खबरीलाल डेस्क
भारत में मॉनसून का मिजाज हमेशा से ही अनिश्चितताओं और आश्चर्यों से भरा रहा है। इस साल जून से अगस्त तक के मॉनसून सीजन ने देश के अलग-अलग हिस्सों में बिल्कुल अलग तस्वीरें पेश की हैं। एक तरफ जहां देवभूमि उत्तराखंड, पूर्वी उत्तर प्रदेश (पूर्वांचल), पश्चिम बंगाल और झारखंड जैसे राज्यों को बादलों ने जमकर भिगोया और वहां नदियां उफान पर रहीं, वहीं दूसरी तरफ देश की राजधानी दिल्ली, पश्चिमी उत्तर प्रदेश, हरियाणा और पंजाब जैसे प्रमुख कृषि-प्रधान राज्यों में बारिश की भारी कमी ने किसानों के साथ-साथ आम लोगों को भी काफी मायूस किया।
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​लेकिन अब, जैसे ही हम सितंबर महीने में प्रवेश कर रहे हैं, मौसम का रुख एक बार फिर तेजी से करवट ले रहा है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) की ताज़ा रिपोर्ट के मुताबिक, यूं तो पूरे सितंबर महीने के दौरान औसत बारिश में कमी देखने को मिल सकती है, लेकिन महीने के पहले ही हफ्ते में देश के कई राज्यों में जोरदार और झमाझम बरसात होने के पक्के आसार बन गए हैं।
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​IMD के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, पूरे देश में सितंबर महीने की औसत मासिक बारिश सामान्य से कम रहने का अनुमान है। मौसम विभाग का कहना है कि यह दीर्घावधि औसत (Long Period Average - LPA) के 91 फीसदी से भी कम रह सकती है। बता दें कि सितंबर महीने के लिए बारिश का सामान्य औसत 167.9 मिमी (mm) माना जाता है। उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ समेत देश के अधिकांश भौगोलिक हिस्सों में कुल मिलाकर बारिश सामान्य से कम ही रहने का अनुमान है। हालांकि, पूर्वोत्तर भारत (North-East India) के राज्यों में सितंबर में बादलों की अच्छी मेहरबानी देखने को मिल सकती है।
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दिल्ली-एनसीआर में आज और इस हफ्ते का मौसम (Delhi NCR Weather Forecast)

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​दिल्ली और इसके आस-पास के सटे इलाकों (NCR) में रहने वाले लोगों के लिए सितंबर की शुरुआत बहुत बड़ी राहत लेकर आने वाली है। अगस्त की उमस और चिपचिपी गर्मी से बेहाल दिल्लीवासियों को शुरुआती दिनों में आसमान में बादल छाए रहने और हल्की से मध्यम बारिश होने की खुशखबरी मिली है।
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    1 से 4 सितंबर का अलर्ट: भारत मौसम विज्ञान विभाग ने स्पष्ट संभावना जताई है कि 1 से 4 सितंबर के बीच मॉनसून की गतिविधियां एक बार फिर से तेज़ होंगी। इस दौरान बादलों की आवाजाही लगी रहेगी और तापमान में सुखद गिरावट दर्ज की जाएगी।
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    तापमान का सटीक पूर्वानुमान: 3 सितंबर को आसमान में काले बादल छाए रहने के साथ हल्की बारिश या बूंदाबांदी का अलर्ट है। इस दिन अधिकतम तापमान 33 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 24 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने का अनुमान है। हालांकि, 5 और 6 सितंबर से बारिश का जोर थोड़ा कम पड़ने लगेगा।
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    प्रदूषण (AQI) से मिलेगी बड़ी राहत: बारिश के साथ चलने वाली तेज़ हवाओं का सबसे बड़ा फायदा दिल्ली की जहरीली होती आबोहवा को मिलेगा। हवा में घुले धूल और धुएं के सूक्ष्म कण (PM 2.5 और PM 10) पूरी तरह से धुल जाएंगे। इससे गाजियाबाद के इंदिरापुरम, लोनी, वसुंधरा, और दिल्ली के अशोक विहार, बुराड़ी से लेकर बवाना तक (जो अक्सर प्रदूषण के हॉटस्पॉट माने जाते हैं), हवा की गुणवत्ता (AQI) में जबरदस्त सुधार देखने को मिलेगा।
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    महीने का ओवरऑल ट्रेंड: इस शुरुआती राहत के बावजूद, पूरे सितंबर के दौरान दिल्ली-एनसीआर में उमस भरी गर्मी (Humid Heat) सता सकती है। दिन का तापमान सामान्य से अधिक रहने की संभावना है, और न्यूनतम तापमान (रात की गर्मी) भी अधिकांश इलाकों में सामान्य से ऊपर ही रहेगा। उत्तर-पश्चिम भारत के कुछ हिस्सों को छोड़ दें तो रातें अपेक्षाकृत गर्म ही महसूस होंगी।
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यूपी, पंजाब, हरियाणा से लेकर राजस्थान तक मॉनसून का हाल (North-West India Weather)

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​उत्तर-पश्चिम भारत के वे राज्य, जहां धान, बाजरा और अन्य खरीफ फसलों की खेती बड़े पैमाने पर होती है, वहां के किसानों की नज़रें टकटकी लगाए आसमान पर ही टिकी हैं।
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    पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़: इन क्षेत्रों के साथ-साथ दिल्ली में 31 अगस्त से लेकर 2 सितंबर तक और फिर एक बार 6 सितंबर के दौरान हल्की से लेकर मध्यम बारिश की प्रबल संभावना है। 1 से 2 सितंबर के बीच आसमान में तेज़ बिजली चमकने और बादलों के भयानक तरीके से गरजने (Thunderstorms) के भी पूरे आसार हैं, इसलिए घर से बाहर निकलते समय सावधानी बरतें।
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    उत्तर प्रदेश का मौसम (UP Weather): पश्चिमी उत्तर प्रदेश में 31 अगस्त से 6 सितंबर तक बारिश का दौर रुक-रुक कर जारी रहेगा। वहीं पूर्वी उत्तर प्रदेश (पूर्वांचल) के इलाकों में 1 सितंबर को गरज के साथ तेज़ बौछारें पड़ने की उम्मीद है, जिससे किसानों की मुरझाई फसलों को नया जीवनदान मिल सकता है।
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    राजस्थान की स्थिति (Rajasthan Weather): पूर्वी राजस्थान में 31 अगस्त से 6 सितंबर तक अच्छी बारिश की उम्मीद है। वहीं सबसे बड़ी राहत की खबर पश्चिमी राजस्थान के लिए है, जहां अभी तक कम बारिश ने चिंताजनक स्थिति पैदा कर रखी थी। वहां भी 2 से 6 सितंबर के बीच बादलों के बरसने की उम्मीद है। यह सूखे से जूझ रहे रेतीले इलाकों के लिए एक बहुत बड़ा 'पॉजिटिव सिग्नल' है।
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मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और पहाड़ी राज्यों में भारी बारिश की चेतावनी (Central & Hilly Regions)

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​मध्य भारत और हिमालयी राज्यों में मॉनसून का रौद्र रूप भी देखने को मिल सकता है। IMD ने कुछ विशेष इलाकों के लिए भारी से बहुत भारी बारिश का अलर्ट (Yellow & Orange Alert) जारी किया है:
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    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh): पश्चिमी मध्य प्रदेश के इलाकों में 2 और 6 सितंबर को भारी बारिश की संभावना है। सबसे ज्यादा सतर्कता 3 से 5 सितंबर के बीच बरतनी होगी, क्योंकि इस दौरान कुछ स्थानों पर बहुत भारी बारिश (Very Heavy Rainfall) हो सकती है, जिससे निचले इलाकों में अचानक जलभराव और नदी-नालों के उफान पर आने का खतरा रहेगा। पूर्वी मध्य प्रदेश में भी 6 सितंबर को कुछ जगहों पर तेज़ वर्षा का अनुमान है।
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    छत्तीसगढ़ और विदर्भ: छत्तीसगढ़ के बलरामपुर और आसपास के अन्य जिलों में 4 सितंबर को भारी से बहुत भारी बारिश हो सकती है। वहीं महाराष्ट्र के विदर्भ क्षेत्र में 2 और 4 सितंबर को अलग-अलग स्थानों पर झमाझम बारिश की संभावना जताई गई है।
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    पहाड़ी राज्यों का मौसम: देवभूमि उत्तराखंड में 6 सितंबर तक हल्की से लेकर मध्यम दर्जे की बारिश का दौर जारी रहने की चेतावनी है। इसके अलावा, जम्मू-कश्मीर, लद्दाख और हिमाचल प्रदेश की ऊंची घाटियों में 2 और 3 सितंबर को बारिश मौसम को और भी खुशनुमा व सर्द बना देगी। पर्यटकों को भूस्खलन (Landslide) संभावित क्षेत्रों से दूर रहने की सलाह दी गई है।
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अल नीनो (El Niño) का गहराता साया: मॉनसून पर क्या होगा असर?

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​इस साल भारत में बारिश की कमी का सबसे बड़ा 'विलेन' अल नीनो (El Niño) को माना जा रहा है। प्रशांत महासागर (Pacific Ocean) में अल नीनो की स्थिति लगातार मजबूत बनी हुई है। इसका सीधा मतलब यह है कि मध्य और पूर्वी प्रशांत क्षेत्र में समुद्र की सतह का तापमान (Sea Surface Temperature - SST) सामान्य से काफी अधिक गर्म हो गया है।
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​नीचे दिए गए इंटरैक्टिव विजेट का उपयोग करके आप खुद देख सकते हैं कि ऐतिहासिक रूप से अल नीनो के मजबूत होने पर भारत के अलग-अलग हिस्सों में बारिश पर कैसा प्रभाव पड़ता है:
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मुख्य वैज्ञानिक तथ्य: जब भी प्रशांत महासागर में अल नीनो की स्थिति मजबूत होती है, तो भारत में आने वाली मानसूनी हवाएं कमज़ोर पड़ जाती हैं। यही कारण है कि मौसम विभाग ने सितंबर में दीर्घावधि औसत (LPA) का केवल 91% (यानी सामान्य से कम) बारिश होने का अनुमान लगाया है।
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​हालांकि, राहत की एक छोटी सी बात यह है कि हिंद महासागर (Indian Ocean) में फिलहाल स्थिति तटस्थ (Neutral) बनी हुई है। यानी न तो यह मॉनसून का बहुत अधिक समर्थन कर रहा है और न ही इसे कमज़ोर कर रहा है। सितंबर के दौरान हिंद महासागर के तटस्थ रहने की ही उम्मीद है, लेकिन मौसम विज्ञानियों का मानना है कि सितंबर के बाद इसके रुख में कुछ बदलाव आ सकते हैं। आने वाले महीनों में अल नीनो के और अधिक मजबूत होने की आशंका है, जिसका असर इस साल के सर्दियों के मौसम और रबी की फसलों (जैसे गेहूं) पर भी साफ-साफ देखने को मिल सकता है।
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नागरिकों और किसानों के लिए अहम सुझाव

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    किसानों के लिए सलाह: चूंकि सितंबर में कुल मिलाकर बारिश कम रहने की उम्मीद है, इसलिए सिंचाई के लिए भूजल और नहर के पानी का बहुत ही बुद्धिमानी से उपयोग करें। पहले हफ्ते में होने वाली बारिश का फायदा उठाते हुए खेतों में जल संचयन (Water Harvesting) का प्रबंध ज़रूर करें ताकि नमी बनी रहे।
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    शहरी क्षेत्रों के लिए सतर्कता: 1 से 6 सितंबर के बीच अचानक तेज़ बारिश और आकाशीय बिजली गिरने (Lightning strikes) की घटनाओं से बचने के लिए, खराब मौसम में सुरक्षित व पक्की इमारतों के अंदर ही रहें। पेड़ों के नीचे बिल्कुल न खड़े हों।
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    स्वास्थ्य और स्वच्छता: उमस भरी गर्मी (Humidity) और बीच-बीच में होने वाली बारिश के कारण रुके हुए पानी में मच्छरों के पनपने से डेंगू, मलेरिया और वायरल फीवर का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। अपने घर के आस-पास, गमलों और कूलरों में साफ पानी इकट्ठा न होने दें और शाम के समय पूरी बाजू के कपड़े पहनें।
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(नोट: मौसम का मिजाज पल-पल बदलता रहता है। सटीक और स्थानीय जानकारी के लिए हमेशा भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) की आधिकारिक वेबसाइट या मोबाइल ऐप 'Mausam' का ही इस्तेमाल करें।)