभाव से एक विस्तृत गाजियाबाद प्रदूषण एडवाइजरी जारी की है, जिसमें नागरिकों को सख्त सावधानी बरतने की अपील की गई है।
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\r\nCMO की महत्वपूर्ण सलाह और बचाव के उपाय
\r\nजनता को गंभीर वायु प्रदूषण से बचाने के लिए, CMO द्वारा जारी गाजियाबाद प्रदूषण एडवाइजरी में निम्नलिखित आवश्यक निर्देश और सुझाव दिए गए हैं:
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  •  AQI की जांच जरूरी: हर व्यक्ति को घर से निकलने से पहले अपने क्षेत्र का एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) अवश्य जांच लेना चाहिए। जिन इलाकों में AQI 300 से अधिक है, वहां अनावश्यक रूप से जाने से बचें।
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  •  सुबह-शाम बाहर न निकलें: सुबह और देर शाम के समय प्रदूषण का स्तर सबसे अधिक (पीक लेवल) होता है। इन घंटों में जॉगिंग, सैर, या किसी भी तरह की शारीरिक गतिविधि के लिए बाहर निकलने से बचें।
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  •  मास्क का उपयोग: बाहर निकलते समय N95 या N99 क्वालिटी के मास्क का प्रयोग अनिवार्य रूप से करें। सामान्य मास्क PM2.5 जैसे महीन कणों को रोकने में प्रभावी नहीं होते हैं।
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  •  बच्चों और बुजुर्गों का विशेष ध्यान: बच्चों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं, और अस्थमा या हृदय रोग से पीड़ित व्यक्तियों** को घर के अंदर ही रहने की सलाह दी गई है। इन संवेदनशील समूहों पर प्रदूषण का सबसे बुरा असर होता है।
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  •  शारीरिक श्रम से बचें: प्रदूषण वाले दिनों में दौड़ने, जिम करने या अधिक मेहनत वाले बाहरी कामों से बचें, क्योंकि इससे सांस लेने की दर बढ़ती है और फेफड़ों में अधिक प्रदूषित हवा जाती है।
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  •  लक्षण दिखने पर डॉक्टर से मिलें: अगर किसी को सांस लेने में लगातार दिक्कत, गले में खराश, लगातार खांसी, सीने में जकड़न या आँखों में जलन जैसे लक्षण महसूस हों, तो तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र या डॉक्टर से संपर्क करें।
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प्रदूषण के स्वास्थ्य पर खतरनाक प्रभाव
\r\nगाजियाबाद की जहरीली हवा में PM2.5 और PM10 जैसे खतरनाक कणों की मात्रा बहुत अधिक है। ये महीन कण सांस के जरिए सीधे फेफड़ों में पहुँचकर श्वसन तंत्र को नुकसान पहुंचाते हैं। वर्तमान में, अस्पतालों की ओपीडी में सांस संबंधी बीमारियों, जैसे अस्थमा अटैक, ब्रोंकाइटिस और एलर्जी के मरीजों की संख्या में तेजी से वृद्धि देखी जा रही है।  यह गाजियाबाद प्रदूषण एडवाइजरी इसीलिए आवश्यक है ताकि लोग अपनी सेहत को लेकर लापरवाही न बरतें। 
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\r\nप्रदूषण रोकने के लिए GRAP-3 लागू
\r\nप्रदूषण के 'गंभीर' स्तर को देखते हुए गाजियाबाद में ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP) का चरण-3 भी लागू कर दिया गया है। इसके तहत, सभी प्रकार के गैर-जरूरी निर्माण कार्यों पर रोक लगा दी गई है, और डीजल जनरेटर के उपयोग को भी सीमित कर दिया गया है। इसके अलावा, नगर निगम को सड़कों पर पानी का छिड़काव और कूड़ा जलाने पर सख्त निगरानी रखने के निर्देश दिए गए हैं।
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  • प्रशासन ने लोगों से भी अपील की है कि वे प्रदूषण कम करने में सहयोग करें, जैसे कि निजी वाहनों का कम इस्तेमाल करें और कचरा न जलाएं। 
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\r\nगाजियाबाद में वायु प्रदूषण की स्थिति बेहद चिंताजनक बनी हुई है, जिसके कारण गाजियाबाद प्रदूषण एडवाइजरी जारी की गई है। शहर का AQI लगातार 400 के पार रिकॉर्ड किया जा रहा है। सीएमओ ने विशेष रूप से बच्चों और बुजुर्गों को सुबह-शाम बाहर न निकलने और N95 मास्क पहनने की सलाह दी है। सभी नागरिकों को स्वास्थ्य विभाग द्वारा दिए गए निर्देशों का गंभीरता से पालन करना चाहिए।

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