खबरीलाल डेस्क
मुंबई (Entertainment Desk): स्टैंड-अप कॉमेडी के नाम पर फूहड़ता, अश्लीलता और असंवेदनशीलता परोसने का चलन लगातार बढ़ता जा रहा है, लेकिन अब ऐसे कंटेंट क्रिएटर्स पर कानूनी शिकंजा कसना शुरू हो गया है। मशहूर स्टैंड-अप कॉमेडियन प्रणित मोरे (Pranit More) अपने एक शो को लेकर भारी मुसीबत में घिर गए हैं। उनके द्वारा होस्ट किए गए एक कार्यक्रम में महिलाओं के प्रति यौन जबरदस्ती को सही ठहराने और मेडिकल शवों (Cadavers) पर अभद्र टिप्पणी करने के मामले में महाराष्ट्र साइबर (Maharashtra Cyber) ने सख्त कदम उठाया है।READ ALSO:-मेरठ में बिजली विभाग और व्यापारियों के बीच ठनी: बिना लिखित आदेश दुकानों के बाहर मीटर लगाने पर बेगमपुल व्यापार संघ का हल्ला बोल!
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गुरुवार, 11 जून को महाराष्ट्र साइबर पुलिस ने प्रणित मोरे, हिमांशु जांगड़ा, डॉ. सेजल पवार और अन्य अज्ञात लोगों के खिलाफ गंभीर धाराओं में एफआईआर (FIR) दर्ज की है। इस पूरे विवाद ने तूल तब पकड़ लिया जब राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) ने भी इस वायरल वीडियो का खुद संज्ञान लिया और आरोपियों को नोटिस जारी कर तलब कर लिया। आइए, इस पूरे विवाद, भद्दे बयानों और उस पर हो रही कानूनी कार्रवाई को विस्तार से समझते हैं।
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क्या है पूरा विवाद? कॉमेडी के मंच से क्या परोसा गया?

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यह पूरा बवाल प्रणित मोरे द्वारा होस्ट किए गए एक स्टैंड-अप कॉमेडी शो के वीडियो क्लिप्स वायरल होने के बाद शुरू हुआ। इन क्लिप्स को यूट्यूब (YouTube) और इंस्टाग्राम (Instagram) सहित कई सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर शेयर किया गया था। इस शो में कॉमेडी के नाम पर ऐसी बातें कही गईं जो न केवल महिलाओं की गरिमा को ठेस पहुंचाती हैं, बल्कि समाज में यौन हिंसा और असंवेदनशीलता को बढ़ावा देती हैं।
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हिमांशु जांगड़ा का आपत्तिजनक बयान: "पैसे खर्च किए हैं तो हक बनता है"

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महाराष्ट्र साइबर विभाग की ओर से जारी प्रेस नोट और मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, वायरल हो रही एक क्लिप में स्टैंड-अप कॉमेडियन हिमांशु जांगड़ा (Himanshu Jangra) बेहद शर्मनाक बातें कहते हुए नजर आ रहे हैं। उन्होंने अपने एक्ट में यह संकेत दिया कि अगर कोई पुरुष किसी महिला के साथ डेट पर जाता है और उस पर पैसे खर्च करता है, तो इसके बदले में उसे शारीरिक संबंध बनाने (Physical Relations) का 'हक' मिल जाता है।
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जांगड़ा की इन टिप्पणियों में महिलाओं को एक 'वस्तु' की तरह पेश किया गया और 'सहमति' (Consent) जैसे गंभीर और महत्वपूर्ण मुद्दे का सरेआम मजाक उड़ाया गया। सबसे हैरानी की बात यह रही कि मंच से कही गई इस बात पर दर्शकों की ओर से तालियां और ठहाके गूंज रहे थे, जो समाज की सोच पर एक बड़ा सवालिया निशान लगाता है।
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डॉ. सेजल पवार की शवों पर भद्दी टिप्पणी

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विवाद केवल यहीं तक सीमित नहीं था। एक अन्य क्लिप में डॉ. सेजल पवार (Dr. Sejal Pawar) ने भी सारी हदें पार कर दीं। पेशे से जुड़ी होने के बावजूद, उन्होंने मेडिकल की पढ़ाई और रिसर्च के लिए दान किए गए पुरुषों के शवों (Medical Cadavers) को लेकर बेहद अश्लील और अपमानजनक टिप्पणियां कीं।
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इन्वेस्टिगेटर्स और साइबर सेल का स्पष्ट कहना है कि ये टिप्पणियां न केवल मृतकों की गरिमा के सख्त खिलाफ थीं, बल्कि यह सार्वजनिक शालीनता और नैतिकता के तय मानकों का सीधा-सीधा उल्लंघन थीं। मेडिकल साइंस में शरीर दान को एक महादान माना जाता है, ऐसे में उस पर भद्दी कॉमेडी करना लोगों को नागवार गुजरा।
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महाराष्ट्र साइबर का एक्शन: इन गंभीर धाराओं में दर्ज हुई FIR

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सोशल मीडिया पर इन क्लिप्स के खिलाफ लोगों का गुस्सा फूटने के बाद महाराष्ट्र साइबर तुरंत हरकत में आया। कंटेंट की जांच करने के बाद नोडल साइबर पुलिस स्टेशन में एफआईआर नंबर 36/2026 दर्ज की गई है।
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इस मामले में पुलिस ने नए आपराधिक कानूनों का इस्तेमाल किया है। यह मामला भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (IT Act), 2000 की निम्नलिखित धाराओं के तहत दर्ज किया गया है:
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    BNS धारा 75(1)(iv) और 75(3): महिलाओं की गरिमा को ठेस पहुंचाने और यौन उत्पीड़न से संबंधित।
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    BNS धारा 294: सार्वजनिक स्थानों पर अश्लील कृत्य या शब्द कहने पर।
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    BNS धारा 353(2): सार्वजनिक भलाई के खिलाफ बयानबाजी करने और अफवाहें या आपत्तिजनक बातें फैलाने पर।
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    IT Act धारा 67: इलेक्ट्रॉनिक रूप में अश्लील सामग्री को प्रकाशित करने या ट्रांसमिट करने पर।
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कार्रवाई को आगे बढ़ाते हुए महाराष्ट्र साइबर ने प्रणित मोरे, हिमांशु जांगड़ा और डॉ. सेजल पवार को समन (Summons) जारी कर दिए हैं। उन्हें सख्त निर्देश दिया गया है कि वे पूछताछ और अपना बयान दर्ज कराने के लिए जल्द से जल्द साइबर सेल के सामने पेश हों।
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राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) की सख्त एंट्री

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इस मामले की गंभीरता को देखते हुए राष्ट्रीय महिला आयोग (National Commission for Women) ने भी मीडिया कवरेज और वायरल फुटेज का स्वतः संज्ञान (Suo Motu Cognizance) लिया। आयोग ने माना है कि यह सिर्फ एक खराब जोक नहीं है, बल्कि समाज के लिए एक खतरनाक माइंडसेट का प्रचार है।
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22 जून को होगी सुनवाई

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आयोग ने मुख्य रूप से प्रणित मोरे और हिमांशु जांगड़ा को सुनवाई के लिए आधिकारिक नोटिस जारी किया है। इस मामले की विस्तृत सुनवाई 22 जून को शाम 4:00 बजे आयोग के मुख्यालय में तय की गई है, जहां इन कॉमेडियन्स को अपने बयानों पर स्पष्टीकरण देना होगा।
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कमीशन की गंभीर चिंताएं:

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NCW ने अपने आधिकारिक प्रेस नोट में इस बात पर गहरी चिंता व्यक्त की है कि जिस तरह से यौन जबरदस्ती (Sexual Coercion) और बिना सहमति के किए जाने वाले व्यवहार को एक 'मनोरंजन' (Entertainment) के तौर पर पब्लिक ऑडियंस के सामने पेश किया गया, वह बेहद निंदनीय है।
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कमीशन ने स्पष्ट तौर पर कहा:

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"किसी भी महिला की सहमति, गरिमा और शारीरिक आजादी (Bodily Autonomy) को कमजोर करने वाले व्यवहार को नॉर्मल बनाना या उसकी बड़ाई करना बहुत खतरनाक है। यह महिलाओं की सुरक्षा और जेंडर-बेस्ड हिंसा (Gender-based violence) के प्रति समाज के नजरिए पर दूरगामी और नकारात्मक असर डालता है।"
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हरियाणा DGP को चिट्ठी: 7 दिन में मांगी एक्शन टेकन रिपोर्ट

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मामले को किसी भी सूरत में ठंडे बस्ते में न जाने देने के संकल्प के साथ, राष्ट्रीय महिला आयोग की चेयरपर्सन विजया रहाटकर (Vijaya Rahatkar) ने कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने इस मामले पर ध्यान देते हुए सीधे हरियाणा के पुलिस महानिदेशक (DGP) को एक विस्तृत चिट्ठी लिखी है।
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इस पत्र में विजया रहाटकर ने मांग की है कि आरोपियों के खिलाफ तुरंत, सख्त और समयबद्ध कार्रवाई की जाए। इसके साथ ही, कमीशन ने पुलिस से सात दिनों के भीतर एक डिटेल्ड एक्शन टेकन रिपोर्ट (Action Taken Report - ATR) भी तलब की है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि आरोपियों को कानून के कटघरे में खड़ा किया जा रहा है।
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'फ्रीडम ऑफ स्पीच' या 'अश्लीलता का लाइसेंस'?

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स्टैंड-अप कॉमेडी को हमेशा से अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता (Freedom of Speech) और समाज को आईना दिखाने वाले एक बेहतरीन माध्यम के रूप में देखा जाता रहा है। लेकिन हाल के दिनों में व्यूज, लाइक्स और तालियां बटोरने की अंधी दौड़ में 'डार्क कॉमेडी' या 'रोस्टिंग' के नाम पर जो कुछ भी परोसा जा रहा है, वह एक स्वस्थ समाज के लिए चिंता का विषय है।
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प्रणित मोरे, हिमांशु जांगड़ा और डॉ. सेजल पवार का यह मामला इस बात की एक कड़वी याद दिलाता है कि रचनात्मकता की भी एक लक्ष्मण रेखा होती है। जब कॉमेडी महिलाओं के अधिकारों, उनकी सहमति, या मृतकों के सम्मान पर हमला करने लगे, तो वह कला नहीं बल्कि अपराध की श्रेणी में आ जाती है। अब सभी की निगाहें महाराष्ट्र साइबर की जांच और 22 जून को होने वाली NCW की सुनवाई पर टिकी हैं, जहां यह तय होगा कि इंटरनेट पर इस तरह की अश्लीलता फैलाने वालों को क्या सजा मिलती है।