गाजियाबाद/लोनी (क्राइम इन्वेस्टिगेशन डेस्क): समाज में इंसानियत को शर्मसार करने वाले अपराधों में मानव तस्करी (Human Trafficking) और खासकर मासूम बच्चों की खरीद-फरोख्त सबसे घिनौना अपराध माना जाता है। उत्तर प्रदेश पुलिस लगातार ऐसे खूंखार सिंडिकेट्स के खिलाफ 'जीरो टॉलरेंस' (Zero Tolerance) की नीति पर काम कर रही है। इसी दिशा में एक बहुत बड़ी और ऐतिहासिक कामयाबी गाजियाबाद पुलिस के हाथ लगी है।READ ALSO:-'गेमिंग' के नाम पर डार्क वेब का खेल: 2 छात्रों ने रातों-रात खड़ा किया करोड़ों का साम्राज्य, मेरठ के मवाना में ED की 4 बजे भोर में 'सर्जिकल स्ट्राइक'
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गाजियाबाद कमिश्नरेट की स्वाट टीम (ग्रामीण जोन) और थाना ट्रोनिका सिटी पुलिस ने एक संयुक्त और गुप्त ऑपरेशन (Joint Secret Operation) चलाते हुए एक ऐसे 'अंतरराज्यीय मानव तस्करी रैकेट' (Interstate Human Trafficking Racket) का भंडाफोड़ किया है, जिसके तार कई राज्यों से जुड़े हुए हैं। पुलिस ने न केवल इस गिरोह के 12 सदस्यों को गिरफ्तार किया है, बल्कि महज 11 दिन के एक अपहृत नवजात शिशु को तस्करों के चंगुल से सकुशल बरामद कर एक मां की सूनी गोद को फिर से आबाद कर दिया है।
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हैरानी की बात यह है कि यह गिरोह सिर्फ बच्चों की तस्करी ही नहीं कर रहा था, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था को खोखला करने वाले 'नकली नोटों' (Fake Currency) के काले कारोबार में भी पूरी तरह से लिप्त था।
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क्या है पूरा मामला? (ऑपरेशन 'सेव लाइफ')

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पुलिस सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, गाजियाबाद के लोनी और ट्रोनिका सिटी क्षेत्र में पिछले कुछ समय से एक संदिग्ध गिरोह की गतिविधियों के इनपुट मिल रहे थे। सूचना थी कि कुछ लोग बाहरी राज्यों से आकर इस इलाके में सक्रिय हैं और वे बच्चों की तस्करी जैसे जघन्य अपराध को अंजाम देने की फिराक में हैं।
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मामले की गंभीरता और संवेदनशीलता को देखते हुए उच्चाधिकारियों के निर्देश पर ग्रामीण जोन की स्वाट (SWAT) टीम और ट्रोनिका सिटी थाने की पुलिस की एक विशेष संयुक्त टीम का गठन किया गया। पुलिस ने सर्विलांस (Surveillance), मुखबिरों के नेटवर्क और मैन्युअल इंटेलिजेंस का जाल बिछाया। पुलिस की कई दिनों की कड़ी मेहनत और सटीक ट्रैकिंग के बाद तस्करों की लोकेशन को ट्रेस कर लिया गया और एक जोरदार छापेमारी कर इस पूरे सिंडिकेट को रंगे हाथों धर दबोचा गया।
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12 तस्कर गिरफ्तार: सिंडिकेट में महिलाएं भी शामिल

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पुलिस की इस ताबड़तोड़ छापेमारी में गिरोह के कुल 12 सदस्यों (अभियुक्त/अभियुक्ता) को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस के लिए यह चौंकाने वाला था कि इस खूंखार रैकेट में महिलाओं की भी सक्रिय और बड़ी भूमिका थी।
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अक्सर मानव तस्कर परिवारों, अस्पतालों या गरीब बस्तियों में महिलाओं के जरिए ही घुसपैठ करते हैं। गिरोह की महिलाएं भोली-भाली माताओं से हमदर्दी जताकर या उन्हें लालच देकर बच्चों को अगवा करने का काम करती थीं। गिरफ्तार किए गए इन 12 लोगों से पुलिस अब कड़ी पूछताछ कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि उन्होंने अब तक कितने और बच्चों को अपना शिकार बनाया है और उन्हें किन-किन राज्यों में बेचा गया है।
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11 दिन के मासूम की सकुशल बरामदगी: जब पुलिस बनी 'फरिश्ता'

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इस पूरे ऑपरेशन की सबसे बड़ी और भावनात्मक सफलता 11 दिन के एक नवजात शिशु की सकुशल बरामदगी रही। इस मासूम को जन्म लेने के कुछ ही दिन बाद इस क्रूर गिरोह ने अगवा कर लिया था और वे इसे किसी अन्य राज्य में मोटी रकम लेकर बेचने की सौदेबाजी कर रहे थे।
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अगर पुलिस की टीम कुछ घंटे भी लेट हो जाती, तो शायद यह बच्चा हमेशा के लिए अपने असली माता-पिता से दूर हो जाता और किसी गलत हाथों में पड़ जाता। जब पुलिस ने तस्करों के चंगुल से इस रोते हुए मासूम को अपने हाथों में लिया और उसे सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया, तो यह पल पूरी पुलिस टीम के लिए भी बेहद भावुक कर देने वाला था। बच्चा पूरी तरह से स्वस्थ और सुरक्षित है, जिसे कानूनी प्रक्रिया के बाद उसके वास्तविक परिजनों को सौंपने की तैयारी की जा रही है।
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नकली नोटों का जखीरा: एक तीर से दो शिकार

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यह गिरोह केवल बच्चों की तस्करी तक सीमित नहीं था। पुलिस की रेड के दौरान एक और बड़ा और चौंकाने वाला खुलासा हुआ। जब तस्करों के ठिकानों और उनके सामान की तलाशी ली गई, तो पुलिस के होश उड़ गए। तस्करों के पास से 2 लाख 90 हजार रुपये के जाली भारतीय नोट (Fake Indian Currency Notes - FICN) बरामद हुए।
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क्या था नकली नोटों का खेल? जांचकर्ताओं का मानना है कि यह गिरोह एक 'डबल-ब्लाइंड सिंडिकेट' (Double-blind Syndicate) चला रहा था।
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    पहला, ये लोग बच्चों का अपहरण कर उन्हें लाखों रुपये में निसंतान दंपतियों या आपराधिक गिरोहों को बेचते थे।
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    दूसरा, इस खरीद-फरोख्त के लेन-देन में वे अक्सर नकली नोटों का इस्तेमाल करते थे ताकि बाजार में नकली करेंसी खपाई जा सके और वे खुद असली पैसा कमा सकें।
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इसके अलावा, पुलिस ने मौके से 3 गाड़ियां (वाहन) भी जब्त की हैं। इन गाड़ियों का इस्तेमाल अपहृत बच्चों को एक राज्य से दूसरे राज्य में सुरक्षित और छुपकर ले जाने, तथा नकली नोटों की डिलीवरी के लिए किया जाता था।
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एसीपी सिद्धार्थ गौतम का बयान: "अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी"

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इस शानदार और सफल पुलिस ऑपरेशन की जानकारी देते हुए सहायक पुलिस आयुक्त (ACP), अंकुर विहार/लोनी, श्री सिद्धार्थ गौतम ने मीडिया को संबोधित किया।
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एसीपी सिद्धार्थ गौतम ने अपनी 'बाइट' (Byte) में स्पष्ट किया:
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"हमारी स्वाट टीम (ग्रामीण) और थाना ट्रोनिका सिटी पुलिस को एक बहुत बड़ी कामयाबी मिली है। हमने एक अंतरराज्यीय मानव तस्करी रैकेट का पर्दाफाश करते हुए 12 अभियुक्तों (जिसमें महिलाएं भी शामिल हैं) को गिरफ्तार किया है। सबसे बड़ी राहत की बात यह है कि हमने 11 दिन के एक नवजात शिशु को सकुशल बरामद कर लिया है। इसके साथ ही इस गैंग के पास से 2 लाख 90 हजार रुपये की फेक करेंसी (नकली नोट) और घटना में प्रयुक्त 3 वाहन भी जब्त किए गए हैं। इन सभी आरोपियों के खिलाफ गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है और इन पर गैंगस्टर एक्ट (Gangster Act) जैसी सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। हम यह भी जांच कर रहे हैं कि इनके तार देश के और किन हिस्सों से जुड़े हुए हैं।"
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समाज के लिए अलर्ट और पुलिस की अपील

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गाजियाबाद पुलिस का यह सफल ऑपरेशन समाज के लिए एक बड़ी राहत भी है और एक सख्त चेतावनी भी। अस्पतालों, रेलवे स्टेशनों और गरीब बस्तियों में ऐसे गिरोह अक्सर सक्रिय रहते हैं जो मौका पाते ही बच्चों को गायब कर देते हैं।
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पुलिस प्रशासन ने आम जनता से अपील की है कि वे अपने छोटे बच्चों को लेकर विशेष सतर्कता बरतें। किसी भी अनजान व्यक्ति (विशेषकर उन महिलाओं या पुरुषों पर जो अचानक आपके बच्चों से बहुत ज्यादा प्यार जताने लगें) पर आंख मूंदकर भरोसा न करें। यदि इलाके में कोई संदिग्ध व्यक्ति या गतिविधि नजर आए, तो तुरंत स्थानीय पुलिस या डायल 112 पर सूचना दें।
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फिलहाल, ट्रोनिका सिटी पुलिस इस पूरे सिंडिकेट के 'मास्टरमाइंड' और नकली नोटों की छपाई के स्रोत (Source) तक पहुंचने के लिए आरोपियों का रिमांड लेने की तैयारी कर रही है। आने वाले दिनों में इस मामले में कई और बड़े खुलासे होने की पूरी संभावना है।
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