गाजियाबाद: उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद (Ghaziabad) जिले से एक दिल दहला देने वाली और ममता को शर्मसार करने वाली घटना सामने आई है। यहां एक कलयुगी मां ने अपनी ही कोख से जन्मी फूल जैसी बच्ची को सिर्फ इसलिए मौत के घाट उतार दिया क्योंकि उसे बेटा चाहिए था। सिहानी गेट थाना क्षेत्र के नेहरूनगर इलाके में हुई इस घटना ने पूरे शहर को झकझोर कर रख दिया है। गाजियाबाद में मां ने नवजात बच्ची को फेंका और उसकी निर्मम हत्या कर दी। पुलिस ने आरोपी महिला को गिरफ्तार कर लिया है और पूछताछ में महिला ने जो खुलासे किए हैं, वे रोंगटे खड़े करने वाले हैं।READ ALSO:-मेरठ में गरजा निगम का एक्शन: हापुड़ अड्डे से गोला कुआं तक सड़क हुई 'साफ', व्यापारियों के विरोध के बीच जब्त किया गया सामान
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

45 मिनट की जिंदगी और दर्दनाक मौत

\r\n\r\n
घटना 5 दिसंबर की सुबह की है। मूल रूप से पश्चिम बंगाल की रहने वाली झरना (19 वर्ष) ने अपनी बहन के घर पर एक बच्ची को जन्म दिया। बच्ची का जन्म सुबह करीब 6 बजे हुआ था। लेकिन दुनिया में आंखें खोलने के महज 45 मिनट बाद ही उसकी सगी मां ने उसे छत से नीचे फेंक दिया।
\r\n\r\n

 

विज्ञापन
विज्ञापन
\r\n\r\n
आरोपी मां ने पुलिस को बताया कि वह बच्ची को घर के पीछे खाली प्लॉट में फेंकना चाहती थी ताकि किसी को पता न चले। लेकिन उसका निशाना चूक गया और 20 फीट दूर पड़ोसी विनय रावत की छत पर जा गिरी। विनय रावत जब सुबह छत पर गए तो वहां पानी की टंकी के पीछे पॉलीथिन में लिपटी नवजात की लाश देखकर सन्न रह गए। उन्होंने तुरंत पुलिस को सूचना दी।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट ने खोली मां के झूठ की पोल

\r\n\r\n
पुलिस जब मौके पर पहुंची तो शक की सुई घर में मौजूद झरना पर घूमी। शुरुआत में झरना ने पुलिस को गुमराह करने की पूरी कोशिश की। उसने झूठी कहानी गढ़ते हुए कहा, "बेटी जब पैदा हुई तो उसकी सांस नहीं चल रही थी, वह मरी हुई थी। मुझे समझ नहीं आया तो मैंने उसे फेंकने की कोशिश की।"
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
लेकिन जब पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट सामने आई, तो मां का झूठ टिक नहीं सका। डॉक्टरों ने स्पष्ट किया कि बच्ची को पैदा होने के 1 घंटे के अंदर मार दिया गया। रिपोर्ट के मुताबिक, गिरने की वजह से बच्ची के सिर की हड्डी दो टुकड़ों में बंट गई थी और हाथ-पैर की हड्डियों में भी फ्रैक्चर था। डॉक्टर ने साफ कहा कि जब बच्ची को फेंका गया, तब वह जिंदा थी और सांस ले रही थी।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

बेटे की चाहत में बनी हत्यारन

\r\n\r\n
एसीपी (ACP) नंदग्राम उपासना पांडेय ने बताया कि कड़ाई से पूछताछ करने पर झरना ने अपना जुर्म कबूल कर लिया। उसने बताया कि उसकी शादी डेढ़ साल पहले बिहार के दरभंगा निवासी बादल से हुई थी। वह और उसका पति बेटा चाहते थे।
\r\n\r\n

 पुलिस ने बच्ची की बॉडी की वीडियोग्राफी और फोरेंसिक जांच भी करवाई थी।

\r\n\r\n
हैरान करने वाली बात यह है कि झरना ने 5 महीने पहले दरभंगा में अवैध रूप से भ्रूण लिंग जांच (Gender Test) करवाई थी। जब उसे पता चला कि गर्भ में बेटी है, तो उसने गर्भपात (Abortion) कराने की कोशिश की, लेकिन डॉक्टरों ने मना कर दिया। इसके बाद उसने देसी दवाइयां खाईं, जिससे उसकी तबीयत बिगड़ गई और वह अपनी बहन के पास गाजियाबाद आ गई।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

पुलिस की कार्रवाई और सवाल

\r\n\r\n
आरोपी मां ने स्वीकार किया कि वह बेटी को किसी भी कीमत पर नहीं पालना चाहती थी। इसीलिए उसने योजना बनाई कि बच्ची को पैदा होते ही फेंक देगी ताकि सबको लगे कि वह गायब हो गई या मरी हुई पैदा हुई थी। पुलिस ने आरोपी मां झरना के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 91 (शिशु की हत्या) के तहत मुकदमा दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया है।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
पुलिस अब आरोपी महिला और बच्ची का डीएनए टेस्ट (DNA Test) भी कराएगी ताकि वैज्ञानिक रूप से भी रिश्ता साबित हो सके। साथ ही, महिला के पति और बहनोई से भी पूछताछ की तैयारी चल रही है।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
गाजियाबाद में मां ने नवजात बच्ची को फेंका - यह घटना सिर्फ एक अपराध नहीं, बल्कि हमारे समाज के माथे पर लगा कलंक है। आज जब हम 'बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ' की बात करते हैं, तब बेटे की चाहत में एक मां का ऐसा क्रूर कदम उठाना बताता है कि सामाजिक मानसिकता में अभी भी बहुत बदलाव की जरूरत है। पुलिस की त्वरित कार्रवाई और पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट ने दूध का दूध और पानी का पानी कर दिया, लेकिन उस मासूम बच्ची को न्याय दिलाने के लिए समाज को भी जागना होगा।
विज्ञापन
विज्ञापन