आगरा में 'हैलो सर! आपके क्रेडिट कार्ड के 10 हजार रिवॉर्ड पॉइंट एक्सपायर हो रहे हैं...' कहकर खाते साफ करने वाले 10 नटवरलाल गिरफ्तार, करोड़ों की ठगी का भंडाफोड़
आगरा कमिश्नरेट और साइबर थाना पुलिस ने एक बड़े अंतरराज्यीय साइबर गिरोह का भंडाफोड़ किया है। ये शातिर लोगों को क्रेडिट कार्ड के रिवॉर्ड पॉइंट रिडीम कराने का लालच देकर OTP मांगते थे और खाते खाली
Published at : 04 Apr 2026, 08:48 AM
Updated at : 11 Sep 2026, 09:25 PM
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Agra Cyber Crime Gang Duping Crores via Credit Card Points Busted 10 Arrested
आगरा कमिश्नरेट पुलिस और साइबर थाना पुलिस के संयुक्त ऑपरेशन में इस गैंग के सरगना सहित कुल 10 साइबर अपराधियों को गिरफ्तार किया गया है। इन शातिरों की गिरफ्तारी के बाद पूछताछ में जो खुलासे हुए हैं, उन्होंने पुलिस अधिकारियों के भी होश उड़ा दिए हैं। जांच में पता चला है कि इन लोगों ने कुछ हजार या लाख नहीं, बल्कि करोड़ों रुपये की ठगी को अंजाम दिया है।
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पुलिस कमिश्नर, आगरा @DeepakKumarIPS के निर्देशन में #आगरा_पुलिस द्वारा साइबर अपराधियों के विरुद्ध निरंतर त्वरित एवं प्रभावी कार्यवाही जारी है। इसी क्रम में- \r\n \r\nरिवॉर्ड प्वाइंट्स का लालच देकर, लोगों से ओटीपी प्राप्त कर, फाइनेंशियल साइबर अपराध करने वाले गैंग के 10 अभियुक्तों को… pic.twitter.com/XZxsR5eCK2
\r\n— POLICE COMMISSIONERATE AGRA (@agrapolice) April 4, 2026
इस पूरे ऑपरेशन की जानकारी देते हुए आगरा के पुलिस उपायुक्त (DCP) आदित्य सिंह ने बताया कि पिछले कुछ समय से राष्ट्रीय साइबर क्राइम पोर्टल (National Cyber Crime Reporting Portal) और गृह मंत्रालय के 'समन्वय एप' (Samanvay App) पर लगातार ऑनलाइन ठगी की शिकायतें मिल रही थीं। ठगी का पैटर्न एक जैसा था– सभी मामलों में पीड़ितों को क्रेडिट कार्ड के रिवॉर्ड पॉइंट रिडीम (नकद में बदलने) का लालच दिया गया था।
इन गंभीर शिकायतों का संज्ञान लेते हुए आगरा पुलिस कमिश्नर के निर्देश पर साइबर थाना पुलिस की एक विशेष टीम का गठन किया गया। पुलिस ने जब उन मोबाइल नंबरों की जांच शुरू की, जिनसे पीड़ितों को फोन आए थे, तो एक बेहद ही उलझा हुआ तकनीकी जाल सामने आया।
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बेंगलुरु तक फैले थे ठगी के तार
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छानबीन के दौरान साइबर पुलिस को एक संदिग्ध मोबाइल नंबर हाथ लगा। सर्विलांस और कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) खंगालने पर पता चला कि इस नंबर का इस्तेमाल बेंगलुरु की रहने वाली सरिता नामक एक महिला के साथ हुई 1.30 लाख रुपये की बड़ी ठगी में किया गया था। जांच की आंच अभी आगे बढ़ ही रही थी कि एक दूसरी महिला की शिकायत भी सामने आ गई। उस महिला को भी इन्हीं ठगों ने एक अन्य मोबाइल नंबर से फोन किया था और क्रेडिट कार्ड के पॉइंट्स रिडीम कराने का झांसा देकर उसके खाते से 9 हजार रुपये उड़ा लिए थे।
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क्या था ठगी का 'मोडस ऑपरेंडी' (काम करने का तरीका)?
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DCP आदित्य सिंह ने गैंग के काम करने के तरीके (Modus Operandi) का खुलासा करते हुए बताया कि ये साइबर क्रिमिनल बेहद शातिर दिमाग वाले हैं और फर्राटेदार अंग्रेजी व हिंदी बोलने में माहिर हैं।
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डेटा चोरी: ये लोग सबसे पहले डार्क वेब या अन्य अवैध स्रोतों से क्रेडिट कार्ड धारकों का डेटा (नाम, नंबर, बैंक का नाम) खरीदते थे।
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फर्जी बैंक अधिकारी: इसके बाद ये शिकार को कॉल करते थे और खुद को उनके संबंधित बैंक का कस्टमर केयर अधिकारी या क्रेडिट कार्ड डिवीजन का मैनेजर बताते थे।
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लालच और डर: वे ग्राहक से कहते थे कि "सर/मैडम, आपके क्रेडिट कार्ड पर हजारों रिवॉर्ड पॉइंट्स जमा हैं, जो आज रात 12 बजे एक्सपायर हो जाएंगे। अगर आप इन्हें रिडीम करना चाहते हैं तो हम अभी कैश में कन्वर्ट कर देते हैं।"
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OTP का खेल: बातों में उलझाकर और ग्राहक का विश्वास जीतकर, ये शातिर उनके मोबाइल पर एक लिंक भेजते थे या सिस्टम जनरेटेड ओटीपी (OTP) पूछते थे। जैसे ही पीड़ित लालच में आकर OTP शेयर करता था, उसके क्रेडिट कार्ड से लिमिट के हिसाब से हजारों-लाखों रुपये तुरंत साफ हो जाते थे।
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IP एड्रेस की ट्रैकिंग से मास्टरमाइंड तक पहुंची पुलिस
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साइबर सेल ने ठगों द्वारा इस्तेमाल किए जा रहे मोबाइल नंबर्स और उनके इंटरनेट प्रोटोकॉल (IP) एड्रेस की गहराई से तकनीकी जांच की। इसी डिजिटल फुटप्रिंट का पीछा करते हुए पुलिस अंततः इस बड़े साइबर क्रिमिनल गैंग के अड्डे तक जा पहुंची।
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जब पुलिस ने गैंग की कुंडली खंगाली तो पता चला कि अकेले आगरा पुलिस कमिश्नरेट के सदर थाने में ही इस गैंग के खिलाफ ठगी की 20 अलग-अलग एफआईआर (FIR) दर्ज हैं। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि यह गैंग किस स्तर पर सक्रिय था।
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मास्टरमाइंड देव चौहान और 9 गुर्गे गिरफ्तार
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छापेमारी के दौरान पुलिस ने इस पूरे नेक्सस (गठजोड़) के मुख्य आरोपी और मास्टरमाइंड देव चौहान को गिरफ्तार कर लिया। देव चौहान की निशानदेही और कबूलनामे के आधार पर पुलिस ने उसके 9 अन्य साथियों को भी धर दबोचा। कुल 10 साइबर अपराधियों की एक साथ गिरफ्तारी आगरा पुलिस की एक बहुत बड़ी कामयाबी मानी जा रही है।
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क्या-क्या हुआ बरामद? पुलिस ने आरोपियों के ठिकाने से ठगी के पैसों से खरीदी गई लाखों रुपये की नकदी बरामद की है। इसके अलावा, ठगी के काम में इस्तेमाल होने वाले 10 महंगे स्मार्टफोन, विभिन्न बैंकों के 7 डेबिट कार्ड और फर्जी पते पर बने 3 आधार कार्ड भी जब्त किए गए हैं। पुलिस इन मोबाइलों का फोरेंसिक डेटा रिकवर कर रही है ताकि ठगी के शिकार हुए अन्य लोगों की जानकारी जुटाई जा सके।
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करोड़ों की ठगी कबूली, अन्य सदस्यों की तलाश तेज
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गिरफ्तार किए गए दसों आरोपियों से फिलहाल पुलिस रिमांड पर कड़ी पूछताछ चल रही है। आरोपियों ने अपने जुर्म का इकबाल करते हुए करोड़ों रुपये की ठगी करने की बात कबूल कर ली है। जांच एजेंसियों को अंदेशा है कि इस गैंग के तार दिल्ली, जामताड़ा, मेवात और बेंगलुरु के अन्य बड़े साइबर अपराधियों से भी जुड़े हो सकते हैं। पुलिस अब इस गैंग के बैंक खातों को फ्रीज कर रही है और इनके नेटवर्क से जुड़े अन्य फरार शातिरों की सरगर्मी से तलाश कर रही है।
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खबरीलाल की जनहित में अपील: कैसे बचें इस ठगी से?
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साइबर ठगी के इस बढ़ते खतरे को देखते हुए 'खबरीलाल' अपने पाठकों से अपील करता है कि:
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बैंक या क्रेडिट कार्ड कंपनी कभी भी आपके रिवॉर्ड पॉइंट रिडीम कराने के लिए खुद सामने से फोन नहीं करती है।
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अगर आपको पॉइंट रिडीम करने हैं, तो बैंक की आधिकारिक वेबसाइट या आधिकारिक मोबाइल बैंकिंग ऐप का ही इस्तेमाल करें।
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फोन कॉल, SMS या व्हाट्सएप पर आए किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक न करें।
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अपना सीवीवी (CVV), पिन (PIN) या ओटीपी (OTP) फोन पर किसी के साथ, चाहे वह खुद को बैंक मैनेजर ही क्यों न कहे, बिल्कुल साझा न करें। सतर्क रहें, सुरक्षित रहें!
Sabse pehle comment karne wale banein.