खबरीलाल डेस्क
दिल्ली-एनसीआर (Delhi-NCR) में रहने वाले लाखों वाहन मालिकों के लिए एक बेहद बड़ी और महत्वपूर्ण खबर सामने आ रही है। बढ़ते प्रदूषण को नियंत्रित करने और पर्यावरण को स्वच्छ बनाने के लिए NCR में गाड़ियों को लेकर बड़ा फैसला लिया जा रहा है। परिवहन विभाग एक ऐसा नया और कड़ा मास्टरप्लान तैयार कर रहा है, जो सीधे तौर पर आपके बजट और आपकी गाड़ी चलाने के तौर-तरीकों को प्रभावित करेगा।READ ALSO:-27 जून मौसम अलर्ट: देश के 16 राज्यों में बरसेंगे बदरा, 70 की रफ्तार से चलेंगी तेज हवाएं, जानें अपने शहर का हाल
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इस नए प्लान के तहत जहां एक तरफ पुराने और अधिक प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों पर सख्ती बढ़ाई जाएगी, वहीं दूसरी तरफ पर्यावरण के अनुकूल गाड़ियां खरीदने वालों को सरकार बंपर तोहफे देने की तैयारी में है। आइए इस विशेष रिपोर्ट में विस्तार से जानते हैं कि परिवहन विभाग का यह नया नियम क्या है, इससे किन वाहन मालिकों की मुश्किलें बढ़ेंगी और किन्हें बड़ा आर्थिक फायदा होने वाला है।
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पुराने BS-4 और नीचे के वाहनों पर गाज गिरना तय

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दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण हमेशा से एक गंभीर समस्या रहा है। सर्दियों के मौसम में स्थिति और भी विकराल हो जाती है। इसे देखते हुए परिवहन विभाग अब समय रहते ही कड़े कदम उठाने की योजना बना रहा है।
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नए मास्टरप्लान के मुताबिक, एनसीआर के तहत आने वाले शहरों (दिल्ली, नोएडा, गाजियाबाद, गुरुग्राम, फरीदाबाद आदि) में BS-4 (Bharat Stage 4) और उससे नीचे की कैटेगरी वाले डीजल और पेट्रोल वाहनों पर सख्ती बहुत ज्यादा बढ़ा दी जाएगी। ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) के लागू होने का इंतजार किए बिना ही, इन वाहनों के संचालन को सीमित करने या कुछ क्षेत्रों में पूरी तरह प्रतिबंधित करने की तैयारी चल रही है।
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परिवहन विभाग का मानना है कि पुराने वाहन नए वाहनों की तुलना में कई गुना अधिक हानिकारक गैसें उत्सर्जित करते हैं। इसलिए, इन गाड़ियों को सड़कों से हटाना या इनका इस्तेमाल कम करना बेहद जरूरी हो गया है।
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स्क्रैपिंग पॉलिसी को बढ़ावा देने की नई रणनीति

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विभाग का यह नया प्लान केवल प्रतिबंधों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह लोगों को स्वेच्छा से अपने पुराने वाहनों को कबाड़ (Scrap) करने के लिए प्रोत्साहित करेगा। इसके लिए 'वाहन कबाड़ नीति' (Vehicle Scrappage Policy) को और अधिक आकर्षक बनाया जा रहा है।
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अगर कोई वाहन मालिक अपनी पुरानी BS-4 या उससे नीचे के मानक वाली गाड़ी को अधिकृत स्क्रैपिंग सेंटर में ले जाकर कबाड़ करवाता है, तो उसे एक 'स्क्रैपिंग सर्टिफिकेट' (Certificate of Deposit) दिया जाएगा। इस सर्टिफिकेट के आधार पर नई गाड़ी खरीदने पर भारी वित्तीय लाभ मिलेंगे।
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BS-6 और इलेक्ट्रिक वाहन (EV) खरीदने पर मिलेगी बंपर छूट

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इस पूरे प्लान का सबसे आकर्षक पहलू उन लोगों के लिए है जो नई गाड़ी खरीदने की सोच रहे हैं। सरकार चाहती है कि लोग पारंपरिक ईंधन वाली गाड़ियों को छोड़कर आधुनिक और कम प्रदूषण फैलाने वाले विकल्पों को अपनाएं।
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मिलने वाले मुख्य फायदे:

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    रोड टैक्स में भारी राहत: यदि आप अपनी पुरानी गाड़ी को स्क्रैप करके नई BS-6 (Phase 2) मानक वाली गाड़ी या इलेक्ट्रिक वाहन (EV) खरीदते हैं, तो आपको रोड टैक्स में 10% से लेकर 25% तक की सीधी छूट मिल सकती है।
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    रजिस्ट्रेशन फीस से मुक्ति: नए इलेक्ट्रिक वाहनों के रजिस्ट्रेशन के समय लगने वाली फीस को पूरी तरह से माफ किया जा सकता है या उसमें बड़ी कटौती की जा सकती है।
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    अतिरिक्त सब्सिडी: राज्य सरकारों की तरफ से ईवी (EV) खरीदारों को दी जाने वाली सब्सिडी को और सरल और तेज बनाया जाएगा, जिससे पैसा सीधे और जल्दी ग्राहकों के खाते में आए।
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लाखों वाहन मालिकों पर क्या और कैसा पड़ेगा असर?

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परिवहन विभाग के इस NCR में गाड़ियों को लेकर बड़ा फैसला से दिल्ली-एनसीआर के लाखों परिवारों पर सीधा असर पड़ेगा।
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    पुरानी गाड़ियों की रीसेल वैल्यू घटेगी: जो लोग अपनी पुरानी BS-4 गाड़ियों को सेकंड हैंड मार्केट में बेचने की सोच रहे थे, उन्हें बड़ा झटका लग सकता है। नियमों के कड़े होने के डर से इन गाड़ियों की रीसेल वैल्यू काफी कम हो जाएगी।
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    नई तकनीक अपनाने का दबाव: मध्यमवर्गीय परिवारों को मजबूरन अपनी पुरानी और अच्छी स्थिति में चल रही गाड़ियों को भी समय से पहले बदलना पड़ सकता है, जिससे उनके घरेलू बजट पर अतिरिक्त दबाव आएगा।
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    ईवी मार्केट में आएगी तेजी: टैक्स और रजिस्ट्रेशन में मिलने वाली बड़ी छूट के कारण लोग सीएनजी (CNG) और इलेक्ट्रिक कारों की तरफ तेजी से आकर्षित होंगे, जिससे ऑटोमोबाइल सेक्टर में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा।
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बुनियादी ढांचे (Infrastructure) को मजबूत करने पर जोर

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इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के साथ-साथ सरकार बुनियादी ढांचे को भी दुरुस्त करने में जुट गई है। एनसीआर के कोने-कोने में नए और हाई-स्पीड चार्जिंग स्टेशन स्थापित किए जा रहे हैं।
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सरकारी दफ्तरों, कमर्शियल मॉल्स, मेट्रो स्टेशनों और रिहायशी सोसायटियों में चार्जिंग पॉइंट अनिवार्य करने की योजना है। इससे ईवी चालकों के मन से 'रेंज एंग्जायटी' (Range Anxiety - चार्ज खत्म होने का डर) पूरी तरह खत्म हो जाएगी और लोग बेझिझक इलेक्ट्रिक गाड़ियां खरीद सकेंगे।
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कब से लागू हो सकता है परिवहन विभाग का यह नया प्लान?

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सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, परिवहन विभाग ने इस योजना का ड्राफ्ट (Draft) तैयार कर लिया है। वर्तमान में इस पर दिल्ली, उत्तर प्रदेश और हरियाणा के परिवहन अधिकारियों के बीच उच्च स्तरीय बैठकें चल रही हैं, क्योंकि एनसीआर इन तीनों राज्यों के हिस्सों से मिलकर बना है।
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उम्मीद जताई जा रही है कि आने वाले कुछ ही हफ्तों में इस नीति को अंतिम रूप देकर आधिकारिक तौर पर लागू कर दिया जाएगा। सरकार का लक्ष्य आगामी सर्दियों का सीजन शुरू होने से पहले ही सड़कों से अधिकतम प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों को कम करना है।
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निष्कर्ष के तौर पर, NCR में गाड़ियों को लेकर बड़ा फैसला पर्यावरण की सुरक्षा के लिहाज से एक बेहद जरूरी और स्वागत योग्य कदम है। हालांकि, इससे पुराने वाहन मालिकों की जेब पर थोड़ा असर जरूर पड़ेगा, लेकिन नई गाड़ियों पर मिलने वाली टैक्स छूट और बेहतर भविष्य के नजरिए से यह योजना बेहद दूरदर्शी है। अगर आप भी एनसीआर में रहते हैं और नई कार या बाइक खरीदने का मन बना रहे हैं, तो कुछ दिन रुकना और सीधे BS-6 या इलेक्ट्रिक वाहन का विकल्प चुनना आपके लिए सबसे समझदारी भरा और किफायती सौदा साबित हो सकता है।