हिंदू पंचांग में एकादशी व्रत को बहुत खास माना जाता है, जो हर महीने में दो बार (कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष) आती है। इन सभी में देवउठनी एकादशी (Devuthani Ekadashi) का महत्व सबसे अधिक है। इस पर्व के साथ ही चातुर्मास की समाप्ति होती है और जगत के पालनहार भगवान विष्णु अपनी चार महीने की योगनिद्रा से जागते हैं। इस शुभ तिथि से ही देश-दुनिया में सभी प्रकार के शुभ कार्यों की शुरुआत होती है, जैसे विवाह, मुंडन और गृह प्रवेश।READ ALSO:-भाग्यफल 31 अक्टूबर: रमा एकादशी पर चंद्र गोचर से 3 राशियों को होगा महालाभ! इन जातकों को आज धन योग से मिलेगी बड़ी सफलता
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देवोत्थान एकादशी का धार्मिक महत्व
\r\n\r\nबिजनौर जिले के धामपुर के ज्योतिषाचार्य श्री निशांत गौड़ जी ने इस दिन के महत्व पर प्रकाश डाला।
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- \r\n पर्व का नाम: इसे देवोत्थान एकादशी या प्रबोधिनी एकादशी भी कहा जाता है। यह हर साल कार्तिक महीने के शुक्ल पक्ष की एकादशी को मनाई जाती है।\r\n \r\n
- \r\n भगवान विष्णु का जागरण: मान्यता है कि भगवान विष्णु इस दिन योगनिद्रा से जागते हैं।\r\n \r\n
- \r\n पाप कटते हैं: इस दिन भगवान विष्णु और धन की अधिष्ठात्री देवी मां लक्ष्मी की एक साथ पूजा करने से जातकों के पाप कटते हैं और उनका आशीर्वाद मिलता है।\r\n \r\n
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देवउठनी एकादशी 2025 की तिथि और तुलसी विवाह
\r\n\r\nज्योतिषाचार्य निशांत गौड़ जी के अनुसार, इस बार एकादशी तिथि की शुरुआत और समापन का समय निम्नलिखित है:
\r\n\r\n| \r\n विवरण \r\n | \r\n \r\n तिथि और समय \r\n | \r\n
| \r\n एकादशी की शुरुआत \r\n | \r\n \r\n शनिवार, 1 नवंबर 2025 को सुबह 9 बजकर 11 मिनट \r\n | \r\n
| \r\n एकादशी की समाप्ति \r\n | \r\n \r\n रविवार, 2 नवंबर 2025 को प्रात:काल 7 बजकर 30 मिनट तक \r\n | \r\n
| \r\n देवउठनी एकादशी (व्रत) \r\n | \r\n \r\n शनिवार, 1 नवंबर 2025 (उदयातिथि के कारण) \r\n | \r\n
| \r\n तुलसी विवाह \r\n | \r\n \r\n 1 नवंबर 2025 (एकादशी के दिन) \r\n | \r\n
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तुलसी पूजा का विधान: प्रबोधिनी एकादशी के अगले दिन माता तुलसी और भगवान शालिग्राम का विवाह भी होता है, जिसे आमतौर पर तुलसी विवाह कहा जाता है। चूंकि तुलसी को मां लक्ष्मी का ही एक रूप माना जाता है, इसलिए देवउठनी एकादशी के दिन उनकी पूजा का विशेष विधान है।
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Devuthani Ekadashi 2025: तुलसी पूजा के खास उपाय
\r\n\r\nज्योतिषाचार्य श्री निशांत गौड़ जी ने इस दिन किए जाने वाले कुछ खास उपायों के बारे में बताया, जिससे भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है:
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- \r\n भगवान को लगाएं तुलसी दल का भोग:\r\n\r\n
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- \r\n विधि: देवउठनी एकादशी 2025 के दिन प्रातः काल पूजा के समय भगवान विष्णु को तुलसी दल अर्पित करें।\r\n \r\n
- \r\n लाभ: ऐसा करने से श्री हरि और मां लक्ष्मी दोनों की कृपा प्राप्त होती है, धन संबंधित परेशानियां दूर होती हैं और घर में सुख-समृद्धि आती है।\r\n \r\n
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- \r\n तुलसी के नीचे जलाएं शुद्ध घी का दीपक:\r\n\r\n
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- \r\n विधि: सभी जातकों को तुलसी के पौधे के नीचे गाय के शुद्ध घी का एक दीपक अवश्य जलाना चाहिए। इसके बाद उस पौधे की परिक्रमा करें।\r\n \r\n
- \r\n लाभ: इससे मां लक्ष्मी के साथ-साथ तुलसी माता का भी आशीर्वाद मिलता है और घर में सकारात्मकता का संचार होता है।\r\n \r\n
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- \r\n सुहाग सामग्री करें अर्पित:\r\n\r\n
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- \r\n विधि: ज्योतिषाचार्य श्री निशांत गौड़ जी के अनुसार, इस दिन सभी सुहागिनें तुलसी के पौधे की विधिवत पूजा-अर्चना करें और उन्हें 16 श्रृंगार की सामग्री अर्पित करें।\r\n \r\n
- \r\n लाभ: ऐसा करने से धन की परेशानियों से निजात मिलती है और वैवाहिक जीवन में सुख बना रहता है।\r\n \r\n
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- \r\n पूजा में करें मंत्रों का जाप: ज्योतिषाचार्य श्री निशांत गौड़ जी ने बताया कि पूजा के समय तुलसी मां के मंत्रों का जाप भी जरूर करें, जिससे मां की असीम कृपा बरसेगी।\r\n \r\n