हिंदू धर्म में देवउठनी एकादशी (Devuthani Ekadashi) का अत्यंत विशेष महत्व है। यह वह पवित्र तिथि है, जब माना जाता है कि सृष्टि के पालनहार भगवान विष्णु अपनी चार महीने की लंबी योग निद्रा से जागते हैं। इसी दिन से चातुर्मास (Chaturmas) की अवधि समाप्त होती है, जिसके साथ ही बीते चार महीने से बंद पड़े सभी तरह के शुभ और मांगलिक कार्य जैसे शादी, मुंडन, गृह प्रवेश और यज्ञोपवीत संस्कार फिर से शुरू हो जाते हैं। इस साल देवउठनी एकादशी 1 नवंबर 2025 को मनाई जाएगी।READ ALSO:-Yashoda Medicity का राष्ट्रपति ने किया उद्घाटन: CM Yogi बोले- UP के लिए यह बड़ा Investment, राजनाथ ने बताया- 'व्यक्तिगत पीड़ा से बड़ी यात्रा'
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चातुर्मास की समाप्ति
\r\n\r\nचातुर्मास की अवधि आमतौर पर जुलाई महीने से शुरू होती है और लगभग 142 दिनों तक चलती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस अवधि में भगवान विष्णु विश्राम करते हैं, इसलिए विवाह सहित कोई भी शुभ कार्य करना वर्जित माना जाता है। देवउठनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु के जागने के साथ ही, विवाह की शहनाइयाँ फिर से गूंजने लगती हैं।
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नवंबर और दिसंबर के शुभ विवाह मुहूर्त
\r\n\r\nपंचांग के अनुसार, देवउठनी एकादशी के बाद नवंबर और दिसंबर 2025 में विवाह के लिए कई शुभ तिथियां मिल रही हैं।
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नवंबर 2025 के विवाह मुहूर्त (कुल 13 शुभ तिथियां)
\r\n\r\nनवंबर का महीना विवाह के लिए काफी अनुकूल माना जा रहा है। इस महीने में विवाह के लिए 13 शुभ तिथियां मिल रही हैं:
\r\n\r\n| \r\n नवंबर 2025 की शुभ तिथियां \r\n | \r\n
| \r\n 2 नवंबर \r\n | \r\n
| \r\n 3 नवंबर \r\n | \r\n
| \r\n 5 नवंबर \r\n | \r\n
| \r\n 8 नवंबर \r\n | \r\n
| \r\n 12 नवंबर \r\n | \r\n
| \r\n 13 नवंबर \r\n | \r\n
| \r\n 16 नवंबर \r\n | \r\n
| \r\n 17 नवंबर \r\n | \r\n
| \r\n 18 नवंबर \r\n | \r\n
| \r\n 21 नवंबर \r\n | \r\n
| \r\n 22 नवंबर \r\n | \r\n
| \r\n 23 नवंबर \r\n | \r\n
| \r\n 25 नवंबर \r\n | \r\n
| \r\n 30 नवंबर \r\n | \r\n
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दिसंबर 2025 के विवाह मुहूर्त (केवल 3 शुभ तिथियां)
\r\n\r\nनवंबर की तुलना में दिसंबर महीने में विवाह के लिए शुभ मुहूर्त काफी कम हैं। पंचांग के मुताबिक दिसंबर 2025 में सिर्फ 3 शुभ तिथियां ही विवाह के लिए उपलब्ध होंगी:
\r\n\r\n| \r\n दिसंबर 2025 की शुभ तिथियां \r\n | \r\n
| \r\n 4 दिसंबर \r\n | \r\n
| \r\n 5 दिसंबर \r\n | \r\n
| \r\n 6 दिसंबर \r\n | \r\n
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विवाह में शुभ मुहूर्त की महत्ता
\r\n\r\nज्योतिष शास्त्र (Jyotish Shastra) शुभ मुहूर्त (Shubh Muhurat) को विशेष महत्व देता है।
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- \r\n ग्रह-नक्षत्रों का प्रभाव: मान्यता है कि हर क्षण ग्रह और नक्षत्र अपनी स्थिति बदलते रहते हैं, जिसका सीधा प्रभाव मनुष्य के जीवन पर पड़ता है।\r\n \r\n
- \r\n शुभ समय: शुभ मुहूर्त वह समय होता है जब ग्रहों की स्थिति वर और वधू दोनों के ही पक्ष में होती है। इस समय की गई शादी से दांपत्य जीवन में सौभाग्य, स्थिरता आती है और देवी-देवताओं का आशीर्वाद भी मिलता है।\r\n \r\n
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शादी की तैयारियों में तेजी
\r\n\r\nदेवउठनी एकादशी के साथ ही, नवंबर और दिसंबर में शादी करने की योजना बना रहे परिवारों ने अब अपनी तैयारियों में तेजी ला दी है। चूंकि दिसंबर में मुहूर्त कम हैं, इसलिए नवंबर की तिथियां सबसे अधिक डिमांड में रहेंगी।
\r\n\r\n(डिस्क्लेमर): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए खबरीलाल मिडिया उत्तरदायी नहीं है।)