खबरीलाल डेस्क
स्कूल... जिसे विद्या का मंदिर कहा जाता है, जहां माता-पिता अपने बच्चों को एक सुरक्षित भविष्य, संस्कार और शिक्षा की नींव रखने के लिए भेजते हैं। लेकिन क्या हो जब वही स्कूल एक मासूम के लिए खौफ का घर और मौत का कारण बन जाए? विशाखापत्तनम (Visakhapatnam) से एक ऐसी ही झकझोर कर रख देने वाली घटना सामने आई है, जिसने पूरे देश के माता-पिता को गहरे खौफ और चिंता में डाल दिया है। यहां एक 6 साल के छोटे से बच्चे की सिर्फ इसलिए जान चली गई क्योंकि उसने अपना होमवर्क (Homework) पूरा नहीं किया था। एक टीचर की बेरहम डांट, खौफ और एक थप्पड़ ने इस हंसते-खेलते मासूम की जिंदगी हमेशा के लिए छीन ली।
\r\n\r\n
 
\r\n\r\n

​CCTV में कैद हुई मौत की लाइव तस्वीरें, गिड़गिड़ाता रहा मासूम

\r\n\r\n\r\n
​यह पूरा खौफनाक वाकया क्लासरूम में लगे CCTV कैमरे में कैद हो गया है। वायरल वीडियो (Viral Video) में साफ देखा जा सकता है कि कैसे एक नन्हा सा बच्चा, जिसे शायद दुनिया की सही से समझ भी नहीं है, खौफ के मारे कांप रहा है। वीडियो में बच्चा रोते हुए और अपने दोनों हाथ हिलाकर टीचर के सामने गिड़गिड़ाता नजर आ रहा है, जैसे वह रहम की भीख मांग रहा हो। लेकिन टीचर का दिल नहीं पसीजा।
\r\n\r\n
 
\r\n\r\n
​विशाखापत्तनम के वन-टाउन थाना क्षेत्र स्थित 'लिटिल गार्डन स्कूल' (Little Garden School) में पढ़ने वाला 6 वर्षीय प्रणय तेज (Pranay Teja) घटना वाले दिन अन्य छात्रों के साथ क्लास में लाइन में खड़ा था। तभी टीचर ने बच्चों का होमवर्क चेक करना शुरू किया। जब बारी प्रणय की आई तो पता चला कि उसका होमवर्क अधूरा है। इस छोटी सी बात पर टीचर आगबबूला हो गई।
\r\n\r\n\r\n\r\n\r\n
 
\r\n\r\n
​फुटेज में दिखता है कि टीचर बच्चे को जोर-जोर से डांटने लगती है। बच्चा डर के मारे रोने लगता है। पहले टीचर बच्चे की कमीज और पैंट को झटके से खींचकर ठीक करती है। इसके तुरंत बाद वह बेरहम टीचर उस छोटे से मासूम के गाल पर एक जोरदार थप्पड़ जड़ देती है। थप्पड़ लगने और डांट के उस भयानक खौफ के चलते अगले ही पल कुछ ऐसा होता है जिसकी किसी ने कल्पना भी नहीं की थी। बच्चा अचानक तेजी से खांसने लगता है, उसका शरीर निढाल होने लगता है और देखते ही देखते वह बेहोश होकर उसी टीचर की गोद में गिर जाता है।
\r\n\r\n
 
\r\n\r\n

​अस्पताल पहुंचने से पहले ही टूट गई सांसों की डोर

\r\n\r\n
​बच्चे के अचानक बेहोश होने से टीचर घबरा जाती है। वह उसे हिलाकर उठाने की कोशिश करती है, लेकिन बच्चे के शरीर से कोई हलचल या प्रतिक्रिया (Response) नहीं होती। इसके बाद टीचर तुरंत स्कूल के बाकी स्टाफ को मदद के लिए बुलाती है। आनन-फानन में मासूम प्रणय को विशाखापत्तनम के प्रसिद्ध किंग जॉर्ज अस्पताल (KGH) ले जाया जाता है। लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। अस्पताल पहुंचते ही डॉक्टरों ने प्राथमिक जांच के बाद मासूम को मृत घोषित (Brought Dead) कर दिया। जिस बच्चे को मां-बाप ने सुबह चूमकर स्कूल भेजा था, कुछ ही घंटों बाद उसकी लाश उनके सामने थी।
\r\n\r\n
 
\r\n\r\n

​परिजनों का फूटा गुस्सा, स्कूल पर छिपाने का आरोप

\r\n\r\n
​इस हृदयविदारक घटना की खबर जब प्रणय के माता-पिता को मिली, तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। मृतक बच्चे के पिता ने रोते हुए पुलिस को बताया कि स्कूल प्रबंधन की ओर से उन्हें घटना के वक्त कोई जानकारी नहीं दी गई, न ही कोई फोन किया गया। परिजनों का सीधा आरोप है कि उनके बच्चे की मौत कोई साधारण हादसा नहीं है, बल्कि टीचर द्वारा दी गई शारीरिक और मानसिक प्रताड़ना का नतीजा है।
\r\n\r\n
 
\r\n\r\n
​परिजनों का कहना है कि उनका बच्चा सुबह बिल्कुल स्वस्थ था, लेकिन टीचर के डराने, धमकाने और पीटने से बच्चा इतने गहरे सदमे (Shock) में चला गया कि उसकी जान चली गई। गुस्से और इंसाफ की मांग को लेकर मृतक के परिजनों और स्थानीय लोगों ने KGH अस्पताल और स्कूल के बाहर जमकर हंगामा और विरोध प्रदर्शन किया।
\r\n\r\n
 
\r\n\r\n

​पुलिस एक्शन: धारा 194 के तहत FIR और टीचर हिरासत में

\r\n\r\n
​मामले की गंभीरता को देखते हुए वन-टाउन पुलिस ने तुरंत एक्शन लिया। पुलिस ने स्कूल पहुंचकर सबसे पहले क्लासरूम के CCTV फुटेज को अपने कब्जे में लिया। मृतक के परिजनों की लिखित शिकायत के आधार पर पुलिस ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 194 (संदिग्ध या अप्राकृतिक मौत) के तहत मामला दर्ज कर लिया है और जांच शुरू कर दी है।
\r\n\r\n
 
\r\n\r\n
​जांच अधिकारी अब यह पता लगाने में जुटे हैं कि क्या बच्चे को पहले से कोई अंदरूनी गंभीर बीमारी (Underlying health condition) थी, या फिर टीचर के थप्पड़ और खौफ के कारण उसे हार्ट अटैक, कार्डियक अरेस्ट या ब्रेन में कोई शॉक लगा। असली वजह का खुलासा पोस्टमार्टम रिपोर्ट (Postmortem Report) आने के बाद ही पूरी तरह से हो पाएगा। ताजा जानकारी के अनुसार, पुलिस ने आरोपी महिला टीचर को हिरासत (Custody) में ले लिया है और स्कूल के अन्य कर्मचारियों से भी कड़ाई से पूछताछ की जा रही है।
\r\n\r\n
 
\r\n\r\n

​सरकार सख्त: दोषियों को नहीं बख्शेंगे

\r\n\r\n
​इस दर्दनाक घटना की गूंज राज्य सरकार तक पहुंच गई है। आंध्र प्रदेश के मानव संसाधन विकास मंत्री (HRD Minister) नारा लोकेश ने इस घटना पर गहरा दुख व्यक्त किया है। उन्होंने मीडिया से बात करते हुए कहा, "स्कूल में एक बच्चे का इस तरह से जान गंवाना एक दिल दहला देने वाली घटना है। हम पीड़ित परिवार के साथ खड़े हैं और इस असीम दुख की घड़ी में उन्हें सांत्वना देते हैं। बच्चे की मौत की भरपाई दुनिया की कोई ताकत नहीं कर सकती, लेकिन हम यह सुनिश्चित करेंगे कि दोषियों और स्कूल प्रबंधन के खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई हो।" सरकार ने परिजनों को हर संभव मदद का भरोसा भी दिलाया है।
\r\n\r\n
\r\n\r\n

क्या कहता है कानून? (RTE Act & Corporal Punishment)

\r\n\r\n
​यह घटना पूरे शिक्षा तंत्र और समाज के लिए एक कड़ा सबक है। भारत में शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 (RTE Act) की धारा 17 के तहत स्कूलों में बच्चों को किसी भी प्रकार का शारीरिक या मानसिक दंड (Corporal Punishment) देना पूरी तरह से गैर-कानूनी और प्रतिबंधित है। इसके बावजूद कई प्राइवेट और सरकारी स्कूलों में बच्चों के साथ मार-पीट की घटनाएं सामने आती रहती हैं।
\r\n\r\n
 
\r\n\r\n
​मनोवैज्ञानिकों का भी मानना है कि छोटे बच्चों का दिमाग बहुत कोमल होता है। तेज डांट या शारीरिक प्रताड़ना से बच्चे एक्सट्रीम एंग्जायटी या पैनिक अटैक का शिकार हो सकते हैं, जो कभी-कभी जानलेवा साबित हो सकता है। आज देश का हर नागरिक यही सवाल पूछ रहा है— क्या होमवर्क पूरा न करना इतना बड़ा गुनाह है कि इसके लिए एक 6 साल के मासूम को अपनी जान की कीमत चुकानी पड़े? अब देखना यह है कि प्रशासन इस मामले में स्कूल और उस टीचर के खिलाफ क्या सख्त नजीर पेश करता है ताकि भविष्य में कोई और 'प्रणय' इसका शिकार न हो।