नई दिल्ली: भारत में औपचारिक क्षेत्र में काम करने वाले करोड़ों कर्मचारियों के लिए एक बहुत बड़ी और राहत भरी खबर सामने आई है। केंद्र सरकार ने दशकों पुराने ग्रेच्युटी नियमों में एक ऐतिहासिक और क्रांतिकारी बदलाव कर दिया है। नए लेबर कोड (New Labor Code) के लागू होने के साथ ही, ग्रेच्युटी भुगतान की समय सीमा को लेकर चल रही लंबी प्रतीक्षा अब खत्म हो गई है। 21 नवंबर 2025 से प्रभावी हुए इन नए नियमों के तहत, अब कुछ विशेष श्रेणी के कर्मचारियों को ग्रेच्युटी का लाभ पाने के लिए 5 साल तक लगातार सेवा देने की आवश्यकता नहीं होगी। अब वे मात्र 1 साल की निरंतर सेवा के बाद ही इसके हकदार हो जाएंगे।READ ALSO:-आगरा में 'हैलो सर! आपके क्रेडिट कार्ड के 10 हजार रिवॉर्ड पॉइंट एक्सपायर हो रहे हैं...' कहकर खाते साफ करने वाले 10 नटवरलाल गिरफ्तार, करोड़ों की ठगी का भंडाफोड़
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यह कदम देश के श्रम बाजार में आ रहे बदलावों, विशेष रूप से अल्पकालिक रोजगार और 'गिग इकोनॉमी' (Gig Economy) के बढ़ते चलन को ध्यान में रखते हुए उठाया गया है। इससे उन लाखों श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा का एक मजबूत कवच मिलेगा जो अक्सर निश्चित अवधि के अनुबंधों पर काम करते हैं।
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किसे मिलेगा 1 साल में लाभ?
\r\n\r\nपुराने और अब तक चले आ रहे 'ग्रेच्युटी भुगतान अधिनियम 1972' (Payment of Gratuity Act, 1972) के अनुसार, किसी भी कर्मचारी को ग्रेच्युटी का पात्र बनने के लिए किसी एक संस्थान में कम से कम 5 साल की लगातार और निर्बाध सेवा अनिवार्य थी। यह एक बड़ी बाधा थी, विशेष रूप से उन लोगों के लिए जो अक्सर नौकरियां बदलते थे या जिन्हें अनुबंध पर रखा जाता था।
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लेकिन नए 'सोशल सिक्योरिटी कोड 2020' (Social Security Code, 2020) के तहत, सरकार ने इस समय सीमा को युक्तिसंगत बनाया है। अब 'फिक्स्ड-टर्म एम्प्लॉइज' (Fixed-Term Employees - FTE) और 'कॉन्ट्रैक्ट वर्कर्स' (Contract Workers) के लिए ग्रेच्युटी के लिए आवश्यक निरंतर सेवा की अवधि को घटाकर 1 साल कर दिया गया है।
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फिक्स्ड-टर्म कर्मचारी कौन होते हैं? फिक्स्ड-टर्म कर्मचारी वे होते हैं जिन्हें कंपनियां एक निश्चित और पूर्व-निर्धारित अवधि के लिए लिखित अनुबंध पर रखती हैं। उदाहरण के लिए, यदि किसी व्यक्ति को 1 साल या 2 साल के अनुबंध पर काम पर रखा जाता है, तो वह फिक्स्ड-टर्म कर्मचारी की श्रेणी में आता है। नए नियमों के अनुसार, ऐसे कर्मचारियों को उनकी सेवा की अवधि के आधार पर 'प्रो-राटा' (Pro-rata) यानी आनुपातिक आधार पर ग्रेच्युटी का भुगतान किया जाएगा।
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किसके लिए नियम अपरिवर्तित हैं?
\r\n\r\nयह स्पष्ट करना महत्वपूर्ण है कि ग्रेच्युटी के 1 साल के नियम का लाभ सभी कर्मचारियों को नहीं मिलेगा। नियमित और स्थायी कर्मचारियों (Regular and Permanent Employees) के लिए, ग्रेच्युटी की पात्रता के लिए 5 साल की निरंतर सेवा की शर्त अभी भी बरकरार है। उनके लिए नियमों में कोई बदलाव नहीं किया गया है।
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हालांकि, मृत्यु या विकलांगता के मामलों में, सेवा की अवधि की परवाह किए बिना ग्रेच्युटी का भुगतान किया जाता है। यह प्रावधान पहले की तरह ही लागू रहेगा और इसमें कोई बदलाव नहीं हुआ है।
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बढ़ जाएगी आपकी इन-हैंड ग्रेच्युटी: गणना का नया तरीका
\r\n\r\nनए लेबर कोड ने केवल समय सीमा ही नहीं, बल्कि ग्रेच्युटी की गणना के तरीके को भी महत्वपूर्ण रूप से बदल दिया है। इस बदलाव का सीधा असर कर्मचारी को मिलने वाली अंतिम ग्रेच्युटी राशि पर पड़ेगा।
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नए नियमों के अनुसार, अब कंपनियों के लिए यह अनिवार्य कर दिया गया है कि कर्मचारी की 'वेजेस' (Wages) उसके कुल सीटीसी (Cost to Company - CTC) का कम से कम 50 प्रतिशत होनी चाहिए।
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'वेजेस' की नई परिभाषा: श्रम मंत्रालय ने 'वेजेस' की परिभाषा को स्पष्ट करते हुए इसमें मूल वेतन (Basic Pay), महंगाई भत्ता (Dearness Allowance - DA) और रिटेनिंग अलाउंस (Retaining Allowance) को शामिल किया है। अन्य सभी भत्ते (जैसे HRA, Travel Allowance, आदि) को 'भत्ते' की श्रेणी में रखा गया है।
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इस नई परिभाषा का सीधा असर उन कर्मचारियों पर पड़ेगा जिनका बेसिक पे कम होता था और भत्ते अधिक होते थे। पुराने सिस्टम में, कंपनियां अक्सर बेसिक पे को कम रखती थीं ताकि ग्रेच्युटी और ईपीएफ (EPF) जैसी सामाजिक सुरक्षा देनदारियों को कम किया जा सके। लेकिन अब, यदि किसी कर्मचारी के भत्ते उसके कुल सीटीसी के 50% से अधिक होते हैं, तो अतिरिक्त राशि को बेसिक वेतन में जोड़ दिया जाएगा। इससे भविष्य में मिलने वाली ग्रेच्युटी की राशि काफी बढ़ जाएगी, क्योंकि ग्रेच्युटी की गणना बेसिक पे और डीए पर ही की जाती है।
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कब से प्रभावी हैं नियम?
\r\n\r\nश्रम मंत्रालय द्वारा जारी एफएक्यू (FAQ) दस्तावेज़ों के अनुसार, ये नए ग्रेच्युटी नियम 21 नवंबर 2025 से प्रभावी हो चुके हैं। इसका अर्थ यह है कि जो कर्मचारी इस तारीख को या उसके बाद किसी कंपनी से जुड़े हैं, वे ही 1 साल बाद ग्रेच्युटी के इस नए लाभ का दावा कर सकेंगे। जो कर्मचारी इस तिथि से पहले से काम कर रहे हैं, उनके लिए पुराने नियम ही लागू रहेंगे, जब तक कि उनके रोजगार अनुबंध में कोई बदलाव न हो।
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विशेषज्ञों का मानना है कि केंद्र सरकार का यह कदम देश के करोड़ों औपचारिक क्षेत्र के श्रमिकों के लिए एक बड़ा वरदान साबित होगा। यह न केवल उन्हें सामाजिक सुरक्षा का एक बेहतर कवच प्रदान करेगा, बल्कि छोटी अवधि के रोजगार में भी वित्तीय लाभ सुनिश्चित कर सकेगा। यह श्रम बाजार में लचीलेपन को बढ़ावा देने के साथ-साथ श्रमिकों के हितों की रक्षा करने की दिशा में एक संतुलित दृष्टिकोण है।