खबरीलाल डेस्क
देशभर में मानसूनी बादल अब अपने पूरे रौद्र रूप में आ चुके हैं। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने 2 अगस्त 2026 के लिए एक बेहद गंभीर और विस्तृत मौसम बुलेटिन जारी किया है। इस बुलेटिन के अनुसार, राजधानी दिल्ली-NCR, उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान और गुजरात सहित देश के 13 प्रमुख राज्यों में हल्की से लेकर अत्यधिक भारी बारिश (Extremely Heavy Rainfall) होने की चेतावनी जारी की गई है।READ ALSO:-सावन में शिवभक्तों के सैलाब को देखते हुए मेरठ प्रशासन का बड़ा फैसला: 3 से 12 अगस्त तक जिले के सभी स्कूल, कॉलेज और विश्वविद्यालय रहेंगे बंद
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इस दौरान न केवल मूसलाधार बारिश होगी, बल्कि 30 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तूफानी हवाएं चलने और खतरनाक तरीके से आकाशीय बिजली चमकने की भी प्रबल संभावना है। मौसम वैज्ञानिकों ने स्पष्ट किया है कि वर्तमान में मानसून ट्रफ (Monsoon Trough) का पश्चिमी सिरा अपनी सामान्य स्थिति से दक्षिण की ओर खिसक गया है, जबकि इसका पूर्वी सिरा उत्तर की ओर बना हुआ है। मौसम प्रणालियों के इस जटिल टकराव के कारण उत्तर-पश्चिम, मध्य और पूर्वोत्तर भारत के बड़े हिस्से में भारी जलवृष्टि की स्थितियां बन गई हैं।
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आइए, विस्तार से जानते हैं कि आपके राज्य और शहर में आगामी दिनों में मौसम का मिजाज कैसा रहने वाला है।
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हिमालयी राज्यों में कुदरत का रौद्र रूप: पहाड़ों पर आफत की बारिश

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पहाड़ी राज्यों में मानसून हमेशा से एक चुनौती रहा है, और इस बार भी हालात गंभीर हैं। हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के दुर्गम और पहाड़ी इलाकों में 1 से 7 अगस्त तक लगातार मूसलाधार बारिश का खौफनाक दौर जारी रहने का सटीक अनुमान है।
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    भूस्खलन (Landslides) का खतरा: लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के चलते पहाड़ों की मिट्टी कमजोर पड़ रही है, जिससे भूस्खलन का खतरा कई गुना बढ़ गया है।
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    नदियों का उफान: गंगा, यमुना, ब्यास और अलकनंदा जैसी प्रमुख नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है।
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    प्रशासनिक अलर्ट: स्थानीय प्रशासन ने पर्यटकों और स्थानीय निवासियों को अनावश्यक यात्रा से बचने और नदी-नालों से दूर रहने की सख्त हिदायत दी है।
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उत्तर भारत और मैदानी इलाके: दिल्ली, पंजाब और हरियाणा का हाल

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मैदानी इलाकों में मानसून की मेहरबानी और आफत, दोनों एक साथ देखने को मिल रही है।
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    दिल्ली-NCR: राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली और इससे सटे गुरुग्राम, नोएडा, फरीदाबाद और गाजियाबाद में 3 अगस्त से मानसूनी बौछारें अपने चरम पर होंगी। इससे लोगों को उमस भरी और चिपचिपी गर्मी से बड़ी राहत मिलेगी। हालांकि, दिल्ली के निचले इलाकों और अंडरपास में भीषण जलभराव (Waterlogging) की समस्या खड़ी हो सकती है, जिससे भयंकर ट्रैफिक जाम लगने की आशंका है।
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    पंजाब और हरियाणा: इन दोनों कृषि प्रधान राज्यों में 2 से 4 अगस्त के बीच कई इलाकों में जोरदार से अत्यधिक भारी बारिश हो सकती है।
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    राजस्थान: आमतौर पर सूखे रहने वाले राजस्थान के पूर्वी और पश्चिमी हिस्सों में 1 और 2 अगस्त को भारी बारिश की संभावना जताई गई है, जो यहां के जलस्रोतों के लिए एक वरदान साबित हो सकती है।
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पूर्वी भारत: यूपी, बिहार और झारखंड में वज्रपात का खौफ

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भारत के पूर्वी राज्यों में बारिश के साथ-साथ आकाशीय बिजली का सबसे ज्यादा खतरा मंडरा रहा है।
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    उत्तर प्रदेश: पश्चिमी यूपी में 3 से 7 अगस्त तक झमाझम बारिश होगी, जबकि पूर्वी यूपी (पूर्वांचल) में 2 अगस्त से ही लगातार बारिश का सिलसिला शुरू हो जाएगा, जो बिना रुके पूरे हफ्ते बना रह सकता है।
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    बिहार: राज्य में 2 से 6 अगस्त के बीच व्यापक और अच्छी बारिश की संभावना है। इस दौरान 30 से 50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलेंगी। किसानों के लिए यह बारिश धान की रोपाई के लिए अमृत समान है।
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    झारखंड और बंगाल: झारखंड में आंधी-तूफान के साथ खतरनाक रूप से आकाशीय बिजली गिरने (Lightning Strike) का रेड अलर्ट जारी किया गया है। वहीं, पश्चिम बंगाल और सिक्किम के कई इलाकों में अत्यधिक भारी बारिश दर्ज की जा सकती है, जिससे आम जनजीवन अस्त-व्यस्त हो सकता है।
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मध्य और पश्चिम भारत: मप्र, महाराष्ट्र और गुजरात में जलभराव

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    मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़: मध्य भारत में मानसून पूरी तरह से मेहरबान है। पश्चिमी मध्य प्रदेश में 1 अगस्त को भारी बारिश के आसार हैं, जबकि पूर्वी मध्य प्रदेश (विंध्य और महाकौशल) के जिलों में 4 से 7 अगस्त के दौरान तेज बारिश का सिलसिला देखने को मिलेगा। छत्तीसगढ़ में 3 से 7 अगस्त तक आंधी-तूफान के साथ मूसलाधार बारिश का अलर्ट है।
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    महाराष्ट्र: विदर्भ क्षेत्र में 2 से 5 अगस्त के बीच मौसम बेहद खराब रह सकता है। वहीं कोंकण, गोवा और मध्य महाराष्ट्र में 1 से 3 अगस्त के बीच बाढ़ जैसी स्थिति पैदा करने वाली बारिश हो सकती है।
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    गुजरात: सौराष्ट्र-कच्छ और गुजरात के कई हिस्सों में 1 और 2 अगस्त को अत्यंत भारी बारिश की आशंका जताई गई है। प्रशासन ने निचले इलाकों को खाली कराने की तैयारी भी शुरू कर दी है।
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पूर्वोत्तर और दक्षिण भारत: बाढ़ का कहर और समंदर की लहरें

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    पूर्वोत्तर भारत में बाढ़ का अलर्ट: असम, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में अगले सात दिनों तक बिना रुके भारी बारिश होगी। अरुणाचल और मेघालय में स्थिति सबसे अधिक चिंताजनक है। भारी बारिश के कारण ब्रह्मपुत्र और उसकी सहायक नदियां उफान पर हैं, जिससे नए इलाकों में बाढ़ का पानी घुसने का खतरा बढ़ गया है।
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    दक्षिण भारत: केरल, तटीय और दक्षिणी आंतरिक कर्नाटक में अत्यधिक भारी बारिश का अनुमान है। इस दौरान 50 से 70 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चक्रवाती तूफानी हवाएं चल सकती हैं। तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु के कई हिस्सों में भी मौसम उग्र रहेगा।
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IMD की विशेष एडवाइजरी: क्या करें और क्या न करें

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मौसम विभाग और आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) ने इस भयंकर मानसून को देखते हुए आम जनता के लिए कुछ विशेष सुरक्षा दिशा-निर्देश जारी किए हैं:
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    मछुआरों के लिए रेड अलर्ट: समुद्र में ऊंची-ऊंची लहरें उठने और मौसम खराब रहने के कारण गुजरात, केरल, कर्नाटक, लक्षद्वीप और कोंकण-गोवा के समुद्री तटों पर मछुआरों को 6 अगस्त तक किसी भी सूरत में समुद्र में न उतरने की सख्त सलाह दी गई है।
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    सुरक्षित स्थानों पर रहें: आंधी और बिजली चमकने के दौरान पेड़ों के नीचे या खुले मैदान में बिल्कुल न खड़े हों। पक्के मकानों के अंदर ही रहें।
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    जलभराव वाले इलाकों से बचें: जलभराव वाली सड़कों पर वाहन चलाने से बचें, क्योंकि खुले हुए मैनहोल या गड्ढे जानलेवा साबित हो सकते हैं।
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    यात्रा से बचें: जब तक बेहद जरूरी न हो, पहाड़ी इलाकों (विशेषकर हिमाचल और उत्तराखंड) की यात्रा इस पूरे सप्ताह के लिए टाल दें।
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    अपडेट रहें: मौसम से जुड़ी पल-पल की जानकारी के लिए IMD की आधिकारिक वेबसाइट या अपने फोन के मौसम ऐप पर नजर बनाए रखें और प्रशासन के निर्देशों का पालन करें।
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