उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को वाराणसी दौरे के दूसरे दिन शिक्षा के क्षेत्र में एक बड़ा कदम उठाते हुए सीएम योगी स्कूल चलो अभियान का भव्य शुभारंभ किया। नए शैक्षिक सत्र 2026-27 के लिए यह अभियान वाराणसी के शिवपुर स्थित कंपोजिट विद्यालय से पूरे प्रदेश के लिए एक साथ लॉन्च किया गया है। इसका मुख्य उद्देश्य परिषदीय विद्यालयों में बच्चों का शत-प्रतिशत नामांकन सुनिश्चित करना, ड्रॉपआउट दर को पूरी तरह खत्म करना और शिक्षा को एक जन-आंदोलन का रूप देना है। महाअभियान की शुरुआत करने से पहले मुख्यमंत्री ने काशी के प्रमुख मंदिरों में विशेष दर्शन-पूजन कर प्रदेश की खुशहाली की कामना की।READ ALSO:-यूपी में कुदरत का कहर! 50 से ज्यादा जिलों में आज भारी बारिश-ओले और 70 KMPH आंधी का अलर्ट, घर से निकलने से पहले पढ़ें मौसम का ताजा हाल
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काशी विश्वनाथ और काल भैरव मंदिर में विशेष दर्शन-पूजन के साथ दिन की शुरुआत

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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का यह वाराणसी दौरा कई मायनों में अहम रहा। शुक्रवार को वह मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के साथ वाराणसी पहुंचे थे। शुक्रवार देर रात तक दोनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने साथ मिलकर महाराजा विक्रमादित्य पर आधारित तीन दिवसीय भव्य महानाट्य के मंचन का शुभारंभ किया। लगभग रात 10 बजे तक मुख्यमंत्री वहां दर्शकों के बीच मौजूद रहे और फिर सर्किट हाउस में जाकर रात्रि विश्राम किया।
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शनिवार सुबह की शुरुआत पूरी तरह से आध्यात्मिक रही। मुख्यमंत्री सीधे श्री काशी विश्वनाथ मंदिर और उसके बाद काल भैरव मंदिर पहुंचे। यहां उन्होंने बाबा काल भैरव का विधि-विधान से विशेष पूजन और आरती की। मंदिरों में दर्शन-पूजन का कार्यक्रम समाप्त करने के पश्चात मुख्यमंत्री का काफिला सीधे शिवपुर स्थित कंपोजिट विद्यालय के लिए रवाना हुआ, जहां शिक्षा विभाग का एक बड़ा कार्यक्रम उनकी प्रतीक्षा कर रहा था। 
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सीएम योगी स्कूल चलो अभियान: दो चरणों में चलेगा महाअभियान

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शिवपुर के कंपोजिट विद्यालय में आयोजित एक विशाल और भव्य कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने नन्हे-मुन्ने बच्चों को स्वयं अपने हाथों से स्कूल बैग पहनाए। उन्होंने पाठ्य-पुस्तकें वितरित कर सीएम योगी स्कूल चलो अभियान की औपचारिक शुरुआत की।
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इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने सख्त और स्पष्ट संदेश दिया कि सरकार का लक्ष्य है कि प्रदेश का एक भी बच्चा स्कूल जाने से वंचित न रहे। शिक्षा हर बच्चे का मौलिक अधिकार है। शिक्षा विभाग की महानिदेशक मोनिका रानी द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, यह अभियान दो प्रमुख चरणों में चलाया जाएगा:
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    पहला चरण: 1 अप्रैल से 15 अप्रैल तक।
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    दूसरा चरण: 1 जुलाई से 15 जुलाई तक।
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इस अभियान के अंतर्गत शिक्षक और शिक्षा मित्र घर-घर जाकर सर्वे करेंगे ताकि आउट-ऑफ-स्कूल (Out of School) बच्चों की पहचान की जा सके। ग्राम प्रधानों, पंचायत सदस्यों और अभिभावकों को इस मुहिम का अहम हिस्सा बनाया गया है। सरकार की मंशा स्पष्ट है कि संसाधनों की कमी किसी भी बच्चे की पढ़ाई में बाधा नहीं बननी चाहिए। बच्चों की मुफ्त यूनिफॉर्म, जूते-मोजे, स्वेटर और स्टेशनरी का पैसा सीधे अभिभावकों के बैंक खातों में डीबीटी (DBT) के माध्यम से भेजा जा रहा है। 
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2017 से पहले की जर्जर स्थिति और आज का 'ऑपरेशन कायाकल्प'

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अपने संबोधन में सीएम योगी ने पुरानी यादों को साझा करते हुए 2017 से पहले की शिक्षा व्यवस्था की जर्जर स्थिति पर भी विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा, "मुझे अच्छी तरह याद है, जब 2017 में हमारी सरकार बनी थी, तब हमने 1 जुलाई को स्कूल चलो अभियान की शुरुआत की थी। उससे पहले जब मैं अलग-अलग जनपदों के दौरे पर जाता था, तो मैंने अनुभव किया था कि बेसिक शिक्षा विभाग के भवनों की हालत बेहद खराब और जर्जर थी। कई विद्यालय तो बंदी के कगार पर पहुंच चुके थे।"
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मुख्यमंत्री ने एक पुराना किस्सा सुनाते हुए बताया कि वह एक बार एक ऐसे विद्यालय में गए जहां 10 से भी कम संख्या में बच्चे रह गए थे। जब उन्होंने वहां के प्रधानाचार्य से पूछा कि बच्चों की संख्या इतनी कम क्यों है, तो उन्हें जवाब मिला कि बच्चों की पढ़ने में कोई रुचि नहीं है। इस पर सीएम ने पलटकर सवाल किया, "बच्चों की पढ़ने में रुचि नहीं है या आप लोगों की पढ़ाने में रुचि नहीं है? दोनों बातों में बहुत बड़ा अंतर है।"
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सीएम ने गर्व के साथ बताया कि आज उसी विद्यालय का पूरी तरह कायाकल्प हो चुका है। अब वहां 250 से ज्यादा बच्चे पढ़ते हैं और उस विद्यालय के प्रधानाचार्य का चयन उनकी मेहनत के लिए राष्ट्रपति पुरस्कार के लिए हुआ है। उन्होंने जोर देकर कहा कि आज उत्तर प्रदेश के परिषदीय स्कूल प्राइवेट और कॉन्वेंट स्कूलों को सीधी टक्कर दे रहे हैं। स्मार्ट क्लास, स्वच्छ शौचालय, पीने का साफ पानी और लाइब्रेरी जैसी आधुनिक सुविधाएं अब गांव के हर सरकारी स्कूल तक पहुंच रही हैं। 
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निपुण बच्चे और विद्यालयों का हुआ भव्य सम्मान

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इस राज्यस्तरीय लॉन्च कार्यक्रम में बच्चों और शिक्षकों का उत्साह बढ़ाने के लिए विशेष सम्मान समारोह भी आयोजित किया गया। मुख्यमंत्री ने मंच से वाराणसी जिले के 5 'निपुण विद्यालय', 5 'निपुण बच्चे' और 5 नव-प्रवेशी (जिनका नया एडमिशन हुआ है) बच्चों को सम्मानित किया। बच्चों को प्रशस्ति पत्र और विशेष स्कूल किट प्रदान की गई, जिससे उनके चेहरों पर खुशी साफ छलक रही थी।
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इसके साथ ही, विद्यालय परिसर में शिक्षा, तकनीकी नवाचार और बाल विकास से जुड़े 12 विभिन्न स्टॉल भी लगाए गए थे। मुख्यमंत्री ने इन सभी स्टॉलों का बारीकी से अवलोकन किया और वहां मौजूद शिक्षकों व बच्चों से सीधा संवाद स्थापित कर उनकी रचनात्मकता और विज्ञान मॉडल्स की सराहना की। इस दौरान प्रदेश सरकार के कई मंत्री और शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारी भी मौके पर मौजूद रहे।
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वाराणसी की धर्मनगरी के शिवपुर से शुरू हुआ यह सीएम योगी स्कूल चलो अभियान उत्तर प्रदेश की बेसिक शिक्षा प्रणाली में एक और ऐतिहासिक मील का पत्थर साबित होने जा रहा है। राज्य सरकार के 'ऑपरेशन कायाकल्प' के जरिए पहले ही प्रदेश भर के 1.36 लाख स्कूलों का सफलतापूर्वक जीर्णोद्धार किया जा चुका है। इसके परिणामस्वरूप करीब 60 लाख नए बच्चों का बेसिक शिक्षा में नामांकन हुआ है और ड्रॉपआउट दर में ऐतिहासिक रूप से कमी आई है। अब इस नए शैक्षिक सत्र के अभियान के जरिए सरकार का अंतिम लक्ष्य समाज के सबसे निचले पायदान पर खड़े हर एक बच्चे को मुख्यधारा की शिक्षा से जोड़ना है। जब तक हर बच्चा स्कूल नहीं पहुंच जाता, तब तक यह अभियान एक जन-आंदोलन के रूप में अनवरत चलता रहेगा।
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