नई दिल्ली / इंफ्रास्ट्रक्चर डेस्क: अगर आप अक्सर हाईवे या एक्सप्रेसवे पर सफर करते हैं, तो आपने गौर किया होगा कि जब भी कोई सेना का बड़ा काफिला, पुलिस की गाड़ियां या कोई वीआईपी मूवमेंट टोल प्लाजा से गुजरता है, तो वहां लंबा जाम लग जाता है। सुरक्षा प्रोटोकॉल और मैनुअल चेकिंग के कारण इन वाहनों को निकलने में समय लगता है, जिसका सीधा खामियाजा आम जनता को अपनी गाड़ियां रोककर भुगतना पड़ता है।
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लेकिन, अब यह बीते दिनों की बात होने वाली है। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) और भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) देश के टोल सिस्टम में एक बड़ा और क्रांतिकारी बदलाव करने की तैयारी कर रहे हैं। सरकार जल्द ही एक 'स्पेशल फास्टैग सिस्टम' (Special Fastag System) लागू करने पर विचार कर रही है। इस नए नियम के लागू होने के बाद भारतीय सेना, पुलिस बल और एंबुलेंस व फायर ब्रिगेड जैसी आपातकालीन सेवाओं के वाहनों को टोल नाकों पर एक सेकंड के लिए भी नहीं रुकना पड़ेगा। आइए विस्तार से समझते हैं कि यह 'स्पेशल फास्टैग' क्या है और यह पूरे सिस्टम को कैसे बदल कर रख देगा।
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क्या है 'स्पेशल फास्टैग' और वर्तमान व्यवस्था से यह कैसे अलग है?
\r\n\r\nमौजूदा व्यवस्था में, भारत के सभी टोल प्लाजा पर आम नागरिकों से लेकर कमर्शियल वाहनों तक के लिए एक ही तरह का फास्टैग (Fastag) सिस्टम काम कर रहा है। हालांकि, सरकारी नियमों के अनुसार रक्षा बलों, पुलिस और एंबुलेंस को टोल टैक्स (Toll Tax Exemption) से छूट मिली हुई है, लेकिन सिस्टम की तकनीकी सीमाओं के कारण इन वाहनों को भी बैरियर खुलने का इंतजार करना पड़ता है या टोल कर्मी को अपना आईडी कार्ड दिखाना पड़ता है।
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नया और स्मार्ट समाधान: सरकार की नई योजना के तहत, इन विशेष वाहनों के लिए एक अलग तरह का फास्टैग डिजाइन किया जाएगा, जिसे 'स्पेशल फास्टैग' कहा जा रहा है।
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- \r\n विशिष्ट कलर कोडिंग: यह फास्टैग आम वाहनों के फास्टैग से रंग और डिजाइन में बिल्कुल अलग होगा, ताकि इसे दूर से ही पहचाना जा सके।\r\n \r\n
- \r\n हाई-फ्रीक्वेंसी चिप: इसमें सामान्य से अधिक शक्तिशाली और हाई-फ्रीक्वेंसी वाली रेडियो-फ्रीक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन (RFID) चिप लगी होगी, जिसे टोल के स्कैनर बहुत दूर से और तेज गति में भी आसानी से पढ़ सकेंगे।\r\n \r\n
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टोल प्लाजा पर बनेगी विशेष 'डेडिकेटेड लेन' (Dedicated Lane System)
\r\n\r\nकेवल फास्टैग को अपग्रेड करने से बात नहीं बनेगी, इसके लिए टोल प्लाजा के ढांचे में भी बदलाव किया जाएगा। इस योजना के तहत देश के बड़े और व्यस्त टोल प्लाजा पर एक या दो विशेष लाइनें (Lanes) सिर्फ 'स्पेशल फास्टैग' वाले वाहनों के लिए आरक्षित कर दी जाएंगी।
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यह कैसे काम करेगा?
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- \r\n जैसे ही सेना की कोई गाड़ी या एंबुलेंस इस डेडिकेटेड लेन की तरफ बढ़ेगी, लेन में लगे ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन (ANPR) कैमरे और हाई-सेंसिटिव सेंसर काफी दूर से ही 'स्पेशल फास्टैग' को रीड कर लेंगे।\r\n \r\n
- \r\n सिस्टम के रीड करते ही बूम बैरियर (Boom Barrier) अपने आप खुल जाएगा और गाड़ी बिना अपनी गति (Speed) कम किए टोल प्लाजा को पार कर जाएगी। इसे 'जीरो स्टॉपेज' (Zero Stoppage) तकनीक कहा जा रहा है।\r\n \r\n
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इस नए नियम से देश को होने वाले 4 सबसे बड़े फायदे
\r\n\r\nस्पेशल फास्टैग सिस्टम को लागू करने के पीछे सरकार की एक बहुत व्यापक और दूरदर्शी सोच है। इसके कई रणनीतिक और सामाजिक फायदे हैं:
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1. आपातकालीन स्थिति में अनगिनत जिंदगियों की रक्षा (Lifesaving for Ambulances)
\r\n\r\nइस पूरी योजना का सबसे बड़ा फायदा स्वास्थ्य सेवाओं को मिलेगा। एक एंबुलेंस के लिए सड़क पर एक-एक सेकंड कीमती होता है। कई बार मरीजों की हालत इतनी नाजुक होती है कि टोल प्लाजा पर 2 मिनट का जाम भी उनके लिए जानलेवा साबित हो जाता है। स्पेशल फास्टैग के जरिए एंबुलेंस बिना किसी बाधा के सीधे अस्पताल पहुंच सकेगी, जो एक तरह से उनके लिए 'ग्रीन कॉरिडोर' (Green Corridor) का काम करेगा।
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2. सुरक्षा बलों का रिस्पांस टाइम होगा तेज (Fast Military & Police Movement)
\r\n\r\nराष्ट्रीय सुरक्षा और कानून-व्यवस्था के मोर्चे पर यह कदम बहुत अहम है। सीमा पर कोई तनाव हो, राज्य में दंगा भड़का हो या किसी आपदा के समय सेना/एनडीआरएफ (NDRF) को पहुंचना हो— ऐसे समय में सुरक्षा बलों का काफिला तेजी से मूव करना चाहिए। टोल पर बिना रुके निकलने से सुरक्षा एजेंसियों का 'रिस्पांस टाइम' (Response Time) काफी कम हो जाएगा, जिससे वे किसी भी आपात स्थिति से बेहतर तरीके से निपट सकेंगी।
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3. आम जनता को ट्रैफिक जाम से मिलेगी परमानेंट मुक्ति (Relief for Common Commuters)
\r\n\r\nजब सेना का बड़ा काफिला या किसी वीआईपी का सुरक्षा घेरा (VIP Cavalcade) टोल से गुजरता है, तो सुरक्षा कारणों से वहां आम ट्रैफिक को रोक दिया जाता है, जिससे लंबी कतारें लग जाती हैं। जब इन विशेष वाहनों के लिए अलग लेन होगी और वे बिना रुके निकल जाएंगे, तो मुख्य टोल लाइनों पर ट्रैफिक सुचारू रूप से चलता रहेगा और आम यात्रियों का कीमती समय बर्बाद नहीं होगा।
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4. फर्जीवाड़े पर लगेगी लगाम (Stopping Misuse of Exemption)
\r\n\r\nवर्तमान में कई लोग अपनी निजी गाड़ियों पर फर्जी तरीके से 'पुलिस' या 'प्रेस' लिखवाकर टोल टैक्स बचाने की कोशिश करते हैं। चूंकि यह स्पेशल फास्टैग केवल अधिकृत सरकारी विभागों द्वारा ही जारी किया जाएगा, इसलिए टोल नाकों पर होने वाले इस फर्जीवाड़े पर पूरी तरह से लगाम लग जाएगी।
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भारत का स्मार्ट टोलिंग भविष्य: सरकार का अगला कदम
\r\n\r\nकेंद्रीय सड़क परिवहन मंत्रालय लगातार देश के हाईवे इंफ्रास्ट्रक्चर (Highway Infrastructure) को ग्लोबल स्टैंडर्ड पर ले जाने के लिए काम कर रहा है। 'स्पेशल फास्टैग' उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। सूत्रों के अनुसार, सरकार जल्द ही इस नए नियम का एक विस्तृत ड्राफ्ट (Draft) पेश कर सकती है और इसे पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर देश के कुछ सबसे व्यस्त एक्सप्रेसवे (जैसे दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे, यमुना एक्सप्रेसवे) पर शुरू किया जा सकता है।
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निष्कर्ष के तौर पर यह कहा जा सकता है कि Fastag New Rule के तहत आने वाला यह स्पेशल सिस्टम न केवल हमारी सुरक्षा एजेंसियों की कार्यक्षमता को कई गुना बढ़ा देगा, बल्कि आपातकालीन सेवाओं को भी पंख लगा देगा। आधुनिक तकनीक के जरिए टोल सिस्टम को स्मार्ट बनाकर सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि भारतीय सड़कें न केवल चौड़ी हों, बल्कि उन पर सफर करने का अनुभव भी पूरी तरह से निर्बाध (Seamless) और विश्वस्तरीय हो।
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